Ashish Kumar
अथ श्री गोबर गणेश कथा
सत्यनारायण की पूजा में गोबर के गणेश तो विराजते ही हैं लेकिन मध्य प्रदेश के नीमाड़ क्षेत्र में नर्मदा नदी के किनारे ...
गंगा पार गोवा की बहार
पटना में गंगा के इस पाट पर शाम को अगर जाएं तो आपको गंगा आरती के दर्शन होंगे। ऋषिकेश, हरिद्वार और काशी ...
माया साहब को समझना है तो बाबा साहब को समझो
अम्बेकडकरवादी प्रो एल. कारुण्यकरा, डॉ बाबा साहब अंबेडकर दलित और आदिवासी अध्ययन केन्द्र, वर्धा के निदेशक हैं। प्रोफेसर कारुण्यकरा दलित चिंतक के रूप में मानते हैं कि मायावती जो कर रही हैं उसमें कुछ गलत नहीं है। उनकी राजनीति में दलित उत्थान के बीज छिपे हुए हैं। प्रोफेसर कहते हैं कि जो लोग मायावती को आज राजनीतिक रूप से घेर रहे हैं असल में वे किसी दलित नेता के उत्थान को बर्दाश्त नहीं कर पा रहे हैं। एक दलित चिंतक से मायावती की राजनीति को समझने की कोशिश की आशीष कुमार अंशु ने- ... Full story
डिग्गी पैलेस में साहित्य की डुगडुगी
इसे संयोग ही कहा जाएगा कि 22 जनवरी को जयपुर में पंडित झाबरमल्ल शर्मा स्मृति व्याख्यान में प्रेस परिषद के अध्यक्ष पूर्व न्यायाधीश मार्कण्डेय काटजू जब बोल रहे थे कि “देश और लोगों की असली समस्याओं से भटकाने के लिए जनता को धर्म, फिल्म, क्रिकेट और गैर जिम्मेदार मीडिया की अफीम का नशा दिया जा रहा है.”, उसी दौरान जयपुर में ही एशिया के सबसे बड़े साहित्यिक उत्सव जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल का तीसरा दिन ओप्रा विन्फ्रे को पाकर अभिभूत था. पूरा डिग्गी पैलेस प्रसिद्ध टीवी एंकर ओप्रा विन्फ्रे के प्रशंसकों से अटा पड़ा था. हजारों की संख्या में लोग ‘नो इंट्री’ के बाद भी डिग्गी पैलेस के अंदर दाखिल होना चाहते थे. ... Full story
लावारिश लाशों की तारणहार
शव, शवयात्रा, कफन और दाह संस्कार ऐसे शब्द हैं जिनका प्रयोग कोई आपके सामने करे तो सारा माहौल भारी हो जाएगा. मगर आज हम चंडीगढ़ की जिस महिला समाजसेवी का परिचय आपसे करवाने जा रहे हैं ये शब्द और उनसे जुड़ी हुई क्रियाएं उनकी रोजमर्रा की जिंदगी हैं. अमरजीत कौर ढिल्लों चंडीगढ़ में रहती हैं और मृत देह का कफन-दफन उनके जीवन का अनिवार्य हिस्सा है. आप कभी भी उनके घर में जाईये, वहां आपको कुछ कफन के टुकड़े हमेशा धरे मिल जाएंगे. ... Full story
लिखित परीक्षा दो, टिकट लो
महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना की छवि पूरे देश में एक तोड़-फोड़ वाली पार्टी के तौर पर ही बनी है, जिसके संबंध में महाराष्ट्र के बाहर रहने वाले लोगों की समझ यही है कि इस पार्टी के कार्यकर्ताओं के पास मराठी प्रेम और उत्तर भारतीयों से नफरत के अलावा करने के लिए कुछ भी नहीं है। बात सही भी है लेकिन मनसे ने एक ऐसा काम कर दिया है जो देश में दूसरे राजनीतिक दलों के लिए प्रेरक हो न हो चौंकानेवाला जरूर हो सकता है। ... Full story
मंडल क्यों हुए कमंडलधारी?
‘इंडिया टुडे’ के किसी संपादक को लेकर शायद ही इतनी चर्चा पहले कभी हुई हो, जितनी दिलीप मंडल के संपादक बनने पर इन दिनों हो रही है। दिलीपजी जो मीडिया को अंडरवर्ल्ड कहकर दलाली का अड्डा बताते रहे, मीडिया के अंदर बैठे लोगों पर सवाल उठाते रहे, एक समय उनसे यह उम्मीद जगी थी कि वे वैकल्पिक मीडिया को मुख्यधारा की मीडिया के समानान्तर खड़ा करने की कुवत रखते हैं। लेकिन अचानक पाला बदलकर दिलीप मंडल मुख्य धारा की मीडिया के कमण्डलधारी क्यों हो गये? मुख्यधारा की मीडिया को गंदा धंधा बतानेवाले दिलीप मंडल उसी धंधे में क्यों उतर गये? मंडल ने हाथ में कारपोरेट मीडिया का कमंडल क्यों पकड़ लिया ? ... Full story
टीम अन्ना नहीं, यह टीम अरविन्द है
टीम अन्ना पर अभी तक दिल्ली के दिग्विजय सिंह ही सवाल उठा रहे थे लेकिन खुद अण्णा हजारे के गांव में भी भी टीम अण्णा को लेकर कोई बहुत सकारात्मक दृष्टिकोण नहीं है. दिल्ली में राहुल गांधी से मिलने के लिए आये और अपमानित होकर वापस गये रालेगढ़ गांव के सरपंच जयसिंह महापारे अपरिचित नाम नहीं रह गये हैं. वे उस गांव के सरपंच हैं जिस गांव में अण्णा रहते हैं, इसलिए उनकी बात का मायने होता है और उनका रूख अण्णा के गांव का रुख होता है. अण्णा के मौन व्रत के दौरान रालेगढ़ सिद्धि गांव पहुंचे आशीष कुमार अंशु ने महापारे से बातचीत करके बहुत सारे मुद्दों पर अण्णा के गांव का रुख जानने की कोशिश की. ... Full story
लक्ष्य पाने की नौजवान लगन
कौन कहता है कि आज के युवा समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी नहीं समझते। जिन्हें ऐसा लगता हो, उन्हें एक बार लक्ष्य की टीम से मिलना चाहिए। विश्वास जानिए आज के युवाओं को लेकर आपकी सोच बदल जाएगी। एक ओर जब गांव के नौजवान शहर और शहर के नौजवान विदेश जाने की जद्दोजहद में उलझे हुए हैं तो महाराष्ट्र के पचौड़ा गांव के ये नौजवान अपने गांव के उत्थान का लक्ष्य पाने में लगे हुए हैं। ... Full story
बाबा मार्क्स का अफीम
एक मित्र की फेसबुक बुक वॉल पर एक कमेन्ट था जिसका लब्बो लुआब यह कि राम-राम, सलाम वालेकुम, सत श्री अकाल जैसे संबोधन करने वाले साथी उनके फेसबुक की फ्रेन्ड लिस्ट से बाहर चले जाएं। वे लोग भी बाहर चले जाएं जिन्होंने अपनी तस्वीर की जगह किसी चर्च, मन्दिर या गुरुद्वारे की तस्वीर लगा रखी है। चूंकि इस नास्तिक फेसबुकधारी मित्र की नजर में ऐसे सभी लोग ‘धार्मिक’ किस्म के लोगों की श्रेणी में आते हैं। ... Full story
