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Jul

09

2014

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नर्सों के वापसी की नसीहत

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नर्सों के वापसी की नसीहत

नर्सों की वापसी ने भारतीय राजनीति और कूटनीति के संदर्भ में कई अच्छे संकेत दिए हैं। यह देखना सुखद है कि भारत की सरकारें अब संकटग्रस्त क्षेत्रों में फंसे अपने नागरिकों की सुरक्षित वापसी के लिए लगभग उसी तरह की तेजी और प्रतिबद्धता दिखा रही हैं, जैसी पश्चिम की सरकारें दिखाया करती हैं। यह सिलसिला आगे भी जारी रहना चाहिए क्योंकि विश्व भर में अपने नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना हमारी सरकारों का लोकतांत्रिक और प्रशासनिक दायित्व है। इस घटना ने यह भी दिखाया है कि राज्य और केंद्र की सरकारें भले ही अलग-अलग दलों द्वारा संचालित हों, इच्छा-शक्ति हो तो वे अच्छे तालमेल के साथ कार्य कर सकती हैं और इसके सुखद नतीजे सामने आ सकते हैं। नर्सों की वापसी नरेंद्र मोदी सरकार की बड़ी कूटनीतिक विजय है। हालाँकि अभी इराक में भारत की चुनौती खत्म नहीं हुई है क्योंकि और भी कई भारतीय नागरिक वहाँ फंसे हुए हैं, जिन्हें सुरक्षित स्वदेश लाया जाना बाकी है। कहा जाता है कि समूचे इराक में फंसे भारतीयों की संख्या दस हजार के आसपास हो सकती है। हालाँकि युद्धग्रस्त क्षेत्रों में अटके लोगों की संख्या बहुत सीमित, लगभग सौ, है। इनमें इमारती कामकाज करने वाले चालीस भारतीय मजदूर भी शामिल हैं जिनका

Jul

07

2014

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सदा आनंद कैसे रहे रेलवे?

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सदा आनंद कैसे रहे रेलवे?

एक अनुमान के अनुसार सुरक्षा तंत्रों को पुख्ता करने, विधुतीकरण एवं आधुनिकीकरण के लिये रेलवे को दो लाख करोड़ रूपये की जरूरत होगी। इसका यह अर्थ हुआ कि रेलवे को हर साल 40000 करोड़ रूपये की दरकार होगी। फिलहाल भारतीय रेल हर साल तकरीबन 10,000 से 15,000 करोड़ रूपये मुनाफा कमाता है। इस हिसाब से उसे हर साल 25,000 से 30,000 करोड़ रूपये उगाहने होंगे। किराये-भाड़े में वृद्धि करके इस वर्ष रेलवे ने 6000 करोड़ रूपये इकठ्ठा किया है। स्पष्ट है शेष राशि की व्यवस्था सरकार को बजटीय प्रावधान से करनी होगी। बजटीय सहायता से पिछले साल रेलवे ने 29 हजार करोड़ रुपये हासिल किये थे। इस साल उसे 19000 से 24000 करोड़ रूपये की जरूरत हो सकती है। गौरतलब है कि प्रत्येक साल इतनी बड़ी रकम जुटाना रेलवे के लिये आसान नहीं होगा। इसके लिये उसे हर साल रेल किराये-भाड़े में बढ़ोतरी करनी होगी। साथ ही, उसे अपने आंतरिक संसाधनों को भी बढ़ाना होगा। इस आलोक में रेलवे बिना जरूरत के पड़ी हुई ज़मीनों के व्यावसायिक उपयोग, बाजार से धन जुटाने, विज्ञापन आदि विकल्पों का सहारा ले सकता है। 

सुरक्षा और आधुनिकीकरण के फ्रंट पर रेलवे को हर पांच साल में 19 हजार किलोमीटर रेलवे ट्रैक का नवीनीकरण करना

Jul

07

2014

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पुरुष उत्पीड़न का काला कानून

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पुरुष उत्पीड़न का काला कानून

