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Feb

02

2016

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रोहित वेमुला की आत्महत्या और समाज का दोहरापन

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रोहित वेमुला की आत्महत्या और समाज का दोहरापन

उसका यह अकेलापन बहुत ही शर्मनाक है, क्योंकि रोहित वेमुला पिछले दस दिनों से अपने चार अन्य साथियों के साथ खुले आसमान के नीचे सो रहा था, क्योंकि हैदराबाद विश्वविद्यालय की कार्य परिषद् एक प्रस्ताव पास कर उनने हॉस्टल से निकाल दिया था. और इन पाँचों छात्रों का प्रवेश विश्वविद्यालय के हर सार्वजनिक स्थान पर प्रतिबंधित कर दिया गया था. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आर.एस.एस.) व भारतीय जनता पार्टी का छात्र संगठन अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के कार्यकर्ताओं से मारपीट करने का आरोप था. यह सूचना उसके कुछ साथियों ने सोशल साईट पर भी डाली थी. आखिर कहां गये वे सब संगठन जो दलितों आदिवासियों और अल्पसंख्यक लोगों के नाम पर चलते हैं. यह चुप्पी और भी खतरनाक है, आखिर कोई छात्र, शोधार्थी और शिक्षक क्यों लड़ेगा समाज के लिए? आखिर कौन बोलेगा और कौन लड़ेगा? जब लोग चुप रहेंगे?

हैदराबाद केंद्रीय विश्वविद्यालय का दलित छात्र संगठन अम्बेडकर स्टूडेंटस एसोसिएशन, जब उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरपुर नगर जिले के दंगों पर बनी फिल्म “मुजफ्फरपुर अभी बाक़ी” के दिखाये जाने को लेकर प्रतिबद्ध थी, तो भी हैदराबाद विश्वविद्यालय के मुस्लिम छात्रों और हैदराबाद शहर के मुस्लिम संगठनों ने उनका कोई साथ नहीं दिया. फिर अम्बेडकर स्टूडेंटस एसोसिएशन और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आर.एस.एस.) व

Feb

02

2016

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क्या बहुसंख्यक के वर्चस्व से जनतंत्र खत्म हो रहा है?

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क्या बहुसंख्यक के वर्चस्व से जनतंत्र खत्म हो रहा है?

यह धारा पॅूजीवाद की तरफ तो बहुत तेजी से बढ़ रही है किन्तु साथ ही बहुसंख्यक तुष्टिकरण की दिशा में भी थोड़ा थोड़ा सरक रही है। राजेश जोशी जी पिछली सरकार की उपज हैं। यह बात निर्विवाद है कि राजनेताओं ने अपने अधिकांश चरणों और भाटों को साहित्यकार, कवि,नाटककार आदि सिद्ध करके उन्हें सम्मानित किया। उन्हें अनेक पुरस्कार भी दिये। ऐसे पुरस्कार प्राप्त लोगों में कुछ योग्य लोग भी पुरस्कार पाये होंगे। अब सरकार बदली है और वह अपने चारणों भाटों को पुरस्कृत कर रही है। तो पिछले चारणों को बहुत कष्ट हो रहा है जो नहीं होना चाहिए। कुछ लोगों ने तो उचित समझकर अपने पुरस्कार वापस भी किये है। किन्तु अनेक लोग अब भी ऐसे गलत पुरस्कारों को अपने पास रखे हुए है। मैं नही कह सकता कि राजेश जी की क्या स्थिति है।

सुना है कि भारतीय संविधान में धर्म-निरपेक्षता और समाजवाद शब्द बाद में जोड़े गये जो स्वतंत्रता के प्रारंभ से संविधान के भाग नहीं। मेरी जानकारी के अनुसार जनतंत्र की वास्तविक परिभाषा मात्र यह है कि उस देश मे व्यक्ति को मौलिक अधिकार प्राप्त होते है। ये अधिकार भी चार ही होते हैं-1. जीने की स्वतंत्रता 2. अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता 3. सम्पत्ति 4. स्वनिर्णय।

Jan

31

2016

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दहेज तो नहीं मांगा, लेकिन अब मौत मांग रहे हैं दीनदयाल

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दहेज तो नहीं मांगा, लेकिन अब मौत मांग रहे हैं दीनदयाल

