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Nov

21

2014

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मोमिन मुसलमीन

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मोमिन मुसलमीन

राजनैतिक रणनीतियां
पाकिस्तान में बसने रत छोड़ने से पहले,मौलाना मौदूदी ने कहा था कि यदि भारत के मुसलमान अपने अधिकारों पर जोर देंगे तो उनके प्रति हिन्दुओं का पूर्वाग्रह बढ़ेगा। अतः, उनकी यह सलाह थी कि मुसलमानों को सरकार और प्रशासन से दूर ही रहना चाहिए ताकि हिन्दू राष्ट्रवादी आश्वस्त रहें कि उनके मुकाबिल मुस्लिम राष्ट्रवादी ताकतें लामबंद नहीं हो रही हैं। मौलाना के अनुसार, यही वह एकमात्र रास्ता था जिसके जरिए मुसलमान, इस्लाम के संबंध में बहुसंख्यक समुदाय के पूर्वाग्रहों को दूर करने में सफल हो सकते थे। साम्प्रदायिक राष्ट्रवादियों की दृष्टि में समाज में या तो किसी सम्प्रदाय का वर्चस्व हो सकता है या वह पराधीन हो सकता है। उन्हें बीच का यह रास्ता दिखता ही नहीं है कि दो समुदायों के सदस्य,मिलजुलकर,शांतिपूर्वक रह भी सकते हैं। यही समस्या मौलाना मौदूदी के साथ थी। मौलाना मौदूदी के पाकिस्तान जाने के बाद, उनके द्वारा स्थापित जमायते इस्लामी ने चुनावी राजनीति में भाग नहीं लिया। परंतु मौलाना की सलाह उन मुसलमानों के लिए किसी काम की नहीं थी जो कि अपनी रोजाना की जिंदगी की जरूरतों को पूरा करने की जद्दोजहद में लगे हुए थे।
देवबंदी उलेमाओं के संगठन जमायत उलेमा.ए.हिन्द ने हमेशा पाकिस्तान का विरोध किया। जमात ने

Nov

21

2014

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ऑनलाइन कारोबार में सुधार की दरकार

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ऑनलाइन कारोबार में सुधार की दरकार

नाकाम हुए स्नैपडील और एमेजॉन इंडिया के मंसूबे: 
इस बार खुदरा बिक्रेताओं के दबाव में स्नैपडील और एमेजॉन इंडिया साकार नहीं हो सका। दबाव में दोनों कंपनियों को सोच-समझकर छूट की पेशकश करनी पड़ी, क्योंकि एलजी, सैमसंग, वीडियोकॉन, सोनी, पैनासोनिक आदि उपभोक्ता टिकाऊ कंपनियों ने अपने व्यापार साझेदारों को आगाह किया था कि भारी छूट के साथ बेचे गये उत्पादों पर सर्विस  और वारंटी की सुविधा नहीं दी जायेगी। इन कंपनियों के ऐसे रुख के कारण छोटे डीलरों के जरिये की जाने वाली बिक्री में गिरावट दर्ज की गई, क्योंकि वे मामूली मार्जिन पर उत्पादों को ऑनलाइन बाजार में पहुँचा रहे थे। प्रमुख उपभोक्ता टिकाऊ कंपनियों ने इस संबंध में ऑनलाइन कंपनियों से भी बात की, ताकि मूल्य के निर्धारण उनके मन मुताबिक हो, जिसके कारण दोनों कंपनियों ने मूल्य के मुक़ाबले भारी छूट देने से परहेज किया, जैसे, स्नैपडील ने आईफोन 5 एस को केवल 10 प्रतिशत छूट के साथ 31,499 रूपये में इस “सेविंग डे” में बेचने की पेशकश की। इसीतरह माइक्रोमैक्स की एचडी एलईडी को 19990 रूपये में बेचने की पेशकश की गई, जो दीवाली में भी इसी कीमत पर बेची जा रही थी। बहरहाल, उपभोक्ता टिकाऊ कंपनियों की इसतरह की पहल के कारण स्नैपडील और

Nov

21

2014

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अजब निजाम है उलटे सवाल देता है

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अजब निजाम है उलटे सवाल देता है