1. 19 जुलाई, 2005 में सुप्रीम कोर्ट ने भारतीय दण्ड संहिता की धारा 498-ए को कानूनी आतंकवाद की संज्ञा दी।
2. 11 जून, 2010 सुप्रीम कोर्ट ने भारतीय दण्ड संहिता की धारा 498-ए के सम्बन्ध में कहा कि पतियों को अपनी स्वतंत्रता को भूल जाना चाहिये।
14 अगस्त, 2010 सुप्रीम कोर्ट ने भारत सरकार से भारतीय दण्ड संहिता की धारा 498-ए में संशोधन करने के लिए कहा।
4. 04 फरवरी, 2010 पंजाब के अम्बाला कोर्ट ने स्वीकार कि भारतीय दण्ड संहिता की धारा 498-ए के प्रावधानों का दुरूपयोग हो रहा है।
5. 16 अप्रेल,
ॉम्बे हाई कोर्ट ने और 22 अगस्त, 2010 को बैंगलौर हाई कोर्ट ने भी भारतीय दण्ड संहिता की धारा 498-ए के दुरूपयोग की बात को स्वीकारा।
6. 22 अगस्त, 2010 को केन्दीय सरकार ने सभी प्रदेश सरकारों की पुलिस को भारतीय दण्ड संहिता की धारा 498-ए के प्रावधानों के दुरुपयोग के बारे में चेतावनी दी।
7. विधि आयोग ने अपनी
ं रिपोर्ट में इस बात को साफ शब्दों में स्वीकारा कि भारतीय दण्ड संहिता की धारा 498-ए के प्रावधानों का दुरुपयोग हो रहा है।
8. नवम्बर, 2012 में सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश द्वय टीएस ठाकुर और ज्ञानसुधा मिश्रा की बेंच ने कहा कि धारा 498-ए

Jul

07

2014

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ग्राउंड जीरो पर ग्रीनपीस

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ग्राउंड जीरो पर ग्रीनपीस

इन दोनों युवकों को उठाकर एक अज्ञात ठिकाने पर ले जाया गया। फिर इस मकान में बचे लोगों ने परिचितों को फोन लगाने शुरू किए। बात फैली, तो पलटकर प्रशासन के पास भी दिल्लीो-लखनऊ से फोन आए। काफी देर बाद पता लग सका कि इन्हें छत्तीटसगढ़ की सीमा से लगे माडा थाने की पुलिस उठाकर ले गई है। इन दो युवकों के अलावा दो और व्यक्तियों को उठाकर पुलिस माडा थाने में ले आई थी। थाने में पहले से ही एस्सार कम्पनी के तीन अधिकारी बैठे हुए थे। वे रात भर बैठकर पुलिस को एफआईआर लिखवाते रहे। चारों पकड़े गए लोगों के ऊपर धारा 392, 353 और 186 के तहत मुकदमा दर्ज किया गया। अगले दिन अदालत में पेशी के बाद इन्हें  न्यालयिक हिरासत में भेज दिया गया। फिर जबलपुर उच्च न्यायालय से जब एक बड़े वकील राघवेंद्र यहां आए, तब कहीं जाकर चार में से तीन की ज़मानत अगले दिन हो सकी। चौथे शख्स पर शायद तीसेक साल पहले कोई मुकदमा हुआ था, जिसका फायदा उठाकर पुलिस उसे 28 दिनों तक जेल में रखने में कामयाब हो सकी।

ये कहानी विनीत, अक्षय, विजय शंकर सिंह और बेचन लाल साहू की है। विनीत और अक्षय शहरों से पढ़े-लिखे युवा हैं

Jul

03

2014

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काबा पर कहर?

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सऊदी अरब के अल हरम मस्जिद के मध्य में मौजूद पवित्र काला पत्थर सऊदी अरब के अल हरम मस्जिद के मध्य में मौजूद पवित्र काला पत्थर

अबू तुरैब ने अपने आपको जिस आइसिस का जेहादी बताया था यह वही चरमपंथी इस्लामिक संगठन है जो बीते कुछ सालों से सीरिया में और अब इराक में इस्लामिक स्टेट के लिए लड़ रहा है। उसका इरादा है कि एक दिन वह सऊदी अरब पर भी कब्जा करेगा और अल्लाह की मर्जी का इस्लामिक स्टेट स्थापित करेगा। और जिस दिन ऐसा होगा उस दिन पहली गाज गिरेजी उस काबा पर जिसे इस्लाम में सबसे पवित्र स्थान का दर्जा हासिल है। आतंकियों का कहना है कि इराक में अनबार प्रांत के बाद वे सऊदी अरब के अरूर इलाके में दाखिल होकर मक्का तक पहुंचेंगे जहां पवित्र काबा मौजूद है। आइसिस के जेहादियों का कहना है कि इसके बाद वे पवित्र काबा को जमींदोज कर देंगे। और ऐसा इसलिए करेंगे क्योंकि उनके मुताबिक यहां बुतपरस्ती की जाती है जो कि रसूल द्वारा बताये गये इबादत के उसूल के खिलाफ है।

