Anand Pradhan

मनरेगा को मारने पर आमादा सरकार

आम आदमी खासकर गरीबों की सबसे बड़ी खिदमतगार होने का दावा करनेवाली यू.पी.ए सरकार और कांग्रेस पार्टी इसके सबूत के तौर पर ...

जागो मतदाता जागो!

विकास के सभी सूचकांकों पर सबसे निचले पायदान पर फिसल गए उत्तर प्रदेश को बीमारू प्रदेशों में लाइलाज सा मान लिया गया ...

भूख के बाजार में सौदागर हुई सरकार
 

भूख के बाजार में सौदागर हुई सरकार

खाद्यान्न सुरक्षा विधेयक के जरिए सरकार का असली मकसद न सिर्फ पी.डी.एस. प्रणाली को खत्म करना है बल्कि वह किसानों से न्यूनतम समर्थन मूल्य पर अनाज खरीदने की जिम्मेदारी से भी मुक्ति चाहती है. इस तरह वह न केवल गरीब लोगों को मिलनेवाले सस्ते अनाज से महरूम कर रही है बल्कि किसानों को भी बाजार, बड़े अनाज व्यापारियों और कंपनियों के रहमो-करम पर छोड़ना चाहती है. ... Full story

आर्थिक संकट से उभरता राजनीतिक संकट
 

आर्थिक संकट से उभरता राजनीतिक संकट

यूरोप का आर्थिक-वित्तीय संकट दिन पर दिन गहराता जा रहा है. इस संकट की आग में यूरो जोन की एक के बाद दूसरी अर्थव्यवस्थाएं झुलसती जा रही हैं. मुश्किल यह है कि यह संकट सिर्फ एक या दो देशों तक सीमित या केवल आर्थिक और वित्तीय संकट नहीं रह गया है. इस संकट से निपटने में यूरोपीय और अंतर्राष्ट्रीय नेतृत्व की नाकामी के कारण यह एक गंभीर राजनीतिक संकट में बदलता जा रहा है. यूनान (ग्रीस) के प्रधानमंत्री जार्ज पापेंद्र्यू की बलि चढ़ चुकी है और इटली के प्रधानमंत्री सिल्वियो बर्लुस्कोनी की कुर्सी खतरे में है. यही नहीं, इसने यूरोप के आर्थिक और वित्तीय एकीकरण की प्रक्रिया को गंभीर खतरे में डाल दिया है. ... Full story

अन्ना के आंदोलन की मीडिया रिपोर्टिंग ने सरकार को सचेत कर दिया
 

न्यूज चैनलों के नाम सरकार का संदेश

सरकार को न्यूज चैनलों के पत्रकारीय अतिरेकों-विचलनों से कोई खास शिकायत नहीं है. न्यूज चैनल जब तक सिनेमा, क्रिकेट, सेलेब्रिटीज, कामेडी और क्राइम दिखाते रहे, राखी सावंत के लटकों-झटकों और नाग-नागिन के रहस्य में मस्त रहे और सनसनी के लिए टुटपुंजिया ‘खबरों’ के साथ खिलवाड़ करते रहे, सरकार को कोई परेशानी नहीं हुई. जब तक न्यूज चैनल दर्शकों को उलझाये और सुलाये रहे, सरकार को उनसे कोई समस्या या शिकायत नहीं थी. लेकिन जैसे ही चैनलों ने भ्रष्टाचार-घोटालों के मामलों का भंडाफोड और उन्हें उछालना शुरू किया और अन्ना हजारे को भ्रष्टाचार विरोधी मुहिम का हीरो बना दिया, सरकार का सिंहासन हिलने लगा और उसकी चिंता और नाराजगी बढ़ने लगी. उसे चैनलों की अराजकता, मनमानी और अतिरेक-विचलन दिखाई देने लगे और रेगुलेशन की जरूरत महसूस होने लगी. ... Full story

पूंजीवाद के खिलाफ खड़ा हुआ जनवाद
 

पूंजीवाद के खिलाफ खड़ा हुआ जनवाद

कोई दो दशक पहले सोवियत संघ के ध्वंस को पूंजीवाद की अंतिम विजय बताते हुए फ्रांसिस फुकुयामा ने ‘इतिहास के अंत’ की घोषणा कर दी थी. इस बीच, मिसिसिपी से लेकर टेम्स में बहुत पानी बह चुका है और इतिहास खुद पूंजीवाद के दुर्ग अमेरिका और यूरोप में करवट लेता हुआ दिखाई दे रहा है. अगर इतिहास सड़कों पर बनता है तो हजारों-लाखों लोग कारपोरेट पूंजी के लगातार बढ़ते वर्चस्व को चुनौती देते हुए सिएटल से सिडनी तक और न्यूयार्क से लन्दन तक सड़कों पर इतिहास बना रहे हैं. स्वाभाविक तौर पर इससे पूंजीवाद के मजबूत गढ़ों में उथल-पुथल और घबराहट का माहौल है. ... Full story

