Dr. Ashish Vashisth

कांग्रेस की खुशी सोनिया का गम

ऐसा लगता है कांग्रेस नेता और मंत्री जान-बूझकर बाटला हाउस विवाद को थमने नहीं देना चाहते। गाहे-बगाहे उसके जख्म को कुरेदते रहते ...

मुलायम में समा रहे हैं माया के लोग

बसपा शासनकाल में जो लोग मायावी सत्ता के नाक के बाल थे वो एक-एक करके किसी न किसी बहाने से उससे दूर ...

राजा बनने से पहले रंक हो गये राहुल
 

राजा बनने से पहले रंक हो गये राहुल

कांग्रेस महासचिव राहुल गांधी ने सोमवार को वाराणसी में आयोजित प्रेस कांफ्रेंस में जो कुछ भी मीडिया के सामने कहा उससे राहुल गांधी की नीति, दर्शन, और भविष्य की योजनाओं को आसानी से समझा जा सकता है। राहुल की भाव-भंगिमा और भाषाशैली सीधे तौर पर यह इशारा कर रही थी कि उनका मिशन 2012 मंजिल से पहले ही हांफने लगा है। जिस तरह से उन्होंने मिशन की सफलता पर खुद ही संदेह जाहिर किया है उससे साफ है कि दिग्विजय सिंह उन्हें यूपी में राजा घोषित करते इससे पहले ही राहुल गांधी ने खुद को रंक करार दे दिया है। ... Full story

फीका हुआ चुनाव
 

फीका हुआ चुनाव

पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त टीएन शेषन के कार्यकाल से आदर्श चुनाव आचार संहिता का जो डंडा राजनीतिक दलों और नेताओं पर चला, उसकी धमक और हनक आज भी वैसी ही है। अब चुनाव प्रचार का शोर-शराबा न तो लोगों की नींद में खलल डालता और न ही दीवारे रंगी-पुती नजर आती हैं। हफ्तों पहले चुनाव प्रचार शुरू करने और बेहिसाब रुपये उड़ाने वाले राजनीतिक दल और नेता अब अपने खर्च के एक-एक पैसे का हिसाब-किताब रखने को मजबूर हैं। ... Full story

कांटों भरी राह पर कांग्रेस के युवराज
 

कांटों भरी राह पर कांग्रेस के युवराज

कांग्रेसी युवराज राहुल गांधी के लिए यूपी विधानसभा चुनाव नाक का सवाल बन गया है। मिशन 2012 के लिए राहुल पिछले विधानसभा चुनावों के बाद से ही पसीना बहा रहे हैं, लेकिन मौजूदा जमीनी हालात जो तस्वीर पेश कर रहे हैं, उससे राहुल और उनकी टीम की रातों की नींद उड़ी हुई है। ... Full story

मजबूर क्यों हुई मगरूर मायावती?
 

मजबूर क्यों हुई मगरूर मायावती?

भ्रष्टाचार के आरोपों से घिरी यूपी की बसपा सरकार की मुखिया मायावती ने मजबूरी में आपरेशन क्लीन के तहत बड़ी तादाद में मंत्रियों को सरकार से हटाया और विधायकों, मंत्रियों और कद्दावर नेताओं के टिकट काटकर जनता को यह संदेश देने की कोशिश की कि उनकी पार्टी में दागियों, अपराधियों और भ्रष्टाचारियों के लिये कोई स्थान नहीं है। लेकिन अहम सवाल यह है कि पिछले पांच साल से दर्जनों दागी और भ्रष्टाचारी माया-मंत्रिमंडल के अनमोल नगीनों में शुमार थे, फिर एकाएक ऐसा क्या हुआ कि लोकायुक्त की रिपोर्ट और अनुशंसा से मायावती का विवेक जाग उठा और एक-एक करके उन्होंने अपनी आंख के तारों, अति निकट और चहेतों को पार्टी और सरकार से बाहर निकालने में तनिक भी हिचकिचाहट और संकोच नहीं दिखाया? ... Full story