सुनहरा अवसर
सम्मेस्सा लेने के लिए यदि ४००० प्रतिनिधि पहुंचे तो उन्हें कवरेज देने के लिए लगभग २५०० मीडियाकर्मी भी ब्रिस्बेन में मौजूद थे। इस लिहाज से अपनी आर्थिक और राजनयिक शक्ति को साबित करने के लिए जी-२० का मंच नमो के लिए सुनहरा अवसर था। लेकिन क्या नरेन्द्र मोदी वह कर पाये? आप नीतियां चाहे जो बघार लें इस हकीकत से कोई इंकार नहीं कर सकता कि अंतर्राष्ट्रीय वित्तीय पूंजी, अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष, विश्व बैंक और अमेरिकी साम्राज्यवाद के नेतृत्ववाले बड़े औद्योगिक देशों की अगुवाई में विश्व की जिस तरह की अर्थव्यवस्था बनी है, हिंदुस्तानी अर्थतंत्र भी उसी का अंग है। इसलिए चंद दिनों पहले वल्र्ड ट्रेड ऑर्गेनाइजेशन के ट्रेड फैसिलिटेशन एग्रीमेंट पर हस्ताक्षर करने को नमो का हिंदुस्तान मजबूर हुआ है। याद है २० वर्ष पहले का काल। तब नरसिंह राव सरकार अमेरिकी साम्राज्यवाद के दबाव में डंकल प्रस्ताव पर हस्ताक्षर कर रही थी। उन दिनों भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष हुआ करते थे डॉ. मुरली मनोहर जोशी। तब नमो के पास राष्ट्रीय सचिव का दायित्व था। उस वक्त नमो डंकल प्रस्तावों के खिलाफ प्रभावशाली वक्तव्य दिया करते थे। आज उन्हीं नमो को अमेरिकी आका ‘मैन ऑफ एक्शन’ कह रहा है।

व्यक्तित्वों की ब्रांडिंग
याद होगा २००८-०९ में

Nov

20

2014

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बरवाला का बैरी

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बरवाला का बैरी

हरियाणा के दलित समाज में पैदा होनेवाले रामपाल सिंह जाटिन (जतिन, जातिन) कोई ऐसे विख्यात संत न थे कि देश की आधुनिक संत परंपरा में उनका कोई स्थान होता। सोनीपत के गोहाना तहसील में पिता नंदलाल और माता इंदिरा देवी की संतान रामपाल ने आईटीआई की डिग्री लेने के बाद हरियाणा सिंचाई विभाग में जूनियर इंजीनियर की नौकरी कर ली थी। शुरूआत में एक धर्मनिष्ठ हिन्दू की तरह वे भी हनुमान के भक्त थे और देवी देवताओं की पूजा किया करते थे। लेकिन अपनी जीवनी में संत रामपाल कहते हैं कि देवी देवताओं की पूजा करते हुए भी उन्हें वह मानसिक शांति प्राप्त नहीं हो पा रही थी जो धर्म मार्ग पर चलते हुए वे पाना चाहते थे। इसी उधेड़बुन में नब्बे के दशक में एक बार उनकी मुलाकात के एक कबीरपंथी संत रामदेवानंद से हो गयी। 1994 में रामदेवानंद से हुई इस मुलाकात के बाद रामपाल सिह के जीवन में बहुत क्रांतिकारी बदलाव आया और वे कहते हैं कि रामदेवानंद ने जो उन्हें नामजप का उपदेश किया उससे उन्हें वह मानसिक शांति प्राप्त हुई जिसकी तलाश में वे भटक रहे थे।

रामदेवानंद से मुलाकात के बाद अगले ही साल 1995 में उन्होंने अपनी नौकरी से इस्तीफा दे दिया और

Nov

18

2014

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मध्य प्रदेश के दिल की धड़कन: मांडू

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मध्य प्रदेश के दिल की धड़कन: मांडू

जहाज महल पर खड़े होकर आप असीम सुकून की अनुभूति करेंगे। हिन्डोला महल में आपका मन डोले बिना नहीं रहेगा। होशंगशाह का मकबरा मन को मोह लेगा और ताजमहल की याद दिलाएगा। आल्हा-ऊदल की कथाएं रोमांच बढ़ा देंगी, आपकी भुजाओं की मछलियां बाहर आने को मचल उठेंगी। ईको प्वाइंट पर खड़े होकर जब आप जोर से अपना नाम पुकारेंगे तो लगेगा कि दुनिया आपको सुन रही है। अद्भुत है माण्डू। रानी रूपमति और बाज बहादुर की खूबसूरत मोहब्बत की तरह माण्डू भी बेहद हसीन है।

