Arjun Sharma
आमिर के हीरो कृष्ण कुमार
आमिर खान के टीवी शो सत्यमेव जयते ने जितनी धूम मचाई है उसका ये आलम है कि इलैक्ट्रानिक मीडिया को भी ये ...
बदला बदला सा पंजाब नजर आता है
आज 27 मार्च है। बहुत सालों बाद आज पंजाब की सडक़ों पर फिर से अर्ध सैनिक बल दिखाई दे रहे हैं। पंजाब ...
हिसार का हिसाब किताब
किसी भी प्रदेश में उपचुनाव में ज्यादार नतीजे उसी पार्टी के पक्ष में जाया करते है जिसकी सूबे में हुकूमत हो। इस लिहाज से हिसार लोकसभा उप-चुनाव के नतीजे विस्मयकारी कहे जा सकते हैं। जिस प्रकार पहले व दूसरे नंबर की जंग में हजकां-भाजपा गठबंधन व इनैलो उम्मीदवारों का प्रदर्शन रहा उसे इस लिहाज से विस्मयकारी कहा जा सकता है क्योंकि जिस कांग्रेस पार्टी का हरियाणा में शासन है उस पार्टी का उम्मीदवार तीसरे नंबर पर रहा व तमाम सलाहियात के बावजूद अपनी जमानत भी नहीं बचा पाया। ये जीत तकनीकी तौर पर कुलदीप बिश्नोई की ही है पर अजय चौटाला के प्रदर्शन को देख कर उन्हें हारा हुआ कहने को मन नहीं मानता। ... Full story
हरियाणा में चौटालाशाही को चुनौती
हरियाणा में हरियाणा जनहित कांग्रेस और भाजपा का गठबंधन सीधे पर पर कांग्रेस को चुनौती की बजाय ओम प्रकाश चौटाला की चौटालाशाही को चुनौती है। हजकां के साथ गठबंधन का निर्णय क्या भाजपा का अनपेक्षित निर्णय था? भाजपा को यह निर्णय क्यों लेना पड़ा? भाजपा के पास और क्या विकल्प थे? भाजपा को इससे क्या लाभ और हानि होगी? हजकां ने भाजपा का साथ क्यों लिया और हजकां के पास और क्या विकल्प थे? ... Full story
अफजल गूरू के नाम पर
देश की संसद पर हुए हमले के मुख्य सूत्रधार अफजल गूरू (गुरु नहीं, गूरू कश्मीर में दूध बेचने वाले ग्वालों की जाति का एक उपनाम है) की फांसी के संदर्भ में जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री ट्वीट करते हुए लिखते हैं कि जैसा तमिलनाडू विधानसभा ने किया, वैसा यदि जम्मू-कश्मीर की विधानसभा ने किया होता तो देश की प्रतिक्रया क्या होती? इस छोटे से ट्वीट ने कश्मीर समेत सारे देश में एक नई बहस छेड़ दी है। उसी अफजल के संदर्भ में ये तथ्य पाठकों के लिए काफी रुचिकर रहेगा कि दिल्ली की तिहाड़ जेल नम्बर तीन में बंद अफजल गूरू ने वहां के अधीक्षक मनोज कुमार द्विवेदी से बातचीत के क्रम में न केवल ये माना है कि संसद पर हमले का सूत्रधार वही था, अलबत्ता उसने पाकिस्तान में हुई तीन महीने की ट्रेनिंग के कई संस्मरणों को उनके साथ सांझा किया है। ... Full story
प्रकाश झा स्टाइल में आई आरक्षण
सिनेमाघरों में लगने से पहले ही विवादों में घिर गई फिल्म आरक्षण के निर्देशक प्रकाश झा के विचारों व पारिवारिक पृष्ठभूमि में बड़ा विचित्र विरोधाभास है। वे विचारधारा से वामपंथी हैं। उनकी पारिवारिक पृष्ठभूमि बिहार के बहुत बड़े जमींदार घराने की है। उन्हें पहली बार दस साल पहले चंडीगढ़ में सैक्टर 17 की एक किताबों की दुकान पर देखा था। साधारण खद्दर का रंगदार कुर्ता पायजामा पहने लंबे बालों को पीछे चोटी में बांधे व कंधे पर एक कपड़े का थैला लिए हुए। तब वे इतने चर्चित न थे पर क्रिऐटिव डायरेक्टर के तौर पर उनकी पहचान बुद्धिजीवी वर्ग में एक खास रुतबा रखती थी। ... Full story
पंजाब केसरी आखिर क्या है?
