Arindam Chaudhari
खूनी खरबपतियों के नाक पर नकेल
टी.एन. शेषन के विपरीत, जब आप विनोद राय से मिलेंगे तो उन्हें एक बहुत ही सौम्य और मृदुभाषी व्यक्ति पाएंगे. हमारे स्नातक ...
किराया भले बढ़ाओ लेकिन जान बचाओ
पिछले एक दशक में रेलवे किराये में बढ़ोत्तरी नहीं की गई है। इसके पीछे तर्क है कि ऐसा करने से आम आदमी ...
राजीव गांधी से राहुल गांधी तक कांग्रेस के तीन दशक
बताते हैं कि 1982 में भारत निर्णायक रूप से बदला था. उन दिनों मैं स्कूल में था, इसलिए मुझे अखबारों की सुर्खियां ठीक से याद नहीं, लेकिन इतना जानता हूं कि 1982 में आंध्र प्रदेश की राजनीति में निर्णायक बदलाव हुआ था. आंध्र प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री टी. अनैया राजीव गांधी की चप्पल उठाना चाहते थे. और यह इतिहास में दर्ज हो गया. राजीव गांधी कांग्रेस के नए नेता थे और किसी तरह से, सही या गलत, राजीव गांधी की खुशामद करने के उस प्रयास ने एक फिल्मी हस्ती एनटी रामाराव को तेलुगु गर्व को फिर से हासिल करने के लिए एक आंदोलन और एक पार्टी शुरू करने के लिए प्रेरित किया. राव और उनकी तेलुगु देशम पार्टी ने 1983 के विधानसभा चुनाव में पूर्ण बहुमत भी हासिल कर लिया. ... Full story
प्रतिबंध की पॉलिटिक्स और अतिवादी अमेरिका
संयुक्त राष्ट्र और उसके सहयोगी (खासतौर पर इजराइल) ईरान को घेरते जा रहे हैं. एक जबरदस्त जीत के साथ अमेरिकी सीनेट ने विदेशी वित्तीय संस्थानों के सेंट्रल बैंक ऑफ ईरान के साथ व्यापार करने पर प्रतिबंध को स्वीकृति दे दी है. लगातार लगाए गए प्रतिबंधों की श्रृंखला के बाद ओबामा सरकार ने हाल ही में यानी 31 दिसंबर 2011 को ईरान पर सबसे ज्यादा गंभीर प्रतिबंध की घोषणा की, जिसके तहत सेंट्रल बैंक ऑफ ईरान पर वित्तीय प्रतिबंध लगा दिए गए हैं. ... Full story
वॉल स्ट्रीट विरोध प्रदर्शन जिंदाबाद!
पूंजीवाद पर सवाल करने और इस बात पर गंभीरता से पुनर्विचार करने की जरूरत है कि क्या निर्बाध लाभ और सरवाइवल ऑफ द फिटेस्ट (सर्वोत्तम की उत्तरजीविता) का एकमात्र सिद्धांत उसे सूचना क्रांति और सामाजिक सक्रियता के इस युग में जरा-सा भी आगे ले जा सकता है, जबकि लगातार उठ रही इन आवाजों को नजरंदाज करना दिन पर दिन मुश्किल होता जा रहा है. सिर्फ मिस्र और ट्यूनीशिया पर ही खतरा नहीं मंडरा रहा, हर उस देश को खतरा है जो अपनी जनता के साथ अन्याय कर रहा है. मध्य एशिया के देशों के अत्याचार जगजाहिर हैं, उसी तरह आजादी और लोकतंत्र के नाम पर अमेरिका में जो शोषण हो रहा है, उससे वह भी आखिरकार बेनकाब हो रहा है. ... Full story
सर्वाइवल आफ द वीकेस्ट
'अवसरों के देश' अमेरिका में उम्मीद से थोड़ा बाद में ही सही लेकिन लोग सड़कों पर उतर ही आये. वर्तमान विश्व व्यवस्था में पूंजीवाद के स्वर्ग में लोगों का इस तरह सड़कों पर उतर आना और पूंजीवाद के किलों पर कब्जा कर लेने का अभियान शुरू करना निश्चित रूप से केवल अमेरिका पर ही नहीं पूंजीवाद के स्वरूप पर भी सवाल खड़ा करता है. बेशर्म मुनाफाखोरी के प्रतीक बन चुके वाल स्ट्रीट को कब्जा कर लेने का अहिंसक आंदोलन आगे कहां तक जाएगा? मैनजमेन्ट गुरू अरिन्दम चौधरी ने अमेरिका के आंदोलन और पूंजीवाद के भविष्य पर एक लंबा लेख लिखा है. निश्चित रूप से यह लेख हमें न सिर्फ अमेरिका की असली समस्या को समझने में मदद करता है बल्कि पूंजीवाद की पड़ताल करने में भी मदद करता है. अरिन्दम चौधरी के इस लेख को हम दो किश्तों में प्रकाशित कर रहे हैं. पहली किश्त में पूंजीवाद की पड़ताल और दूसरी किश्त में अमेरिका का आर्थिक संकट. ... Full story
सफलता और और सम्मान फिर भी सफर नहीं आसान