पैंगम्बर हज़रत मोहम्मद साहब का जन्म वर्तमान सउदी अरब के इसी मक्का प्रांत के कुरैशी कबीले में हुआ था। मक्का में ही मौजूद हीरा की गुफाओं म्मद साहब मक्का छोड़कर इस्लाम के प्रचार के लिए बाहर गये तो कुरैशियों ने उनके भी दोबारा काबा लौटने पर रोक लगा दी थी।

Jul

01

2014

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बीजिंग में पंचशील की वर्षगाँठ या तेरहवीं?

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बीजींग में चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ उपराष्ट्रपति मोहम्मद हामिद अंसारी बीजींग में चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ उपराष्ट्रपति मोहम्मद हामिद अंसारी

वाशिंगटन पोस्ट में प्रकाशित चीन के इस नक़्शे के साथ प्रकाशित रिपोर्ट में इस चीन के इस विवादित नक़्शे पर दक्षेस देशों की चिंता को भी मुखरता से प्रकट किया है. यहाँ यह भी उल्लेखनीय है कि अंसारी की चीन यात्रा के दौरान ही लद्दाख में स्थित पेंगोंग झील में चीनी सेना के अतिक्रमण को भी भारतीय सेना ने विफल कर दिया है. यह नई घटना चीन के दशकों से चले आ रहे उस चीनी अभियान का ही हिस्सा है जिसमें चीन अरुणाचल प्रदेश के 90 हजार वर्ग किलोमीटर और जम्मू कश्मीर के अक्साई चीन के 32 हजार वर्ग किलोमीटर इलाके पर अपना दावा प्रकट करते रहा है.

पिछले एक दशक में जबकि भारत में मनमोहन के नेतृत्व में एक अल्पमत और अनिर्णय के रोग की शिकार सरकार शासन कर रही थी तब चीन का यह कुत्सित अभियान कुछ अधिक ही चला. यह एक चौकानें वाला किन्तु दुःखद सत्य है कि पिछले छः दशकों में से पिछला एक मनमोहन के नेतृत्व वाला दशक ऐसा रहा जबकि चीन ने सर्वाधिक अवसरों पर भारतीय सीमा का अतिक्रमण किया और भारतीय सेना के साथ मोर्चों पर आमनें-सामनें की मुद्रा में आया और उस पर तुर्रा यह रहा कि पिछले एक दशक में ही

Jul

01

2014

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कितना अच्छा बजट आनेवाला है?

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कितना अच्छा बजट आनेवाला है?

इसी तरह 80 सी के तहत मिलने वाली छूट की सीमा में बढ़ोतरी बड़ी रियायत हो सकती है, लेकिन वित्त मंत्री अरुण जेटली ऐसा करेंगे, संदेहास्पद है, क्योंकि 80 सी के तहत छूट की सीमा बढ़ाने से राजकोष पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। 80 सी के तहत मिलने वाली छुट के कारण लोगों में बचत करने की प्रवृति विकसित हो रही है, लेकिन वित्त वर्ष 2004-05 से 2013-14 के दरमियान छूट की सीमा चार गुना बढी है, जबकि आंकड़ों में खुदरा मंहगाई महज दोगुना। इसलिए 80 सी के तहत छूट की सीमा में बढ़ोतरी का आकलन करना, गलत होगा।

बजट से पहले सरकार ने वाहन, पूंजीगत वस्तुओं और कंज्यूमर ड्यूरेबल्स क्षेत्र को उत्पाद शुल्क में दी जा रही रियायत को 31 दिसंबर, 2014 तक जारी रखने का निर्णय लिया है। इस रियायत से सरकारी खजाने पर प्रति माह 500 करोड़ रूपये के बोझ पड़ने का अनुमान लगाया गया है। फिर भी अच्छे दिन की उम्मीद में ऐसा निर्णय लिया गया है। इस नुकसान की भरपाई बजट में ब्रांडेड परिधानों पर उत्पाद शुल्क लगाकर की जा सकती है। बजट में सिगरेट पर कर 45 से बढ़कर 60 प्रतिशत हो सकता है। बजट में सिगरेट पर कर बढ़ोतरी की सुगबुगाहट भर

Jul

01

2014

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वे कौन हैं जो एसपी को याद करते हैं?