मालवा के परमार राजाओं के बसाए माण्डू को देखने के लिए अपने मित्र मनोज पटेल और गजेन्द्र सिंह अवास्या के साथ जाना हुआ। सुबह करीब 8 बजे राजेन्द्र नगर, इंदौर से कार से रवाना हुए और करीब दो घंटे में 100 किलोमीटर दूर स्थित माण्डू पहुंच गए। विंध्याचल की पहाड़ी पर करीब 2000 फीट की ऊंचाई पर स्थित माण्डू दुर्ग में प्रवेश से पहले एक गहरी खाई कांकडा खो है। थोड़ी देर यहां फोटो सेशन हुआ। इसके बाद अपनी समृद्धि, अपने सौंदर्य और रूपमति-बाज बहादुर के प्रेम के लिए मशहूर माण्डू के परकोटे में आलमगीरी और भंगी दरवाजे से प्रवेश किया। माण्डू दुर्ग का विस्तार बहुत अधिक है। इसके अलग-अलग हिस्सों में स्थित ऐतिहासिक इमारतें,

Nov

17

2014

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महा नैतिक महा राष्ट्र

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महा नैतिक महा राष्ट्र

ठीक है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी को नेचुरली करप्ट पार्टी कहा। यह भी कहा कि कांग्रेस – एनसीपी का गोत्र एक ही है। जल्दी ही कोई हरियाणा से कहेगा कि एक गोत्र वाले की शादी अनैतिक थी। अब जाकर नैतिक हुई है जब अलग गोत्र वाली बीजेपी और एन सी पी का गंधर्व विवाह हुआ है। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के बारे में प्रधानमंत्री मोदी ने क्या क्या नहीं कहा। जनता को लगा होगा कि एन सी पी कांग्रेस से मुक्ति का वक्त आ गया है। पर क्या उस जनता को यह नहीं दिखा था कि चौबीस घंटे पहले तक इन पार्टियों में रहने वाले नेता बीजेपी के टिकट पर लड़ने आ गए हैं। शायद बीजेपी गंगा है जिसमें डुबकी लगाते ही सब पवित्र हो जाते होंगे। अब उस जनता ने इन उम्मीदवारों को वोट तो दिया ही। गुजरात विधानसभा में भी बीजेपी के टिकट से कई कांग्रेसी विधायक हैं। संसद में भी हैं। केंद्रीय मंत्रिमंडल में शिव सेना, आर जे डी और कांग्रेस से आए नेता मंत्री बने हैं। बीजेपी अब बीजेपी नहीं है। यह एक प्लेटफार्म है जहां कोई भी राष्ट्रवाद का टिकट कटाकर गाड़ी पकड़ सकता है। यहां पूर्व अलगाववादी लोन राष्ट्रवादी हो सकते

Nov

17

2014

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बिला'श'पुर

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बिला'श'पुर

आखिर ऐसी हड़बड़ी किसलिए? क्या सर्जन साहब के पीछे कोई भूत लगा था, क्या उनकी कनपटी पर किसी ने बंदूक रखी थी? जाहिर है, ऐसा कुछ भी नहीं हुआ था। तो भी, जिला अस्पताल के सर्जन साहब और उनके साथ गए सहयोगी डॉक्टर के हाथ चिकित्सीय देखभाल के तमाम मानकों को तोड़ते हुए चले तो माना जाना चाहिए कि ऐसा किसी आपातकालीन स्थिति में ही हुआ होगा। इस आपातकालीन स्थिति की व्याख्या में ही बिलासपुर के गांव के नसबंदी शिविर में हुई जानलेवा हड़बड़ी का राज छुपा है। नसबंदी शिविर में सर्जन साहब के हाथ महिलाओं की स्वास्थ्य-रक्षा को अपना कर्तव्य मानकर नहीं चल रहे थे। वे महिलाओं को ‘टारगेट’ मानकर अपना हाथ चला रहे थे। ‘टारगेट’ बुनियादी रुप में सेना का शब्द है। सेना युद्ध लड़ती है, उसे अपने टारगेट पर निशाना साधना होता है। ‘टारगेट’ को यथाशीघ्र मार गिराने में ही उसकी सफलता है। सेना के लिए शत्रु-पक्ष की ओर खड़ी कोई भी चीज चाहे वह मनुष्य हो या ह्ववाइट हाऊस सरीखा लोकतंत्र का मंदिर या फिर मशहूर नालंदा विश्वविद्यालय का पुस्तकालय, सबकुछ एक ‘टारगेट’ होता है, यानि एक ऐसी चीज जो अपने विध्वंस के लिए खड़ी है।

