
अविनाश का मोहल्ला और रवीश कुमार का कस्बा ब्लागजगत के जाने-पहचाने नाम है. संयोग से दोनों ही देश देश के प्रतिष्ठित समाचार चैनल एनडीटीवी में काम करते हैं. देश-दुनिया में कहीं भी मोहल्ला और कस्बा भले ही दिख जाए लेकिन उनके अपने ही दफ्तर में ये दोनों ब्लाग प्रतिबंधित हैं. आरोप है कि इनके ब्लाग [...]
January 16, 2008 | Posted in
कारपोरेट मीडिया |
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साल 2007 हिन्दी ब्लागिंग के लिहाज से बहुत महत्व का था फिर भी ऐसा कुछ नहीं हुआ है जिसे उपलब्धि मानकर समीक्षा की जाए. कुछ घटनाएं जरूर हुई हैं जिनका आगामी सालों में हिन्दी की इस नयी विधा पर बहुत अच्छा असर पड़ेगा. संवाद तो हुआ ही विवाद भी खूब हुए. ब्लागरों की सक्रियता देखिए [...]
January 14, 2008 | Posted in
बात करामात |
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धड़ा-धड़ कई स्रोतों से पता चल गया है कि दिल्ली के एक फार्महाउस में 12 जनवरी को ब्लागर मीट आयोजित हो रही है. जितना देख-सुन रहा हूं उससे यही लगता है कि यह अब तक के ब्लागर मीट्स का का बाप साबित होगा. आयोजक कह रहे हैं कि 200-300 ब्लागर आयेंगे. कहां से मालूम नहीं. [...]
January 9, 2008 | Posted in
बात करामात |
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मेरा ब्लाग की दुनिया में आना न तो किसी प्रकार का निमंत्रण था और न ही सोची समझी योजना. वह तो कुछ लोगों की पत्रकारीय धोखाधड़ी थी जिससे आजिज आकर मैंने तय किया हिन्दी की इस मुफ्तखोरी में मैं काम नहीं करूंगा. अगर अपनी शर्तों पर काम करना इतना मुश्किल है तो मैं इन लोगो [...]
December 31, 2007 | Posted in
बात करामात |
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क्या आपके साथ कभी ऐसा हुआ है कि आप किसी पत्रिका को चिट्ठी लिखें और उस चिट्ठी को पढ़कर लोग आपको चिट्ठी लिखे? आठ-नौ सालों से अन्य कामों के साथ-साथ थोड़ा लिखता-पढ़ता भी हूं. लेकिन ऐसा पहली बार हुआ है कि मेरे लेख नहीं बल्कि मेरे पत्र को पढ़कर किसी ने मुझे पत्र लिखा है. [...]
November 24, 2007 | Posted in
बात करामात |
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