
हम थे वो(हिन्दी) थी, वो थी हम थे
हम थे वो थी और समा रंगीन
समझ गए न
जाते थे जापान (तकनीक की मक्का), पहूँच गए चीन,
समझ गए न,
याने याने गड़बड़ होना ही था.
ओ मन्नू (चीनी) तेरा हुआ, अब मेरा क्या होगा।
गुड़गाँवा जाना हुआ, बाज़ार घूमते एक रेड़ी पर नज़र पड़ी, भीड़ थी मानो कुछ मुफ्त मिल [...]
May 2, 2008 | Posted in
बात करामात |
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कल तक उमर थानाम मेराआज से उमेश है
चीख पड़ेधर्म के नुमायिंदेवो कहते हैं -मैं उमर नहीं वो कहते हैं -मैं उमेश नहीं उनका रहीम मेरा नहीं उनका राम मेरा नहीं अब ना हाथ उठाऊ मैं अब ना हाथ जोडुँ मैं
मुझसे मेरा विश्वास छीनकर जीने की चाह छीनकर वो कहते हैं -गलती की मैंने बिना [...]
May 1, 2008 | Posted in
बात करामात |
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उत्तर प्रदेश और बिहार में सत्तू का प्रयोग आम है। सत्तू भूने हुए चने को पीस कर बनता है । सामान्यतया यह चूर्ण के रूप में रहता है जिसे पानी में घोलकर या अन्य रूपों में खाया अथवा पीया जाता है ।
दिल्ली में सत्तू पाना बहुत आसान हो गया है। आपको सुबह ६ बजे [...]
May 1, 2008 | Posted in
बात करामात |
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चीफ़ जस्टिस के.जी.बालाकृष्णन ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि सूचना के अधिकार के दायरे से उनका कार्यालय बाहर है इस लिये उनसे किसी सूचना की उम्मीद न करी जाए लेकिन दूसरी ओर लोकसभा स्पीकर सोमनाथ चटर्जी और विधि मंत्री एच.आर.भारद्वाज ने इस बात का विरोध किया है। विधि,कार्मिक एवं न्याय के लिये गठित करी गयी [...]
April 30, 2008 | Posted in
बात करामात |
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अच्छी क्यों?
भई मुझे न्यौता दिया है तो अच्छी ही हुई न! कवियों और पत्रकारों के बीच थोड़े बहुत आम इंसानों का भी होना ज़रूरी है।
न हो तो उबकाई आती है, कवियों और पत्रकारों को भी, और आम इंसानों को भी।
यह बात अच्छी है कि विस्फोटक जी यानी संजय तिवारी जी ने पहले ही स्पष्ट [...]
April 29, 2008 | Posted in
बात करामात |
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