सेना का यह शब्द-विशेष और उससे जुड़ी आक्रामकता का

Nov

17

2014

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प्रमोद महाजन के हिन्दू हृदय सम्राट

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प्रमोद महाजन के हिन्दू हृदय सम्राट

प्रमोद महाजन ने ‘गेटवे ऑफ इंडिया’ पर आयोजित उस कार्यक्रम में शिवसेनाप्रमुख के व्यक्तित्व का शब्द चित्र उकेरा था। प्रमोद महाजन ने कहा था कि- ‘मैं पांच वाक्यों में बताना चाहता हूं कि मुझे बालासाहेब क्यों अच्छे लगते हैं? पहला वाक्य है- वह दुनिया में एकमेव नेता हैं जिनके होंठों पर वही बात है जो उनके पेट में है।’ होंठ और पेट की बात कहना मराठी मुहावरा है। प्रमोद महाजन रेखांकित करना चाहते थे कि शिवसेनाप्रमुख के दिल में जो बात होती है वही उनकी जुबां पर भी आती है। उनका दूसरा वाक्य था कि- ‘पूरी दुनिया के इतिहास में शिवसेनाप्रमुख एकमेव राजनेता हैं जिन्होंने कभी अपने वक्तव्य का खंडन नहीं किया। वे जो बोलते हैं सोच-समझकर बोलते हैं। एक बार बोल दिया तो फिर कभी उसका खंडन नहीं किया।’ शिवसेनाप्रमुख के व्यक्तित्व को जाननेवाला उनका प्रखरतम विरोधी भी उनकी इस वृत्ति का प्रशंसक रहा है।

प्रमोद महाजन का तीसरा वाक्य था कि- ‘शिवसेनाप्रमुख एकमेव नेता हैं जिनके समर्थकों की औसत आयु में कभी इजाफा नहीं हुआ। शिवाजी पार्क पर बीते चार दशकों से उन्हें सुनने के लिए आनेवालों की औसत आयु कभी २५ वर्ष से अधिक की नहीं रही।’ युवकों को चार दशकों तक सतत आकर्षित रखने के चलते

Nov

16

2014

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भ्रष्ट व्यवस्था के 'अमर' अग्रवाल

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भ्रष्ट व्यवस्था के 'अमर' अग्रवाल

चूंकि परिवार नियोजन जैसे राष्ट्रीय कार्यक्रमों को आयोजित एवं नियंत्रित करने की जिम्मेदारी अंततरू जिला प्रशासन की होती है लिहाजा इस मामले में वह भी अपनी  जिम्मेदारी से बच नहीं सकता। इसीलिए सरकार ने घटना के चार दिनों के भीतर ही न केवल न्यायिक जांच की घोषणा की अपितु ऑपरेशन के लिए प्रमुख रूप से जिम्मेदार डॉक्टर आर.के. गुप्ता एवं मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. एस सी.भांगे को निलंबित करने के बाद अंततरू बर्खास्त कर दिया। पिछली तमाम बड़ी घटनाओं मसलन बालोद एवं बागबाहरा मोतियाबिंद ऑपरेशन के बाद दर्जनों मरीजों के आंखों की रोशनी खोने का मामला हो या फिर अनेक जिलों में निजी चिकित्सालयों में स्वास्थ्य बीमा योजना के तहत स्वीकृत राशि हड़पने के लिए जबरिया सैंकड़ों महिलाओं का गर्भाशय निकालने का प्रकरण हो या फिर कांकेर जिले के झलियामारी आदिवासी कन्या छात्रावास की छात्राओं का यौन शोषण हो, कार्रवाई के नाम पर केवल लीपापोती हुई, जांच का नाटक होता रहा, फौरी तौर पर कुछ कर्मचारियों का निलंबन हुआ लेकिन अंतत: बिना माकूल सजा पाए सभी बहाल भी हो गए।

दिलों को झंझोड़ने वाले उस दौर में भी जबरदस्त जन आक्रोश फूटा, राजनीतिक धरने-प्रदर्शन हुए किंतु सरकार की सेहत पर कोई प्रभाव नहीं पड़ा। यकीनन नसबंदी हादसा और भी ज्यादा