मेरे लिए मीडिया हमेशा से एक वाहन रहा है, जो बड़ी संख्या में लोगों तक पहुंचता है, यह बात उन लोगों द्वारा नहीं बताई गई थी, जो मीडिया के नाम पर यथास्थिति कायम रखना चाहते हैं. जो विचार-विमर्श और बहस हम अंग्रेजी में आईआईपीएम की कक्षाओं में किया करते थे, हम चाहते थे कि जो लोग कक्षा के बाहर हैं, वे अपनी मातृभाषा में विचार-विमर्श और बहस करें. कक्षा में एक बार में हम 60 लोगों को पढ़ाते हैं, जबकि मीडिया के जरिए हम छह लाख लोगों तक पहुंच जाएंगे! और उम्मीद है कि एक दिन साठ करोड़ लोगों तक. हमारे लिए मीडिया, आसपास की हकीकत को, सरल शब्दों में उस भाषा में पढ़ाने का तरीका है, जो लोगों के दिल के काफी करीब है. ... Full story
लोकतंत्र का लचीला रुख अपनाएं अन्ना
जब अन्ना तिहाड़ में थे और वहीं रहने की जिद पर अड़े थे तो बहुत सारे भारतीय इसे उनके संघर्ष के अदम्य साहस के तौर पर देख रहे थे. लेकिन छोडिए भी. सरकार ने उनके अनशन को रोकने के लिए मूर्खतापूर्ण शर्तें लगाकर और उन्हें गिरफ्तार कर एक बड़ी भूल की. लेकिन भारी जनविरोध ने सरकार को झुकने और समर्पण के लिए विवश किया. बाद में खुद सरकार ने कहा कि अन्ना की टीम और उनके समर्थक अनशन कर सकते हैं. उसने अनशन पर थोपी सभी मूर्खतापूर्ण शर्तों को वापस लेने की सार्वजनिक घोषणा भी की. तो क्या अन्ना हजारे इस शानदार जीत के बाद कुछ उदार हुए? नहीं, अब वह इस बात पर अड़े हैं कि उन्हें वह सब कुछ हासिल करने दिया जाए, जो वह चाहते हैं. सरकार पूरी तरह से नतमस्तक होकर उनकी सभी मांगें मानती रहे. इस बीच भावनाओं से भरे उनके लाखों समर्थक खुद को जोखिम में डालकर देशभर में विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं. क्या इसे जिद्दी, घमंडी और असंवेदनशील होना नहीं माना जाएगा? ... Full story
चीन के सामने सिर्फ तमाशबीन
जिन लोगों ने भी बीजिंग ओलंपिक्स को करीब से देखा, वे निश्चित तौर पर पूर्व चीनी जिमनास्ट ली निंग से प्रभावित हुए होंगे, जिन्होंने समारोह की उद्घाटन ज्योति जलाई थी. 1984 के खेलों में तीन स्वर्ण पदक जीत चुके 45 साल के ली निंग, खेल सामग्री का निर्माण करने वाली चीन की सबसे बड़ी कंपनी-ली निंग कंपनी लिमिटेड- के संस्थापक और मालिक हैं. ली निंग कंपनी न केवल चीन की सबसे बड़ी कंपनी है, बल्कि इसके स्टोर दुनियाभर में हैं. 2008 के ओलंपिक्स में कंपनी चीनी टीम के अलावा कई अन्य टीमों की प्रायोजक बनी. आज वह एडिडास और नाइकी की चीन में सबसे बड़ी प्रतिस्पर्धी है जिसका पिछले साल का राजस्व 1.354 अरब डॉलर था. चीन मार्केट सर्वे ग्रुप के सर्वे 2009 के मुताबिक ली निंग और एडिडास दोनों की चीन के खेल बाजार पर 14 फीसदी की हिस्सेदारी है, जो बाजार के सबसे बड़े खिलाड़ी नाइकी से महज तीन फीसदी कम है. ... Full story
कश्मीर के भविष्य से खतरनाक खिलवाड़
कश्मीर बहुत पहले ही धरती का स्वर्ग होने का दर्जा खो चुका है. अब तो कश्मीर में लगभग नर्क जैसी स्थितियों से दो चार होना पड़ता है. ऐसा नहीं है कि आम कश्मीरी महज भय और लगातार निगरानी में रह रहे हैं, बल्कि उनकी बुनियादी आजादी भी इतिहास की बात हो गई है. प्रीपेड सेल फोन कनेक्शन पर रोक लगाने से लेकर जमीन के मालिकाने पर प्रतिबंध लगाने वाले कानूनों तक, लगभग सभी लोकतांत्रिक अधिकार छीन लिए गए हैं. हालात इस हद तक बदतर हैं कि हर दूसरे महीने पुलिस अथवा सरकारी बर्बरता के दो-चार मामले सुर्खियां बनते हैं और अगले हफ्ते ही उन्हें ठंडे बस्ते में डाल दिया जाता है. वहां जिस तरह की अशांति है, उसे देखते हुए प्रीपेड सेल फोन और भूमि अधिग्रहण पर रोक सही है, लेकिन सबसे अधिक नुकसान पहुंचा रहा है कश्मीर का बाल न्याय कानून, जो कि भविष्य के लिए अभूतपूर्व परिणाम का सबब बनेगा. ... Full story
