Arvind Tripathi
गुंडई की सुविधाजनक सफाई
समाजवादी पार्टी को अपनी पिछली हार के कारणों का अंदाजा था. गुंडागर्दी की छवि से निजात पाने का प्रयास कर रही पार्टी ...
कानपुर की कोचिंग मंडी
कानपुर छात्र-छात्राओं केसुनहरे भविष्य के निर्माण के लिए प्रतियोगी परीक्षाओं कि तैयारी कराने के केंद्रके रूप में देश-भर में विख्यात हो चुका ...
नारी में दुर्गा बसै
विगत दिनों अंतर्राष्ट्रीय बेटी दिवस था. अब नवरात्र शुरू हो रहे हैं. उस दिन से आज तक मेरे मन में लगातार उथल-पुथल जारी है. क्या आज के समाज में स्त्री का दोष ही उसका स्त्री होना है ? माँ और बेटी के पर्व के अवसरों के परिप्रेक्ष्य में कहूँगा कि आज का समाज बेटी और माँ दोनों में से किसी का सम्मान करना नहीं सीख पाया है. चाहे वो अपना देश हो या फिर विदेश. माँ दुर्गा को ये सम्मान देवताओं ने तभी दिया जब उन्होंने अपनी शक्ति को सिद्ध किया. जब हथियार उठाये. राक्षसों का नाश किया.मधु-कैटभ, दुर्गम, रक्त-बीज और शुम्भ-निशुम्भ सहित तमामों को मौत के घात उतार दिया. क्या आज की नारी के समक्ष वैसी ही स्थिति नहीं आ रही है कि वो भी हथियार उठाकर अपनी अस्मिता की रक्षा करे! यदि हाँ, तो ये सभ्य कहलाने वाले समाज के लिए शर्मनाक है कि हम अपनी बेटियों, चाहे वो अविवाहिताये हों या विवाहिताएं, उनका सम्मान और गौरव नहीं बचा पा रहे हैं. ... Full story
सत्ता के लिए निर्णायक संघर्ष
उत्तर प्रदेश की राजनीतिक स्थितियों को देखने से जान पड़ता है की सभी दलों ने अपने अंतिम प्रयास कर लिए हैं, पर वास्तव में अंदरखाने चुनाव बाद की तैयारियां जारी है. मुद्दा-बहुल चुनाव में मुख्य प्रभावी मुद्दे और जीत की सफल गणित और रणनीति की तलाश में सभी दल व्यस्त हैं, परन्तु सही रास्ता नहीं सूझ रहा है. सभी छोटे दल भी अपनी ताकत का प्रयोग कर रहे हैं. लेकिन मतदान की शुरूआत के साथ ही सत्ता की जोड़ तोड़ भी शुरू हो गई है। ... Full story
पिछड़ों के नाम पर पतित राजनीति
उत्तर प्रदेश में विधानसभा का चुनावों में पहले चरण के नामांकन की तारीख नजदीक आ रही है लेकिन चुनाव के इतने करीब आ जाने के बाद भी प्रदेश में चुनाव के मुद्दों में भटकाव जोरों पर है. विगत वर्ष चर्चा में रहे भ्रष्टाचार, महँगाई, काला-धन वापसी और अपराध के स्थान पर जातीय आधार पर चुनाव जीतने की बिसात बिछाई जा रही है. आर्थिक और जातीय आधार पर “पिछड़ा-वर्ग” कहलाने वाला समाज सत्ता पाने और कब्जियाने में एक बड़ा भाग पाने में सक्षम होने के बावजूद छोटे-छोटे स्वार्थों के चलते बिखर सा गया है. वैचारिक गिरावट का दौर ऐसा है की समाजवादी, राष्ट्रवादी, वाम-पंथी और मध्यमार्गी सभी प्रकार की राजनैतिक विचारधाराओं के दल आज इस खास पिछड़ा वोट बैंक को हथियाने के लिए पतिति राजनीति का सहारा ले रहे हैं. ... Full story