Nov

14

2014

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नेहरू की छाया

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नेहरू की छाया

घी के (दिए)  जलाने का आव्हान करती आवाज का तर्क तो तभी समझ आ गया था, वह मोहल्ला हिन्दू महासभा का गढ़ ठहरा…लेकिन जीजी-बाबूजी के दुख को समझने की कोशिश आज तक जारी है। वे कांग्रेस के वोटर नहीं, विरोधी ही कहे जाएंगे… नेहरूजी की कई बातों से उन्हें चिढ़ होती थी, चीन से हारने की वजह भी तो नेहरू की नादानी ही थी…फिर भी उस रात घर में चूल्हा नहीं जला….जैसे घर का कोई बुजुर्ग ही चल बसा था…तीन दिन तक पूजा नहीं हुई…सूतक माना गया….बहुत से लोग भारतीय जन-मानस में गांधीजी की उपस्थिति को तो स्वाभाविक मानते हैं, क्योंकि वे घोषित रूप से धार्मिक, पारंपरिक व्यक्ति थे, लेकिन नेहरू? उनके बारे में बताया जाता है कि उनका सोच-विचार, मन-संस्कार तो विलायती था—क्या लेना-देना उनका भारतीय जन-मानस से…तो, क्या सत्ताईस मई उन्नीस सौ चौंसठ को क्या वह घर अनोखा था, जहाँ उस रात चूल्हा नहीं जला, तीन दिन तक सूतक माना गया; या वह देश के करोड़ों घरों जैसा साधारण घर ही था…क्या खो दिया था उस दोपहर, इन तमाम घरों ने?

आज पचास बरस बाद एक बात तो लगती है कि हममें से बहुतेरे मानवीय संवाद की विधि ही नहीं समझते, इसीलिए उस जादू को नहीं समझ

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Seetaram Yechuri

Seetaram Yechuri

हैदराबाद के ब्राह्मण कुल में पैदा हुए सीताराम येचुरी भारत में कम्युनिस्ट आंदोलन के कुछ चेहरों में एक बन गये हैं. सेंट स्टीफेन और जेएनयू से शिक्षा. 1974 में एसएफआई में सक्रिय और बाद में सीपीआईएम से जुड़े. 1984 में सीपीआई सेन्ट्रल कमेटी में शामिल हुए. वर्तमान में सीपीआई (एम) पोलित ब्यूरो के मेम्बर और ऐसे सक्रिय राजनीतिज्ञ जिनसे मिलने की तमन्ना बराक ओबामा भी रखते हों.
Rajiv Yadav

Rajiv Yadav

इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक राजीव दिल्ली स्थित आईआईएमसी से मीडिया में मास्टर डिग्री ले चुके हैं. फिलहाल इलाहाबाद में रहकर मुक्त पत्रकारिता और जनाधिकार के मुद्दों पर सक्रिय कार्य कर रहे हैं. विस्फोट पर लेखन.
Ashok Wankhade

Ashok Wankhade

यवतमाल में पैदा हुए अशोक वानखेडे पढ़ने के लिए इंदौर आये तो पत्रकारिता का कैरियर साथ में लेकर इंदौर से बाहर निकले. फ्री प्रेस जर्नल से पत्रकारिता शुरू करनेवाले अशोक वानखेडे चौथा संसार में काम करने दिल्ली आये तो यहीं के होकर रह गये. करीब पचीस साल के अपने पत्रकारीय कैरियर में अंग्रेजी, हिन्दी और मराठी तीनों भाषाओं के लिए काम किया है. इलेक्ट्रानिक का जमाना आया तो विडियो जर्नलिज्म में भी हाथ आजमाया. अब एक अखबार के राजनीतिक संपादक होने के साथ साथ नये मीडिया को नारा-ए-मस्ताना बनाना चाहते हैं.
Dr. Ashish Vashisth

Dr. Ashish Vashisth

डॉ. आशीष वशिष्ठ लखनऊ में रहनेवाले स्वतंत्र पत्रकार हैं. विभिन्न विषयों पर समसामयिक टिप्पणी और लेखन.
Harsh Vardhan

Harsh Vardhan

हर्षवर्धन टीवी पत्रकार हैं. अमर उजाला में लंबे समय तक काम करने के बाद सीएनबीसी आवाज में काम किया. इस वक्त पी7न्यूज में कार्यरत। बतंगड़ नाम से नियमित ब्लाग भी लिखनेवाले हर्षवर्धन राजनीतिक विश्लेषक के तौर पर स्थापित हैं.
Vinod Upadhyay