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वे कौन हैं जो एसपी को याद करते हैं?

इतने चेहरों को एक साथ जीने वाले पत्रकारीय वक्त में एसपी यानी सुरेन्द्र प्रताप सिंह को याद करना किसी त्रासदी से कम नहीं है। मौजूदा पत्रकारों की टोली में जिन युवाओ की उम्र एसपी की मौत के वक्त दस से पन्द्रह बरस रही होगी आज की तारिख में वैसे युवा पत्रकार की टोली कमोवेश हर मीडिया संस्थान में है। खासकर न्यूज चैनलों में भागते-दौड़ते युवा कामगार पत्रकारों की उम्र पच्चीस से पैंतीस के बीच ही है। जिन्हें २७ मई १९९७ में यह एहसास भी ना होगा कि उनके बीच अब एक ऐसा पत्रकार नहीं रहा जो २०१४ में जब वह किसी मीडिया कंपनी में काम कर रहे होंगे तो पत्रकरीय ककहरा पढने में वह शख्स मदद कर सकता है। वाकई सबकुछ तो बदल गया फिर एसपी की याद में डुबकी लगाकर किसे क्या मिलने वाला है। कही यह पत्रकरीय पापों को ढोते हुये पुण्य पाने की आकांक्षा तो नहीं है। हो सकता है। क्योंकि पाप से मुक्त होने के लिये कोई दरवाजा तो नहीं बना लेकिन भागवान को याद कर सबकुछ तिरोहित तो किया ही जाता रहा है और यही परंपरा पत्रकारिय जीवन में भी आ गयी है तो फिर गलत क्या है। हर क्षण पत्रकारीय पाप कीजिये और अपने

Jun

30

2014

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आस्था का हथियार और मोदी सरकार

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आस्था का हथियार और मोदी सरकार

नरेंद्र मोदी के देश के प्रधानमंत्री के रूप शपथ-ग्रहण के बाद अब शायद यह कहना अप्रासंगिक होगा कि खुद भाजपा को भी इतनी सशक्त जीत की उम्मीद नहीं थी। इसके बावजूद अगर भाजपा ने चुनावों से पहले से ही खुद को एक तरह से जीते हुए पक्ष के रूप में पेश करना शुरू कर दिया था तो इसकी क्या वजहें रही होंगी, सोचने का मसला यह है। सवाल है कि आखिर भाजपा किस भरोसे यह दावा कर रही थी। क्या वह इस बात को लेकर आश्वस्त थी कि सियासी शतरंज पर उसने जो बिसात बिछाई है, उसमें नतीजे उम्मीद के हिसाब से ही आएंगे? वह बिसात बिछाते हुए आरएसएस या भाजपा ने किन-किन चुनौतियों को ध्यान में रखा और उसके बरक्स कौन-से मोर्चे मजबूत किए? उसके सामने चुनौतियों की शक्ल में जितनी भी राजनीतिक ताकतें थीं, उनके लिए यह अंदाजा लगाना क्या इतना मुश्किल था कि वे आरएसएस की चालों को भांप तक नहीं पाए? आम अवाम के पैमाने पर क्या ऐसा किया गया कि अब तक भाजपा के लिए चुनौती रहा एक साधारण वोटर एक खास तरह के "हिप्नोटिज्म" की जद में आकर भाजपा के पाले में जा खड़ा हुआ? क्यों ऐसा हुआ कि यह सब विकास लगभग बिना

Jun

30

2014

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शिया बनाम सुन्नी की जंग

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शिया बनाम सुन्नी की जंग

इस आग का असर हो रहा है और ईरान अपने इराकी शिया भाइयों की मदद के लिए तैयार है, भले ही इसके लिए अमेरिका जैसे पारंपरिक ‘शत्रु’ का सहयोग क्यों न लेना पड़े। ईरान की सरकार हिज्बुल्लाह, सीरिया, इराक और ईरान के शिया दायरे और अपने रसूख को बरकरार रखना चाहती है। सऊदी अरब धार्मिक नेतृत्व के मामले में ईरान का सबसे बड़ा प्रतिद्वंद्वी है लेकिन वह भी आइएसआइएस के निशाने पर है और उसे यह संगठन ‘खिलाफत’ के केन्द्र में रखना चाहता है।

