
आज एक बार फिर पाण्डेय जी ने मेरे इस लेख पर सवाल उठाया है कि हमारे भविष्य का क्या ब्ल्यूप्रिंट होना चाहिए? अगर इसको विकास नहीं कहते तो विकास किसको कहोगे? यह बहुत अच्छा विषय है. मैं अपनी ओर से कुछ कहूं इससे अच्छा होगा बहुत सारे ब्लागर इस बहस में शामिल हों. आपके हिसाब [...]
December 12, 2007 | Posted in
बात करामात |
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जब आप किसी समस्या का अति सरलीकरण करना चाहें तो एक रेखा खींच दीजिए. समस्या वाला हिस्सा अलग हो जाएगा. फिर आप केवल उस हिस्से पर केन्द्रित हो जाते हैं जहां समस्या है. अब आप टुकड़ों में समस्या सुलझाते चले जाईये. हो सकता है किसी दिन आपको संतोष हो जाए कि आपने समस्या को न [...]
December 12, 2007 | Posted in
बात करामात |
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कैबिनेट का यह फैसला दो-ढाई महीने पुराना हो चुका है कि हर गांव में न्यायालय होना चाहिए. काम चल रहा है. वित्त मंत्रालय से 324 करोड़ का बजट भी ले लिया गया है. सदन की मंजूरी मिलते ही इसे आगे बढ़ा दिया जाएगा. हो सकता है अगले साल तक ऐसे ग्राम न्यायालय गांवों में दिखने [...]
September 28, 2007 | Posted in
बात करामात |
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जवाहरलाल कौल
हाईड एक्ट का सारांश “कांग्रेसनल रिसर्च सर्विस” ने उपलब्ध करवाया है. अमेरिकी कांग्रेस पुस्तकालय द्वारा संचालित यह सेवा सरकारी उपक्रम है जो अमरीकी कांग्रेस को सेवा प्रदान करता है.
विधेयक का नाम है- हेनरी जे हाईडः संयुक्त राज्य-भारत शांतिमय परमाणु उर्जा सहयोग-2006. इसमें पहले तो भारत और अमेरिका के लोकतांत्रिक हितों की समानता की [...]
September 9, 2007 | Posted in
बात करामात |
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जशपुर और दिल्ली से राकेश सिंह
जशपुर में शैलेन्द्र पाण्डेय
जशपुर के इस इलाके में आने के बाद लगता है गरीबी को नयी परिभाषा गढ़नी चाहिए. क्योकिं जिस परिभाषा में हम गरीबी को मापते हैं उस परिभाषा की गरीबी यहां अमीरी है. आदिवासियों तक यह बात पहुंच गयी है कि पैसा जीवन में बहुत जरूरी [...]
September 5, 2007 | Posted in
बात करामात |
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