Vinod Upadhyay

मूलत: बक्सर बिहार के रहनेवाले विनोद उपाध्याय भोपाल में रहकर पत्रकारिता करते हैं. दैनिक राष्ट्रीय हिन्दी मेल से पत्रकारिता में प्रवेश. वर्तमान में भोपाल से ही प्रकाशित होनेवाले दैनिक अग्निबाण से जुड़े हुए हैं.
Arvind Tripathi

Arvind Tripathi

अरविन्द त्रिपाठी देश के कई बड़े समाचार पत्रों व पत्रिकाओं में काम करने के बाद वर्तमान में दिल्ली से प्रकाशित हो रही "सामना" हिंदी पत्रिका में उत्तर प्रदेश से विशेष संवाददाता के पद पर कार्यरत हैं. साथ ही पानी और पर्यावरण के मुद्दे पर राजेन्द्र सिंह के साथ काम कर रहे हैं.
Sanjeet Tripathi

Sanjeet Tripathi

रायपुर के रहनेवाले संजीत त्रिपाठी वैसे तो प्रिंट मीडिया के लिए ही काम करते हैं लेकिन प्रिंट से ज्यादा आनलाइन मीडिया में सक्रियता. ब्लाग लिखने से लेकर फेसबुक सक्रियता तक संजीत सब जगह नजर आते हैं. आवारा बंजारा नाम से ब्लाग लेखन करनेवाले संजीत फिलहाल रायपुर में एक अखबार के साथ काम कर रहे हैं.
Anushikha Tripathi

Anushikha Tripathi

भोपाल में ही पढ़ाई लिखाई और अब भोपाल में ही रहकर पत्रकारिता. माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय से 2011 में पत्रकारिता की डिग्री.
Awesh Tiwari

Awesh Tiwari

मेरे लिए खबरें सिर्फ सूचनाओं को कलमबंद करने का जरिया नहीं है ,ये जरुरी है कि जिनके लिए भी हम खबरें लिख रहे हैं उनको उन ख़बरों से कुछ मिले |पिछले एक दशक से उत्तर भारत के सोन-बिहार -झारखण्ड क्षेत्र में आदिवासी किसानों की बुनियादी समस्याओं ,नक्सलवाद ,विस्थापन ,प्रदूषण और असंतुलित औद्योगीकरण को लेकर की गयी अब तक की रिपोर्टिंग में हमने अपने इस सिद्धांत को जीने की कोशिश की है।
Anshuman Tiwari

Anshuman Tiwari

मूलत: उत्तर प्रदेश के रहनेवाले अंशुमान तिवारी ने आर्थिक पत्रकारिता को हिन्दी में बहुत शुरूआती दौर से देखा समझा है. अमर उजाला कारोबार के लिए काम किया और बाद में दैनिक जागरण समूह से जुड़े. वर्तमान में दैनिक जागरण के ब्यूरो चीफ हैं. इसके साथ ही अर्थार्थ नाम से ब्लाग भी लिखते हैं.
Sanjay Tiwari

Sanjay Tiwari

आप जहां तक सोच सकते हैं इंटरनेट आपको वहां तक काम करने का मौका देता है. अभी तक मानव सभ्यता ने जितने भी मीडिया माध्यमों का उपयोग किया है यह उन सबमें अनूठा, प्रभावी और सर्वगुण संपन्न है. सूचना लेने देने के तीन माध्यमों दृश्य, श्रवण और पाठ को एक ही धागे में लपेटे नया मीडिया उत्पादन और पहुंच दोनों के लिहाज से सर्वश्रेष्ठ है. ऐसे नये मीडिया का जनहित के लिए भरपूर उपयोग हो, विस्फोट.कॉम उसी दिशा में उठा एक कदम है. visfot@visfot.com
Sanjay Swadesh

Sanjay Swadesh

किरोडीमल कॉलेज स्नातकोत्तर के बाद केंद्रीय हिंदी संस्थान दिल्ली से पत्रकारिता में डिप्लोमा। दैनिक हिंदुस्तान, नवभारत टाईम्स, सहारा समय, दैनिक भास्कर में काम. कई पत्र-पत्रिकाओं में स्वतंत्र लेखन के साथ स्थानीय जनअभियानों से जुड़े हैं।
Naresh Sirohi