जहां तक भारत का सवाल है तो भारत के शिया समुदाय की सद्भावना और सहयोग इराक हुकूमत के साथ है। इराक में दहशतगर्दी कार्रवाइयों के खिलाफ शियाओं के संगठन अंजुमन हैदरी, मजजिले-उलेमा-ए-हिंदी और हुसैनी टाइगर जैसे शिया संगठन ने एकजुट होकर विरोध-प्रदर्शन करने का ऐलान किया है और सैकड़ों की तादाद में इराक जाकर अपनी ‘सेवाएं’ देने का पैâसला किया है। अंजुमन हैदरी दिल्ली के सचिव बहादुर अब्बास ने बताया कि उनकी अंजुमन के तहत अब तक ७०० युवकों ने इराक जाने के लिए अपना रजिस्ट्रेशन कराया है। ये युवक इराक में पवित्र धार्मिक स्थलों की हिफाजत करने और इराकी फौजियों की मदद करने के लिए इराक जाएंगे। हुसैनी टाइगर, लखनऊ ने भी इराक जाने

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Seetaram Yechuri

Seetaram Yechuri

हैदराबाद के ब्राह्मण कुल में पैदा हुए सीताराम येचुरी भारत में कम्युनिस्ट आंदोलन के कुछ चेहरों में एक बन गये हैं. सेंट स्टीफेन और जेएनयू से शिक्षा. 1974 में एसएफआई में सक्रिय और बाद में सीपीआईएम से जुड़े. 1984 में सीपीआई सेन्ट्रल कमेटी में शामिल हुए. वर्तमान में सीपीआई (एम) पोलित ब्यूरो के मेम्बर और ऐसे सक्रिय राजनीतिज्ञ जिनसे मिलने की तमन्ना बराक ओबामा भी रखते हों.
Rajiv Yadav

Rajiv Yadav

इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक राजीव दिल्ली स्थित आईआईएमसी से मीडिया में मास्टर डिग्री ले चुके हैं. फिलहाल इलाहाबाद में रहकर मुक्त पत्रकारिता और जनाधिकार के मुद्दों पर सक्रिय कार्य कर रहे हैं. विस्फोट पर लेखन.
Ashok Wankhade

Ashok Wankhade

यवतमाल में पैदा हुए अशोक वानखेडे पढ़ने के लिए इंदौर आये तो पत्रकारिता का कैरियर साथ में लेकर इंदौर से बाहर निकले. फ्री प्रेस जर्नल से पत्रकारिता शुरू करनेवाले अशोक वानखेडे चौथा संसार में काम करने दिल्ली आये तो यहीं के होकर रह गये. करीब पचीस साल के अपने पत्रकारीय कैरियर में अंग्रेजी, हिन्दी और मराठी तीनों भाषाओं के लिए काम किया है. इलेक्ट्रानिक का जमाना आया तो विडियो जर्नलिज्म में भी हाथ आजमाया. अब एक अखबार के राजनीतिक संपादक होने के साथ साथ नये मीडिया को नारा-ए-मस्ताना बनाना चाहते हैं.
Dr. Ashish Vashisth

Dr. Ashish Vashisth

डॉ. आशीष वशिष्ठ लखनऊ में रहनेवाले स्वतंत्र पत्रकार हैं. विभिन्न विषयों पर समसामयिक टिप्पणी और लेखन.
Harsh Vardhan

Harsh Vardhan

हर्षवर्धन टीवी पत्रकार हैं. अमर उजाला में लंबे समय तक काम करने के बाद सीएनबीसी आवाज में काम किया. इस वक्त पी7न्यूज में कार्यरत। बतंगड़ नाम से नियमित ब्लाग भी लिखनेवाले हर्षवर्धन राजनीतिक विश्लेषक के तौर पर स्थापित हैं.

