Anil Raghuraj
प्रतिभा पाटिल का गृह कलेश
पुणे के पास खडकी सैन्य छावनी में प्रतिभा पाटिल के लिए एक बंगला बन रहा है. 2.61 लाख वर्गफुट में बननेवाले इस ...
यह बजट किसके लिए है?
यह एक ऐसा सवाल है जो प्रणव मुखर्जी के इस बजट पर जरूर पूछा जा सकता है. क्या यह बजट आम के ...
जो वादा किया है वो निभाना पड़ेगा
किसी भी एक्जिट पोल ने ऐसा नहीं कहा था और न ही किसी राजनीतिक विश्लेषक ने ऐसा सोचा था कि उत्तर प्रदेश की 403 सीटों वाली विधानसभा में मुलायम सिंह यादव की समाजवादी पार्टी को 224 सीटों का जबरदस्त बहुमत मिल जाएगा। मुलायम तो राजनीतिक अखाड़े के पुराने पहलवान हैं और अब तक चुनावी वादों के प्रति एकदम संवेदनहीन हो चुके होंगे। लेकिन मुख्यमंत्री की शपथ लेने जा रहे अखिलेश यादव बार बार कह रहे हैं कि वे चुनाव प्रचार के दौरान और पार्टी के घोषणापत्र में किए गए वादों पर अमल करेंगे। अगर वे अपने वादों पर कायम रहते हैं तो क्या वे वह सबकुछ कर पायेंगे जो कि उन्होंने वादा किया है? ... Full story
माया पर पड़ी महिलाओं की मार
उत्तर प्रदेश में हार के बाद बसपा प्रमुख बहन मायावती ने अपनी हार के लिए कांग्रेस और भाजपा को यह कहते हुए जिम्मेदार ठहराया था कि उनके कारण मुस्लिम मतों का समाजवादी पार्टी के प्रति ध्रुवीकरण हो गया और उनकी बहुजन समाज पार्टी धराशायी हो गई. लेकिन अगर अब हम उपलब्ध आंकड़ों का विश्लेषण करें तो मत विभाजन में महिलाओं ने इस बार जमकर मतदान किया है. तो कहीं ऐसा तो नहीं है कि महिलाओं द्वारा जमकर किये गये मतदान की मार मायावती पर पड़ी हो? ... Full story
मंदी के खतरनाक मोड़ पर खड़ा यूरोप
विश्व अर्थव्यवस्था इस समय ‘खतरनाक दौर’ में जा पहुंची है। यूरोप मंदी की चपेट में आ चुका है। यह किसी ऐरे-गैरे का नहीं, बल्कि विश्व बैंक का कहना है। साथ ही उसका यह भी कहना है कि भारतीय अर्थव्यवस्था की विकास दर चालू वित्त वर्ष 2011-12 में 6.8 फीसदी रहेगी, जबकि वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी का नया अनुमान 7 से 7.5 फीसदी का है। पिछले वित्त वर्ष 2010-11 में भारत का जीडीपी (सकल घरेलू उत्पाद) 8.5 फीसदी बढ़ा था, जबकि चालू वित्त वर्ष की पहली छमाही में इसकी विकास दर 7.3 फीसदी रही है। ... Full story
नेट के बारे में बदनीयत सरकार
केंद्र सरकार का कहना है कि गूगल, फेसबुक, ऑरकुट, ब्लॉग स्पॉट, यू ट्यूब, याहू व माइक्रोसॉफ्ट समेत 21 सोशल नेटवर्किंग साइटें व सर्च इंजन देश में सांप्रदायिक सद्भाव और राष्ट्रीय एकता को चोट पहुंचा रहे हैं, इसलिए इनके खिलाफ मुकदमा चलाने की इजाजत दी जाती है। सरकार की तरफ से यह फरमान कपिल सिब्बल के नेतृत्व वाले सूचना प्रौद्योगिकी विभाग ने जारी किया है। ... Full story
टांय टांय फिस्स हो गया हिन्दी इकोनॉमिक टाइम्स