दीनदयाल शर्मा दिल्ली के यमुना विहार कालोनी में रहते हैं। 2003 में अपने एयरफोर्स अधिकारी बेटे की शादी एक फौजी की बेटी से किया था। बहू आयी। रानी बनकर रही। एक बेटा भी हुआ। छह साल कब बीत गये किसी को पता न चला। फिर छह साल बाद अचानक से बहू घर छोड़कर मायके चली गयी। इसके बाद वही हुआ जो आमतौर पर एक सामान्य हिन्दू परिवार का सबसे बड़ा डर बन गया है। बहू ने 2012 में दहेज उत्पीड़न का केस दर्ज करा दिया और बीते तीन सालों से अब उनकी अपनी बहू और पोते से कोर्ट में ही मुलाकात होती है।

दीनदयाल कह रहे हैं कि जब छह साल दहेज नहीं मांगा तो छठे साल में ऐसा क्या हो गया कि बहू ने दहेज उत्पीड़न का मामला दर्ज करा दिया? दीनदयाल के मुताबिक बहू ने मांग रखी थी कि घर उसके नाम कर दिया जाए जिसे सास ससुर ने नहीं माना। हो सकता है बेटे ने बीबी का साथ देने की बजाय अपने मां बाप का साथ दिया और बात बिगड़ गयी। बहू मायके चली गयी। तकरार बढ़ती चली गयी और मामला अदालत में उलझ गया है। किसी सत्तर साल के बुजुर्ग के लिए रोज रोज कोर्ट

Dec

28

2015

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वीवीआईपी विमान के नाम पर फिजूलखर्ची

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वीवीआईपी विमान के नाम पर फिजूलखर्ची

इन तीनों पदों पर बैठे लोगों के परिवहन के आधुनिकीकरण पर बीते डेढ़ दशक में पानी की तरह पैसा बहाया गया है। एम्बेसडर, कन्टेसा और सफारी गाड़ियों को हटाकर हाईएन्ड बीएमडब्लू, मर्सीडीज की गाड़ियों को काफिले में शामिल किया गया है। सब बख्तरबंद हैं और किसी आपातस्थिति में वीवीआईपी को सुरक्षित रखने का भरोसा देती हैं। इनके टायरों में आग नहीं लगती, इनके तेल टैंक तक फायर प्रूफ हैं तथा रासायनिक हथियारों के हमले से भी वीवीआईपी को बचाने का भरोसा देती हैं।

इसी तरह हवाई सेवा का भी आधुनिकीकरण करते हुए तीन नये बोइंग बिजनेस जेट 737-800 को शामिल किया गया। इनमें से हर एक विमान की कीमत 950 करोड़ रुपये है। ये विमान हमले की स्थिति में सेल्फ डिफेन्स सिस्टम से लैस हैं। बोइंग ने ये बिजनेस जेट दुनिया के वीवीआईपी लोगों को ध्यान में रखकर ही बनाये हैं जिसमें एक वीवीआईपी की सुरक्षा और सुविधा का पूरा ध्यान रखा गया है। कांफ्रेस एरिया, बेडरुम, शॉवर, मिनी आफिस और सेटेलाइट फोन की सुविधा इन बिजनेस जेट में होती है। इन सबसे बड़ी खूबी यह कि ये बिजनेस जेट नॉन स्टॉप 17 हजार किलोमीटर तक उड़ान भर सकते हैं। अटल बिहारी वाजपेयी सरकार में इन्हीं सारे पहलुओं

Dec

28

2015

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सत्ता के नारदमोह में फंसी अरविन्द की नैतिकता

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सत्ता के नारदमोह में फंसी अरविन्द की नैतिकता

इसका अर्थ हुआ कि ईमानदार और अच्छे लोग विभिन्न गुटो मे विभाजित हो जाते है और चालाक लोग ऐसे विभाजन का लाभ उठाते हैं। मै उचित समझता हॅू कि मेरे जैसे लोग ऐसे सत्ता के नारदमोह मे पडे लोगो को आइना दिखाने का काम करें। मै अरविन्द केजरीवाल के भविष्य के विषय मे कुछ कहना उचित नही समझता। क्योकि भारत मे तो कभी भी कुछ भी उल्टा सीधा होना संभव है। मुझे पता है कि चरण सिंह सरीखे इमानदार और चरित्रवान के नारदमोह ने इंदिरा गांधी की पुनः वापसी का मार्ग प्रशस्त किया था। चंद्र शेखर जी के नारदमोह का भी परिणाम हम देख चुके है। इसलिये कब क्या हो जायेगा यह नही पता। किन्तु क्या होना चाहिये इतना ही मै कह सकता हॅू।