Vinod Upadhyay

मूलत: बक्सर बिहार के रहनेवाले विनोद उपाध्याय भोपाल में रहकर पत्रकारिता करते हैं. दैनिक राष्ट्रीय हिन्दी मेल से पत्रकारिता में प्रवेश. वर्तमान में भोपाल से ही प्रकाशित होनेवाले दैनिक अग्निबाण से जुड़े हुए हैं.
Arvind Tripathi

Arvind Tripathi

अरविन्द त्रिपाठी देश के कई बड़े समाचार पत्रों व पत्रिकाओं में काम करने के बाद वर्तमान में दिल्ली से प्रकाशित हो रही "सामना" हिंदी पत्रिका में उत्तर प्रदेश से विशेष संवाददाता के पद पर कार्यरत हैं. साथ ही पानी और पर्यावरण के मुद्दे पर राजेन्द्र सिंह के साथ काम कर रहे हैं.
Sanjeet Tripathi

Sanjeet Tripathi

रायपुर के रहनेवाले संजीत त्रिपाठी वैसे तो प्रिंट मीडिया के लिए ही काम करते हैं लेकिन प्रिंट से ज्यादा आनलाइन मीडिया में सक्रियता. ब्लाग लिखने से लेकर फेसबुक सक्रियता तक संजीत सब जगह नजर आते हैं. आवारा बंजारा नाम से ब्लाग लेखन करनेवाले संजीत फिलहाल रायपुर में एक अखबार के साथ काम कर रहे हैं.
Anushikha Tripathi

Anushikha Tripathi

भोपाल में ही पढ़ाई लिखाई और अब भोपाल में ही रहकर पत्रकारिता. माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय से 2011 में पत्रकारिता की डिग्री.
S Rajen Todariya

S Rajen Todariya

लंबे समय से पत्रकारिता में सक्रिय एस राजेन टोडरिया दैनिक भास्कर में बतौर स्थानीय संपादक काम कर चुके हैं। इस वक्त देहरादून से प्रकाशित पाक्षिक पत्रिका जनपक्ष टुडे के प्रधान संपादक हैं।
Awesh Tiwari

Awesh Tiwari

मेरे लिए खबरें सिर्फ सूचनाओं को कलमबंद करने का जरिया नहीं है ,ये जरुरी है कि जिनके लिए भी हम खबरें लिख रहे हैं उनको उन ख़बरों से कुछ मिले |पिछले एक दशक से उत्तर भारत के सोन-बिहार -झारखण्ड क्षेत्र में आदिवासी किसानों की बुनियादी समस्याओं ,नक्सलवाद ,विस्थापन ,प्रदूषण और असंतुलित औद्योगीकरण को लेकर की गयी अब तक की रिपोर्टिंग में हमने अपने इस सिद्धांत को जीने की कोशिश की है।
Anshuman Tiwari

Anshuman Tiwari

मूलत: उत्तर प्रदेश के रहनेवाले अंशुमान तिवारी ने आर्थिक पत्रकारिता को हिन्दी में बहुत शुरूआती दौर से देखा समझा है. अमर उजाला कारोबार के लिए काम किया और बाद में दैनिक जागरण समूह से जुड़े. वर्तमान में दैनिक जागरण के ब्यूरो चीफ हैं. इसके साथ ही अर्थार्थ नाम से ब्लाग भी लिखते हैं.
Sanjay Tiwari

Sanjay Tiwari

आप जहां तक सोच सकते हैं इंटरनेट आपको वहां तक काम करने का मौका देता है. अभी तक मानव सभ्यता ने जितने भी मीडिया माध्यमों का उपयोग किया है यह उन सबमें अनूठा, प्रभावी और सर्वगुण संपन्न है. सूचना लेने देने के तीन माध्यमों दृश्य, श्रवण और पाठ को एक ही धागे में लपेटे नया मीडिया उत्पादन और पहुंच दोनों के लिहाज से सर्वश्रेष्ठ है. ऐसे नये मीडिया का जनहित के लिए भरपूर उपयोग हो, विस्फोट.कॉम उसी दिशा में उठा एक कदम है. visfot@visfot.com
Sanjay Swadesh

