Anand Pandey

अंतर्राष्ट्रीय मातृभाषा दिवस

पूंजीवाद का अंतर्राष्ट्रीय वर्चस्व भाषाई भी है. आज भूमंडलीकरण के नाम पर दुनिया को अमेरिका-यूरो केंद्रित बनाने के प्रयास में दुनिया ...

सिल्क होने की त्रासदी

स्त्री मुक्ति का सपना आज भी मानव-समाज के लिए एक चुनौती है. फिल्म, साहित्य, राजनीति और कलाओं में विभिन्न रूपों में स्त्री ...

सुरसा बनती सिविल सोसाइटी
 

सुरसा बनती सिविल सोसाइटी

आजकल भ्रष्टाचार विरोधी आन्दोलन ने संसदीय राजनीति के पतन को उघाड़ने और सरकार की उपस्थिति को एक शोक गीत के रूप में प्रतीकित कर दिया है. अन्ना हजारे के नेतृत्व वाले इस आन्दोलन को व्यापक लोकप्रियता मिली है और इस आन्दोलन की शक्ति और संभावनाएं अभी भी बनी हुई हैं. इस आन्दोलन का वैचारिक विरोध भी हो रहा है. समाज के अलग-अलग वैचारिक और जातीय वर्गों की तरफ से. कोई इसे प्रतिक्रांतिकारी कह रहा है तो कोई इसे सवर्ण-हिंदूवादी. इसके साथ ही साथ अन्ना के अतिरिक्त संगठन कर्यकर्ताओं पर भी तरह-तरह से उंगलियाँ उठ रही हैं. लेकिन असल में इस आन्दोलन और इसके पहले के सारे जनांदोलन बुनियादी रूप से पतित हो चुकी संसदीय राजनीति पर अब सीधे-सीध उंगली उठा रहे है. ... Full story

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Anand Pandey Anand Pandey छात्र राजनीति से जुड़े रहे आनंद पाण्डेय समकालीन साहित्यिक राजनीतिक विषयों पर लिखने में रुचि रखते हैं. दिल्ली के जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय से बीसवीं सदी के अंतिम दशक में हिन्दी आलोचना और राजनीति पर शोध के बाद सक्रिय राजनीति की ओर रुख और स्वतंत्र लेखन।

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