मैं लम्बे समय से यह मानता रहा हॅू, बल्कि गर्व करता रहा हॅू, कि मैं किसी व्यक्ति के गुण अवगुण की पहचान अन्य लोगों की अपेक्षा जल्दी और निश्चित रुप से कर पाता हॅू। मैं यह भी मानता रहा हॅू कि मैं आसानी से ठगा नहीं जाता। पाॅच सात वर्ष पूर्व ही मैंने तेरह ऐसे लोगों की सूची प्रकाशित की थी जिन्हें मैं अच्छे राजनीतिज्ञ मानता था। साथ ही मैंने तेरह ऐसे लोगों की भी सूची

Dec

28

2015

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दुनिया के आइने में इस्लाम

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दुनिया के आइने में इस्लाम

नाइजीरिया अफ्रीका की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है। इस देश में बोको हराम नाम का अतिवादी इस्लामी संगठन सक्रिय है। इसका घोषित लक्ष्य शरिया का राज्य स्थापित करना है। ये संगठन अल-क़ायदा से प्रेरणा प्राप्त करता है। इसके लोग 2001 से 2013 तक 10,000 लोगों की हत्यायें कर चुके हैं। ये संगठन 10-12 साल के बच्चों तक को अपने सैनिक बनाने के लिए कुख्यात है। स्कूलों, चर्चों, पुलिस स्टेशनों, राज्य की व्यवस्था के केन्द्रों पर हमला करता है, युवा महिलाओं और युवतियों का अपहरण कर उन्हें इस्लाम कबूल करने पर मजबूर करता है। कुछ युवतियों से बोको हराम के लड़ाके शादी कर लेते हैं और कई महिलाओं को यौन बंधक बनाकर रखते हैं। सेना ने हज़ारों महिलाओं को भी बोको हराम की क़ैद से मुक्त कराया। जिन महिलाओं को रिहा कराया गया, उनमें से सैकड़ों गर्भवती हैं। संयुक्त राष्ट्र पॉपुलेशन फंड (यूएनएफपीए) नाइजीरिया के एक्जीक्यूटिव डायरेक्टर बाबाटुंडे ओशोटिमेहिन ने बताया है कि, "इनमें से ज्यादातर की मेडिकल जांच की जा रही है ताकि एचआईवी और एड्स समेत दूसरी बीमारियों का पता लग सके''। 29 मई 2015 से राष्ट्रपति बने सख़्त प्रशासक मुहम्मदू बुहारी नाइजीरिया की सेना के प्रमुख रह चुके हैं। मुहम्मदू बुहारी के आने के बाद से बोको हराम की

Dec

18

2015

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अम्‍बेडकरवादी आंदोलन का अंर्तद्वंद

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अम्‍बेडकरवादी आंदोलन का अंर्तद्वंद

जाति उन्‍मूलन आंदोलन मूलत: एक गैर-राजनीतिक संगठन है। इसके संस्‍थापक ये आहवान करते है की सभी अंम्‍बेडकरवादी, समतावादी, प्रगतिशील व्‍यक्ति एवं संगठन जो जाति उन्‍मूलन चाहते है वे इस आंदोलन के सहभागी बने, क्‍योकि ये केवल राजनीतिक जरूरत नही बल्कि वर्तमान समय की जरूरत भी है।

रा‍ष्ट्रीय परिप्रेक्षय में भी देखे तो जाति व्‍यवस्‍था एक भयंकर समस्‍या के रूप में खड़ी दिखती है जो भारत के विकास, उत्‍थान के लिए एक बाधा है। ये भारत की सामाजिक एकता में बाधाकार्ता तो है ही, साथ साथ आपसी कटुता बढ़ाने का भी एक साधन है। आजकल राजनीतिक दल ऐसी कटुता को हवा देकर मतो का धुवीकरण करते है।