Sanjay Swadesh

किरोडीमल कॉलेज स्नातकोत्तर के बाद केंद्रीय हिंदी संस्थान दिल्ली से पत्रकारिता में डिप्लोमा। दैनिक हिंदुस्तान, नवभारत टाईम्स, सहारा समय, दैनिक भास्कर में काम. कई पत्र-पत्रिकाओं में स्वतंत्र लेखन के साथ स्थानीय जनअभियानों से जुड़े हैं।
Naresh Sirohi

Naresh Sirohi

महैन्द्र सिंह टिकैत की टीम में शामिल होकर पश्चिमी उत्तर प्रदेश में किसान आंदोलन से अपना सार्वजनिक जीवन शुरू करनेवाले नरेश सिरोही अभी भी मूल रूप से किसान आंदोलन से ही जुड़े हुए हैं। स्वदेशी आंदोलन में सक्रियता। संप्रति भाजपा किसान मोर्चा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष।
Rakesh Sinha

Rakesh Sinha

अकादमिक पृष्ठभूमि से ताल्लुक रखनेवाले प्रो. राकेश सिन्हा संघ विचारधारा के बीच सक्रिय समानतावादी विचारक हैं. राकेश सिन्हा हिन्दुत्व की प्रखर धारा के पैरोकार हैं. लेकिन ऐसा करने के लिए वे हिंसक विवाद की बजाय अहिसक "संवाद" को अपना जरिया बनाते हैं. इंडिया पॉलिसी फाउण्डेशन के मानद निदेशक के रूप में शोध, अध्ययन और संवाद को आगे बढ़ा रहे हैं.

Virender Singh Chauhan

वीरेंद्र सिंह चौहान एक दशक से अधिक समय तक हिंदी पत्रकारिता की मुख्यधारा से जुड़े रहे. दैनिक दिव्य हिमाचल में बतौर उप संपादक और बाद में अमर उजाला और दैनिक ट्रिब्यून में स्टाफ रिपोर्टर के नाते कार्य किया. इस दौरान हरियाणा यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट्स के प्रदेश अध्यक्ष. सितम्बर 2007 से पत्रकारिता के शिक्षण में. सम्प्रति चौधरी देवी लाल विश्वविद्यालय, सिरसा के पत्रकारिता व जनसंचार विभाग में एसोसिएट प्रोफेसर और विभागाध्यक्ष.
S N Singh

S N Singh

शेष नारायण सिंह मूलतः इतिहास के विद्यार्थी हैं. शुरू में इतिहास के शिक्षक रहे. .बाद में पत्रकारिता की दुनिया में आये...प्रिंट, रेडियो और टेलिविज़न में काम किया. इन्होने १९२० से १९४७ तक की महात्मा गाँधी की जीवनी के उस पहलू पर काम किया है जिसमें वे एक महान कम्युनिकेटर के रूप में देखे जाते हैं..1992 से अब तक तेज़ी से बदल रहे राजनीतिक व्यवहार पर अध्ययन करने के साथ साथ विभिन्न मीडिया संस्थानों में नौकरी की. अब मुख्य रूप से लिखने पढने के काम में लगे हैं. एक अखबार में काम और विस्फोट.कॉम के सम्मानित स्तंभलेखक.
Rajesh Singh

Rajesh Singh

मुंबई में रहनेवाले राजेश सिंह मानवाधिकार कार्यकर्ता और पत्रकार हैं. वर्तमान समय में नागरिक विकल्प नामक पत्रिका का संपादन और मानवाधिकार संस्था का संचालन.
SATISH SINGH

SATISH SINGH

सतीश सिंह वर्तमान में भारतीय स्टेट बैंक में एक अधिकारी के रूप में पटना में कार्यरत हैं और विगत तीन वर्षों से स्वतंत्र लेखन कर रहे हैं। भारतीय जनसंचार संस्थान से सत्र 1994-95 में (हिन्दी पत्रकारिता में) स्नात्कोतर डिप्लोमा करने के बाद 1995 से जून 2000 तक मुख्यधारा की पत्रकारिता में इनकी सक्रिय भागीदारी रही है।
Abhishek Singh

Abhishek Singh

अभिषेक रंजन सिंह ने 2007-08 में नई दिल्ली के भारतीय जनसंचार संस्थान से पत्रकारिता की पढ़ाई पूरी की। करियर की शुरूआत सकाल मीडिया गुप्र से किया। इन दिनों दक्षिण एशिया की प्रमुख ब्रॉडकास्ट एजेंसी सीवीबी न्यूज सर्विस में कार्यरत हैं। इसके अलावा विस्फोट सहित देश के प्रमुख हिंदी समाचार पत्र और पत्रिकाओं में समसामयिक मुद्दों पर नियमित लेखन कर रहे हैं।
SANDEEP SINGH

