
आत्मा कभी मरती नहीं क्योंकि वह अजर-अमर है. वह हमारे शरीर में निवास करती है और आत्मतत्व इस शरीर को वाहक के रूप में उपयोग करती है. जब शरीर अशक्त हो जाता है तो आत्मा उसी तरह इसे छोड़ देती है जैसे पुराने पड़ने पर हम वस्त्र का त्याग कर देते हैं. यह धारणा भारतीय [...]
November 17, 2007 | Posted in
बात करामात |
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अपने देश में आजकल आनुवांशिक बीज अथवा जेनेटिकली मोडिफाईड अनाजों के बारे अक्सर चर्चा होती है. कुछ साल पहले तक इन शब्दों से हमारा कोई वास्ता नहीं था.लेकिन अचानक ही पैदावार बढ़ाने के लिए आनुवांशिक बीजों के प्रयोग को आधुनिक खेती के नाम पर प्रस्तुत किया जा रहा है. सबसे पहला सवाल तो यही है [...]
November 16, 2007 | Posted in
बात करामात |
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यमुना की गंदगी और उसकी सफाई के बारे में ऊपर जितनी हलचल दिखती है घाट पर उतना ही सूनापन है. साफ-सफाई के सरकारी दावे और गैरसरकारी प्रयास दोनों ही खोखले साबित हुए हैं. हो सकता है कि पर्यावरणविद कही जानेवाली वंदना शिवा की अनाम संस्थाएं अमरीका स्थित वाटर कीपर्स एलांयस को यह विश्वास दिलाने में [...]
November 12, 2007 | Posted in
बात करामात |
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दिल्ली मेट्रो के कार्यकारी निदेशक ई श्रीधरन के लिए यह गर्व की बात है कि उन्होंने दिल्ली को वह पवित्र गाय दे दी है जिस पर कोई सवाल नहीं उठा सकता. न कानून, न प्रशासन और न ही मीडिया. यह दिल्ली की चरमराई जन-परिवहन प्रणाली ही है कि श्रीधरन जो कुछ करते हैं उसका आंख-मूंदकर [...]
November 5, 2007 | Posted in
बात करामात |
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अनुपम मिश्रदूरी एक छोटा सा शब्द है. लेकिन राज और समाज के बीच इस शब्द के आने से समाज का कष्ट कितना बढ़ जाता है इसका कोई हिसाब नहीं. फिर जब यह दूरी एक तालाब की नहीं सात समंदर की हो जाए तो बखान के लिए क्या रह जाता है?
अंग्रेज सात समंदर पार से आये [...]
September 10, 2007 | Posted in
बात करामात |
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