रायपुर छत्‍तीसगढ. में जाति उन्‍मूलन आंदोलन के तृतीय अखिल भारतीय सम्‍मेलन का आयोजन किया गया। ग़ौरतलब है की जाति उन्‍मूल
लन की रायपुर इकाई का बागडोर अम्‍बेडकर वादियों ने थामा हुआ है। और वे मुस्‍तैदी से इस मुहिम को आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबध्‍द है। दरअसल इस सम्‍मेलन के बाद कुछ अम्‍बेडकर वादियों के बीच बहस चल पड़ी है। वे कहते है की यह कम्‍युनिष्‍टो का एक छल है। कम्‍युनिष्‍ट अब हांसिये पर है और वे अम्‍बेडकर और जाति के मुद्दे को भुनाना चाहते है। जाति उन्मूलन जैसे मुद्दों को उठाकर पीडि़त

Dec

04

2015

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के पी ओली की झोली में क्या है?

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के पी ओली की झोली में क्या है?

हमारे पी.एम ओली के जादुई झोली में उखानों का पिटारा है। जिसे सुना कर वह जनता और अपनी पार्टी के कार्यकर्ताओं का मन भरमाते हैं। कार्यक्रम में उपस्थित पत्रकार भी अपना फोकट में मनोरंजन कर लेते हैं। जैसे तैसे तिकड़म कर के प्रधानमंत्री हो बन जाना और उस के लिए पात्रता रखना दो अलग, अलग बातें हैं। अनेक तिकड़मबाजी कर के ओली पी.एम.तो बन गए पर सत्ता चलाने की खूबी उनमें रत्ती भर भी नहीं हैं। इसीलिए तो राजधानी की एलिट क्लास जनता को श्वेतपत्र जारी कर के अपना कालिख भरा चेहरा छुपा रहे हैं और मधेश की जनता को गोली बांट रहे हैं।

पी.एम ओली से किसी को समस्या समाधान की कोई उम्मीद नहीं है। जब विगत में मारने काटने और लड़ाई करने वाले ही देश के भाग्यविधाता बन बैठे हैं। तब देश में बन्दुक की गोली चलेगी और खून की होली ही बहेगी। २००८ साल में झापा कांड के मुखिया इस देश के पी.एम.और माओवादी जनयुद्ध में १७ हजार नेपाल की जनता को मारने वाले ही जब सिहंद्वार पर काबिज हो देश हांक रहे हैं तो? जनता बेचारी “अब तेरा क्या होगा कालिया” के तर्ज पर सहमी बैठी हुई है।

राष्ट्रवाद कोई परफ्यूम वा बेहोश करने

Dec

03

2015

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भारतीय विदेश नीति की अग्नि परीक्षा

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भारतीय विदेश नीति की अग्नि परीक्षा

भारत सहित एशिया व अफ्रीका के अनेक देशों में भी हलचल उठनी शुरु हो गयी थी। ऐसे में अमेरिका द्वारा अपनी वर्चस्वता बरकरार रखने हेतु कुछ न कुछ जवाबी कदम उठाने जरूरी हो गये और जब फ्रांस में 13/11 को आईएसआईएस के द्वारा आतंकी हमले किये गये तो कूटनीतिज्ञों व अन्तर्राष्ट्रीय राजनीति के जानकारों को समझ आ चुका था कि अमेरिका अपने सहयोगी फ्रांस व कठपुतली आईएसआईएस की मदद से अपनी चाल चल चुका है। अब पूरी दुनिया में इस्लामी आतंकवाद के विरूद्ध एक जनमत सा खड़ा हो गया है और पिट्ठू मीडिया नित नये दृष्टांत गढ़ अमेरिका-फ्रांस-यूके के नेतृत्व में नाटो देशों के सारे खेल जो अरब देशों में खेले गये, को जायज ठहराता जा रहा है और रुसी खेमे की स्थिति फिलहाल रक्षात्मक हो गयी है। जी-20 सम्मेलन में भी पुतिन को सीरियाई राष्ट्रपति असद का साथ न देने व अमेरिका के साथ मिलकर आईएस को तबाह करने का दबाव डाला गया जोकि निश्चित रूप से रूस नहीं मानने वाला। अन्तर्राष्ट्रीय परिस्थितियां जिस तेजी से बदल रही हंै वे एक बड़े मानवीय संघर्ष की तरफ बढऩे का ईशारा कर रही हैं। फिलहाल ये छठी सदी से चल रहे इस्लाम व ईसाईयत के संघर्ष के उग्र होने के रूप

Nov

30

2015

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कितनी करवट लेगी काशी?

