Awesh Tiwari
आंसूओं के बाजार में आमिर खान का दरबार
आपको निर्मल बाबा भूले नहीं होंगे। निर्मल बाबा का दरबार इसलिए खारिज कर दिया जाता है क्योंकि वे लोगों की भावनाओं का ...
टाइटैनिक का छत्तीसगढ़ कनेक्शन
१५ अप्रैल १९१२ की उस अँधेरी रात में जब टाइटेनिक नार्थ एटलांटिक महासागर में बर्फ के पहाड़ से टकराकर समुद्र की गर्त ...
निर्मल निंदक जो हुए उनकी नहीं है खैर
बाबा को लेकर मीडिया में मचे हडकंप का असर निर्मल दरबार के फेसबुक और ट्विटर एकाउंट पर भी नजर आने लगा है बाबा ने उनके नाम से बनाये गए अनाधिकारिक फेसबुक पेज और nirmalbaba.net.in जैसी कथित तौर पर छद्म कहे जाने वाली वेबसाईट के खिलाफ अदालत की शरण ले ली है। इस बीच बाबा ने अपने पेज पर ऐलान कर दिया है कि सभी प्रकार के टेलीफोनिक और व्यक्तिगत तौर पर मिलने-जुलने के कार्यक्रम को बंद कर दिये गये है। ऐसा नहीं कि मीडिया के इस हड़बोंग में बाबा के अनुयायी चुप बैठे हैं, भारी संख्या में उनके अनुयायियों ने इंडियन ब्राडकास्टिंग फेडरेशन में स्टार न्यूज और जी न्यूज के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई है। कोई उनकी तुलना ईसा से तो कोई भगवान राम से कर रहा है। ... Full story
गाय और सूअर का मांस खायेंगे जेएनयू के छात्र
महिषासुर पूजन और देवी दुर्गा के प्रति अपशब्दों के प्रयोग के बाद जवाहर लाल नेहरु विश्वविद्यालय के कतिपय छात्र संगठनों ने छात्रावासों के मेस में गाय और सूअर के मांस की मांग करके नया विवाद पैदा कर दिया है। छात्र संगठन द न्यू मेटरलिएस्ट माग कर रहा है कि विश्वविद्यालय के सभी छात्रावासों में इस मांसाहार का तात्कालिक इंतजाम किया जाए। इस संगठन के समर्थन में स्टूडेंट्स फॉर रेस्सिटेंस, नागा स्टूडेंट फोरम और ऑल इंडिया बैकवर्ड स्टूडेंट फोरम भी आ गए हैं। ... Full story
लायलपुर का लाल
आज शहीद ए आज़म भगत सिंह सिर्फ भारत में ही नहीं बल्कि पाकिस्तान के लोगों और बुद्धिजीवियों के बीच भी काफी लोकप्रिय हैं। पाकिस्तान में इतिहास आज एक बार फिर से लिखा जा रहा है, उन पर फ़िल्में बनायीं जा रही है, उन पर ड्रामा किया जा रहा है, उनकी स्मृतियों के पिटारे को फिर से खोल दिया गया है। ... Full story
सपा के जीत की साफ वजहें
डॉ राममनोहर लोहिया ने कहा था- एक तो यह दुनिया का शायद सबसे बेरहम युग है, बिल्कुल निर्दयी और दूसरे, अन्याय के खिलाफ जितना यह युग लड़ रहा है, उतना शायद पहले वाला और कोई नहीं लड़ा। एक तरफ निर्दयता में यह सदी बहुत बढ़ी हुई है तो दूसरी तरफ न्याय की इच्छा में भी...। उत्तर प्रदेश भी लड़ा अन्याय के खिलाफ, सत्ता की निर्दयता के खिलाफ, पांच साल पहले २००७ में भी लड़ा था जब मायावती को सत्ता मिली थी और अब २०१२ में भी लड़ा और इस बार उसने मूर्तियों की महारानी को एक बार पुनः अन्तः पुर में भेज दिया है। ... Full story
खनन धसान में पचास मजदूरों के मरने की आशंका
सोनभद्र के बिल्ली मारकुंडी खनन क्षेत्र में सोमवार शाम ट्रांसमिशन लाइन समेत एक पूरे पहाड़ के धसकने से ५० से ज्यादा मजदूरों के मरने की आशंका है। मृतकों में से ज्यादातर झारखण्ड और छत्तीसगढ़ के मजदूर हैं। उक्त पहाड़ में बसपा के कुछ स्थानीय नेता पुलिस की मिली भगत से लंबे समय से अवैध खनन कर रहे थे। ... Full story
सब तख्त उछाले जाएंगे
उत्तर प्रदेश का राजनीतिक धर्म युद्ध है राजनीतिक दलों का कर्म युद्ध भी है। उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनावों के परिणाम न सिर्फ लोकतंत्र की प्रयोगशाला बनते हुए जीर्ण-शीर्ण हो चुके इस राज्य का भविष्य सुनिश्चित करेंगे बल्कि इससे देश की राजनीति की भी दिशा तय होगी। ये चुनाव भाजपा, कांग्रेस बसपा और सपा के लिए ही नहीं उन छोटी बड़ी पार्टियों के लिए भी महत्वपूर्ण है जो अन्य राज्यों में अपने प्रभुत्व को केंद्र की राजनीति में हिस्सेदारी लेकर या देकर भुना रही हैं। ... Full story
अभिव्यक्ति की आजादी पर लगा तकनीकि का ताला
लीजिए अब अपना माथा पीटिये। अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को सीमाओं में बाँधने की तैयारी पूरी हो गयी है। गूगल अब अपनी ब्लॉगस्पाट साइट्स को देशों की स्वीकृति और अस्वीकृति के आधार पर ब्लाक करने की तैयारी कर चुका है। यानि की अगर कोई ब्लॉग किसी देश की सरकार को आपत्तिजनक लगता है तो वो गूगल से उसको अपने देश में प्रतिबंधित करने की मांग कर सकता है। मुमकिन है अगले कुछ दिनों में ये प्रणाली काम करने लगेगी। फिलहाल जिन तीन देशों में ये लागू होने जा रहा है उनमे भारत के अलावा आस्ट्रेलिया और न्यूजीलेंड शामिल हैं। ... Full story
माया के सरदार का काला कारोबार
आप इसे मायावती की आर्थिक सत्ता का पतन कह सकते हैं। उत्तर प्रदेश में पोंटी चड्ढा के ठिकानों पर इनकम टेक्स के छापे बसपा के लिए अब तक का सबसे बड़ा नुकसान साबित होने जा रहा है। उत्तर प्रदेश के सियासी हलकों में ही नहीं आम आदमी भी इस बात से परिचित था कि मायावती ने मुख्यमंत्री बनते ही प्रदेश की सारी आर्थिक सत्ता पोंटी चड्ढा और जेपी ग्रुप में बाँट दी थी। सारे नियम कायदों को ताक पर रख कर न सिर्फ सरकारी ठेके पोंटी के नाम कर दिए गए बल्कि कई जनपदों में राजस्व के साथ -साथ होने वाली अविअध वसूली का ठेका भी पोंटी को दे दिया। सिर्फ इतना ही नहीं पोंटी ही वो आदमी था जिसने बाबूसिंह कुशवाहा जैसे नेताओं के पैर के नीचे की जमीन छीन ली। ... Full story