अरब बसंत बीत जाने के बाद
 

अरब बसंत बीत जाने के बाद

एक पूर्व निर्धारित पटकथा के अनुसार नाटो समर्थित विद्रोहियों के हाथों कर्नल मुअम्मर गद्दाफी के मारे जाने के साथ ही लीबिया में न सिर्फ गद्दाफी की ४२ वर्षों पुरानी हुकूमत बल्कि इसके साथ एक युग का अंत हो गया. आप चाहें तो कह सकते हैं कि अरब वसंत के साथ उठी जनविद्रोह की आंधी ने एक और तानाशाह और जनविरोधी हुकूमत की बलि ले ली. लेकिन पूरा सच सिर्फ इतना ही नहीं है. पूरा सच यह है कि लीबिया में जो कुछ हुआ और हो रहा है, उससे यह तय हो गया है कि अरब वसंत का नेतृत्व एक बार फिर अरब जनता के हाथ से निकलकर पश्चिमी आकाओं के हाथ में पहुँच चुका है. ... Full story

तेलंगाना की आग से मत खेलिए
 

तेलंगाना की आग से मत खेलिए

तेलंगाना एक बार फिर उबल रहा है. अलग राज्य की मांग को लेकर पिछले बीस दिनों से आंध्र प्रदेश के तेलंगाना क्षेत्र के दस जिलों सहित राजधानी हैदराबाद में हालात दिन पर दिन बिगड़ते जा रहे हैं. पूरे तेलंगाना इलाके में अनिश्चितकालीन बंद, हड़ताल और विरोध प्रदर्शनों के कारण सब कुछ ठप्प है. इस इलाके के सरकारी कर्मचारी, वकील, शिक्षक-छात्र, खदान मजदूर और आम लोगों सहित सभी राजनीतिक पार्टियों के विधायक-सांसद-मंत्री इस अनिश्चितकालीन हड़ताल में शामिल हैं. एक तरह से सिविल नाफरमानी की स्थिति है. इससे पहले, इस साल फ़रवरी और मार्च में भी ऐसे ही हालात बन गए थे. ... Full story

बेल्लारी गणराज्य के लूट की कहानी
 

बेल्लारी गणराज्य के लूट की कहानी

कहते हैं कि कानून के हाथ बहुत लंबे होते हैं. लेकिन अब यह सिर्फ फिल्मों के संवादों में सुना जाता है. कानून के ये मिथकीय ‘हाथ’ व्यवस्थागत और सर्वदलीय भ्रष्टाचार के कारण किस हद तक लकवाग्रस्त और कमजोर हो चुके हैं, इसका एक और सबूत है कर्नाटक और आंध्र प्रदेश के बेल्लारी-अनंतपुर इलाके में पिछले एक दशक से भी अधिक समय से सत्ता के खुले संरक्षण में बिना किसी रोक-टोक के जारी लौह अयस्क के अवैध खनन का काला कारोबार. ... Full story

अमेरिका पर राष्ट्रीय कर्ज 14 ट्रिलियन डॉलर पार कर गया है
 

कर्ज लेकर घी पीता अमेरिका

अमेरिकी अर्थव्यवस्था दो साल के भीतर एक बार फिर गहरे संकट में फंसती हुई दिख रही है. अधिकांश विशेषज्ञों को आशंका है कि अमेरिकी अर्थव्यवस्था दोबारा मंदी की चपेट में आ सकती है. आर्थिक वृद्धि की रफ़्तार मंद पड़ रही है, घरेलू मांग सुस्त बनी हुई है, उपभोग में गिरावट दर्ज की गई है, बेरोजगारी दर अभी भी बहुत ऊँची है और वित्तीय बाजारों में घबराहट का माहौल है. ऐसे में, एक तो करेला, ऊपर से नीम चढ़ा की तर्ज पर वैश्विक क्रेडिट रेटिंग एजेंसी- स्टैण्डर्ड एंड पुअर ने अमेरिकी सरकार की साख को झटका देते हुए उसके ऋणपत्रों की रेटिंग को अपनी सर्वोच्च रेटिंग – ए.ए.ए से एक दर्जा नीचे घटाते हुए ए.ए प्लस करने का एलान करके इस घबराहट को और बढ़ा दिया है. ... Full story

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Anand Pradhan Anand Pradhan काशी हिन्दू विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में पीएचडी आनंद प्रधान पत्रकारिता के सैद्धांतिक और व्यावहारिक पक्ष में पारंगत होने की प्रक्रिया में हैं. छात्र राजनीति से लंबे समय तक जुड़ाव रहा. इन दिनों दिल्ली के प्रतिष्ठित इंस्टीट्यूट आफ मास कम्युनिकेशन में एसोसिएट प्रोफेसर.

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