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कितनी करवट लेगी काशी?

दरअसल, लगातार चौंकानेवाले चुनाव नतीजे जनता की उस विवशता का प्रतीक हैं जो काफी बेचैनी से किसी वैकल्पिक राजनीति की तलाश कर रही है। इस तलाश में उसे जब वंशवाद में खोट नजर आता है तो कांग्रेस को बदलकर वंश-परिवार से दूर-दूर रहनेवाले नरेंद्र मोदी में अपना भाग्यविधाता खोजने लगती है तो नया चेहरा मिलते ही अरविदं केजरीवाल जैसे गैर-राजनीतिक को माथे से लगा लेती है और भगवा आडंबरों में फिर से ब्राह्मणवाद का खतरा महसूस कर सामाजिक न्याय के नाम पर 'जातिवादी-परिवारवादी' लालू यादव को अपना 'चाणक्य' बनने का अवसर भी दे देती है। यह जनता का धैर्य है जो लगातार ठगे जाने के बावजूद राजनीतिक पार्टियों को अपनी गलती सुधारने का अवसर दे रही है। जनता चुके हुए खोटे सिक्कों को घिस-घिसकर बार-बार इस उम्मीद में चला रही है कि शायद इसबार वह चल जाए और यह पार्टियों की हिमाकत है जो अपने मुगालते में बार-बार उस अवसर को गंवाने में कोई संकोच नहीं कर रही। संध-भाजपा के कर्ताधर्ता तो 2014 में मिले अवसर को करीब-करीब गंवाने की कगार पर आ चुके हैं, 2015 में मिले अवसर का महागठबंधन क्या करेगा, इसकी गणना भी 20 नवंबर को पटना के गांधी मैदान में आयोजित नीतीश कुमार कैबिनेट के शपथ

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Seetaram Yechuri

Seetaram Yechuri

हैदराबाद के ब्राह्मण कुल में पैदा हुए सीताराम येचुरी भारत में कम्युनिस्ट आंदोलन के कुछ चेहरों में एक बन गये हैं. सेंट स्टीफेन और जेएनयू से शिक्षा. 1974 में एसएफआई में सक्रिय और बाद में सीपीआईएम से जुड़े. 1984 में सीपीआई सेन्ट्रल कमेटी में शामिल हुए. वर्तमान में सीपीआई (एम) पोलित ब्यूरो के मेम्बर और ऐसे सक्रिय राजनीतिज्ञ जिनसे मिलने की तमन्ना बराक ओबामा भी रखते हों.
Rajiv Yadav

Rajiv Yadav

इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक राजीव दिल्ली स्थित आईआईएमसी से मीडिया में मास्टर डिग्री ले चुके हैं. फिलहाल इलाहाबाद में रहकर मुक्त पत्रकारिता और जनाधिकार के मुद्दों पर सक्रिय कार्य कर रहे हैं. विस्फोट पर लेखन.
Ashok Wankhade

Ashok Wankhade

यवतमाल में पैदा हुए अशोक वानखेडे पढ़ने के लिए इंदौर आये तो पत्रकारिता का कैरियर साथ में लेकर इंदौर से बाहर निकले. फ्री प्रेस जर्नल से पत्रकारिता शुरू करनेवाले अशोक वानखेडे चौथा संसार में काम करने दिल्ली आये तो यहीं के होकर रह गये. करीब पचीस साल के अपने पत्रकारीय कैरियर में अंग्रेजी, हिन्दी और मराठी तीनों भाषाओं के लिए काम किया है. इलेक्ट्रानिक का जमाना आया तो विडियो जर्नलिज्म में भी हाथ आजमाया. अब एक अखबार के राजनीतिक संपादक होने के साथ साथ नये मीडिया को नारा-ए-मस्ताना बनाना चाहते हैं.
Dr. Ashish Vashisth

Dr. Ashish Vashisth

डॉ. आशीष वशिष्ठ लखनऊ में रहनेवाले स्वतंत्र पत्रकार हैं. विभिन्न विषयों पर समसामयिक टिप्पणी और लेखन.
Harsh Vardhan