SANDEEP SINGH

सजग युवा पत्रकार व गांधीनगर में रहकर गुजरात केंद्रीय विश्वविद्यालय में शोधरत, सिनेमा व रंगमंच को लेकर विशेष हस्तक्षेप, सामाजिक व राजनीतिक मुद्दों पर खास नजर, विभिन्न अखबारों, पत्र-पत्रिकाओं व वेब पोर्टलों के लिये स्वतंत्र लेखन.
Pranay vikram  Singh

Pranay vikram Singh

श्रमजीवी पत्रकार प्रणव विक्रम सिंह सामाजिक, राजनीतिक और आर्थिक मुद्दों पर पिछले कई सालों से लेखन कर रहे हैं.
Dhananjay Singh

Dhananjay Singh

सिमटते सिमटते कुल परिचय इतना ही शेष रह गया है कि फिलहाल घुमक्कड़ी, सधुक्कड़ी और हाथ में कलम की लकड़ी। गाजीपुर से काशी हिन्दू विश्वविद्यालय होते हुए देहरादून तक पहुंचे हैं। काम काज बहुत किया अब लिखकर अकाज करते हैं।
A N Sibli

A N Sibli

1993 से हिन्दी, उर्दू और अंग्रेजी के विभिन्न राष्ट्रीय अखबारों और पत्रिकाओं में लेखन कर रहे अब्दुल नूर सिबली इस वक्त दिल्ली से प्रकाशित हिन्दुस्तान एक्सप्रेस में बतौर ब्यूरो चीफ कार्यरत हैं. विभिन्न वेबसाइटों पर नियमित लेखन.
Prem Shukla

Prem Shukla

मुंबई से प्रकाशित हिन्दी सामना के कार्यकारी संपादक. पिछले 20 सालों से पत्रकारिता. पत्रकारिता के साथ ही मुबंई में हिन्दीभाषी समाज के विभिन्न सांस्कृतिक और सामाजिक गतिविधियों में भी सक्रिय. विस्फोट.कॉम के नियमित स्तंभ लेखक.
Puja Shukla

Puja Shukla

पेश से टीवी पत्रकार पूजा शुक्ला धाकड़ लिक्खाड़ हैं. घर परिवार की जिम्मेदारी और टीवी पत्रकारिता के साथ साथ कलम को तलवार की तरह इस्तेमाल करती हैं. दिल्ली युनिवर्सिटी से पढ़ी लिखी पूजा दिल्ली में ही रहती है.
Rajesh Shukla

Rajesh Shukla

राजेश शुक्ला तो बस राजेश शुक्ला है. कला की समीक्षा के अलावा समाज और राजनीति की भी कलात्मक समीक्षा करने में महारत. मीडिया की मजूरी और कलम की गुलामी के अलावा दुनिया में फक्कड़ी ही पसंद आती है.
Abhishek Shrivastav

Abhishek Shrivastav

अभिषेक श्रीवास्तव के परिचय वाला पन्ना आमतौर पर खाली ही रहता है। खुद अपना कुछ पता नहीं। कोई परिचय नहीं। लेकिन हाथ में कलम और एक अदद कैमरा पकड़ लें तो बहुत सारी छुपी अक्सों को परिचय दे देते हैं। संघर्ष जिन्दगी का संघर्ष नहीं, बल्कि जीने का फलसफा है। स्वतंत्र पत्रकार तो हैं ही।
Arvind Shesh

Arvind Shesh

नास्तिकता और नौकरी दोनों साथ साथ। घोषित तौर पर। बिना किसी हिचक के। परिचय के नाम पर सिर्फ इतना कि जनसत्ता में नौकरी। लेकिन काम के नाम पर बहुत कुछ। खासकर लेखन के क्षेत्र में। मुद्दों को कविता और कहानी की शक्ल तो दे ही देते हैं, कभी कभी कविता और कहानी को भी मुद्दा बना देते हैं। दिल्ली में डेरा, बाकी सब तरफ कलम का घेरा।