पत्तों को मत झाड़िए, जड़ को उखाड़िये
 

पत्तों को मत झाड़िए, जड़ को उखाड़िये

प्रिंट और इलेक्ट्रानिक मीडिया को आचार संहिता के फंदे में फंसा चुकी सरकार अब सोशल नेटवर्किंग साइटस पर लगाम लगाने की कवायद में जुट गई है। सरकार ये प्रचार कर रही है कि इन सोशल नेटवर्किंग साइटस पर धार्मिक संप्रदायों और महापुरूषों का अपमान होता है। ऊपरी तौर पर सरकार की पहल साफ-सुथरी और नेक नीयत में लिपटी दिखाई देती है, लेकिन अगर सरकारी पहल के भीतर अगर थोड़ा झांका जाए तो सारी कहानी आसानी से समझ आ जाएगी। सरकार की जो कोशिश है वह पत्तों को झाड़कर अपनी जिम्मेदारी से मुक्त हो जाने की है जबकि भ्रष्टाचार और कुशासन की जड़ पर वार करने से वह बचना चाहती है। ... Full story

आम आदमी को गुस्सा क्यों नहीं आता?
 

आम आदमी को गुस्सा क्यों नहीं आता?

देश के युवा सांसद और कांग्रेस महासचिव राहुल गांधी को आम आदमी की बदहाली गुस्सा आता है, भाजपा की फायर ब्रांड नेता उमा भारती रिटेल सेक्टर में एफडीआई पर सरकार के निर्णय से इतनी गुस्सा हो जाती हैं कि वो अपने हाथों वालमॉर्ट के स्टोर में आग लगाने की बात करती हैं, ऐसे में प्रतिक्रिया स्वरूप यह सवाल उठता है कि राहुल गाधीं, उमा भारती और तमाम दूसरे नेताओं को जिस आम आदमी की बदहाली और दुर्दशा पर गुस्सा आता है, आखिरकर खुद उस आम आदमी को अपनी बदहाली पर गुस्सा क्यों नहीं आता है? ... Full story

हाट नहीं अब वालमार्ट
 

हाट नहीं अब वालमार्ट

मल्टी ब्रांड खुदरा निवेश में 51 फीसदी और एकल ब्रांड में 100 फीसदी प्रत्यक्ष की अनुमति देकर अर्थशास्त्री प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने अपनी सरकार की नीति और नीयत का देशवासियों के सामने खुलासा कर दिया है कि वो किस हद तक विदेशी ताकतों और बहुराष्ट्रीय कंपनियों के समक्ष नतमस्तक है. ... Full story

नंद नगरी में किन्नरों के सम्मेलन में हुए हादसे में दर्जनभर लोगों की जान चली गई
 

हादसों से सबक नहीं लेते हम

दर्दनाक हादसों से सबक लेने की बजाए शायद हम हादसों को न्योता देने के आदी हो चुके हैं. पिछले एक दशक में देशभर में भगदड़ और सार्वजनिक समारोहों में आग लगने और भगदड़ में जान गंवाने और घायलों का लेखा-जोखा जोड़ा जाए तो आंकड़ा हजारों में बैठेगा. हरिद्वार में शांतिकुंज परिवार द्वारा आयोजित विशाल समारोह में मची भगदड़ में मारे गए श्रद्वालुओं की चिता की आग अभी ठण्डी भी नहीं हुई थी कि पूर्वी दिल्ली के नंद नगरी में आयोजित किन्नर सम्मेलन के दौरान टेंट में लगी आग से मची भगदड़ ने तकरीबन 16 लोगों की अनमोल जिंदगियां उनसे छीन ली और दर्जनों बुरी तरह जख्मी हो गए. ... Full story

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Dr. Ashish Vashisth Dr. Ashish Vashisth डॉ. आशीष वशिष्ठ लखनऊ में रहनेवाले स्वतंत्र पत्रकार हैं. विभिन्न विषयों पर समसामयिक टिप्पणी और लेखन.

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