Harsh Vardhan

हर्षवर्धन टीवी पत्रकार हैं. अमर उजाला में लंबे समय तक काम करने के बाद सीएनबीसी आवाज में काम किया. इस वक्त पी7न्यूज में कार्यरत। बतंगड़ नाम से नियमित ब्लाग भी लिखनेवाले हर्षवर्धन राजनीतिक विश्लेषक के तौर पर स्थापित हैं.
Vinod Upadhyay

Vinod Upadhyay

मूलत: बक्सर बिहार के रहनेवाले विनोद उपाध्याय भोपाल में रहकर पत्रकारिता करते हैं. दैनिक राष्ट्रीय हिन्दी मेल से पत्रकारिता में प्रवेश. वर्तमान में भोपाल से ही प्रकाशित होनेवाले दैनिक अग्निबाण से जुड़े हुए हैं.
Arvind Tripathi

Arvind Tripathi

अरविन्द त्रिपाठी देश के कई बड़े समाचार पत्रों व पत्रिकाओं में काम करने के बाद वर्तमान में दिल्ली से प्रकाशित हो रही "सामना" हिंदी पत्रिका में उत्तर प्रदेश से विशेष संवाददाता के पद पर कार्यरत हैं. साथ ही पानी और पर्यावरण के मुद्दे पर राजेन्द्र सिंह के साथ काम कर रहे हैं.
Sanjeet Tripathi

Sanjeet Tripathi

रायपुर के रहनेवाले संजीत त्रिपाठी वैसे तो प्रिंट मीडिया के लिए ही काम करते हैं लेकिन प्रिंट से ज्यादा आनलाइन मीडिया में सक्रियता. ब्लाग लिखने से लेकर फेसबुक सक्रियता तक संजीत सब जगह नजर आते हैं. आवारा बंजारा नाम से ब्लाग लेखन करनेवाले संजीत फिलहाल रायपुर में एक अखबार के साथ काम कर रहे हैं.
Anushikha Tripathi

Anushikha Tripathi

भोपाल में ही पढ़ाई लिखाई और अब भोपाल में ही रहकर पत्रकारिता. माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय से 2011 में पत्रकारिता की डिग्री.
Awesh Tiwari

Awesh Tiwari

मेरे लिए खबरें सिर्फ सूचनाओं को कलमबंद करने का जरिया नहीं है ,ये जरुरी है कि जिनके लिए भी हम खबरें लिख रहे हैं उनको उन ख़बरों से कुछ मिले |पिछले एक दशक से उत्तर भारत के सोन-बिहार -झारखण्ड क्षेत्र में आदिवासी किसानों की बुनियादी समस्याओं ,नक्सलवाद ,विस्थापन ,प्रदूषण और असंतुलित औद्योगीकरण को लेकर की गयी अब तक की रिपोर्टिंग में हमने अपने इस सिद्धांत को जीने की कोशिश की है।
Anshuman Tiwari

Anshuman Tiwari

मूलत: उत्तर प्रदेश के रहनेवाले अंशुमान तिवारी ने आर्थिक पत्रकारिता को हिन्दी में बहुत शुरूआती दौर से देखा समझा है. अमर उजाला कारोबार के लिए काम किया और बाद में दैनिक जागरण समूह से जुड़े. वर्तमान में दैनिक जागरण के ब्यूरो चीफ हैं. इसके साथ ही अर्थार्थ नाम से ब्लाग भी लिखते हैं.
Sanjay Tiwari

Sanjay Tiwari

आप जहां तक सोच सकते हैं इंटरनेट आपको वहां तक काम करने का मौका देता है. अभी तक मानव सभ्यता ने जितने भी मीडिया माध्यमों का उपयोग किया है यह उन सबमें अनूठा, प्रभावी और सर्वगुण संपन्न है. सूचना लेने देने के तीन माध्यमों दृश्य, श्रवण और पाठ को एक ही धागे में लपेटे नया मीडिया उत्पादन और पहुंच दोनों के लिहाज से सर्वश्रेष्ठ है. ऐसे नये मीडिया का जनहित के लिए भरपूर उपयोग हो, विस्फोट.कॉम उसी दिशा में उठा एक कदम है. visfot@visfot.com
Arun Tiwari

