मौत, मुक्ति और उत्सव
बनारस के हरिश्चन्द्र घाट पर शरीर का अंत भले ही हो जाता है लेकिन जीवन का सफर जारी रहता है. क्योंकि आप कभी मरते नहीं, आप सिर्फ अपना चोला बदल लेते हैं. इसलिए इस शरीर के वशीभूत जो कुछ आपने किया वह यहीं छोड़ जाईये. धू-धू कर जलती चिताएं बरबस ही आपको मौन कर देती [...]
January 2, 2008 | Posted in बात करामात | Read More »