Naresh Sirohi

महैन्द्र सिंह टिकैत की टीम में शामिल होकर पश्चिमी उत्तर प्रदेश में किसान आंदोलन से अपना सार्वजनिक जीवन शुरू करनेवाले नरेश सिरोही अभी भी मूल रूप से किसान आंदोलन से ही जुड़े हुए हैं। स्वदेशी आंदोलन में सक्रियता। संप्रति भाजपा किसान मोर्चा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष।
Rakesh Sinha

Rakesh Sinha

अकादमिक पृष्ठभूमि से ताल्लुक रखनेवाले प्रो. राकेश सिन्हा संघ विचारधारा के बीच सक्रिय समानतावादी विचारक हैं. राकेश सिन्हा हिन्दुत्व की प्रखर धारा के पैरोकार हैं. लेकिन ऐसा करने के लिए वे हिंसक विवाद की बजाय अहिसक "संवाद" को अपना जरिया बनाते हैं. इंडिया पॉलिसी फाउण्डेशन के मानद निदेशक के रूप में शोध, अध्ययन और संवाद को आगे बढ़ा रहे हैं.
Virender Singh Chauhan

Virender Singh Chauhan

वीरेंद्र सिंह चौहान एक दशक से अधिक समय तक हिंदी पत्रकारिता की मुख्यधारा से जुड़े रहे. दैनिक दिव्य हिमाचल में बतौर उप संपादक और बाद में अमर उजाला और दैनिक ट्रिब्यून में स्टाफ रिपोर्टर के नाते कार्य किया. इस दौरान हरियाणा यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट्स के प्रदेश अध्यक्ष. सितम्बर 2007 से पत्रकारिता के शिक्षण में. सम्प्रति चौधरी देवी लाल विश्वविद्यालय, सिरसा के पत्रकारिता व जनसंचार विभाग में एसोसिएट प्रोफेसर और विभागाध्यक्ष.
S N Singh

S N Singh

शेष नारायण सिंह मूलतः इतिहास के विद्यार्थी हैं. शुरू में इतिहास के शिक्षक रहे. .बाद में पत्रकारिता की दुनिया में आये...प्रिंट, रेडियो और टेलिविज़न में काम किया. इन्होने १९२० से १९४७ तक की महात्मा गाँधी की जीवनी के उस पहलू पर काम किया है जिसमें वे एक महान कम्युनिकेटर के रूप में देखे जाते हैं..1992 से अब तक तेज़ी से बदल रहे राजनीतिक व्यवहार पर अध्ययन करने के साथ साथ विभिन्न मीडिया संस्थानों में नौकरी की. अब मुख्य रूप से लिखने पढने के काम में लगे हैं. एक अखबार में काम और विस्फोट.कॉम के सम्मानित स्तंभलेखक.
Rajesh Singh

Rajesh Singh

मुंबई में रहनेवाले राजेश सिंह मानवाधिकार कार्यकर्ता और पत्रकार हैं. वर्तमान समय में नागरिक विकल्प नामक पत्रिका का संपादन और मानवाधिकार संस्था का संचालन.
SATISH SINGH

SATISH SINGH

सतीश सिंह वर्तमान में भारतीय स्टेट बैंक में एक अधिकारी के रूप में पटना में कार्यरत हैं और विगत तीन वर्षों से स्वतंत्र लेखन कर रहे हैं। भारतीय जनसंचार संस्थान से सत्र 1994-95 में (हिन्दी पत्रकारिता में) स्नात्कोतर डिप्लोमा करने के बाद 1995 से जून 2000 तक मुख्यधारा की पत्रकारिता में इनकी सक्रिय भागीदारी रही है।
Abhishek Singh

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अभिषेक रंजन सिंह ने 2007-08 में नई दिल्ली के भारतीय जनसंचार संस्थान से पत्रकारिता की पढ़ाई पूरी की। करियर की शुरूआत सकाल मीडिया गुप्र से किया। इन दिनों दक्षिण एशिया की प्रमुख ब्रॉडकास्ट एजेंसी सीवीबी न्यूज सर्विस में कार्यरत हैं। इसके अलावा विस्फोट सहित देश के प्रमुख हिंदी समाचार पत्र और पत्रिकाओं में समसामयिक मुद्दों पर नियमित लेखन कर रहे हैं।
SANDEEP SINGH