Arun Tiwari

अरुण तिवारी दिल्ली में रहने वाले स्वतंत्र लेखक हैं।
Sanjay Swadesh

Sanjay Swadesh

किरोडीमल कॉलेज स्नातकोत्तर के बाद केंद्रीय हिंदी संस्थान दिल्ली से पत्रकारिता में डिप्लोमा। दैनिक हिंदुस्तान, नवभारत टाईम्स, सहारा समय, दैनिक भास्कर में काम. कई पत्र-पत्रिकाओं में स्वतंत्र लेखन के साथ स्थानीय जनअभियानों से जुड़े हैं।
Naresh Sirohi

Naresh Sirohi

महैन्द्र सिंह टिकैत की टीम में शामिल होकर पश्चिमी उत्तर प्रदेश में किसान आंदोलन से अपना सार्वजनिक जीवन शुरू करनेवाले नरेश सिरोही अभी भी मूल रूप से किसान आंदोलन से ही जुड़े हुए हैं। स्वदेशी आंदोलन में सक्रियता। संप्रति भाजपा किसान मोर्चा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष।
Rakesh Sinha

Rakesh Sinha

अकादमिक पृष्ठभूमि से ताल्लुक रखनेवाले प्रो. राकेश सिन्हा संघ विचारधारा के बीच सक्रिय समानतावादी विचारक हैं. राकेश सिन्हा हिन्दुत्व की प्रखर धारा के पैरोकार हैं. लेकिन ऐसा करने के लिए वे हिंसक विवाद की बजाय अहिसक "संवाद" को अपना जरिया बनाते हैं. इंडिया पॉलिसी फाउण्डेशन के मानद निदेशक के रूप में शोध, अध्ययन और संवाद को आगे बढ़ा रहे हैं.
Virender Singh Chauhan

Virender Singh Chauhan

वीरेंद्र सिंह चौहान एक दशक से अधिक समय तक हिंदी पत्रकारिता की मुख्यधारा से जुड़े रहे. दैनिक दिव्य हिमाचल में बतौर उप संपादक और बाद में अमर उजाला और दैनिक ट्रिब्यून में स्टाफ रिपोर्टर के नाते कार्य किया. इस दौरान हरियाणा यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट्स के प्रदेश अध्यक्ष. सितम्बर 2007 से पत्रकारिता के शिक्षण में. सम्प्रति चौधरी देवी लाल विश्वविद्यालय, सिरसा के पत्रकारिता व जनसंचार विभाग में एसोसिएट प्रोफेसर और विभागाध्यक्ष.
S N Singh

S N Singh

शेष नारायण सिंह मूलतः इतिहास के विद्यार्थी हैं. शुरू में इतिहास के शिक्षक रहे. .बाद में पत्रकारिता की दुनिया में आये...प्रिंट, रेडियो और टेलिविज़न में काम किया. इन्होने १९२० से १९४७ तक की महात्मा गाँधी की जीवनी के उस पहलू पर काम किया है जिसमें वे एक महान कम्युनिकेटर के रूप में देखे जाते हैं..1992 से अब तक तेज़ी से बदल रहे राजनीतिक व्यवहार पर अध्ययन करने के साथ साथ विभिन्न मीडिया संस्थानों में नौकरी की. अब मुख्य रूप से लिखने पढने के काम में लगे हैं. एक अखबार में काम और विस्फोट.कॉम के सम्मानित स्तंभलेखक.
Rajesh Singh

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मुंबई में रहनेवाले राजेश सिंह मानवाधिकार कार्यकर्ता और पत्रकार हैं. वर्तमान समय में नागरिक विकल्प नामक पत्रिका का संपादन और मानवाधिकार संस्था का संचालन.
SATISH SINGH

SATISH SINGH

सतीश सिंह वर्तमान में भारतीय स्टेट बैंक में एक अधिकारी के रूप में पटना में कार्यरत हैं और विगत तीन वर्षों से स्वतंत्र लेखन कर रहे हैं। भारतीय जनसंचार संस्थान से सत्र 1994-95 में (हिन्दी पत्रकारिता में) स्नात्कोतर डिप्लोमा करने के बाद 1995 से जून 2000 तक मुख्यधारा की पत्रकारिता में इनकी सक्रिय भागीदारी रही है।
Abhishek Singh