इकनॉनिक टाइम्स एकमात्र दिल्ली से छपनेवाला अपना हिंदी संस्करण बंद करने जा रहा है। गुरुवार को उसकी टीम ने आखिरी बार अखबार का काम किया जो शुक्रवार के संस्करण के रूप में बाजार में आया। 30 दिसंबर 2011 का यही अंक हिन्दी इकोनोमिक टाइम्स का आखिरी अंक साबित हुआ। तीन साल दस महीने दस दिन पहले 19 फरवरी 2008 को जब यह अखबार शुरू हुआ था तो प्रबंधन की तरफ से बड़े-बड़े वादे किए गए थे। हिंदी समाज को भी इससे बड़ी अपेक्षाएं थीं। लेकिन कम से कम लागत में ज्यादा से ज्यादा धंधा बटोरने के मकसद से शुरू हुआ यह ‘उद्यम’ बंद ही होना था। ... Full story
रिटेल में पैर फैलाने का खेल
फैसला भारत सरकार का। देश में सड़क से लेकर संसद तक विरोध, लेकिन अमेरिका में स्वागत। वॉशिंगटन से जारी बयान में आधिकारिक तौर पर दलाली का काम करनेवाली अमेरिका-भारत बिजनेस परिषद ने मल्टी ब्रांड रिटेल में 51 फीसदी एफडीआई (प्रत्यक्ष विदेशी निवेश) और सिंगल ब्रांड रिटेल में एफडीआई की सीमा 51 से बढ़ाकर 100 फीसदी किए जाने का स्वागत किया है। उसने केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा गुरुवार रात को लिए गए इस फैसले को ‘साहसिक’ बताया है और कहा है कि इससे खाद्य पदार्थों की कीमतों और महंगाई में कमी आएगी। अमेरिका में बैठकर भारत की महंगाई की चिंता। कितनी महान आत्माएं हैं इस संसार में!!! ... Full story
बचत खातों को बचानेवाला ऐतिहासिक फैसला
इक्कीस साल एक महीने पहले सितंबर 1990 से देश में बैंकों की ब्याज दरों को बाजार शक्तियों या आपसी होड़ के हवाले छोड़ देने का जो सिलसिला हुआ था, वह 25 अक्टूबर 2011 को रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति की दूसरी तिमाही समीक्षा के साथ पूरा हो गया। रिजर्व बैंक के गवर्नर दुव्वरि सुब्बाराव ने ऐलान किया, “अब वक्त आ गया है कि आगे बढ़कर रुपए में ब्याज दर को विनियंत्रित करने की प्रकिया पूरी कर दी जाए।” करीब साल भर पहले 1 जुलाई 2010 से बेस रेट प्रणाली लागू करते वक्त दो लाख रुपए तक के ऋणों पर ब्याज दर को मुक्त किया गया था। इसके बाद केवल बैंकों के बचत खाते की ब्याज दर ही थी जिसे रिजर्व बैंक तय करता था। लेकिन अब तत्काल प्रभाव से उसे भी मुक्त कर दिया गया है। ... Full story
सोना है सिर्फ सट्टेबाजों के लिए
सोने पर हम हिंदुस्तानी आज से नहीं, सदियों से फिदा हैं। पाते ही बौरा जाते हैं। उसकी मादकता हम पर छाई है। जुग-जमाना बदल गया। लेकिन यह उतरने का नाम ही नहीं ले रही। इसीलिए भारत अब भी दुनिया में सोने का सबसे बड़ा खरीदार है। चीन तेजी से बढ़ रहा है, फिर भी नंबर दो पर हैं। भारत में सोने की औसत सालाना खपत 800 टन (8 लाख किलो!!!) है। चीन में यह 600 टन के आसपास है। वैसे, विश्व स्वर्ण परिषद के मुताबिक पिछले साल 2010 में भारत में सोने की खपत 963 टन थी, जबकि चीन में 706 टन। भारत और चीन दोनों मिलकर दुनिया के सोने का 52 फीसदी हिस्सा खपाते हैं। लेकिन दोनों देशों में सोने के पीछे की सोच व रिवाज में काफी अंतर है। ... Full story