अखबारी घरानों में हैरान कर देने वाली सफलता के कीर्तिमान स्थापित करता एक संस्थान? अपने पाठकों की ताल से ताल मिला कर हमेशा उनके मन में अपने साथ जोड़े रखने की ज्योति जलाए रखने की जादूगरी जानने वाले प्रबंधन तंत्र की सफल नीतियों का मिला जुला रूप? या फिर निजता पर आधारित मानसिकता रखने वाले मालिकान की अखबारी कंपनी जिसकी तरक्की के पीछे शायद उसी निजता भरी मानसिकता की नीति का भी हाथ है जो कई बार कई लोगों या समूहों के लिए नफरत का बायस भी बनती रही है? ... Full story
भाई जी की शादी में नहीं आई ताई जी
ये छोटे दिल वाले बड़े लोग! अर्जुन शर्मा अब मुझे कोई संदेह नहीं रह गया कि श्रीमति सोनिया गांधी के मामले में विदेशी मूल का होने का मुद्दा जरा सा भी जिंदा बचा है! कारण? यदि उनमें अभी भी विदेशी संस्कार होते तो वे वरुण गांधी की शादी में शिरकत करके अपने बड़ेपन व विदेशी लोगों जैसे खुले मन व खुले पन का इजहार करतीं न कि पारंपरागत भारतीय जेठानियों जैसी हसद व जलन जैसा प्रदर्शन करती। इतनी बड़ी कुर्सी पर बैठे होने के बावजूद पूरी बेशर्मी और निष्ठुरता से अपने पति के भतीजे के इस विनम्र आग्रह को कि ताई जी भाई जी को साथ लेकर मेरी शादी पर जरूर आना, नजरंदाज करके सोनिया गांधी ने अपने अहं के भारतीय संस्करण के ही दर्शन करवाए हैं। ... Full story
हिंदी साहित्य के लिए पंजाबी के दूत
ख्यातिप्राप्त साहित्यकार रामसरूप अणखी अलग ही किस्म की शख्सियत थे। जमीन से जुड़ा साहित्य रचने के कायल इस पंजाबी लेखक की सादगी और फक्कड़ मिजाजी का असर उनके साथियों, प्रशंसकों और परिजनों पर बाखूबी पड़ा। इसीलिए तो उन्होंने स्वर्गीय अणखी की पहली बरसी भी कुछ उसी अंदाज में मनाई। इस मौके पर कोई धार्मिक-पारंपरिक श्रद्धांजलि सभा की बजाए उनके गृह-क्षेत्र बरनाला के शक्ति कला मंदिर में एक साहित्यिक समागम रखा गया। ... Full story
धर्मशाला में पसरा चीनी रहस्य का साया
बौद्ध धर्मगुरु नम्बर दो करमापा के दफ्तर व मठ से मिले करोड़ों देशी विदेशी करंसी के रुपयों के बाद आमतौर पर शांत दिखने वाले धर्मशाला शहर में अजीब सी सनसनी महसूस होती है। कांगड़ा से पहाड़ की ऊंचाई वाले रास्ते पर गाड़ी का मोड़ काटने के बाद धर्मशाला 14 किलोमीटर का लगा मील पत्थर वहां पहुंचने की उतेजना को और बढ़ा देता है। करमापा के पक्ष में दलाईलामा की इस सफाई के बाद कि करमापा चीनी जासूस नहीं हैं,करमापा के मठ के पास जमा हुए पांच हजार के करीब तिब्बती अपनी पारंपरागत पोशाकें पहने व हाथो में तस्बीहनुमा मालाए पकड़े बुदबुदाता सा मंत्रोचारण करते हुए करमापा मठ की परिक्रमा करते मानो ये जता रहे हैं कि जो हो रहा है उसका उन्हें दुख है व इस विकट घड़ी में वे करमापा के साथ चट्टान की भांति खड़े हैं। ... Full story