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अभिषेक रंजन सिंह ने 2007-08 में नई दिल्ली के भारतीय जनसंचार संस्थान से पत्रकारिता की पढ़ाई पूरी की। करियर की शुरूआत सकाल मीडिया गुप्र से किया। इन दिनों दक्षिण एशिया की प्रमुख ब्रॉडकास्ट एजेंसी सीवीबी न्यूज सर्विस में कार्यरत हैं। इसके अलावा विस्फोट सहित देश के प्रमुख हिंदी समाचार पत्र और पत्रिकाओं में समसामयिक मुद्दों पर नियमित लेखन कर रहे हैं।
SANDEEP SINGH

SANDEEP SINGH

सजग युवा पत्रकार व गांधीनगर में रहकर गुजरात केंद्रीय विश्वविद्यालय में शोधरत, सिनेमा व रंगमंच को लेकर विशेष हस्तक्षेप, सामाजिक व राजनीतिक मुद्दों पर खास नजर, विभिन्न अखबारों, पत्र-पत्रिकाओं व वेब पोर्टलों के लिये स्वतंत्र लेखन.
Pranay vikram  Singh

Pranay vikram Singh

श्रमजीवी पत्रकार प्रणव विक्रम सिंह सामाजिक, राजनीतिक और आर्थिक मुद्दों पर पिछले कई सालों से लेखन कर रहे हैं.
Dhananjay Singh

Dhananjay Singh

सिमटते सिमटते कुल परिचय इतना ही शेष रह गया है कि फिलहाल घुमक्कड़ी, सधुक्कड़ी और हाथ में कलम की लकड़ी। गाजीपुर से काशी हिन्दू विश्वविद्यालय होते हुए देहरादून तक पहुंचे हैं। काम काज बहुत किया अब लिखकर अकाज करते हैं।
A N Sibli

A N Sibli

1993 से हिन्दी, उर्दू और अंग्रेजी के विभिन्न राष्ट्रीय अखबारों और पत्रिकाओं में लेखन कर रहे अब्दुल नूर सिबली इस वक्त दिल्ली से प्रकाशित हिन्दुस्तान एक्सप्रेस में बतौर ब्यूरो चीफ कार्यरत हैं. विभिन्न वेबसाइटों पर नियमित लेखन.
Prem Shukla

Prem Shukla

मुंबई से प्रकाशित हिन्दी सामना के कार्यकारी संपादक. पिछले 20 सालों से पत्रकारिता. पत्रकारिता के साथ ही मुबंई में हिन्दीभाषी समाज के विभिन्न सांस्कृतिक और सामाजिक गतिविधियों में भी सक्रिय. विस्फोट.कॉम के नियमित स्तंभ लेखक.
Puja Shukla

Puja Shukla

पेश से टीवी पत्रकार पूजा शुक्ला धाकड़ लिक्खाड़ हैं. घर परिवार की जिम्मेदारी और टीवी पत्रकारिता के साथ साथ कलम को तलवार की तरह इस्तेमाल करती हैं. दिल्ली युनिवर्सिटी से पढ़ी लिखी पूजा दिल्ली में ही रहती है.
Rajesh Shukla

Rajesh Shukla

राजेश शुक्ला तो बस राजेश शुक्ला है. कला की समीक्षा के अलावा समाज और राजनीति की भी कलात्मक समीक्षा करने में महारत. मीडिया की मजूरी और कलम की गुलामी के अलावा दुनिया में फक्कड़ी ही पसंद आती है.
Abhishek Shrivastav

Abhishek Shrivastav

अभिषेक श्रीवास्तव के परिचय वाला पन्ना आमतौर पर खाली ही रहता है। खुद अपना कुछ पता नहीं। कोई परिचय नहीं। लेकिन हाथ में कलम और एक अदद कैमरा पकड़ लें तो बहुत सारी छुपी अक्सों को परिचय दे देते हैं। संघर्ष जिन्दगी का संघर्ष नहीं, बल्कि जीने का फलसफा है। स्वतंत्र पत्रकार तो हैं ही।
Arvind Shesh

Arvind Shesh

नास्तिकता और नौकरी दोनों साथ साथ। घोषित तौर पर। बिना किसी हिचक के। परिचय के नाम पर सिर्फ इतना कि जनसत्ता में नौकरी। लेकिन काम के नाम पर बहुत कुछ। खासकर लेखन के क्षेत्र में। मुद्दों को कविता और कहानी की शक्ल तो दे ही देते हैं, कभी कभी कविता और कहानी को भी मुद्दा बना देते हैं। दिल्ली में डेरा, बाकी सब तरफ कलम का घेरा।