SANDEEP SINGH

सजग युवा पत्रकार व गांधीनगर में रहकर गुजरात केंद्रीय विश्वविद्यालय में शोधरत, सिनेमा व रंगमंच को लेकर विशेष हस्तक्षेप, सामाजिक व राजनीतिक मुद्दों पर खास नजर, विभिन्न अखबारों, पत्र-पत्रिकाओं व वेब पोर्टलों के लिये स्वतंत्र लेखन.
Pranay vikram  Singh

Pranay vikram Singh

श्रमजीवी पत्रकार प्रणव विक्रम सिंह सामाजिक, राजनीतिक और आर्थिक मुद्दों पर पिछले कई सालों से लेखन कर रहे हैं.
Dhananjay Singh

Dhananjay Singh

सिमटते सिमटते कुल परिचय इतना ही शेष रह गया है कि फिलहाल घुमक्कड़ी, सधुक्कड़ी और हाथ में कलम की लकड़ी। गाजीपुर से काशी हिन्दू विश्वविद्यालय होते हुए देहरादून तक पहुंचे हैं। काम काज बहुत किया अब लिखकर अकाज करते हैं।
A N Sibli

A N Sibli

1993 से हिन्दी, उर्दू और अंग्रेजी के विभिन्न राष्ट्रीय अखबारों और पत्रिकाओं में लेखन कर रहे अब्दुल नूर सिबली इस वक्त दिल्ली से प्रकाशित हिन्दुस्तान एक्सप्रेस में बतौर ब्यूरो चीफ कार्यरत हैं. विभिन्न वेबसाइटों पर नियमित लेखन.
Prem Shukla

Prem Shukla

मुंबई से प्रकाशित हिन्दी सामना के कार्यकारी संपादक. पिछले 20 सालों से पत्रकारिता. पत्रकारिता के साथ ही मुबंई में हिन्दीभाषी समाज के विभिन्न सांस्कृतिक और सामाजिक गतिविधियों में भी सक्रिय. विस्फोट.कॉम के नियमित स्तंभ लेखक.
Puja Shukla

Puja Shukla

पेश से टीवी पत्रकार पूजा शुक्ला धाकड़ लिक्खाड़ हैं. घर परिवार की जिम्मेदारी और टीवी पत्रकारिता के साथ साथ कलम को तलवार की तरह इस्तेमाल करती हैं. दिल्ली युनिवर्सिटी से पढ़ी लिखी पूजा दिल्ली में ही रहती है.
Rajesh Shukla

Rajesh Shukla

राजेश शुक्ला तो बस राजेश शुक्ला है. कला की समीक्षा के अलावा समाज और राजनीति की भी कलात्मक समीक्षा करने में महारत. मीडिया की मजूरी और कलम की गुलामी के अलावा दुनिया में फक्कड़ी ही पसंद आती है.
Abhishek Shrivastav

Abhishek Shrivastav

अभिषेक श्रीवास्तव के परिचय वाला पन्ना आमतौर पर खाली ही रहता है। खुद अपना कुछ पता नहीं। कोई परिचय नहीं। लेकिन हाथ में कलम और एक अदद कैमरा पकड़ लें तो बहुत सारी छुपी अक्सों को परिचय दे देते हैं। संघर्ष जिन्दगी का संघर्ष नहीं, बल्कि जीने का फलसफा है। स्वतंत्र पत्रकार तो हैं ही।
Arvind Shesh

Arvind Shesh

नास्तिकता और नौकरी दोनों साथ साथ। घोषित तौर पर। बिना किसी हिचक के। परिचय के नाम पर सिर्फ इतना कि जनसत्ता में नौकरी। लेकिन काम के नाम पर बहुत कुछ। खासकर लेखन के क्षेत्र में। मुद्दों को कविता और कहानी की शक्ल तो दे ही देते हैं, कभी कभी कविता और कहानी को भी मुद्दा बना देते हैं। दिल्ली में डेरा, बाकी सब तरफ कलम का घेरा।
Balendu Sharma

Balendu Sharma

माईक्रोसाफ्ट के मोस्ट वैलुएबल प्रोफेशनल पुरस्कार से सम्मानित बालेन्दु दाधीच वेब पोर्टल प्रभासाक्षी के समूह संपादक है. तकनीकि के घोड़े पर हिन्दी की काठी बांधनेवाले बालेन्दु दाधीच केवल तकनीकि के जानकार ही नहीं बेहतरीन पत्रकार भी हैं.