Diwakar Muktibodh

दंडकारण्य के अरण्य में आरएसएस

छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद समस्या को सुलझाने के लिए सेना के बाद अब एक और अघोषित सेना कमान संभालने जा रही है. अबूझमाड़ ...

नक्सलवाद से जंग, सेना के संग

जून महीने में ही अबूझमाड़ के घने जंगलों में फौज की तैनाती का जवाब नक्सलियों ने जिस तौर तरीके से देना शुरु ...

रमन ने बनाया विनायक को नायक
 

रमन ने बनाया विनायक को नायक

डा. बिनायक सेन की ख्याति, उनके राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय संबंध तथा एक चिकित्सक के रुप में की गई सेवाओं के बीच क्या कोई संगति बैठती है? क्या सचमुच उन्होंने ऐसा कुछ किया है कि छत्तीसगढ़ के आदिवासी जन-जीवन में गुणात्मक परिवर्तन आया है? क्या मुख्यत: दुर्ग एवं बस्तर जिले के जिन क्षेत्रों में उन्होंने काम किया है, वहां के आदिवासियों की जीवन शैली बदली है? क्या वे नागरिक अधिकारों का महत्व समझने लगे हैं? क्या उनमें स्वास्थ्य संबंधी जागरुकता आयी है? यदि इन सवालों का जवाब राज्य सरकार से पूछा जाए तो वह दो टूक शब्दों में कहेगी कि कोई फर्क नहीं पड़ा है। बिनायक सेन ने ऐसा कोई बड़ा काम नहीं किया है कि उन्हें याद रखा जाए। ... Full story

बौद्धिक जुगाली से नहीं मिटेगा नक्सलवाद
 

बौद्धिक जुगाली से नहीं मिटेगा नक्सलवाद

नक्सली समस्या पर अब बात करने के लिए विशेष कुछ नहीं रह गया है। पिछले दो-तीन वर्षों में जब से यह समस्या भयानक रूप से हिंसक हुई है, इस पर काफी बातें हो चुकी हैं। भूमि सुधार, शोषण, अत्याचार, सामाजिक न्याय, विकास कार्य, भ्रष्टाचार, भाई-भतीजावाद, अपहरण, फिरौती, हत्या, मारपीट, जनअदालत, समानांतर सरकार, शांति वार्ता, शर्तें, निशस्त्रीकरण, ऑपरेशन ग्रीन हंट, सलवा जुडूम, जंगलवार, गुरिल्ला युध्द, फौज की तैयारी, वायुसेना का उपयोग, मीडिया की भूमिका आदि-आदि पहलुओं को समेटते हुए विद्वतजनों, राजनीतिकों, केंद्र सरकार के नुमाइंदों, मुख्यमंत्रियों, माओवादी विचारकों एवं मानवाधिकार के पक्षधरों ने जमकर विचार व्यक्त किए, एक-दूसरे को आरोपों के कटघरे में खड़ा किया एवं देश की इस भीषणतम समस्या को सुलझाने के रास्ते सुझाएं लेकिन इन बौध्दिक जुगालियों के अलावा विशेष कुछ नहीं हुआ। ... Full story

'ऑपेरशन पीस' पर अग्निवेश
 

'ऑपेरशन पीस' पर अग्निवेश

सामाजिक कार्यकर्ता स्वामी अग्निवेश एवं उनके कुछ मानवाधिकार साथियों की कोशिशों की वजह से छत्तीसगढ़ पुलिस के 5 जवान नक्सलियों की कैद से आजाद तो हो गए लेकिन क्या 'ऑपरेशन रिहाई' के इस अभियान को शांतिवार्ता की दिशा में नयी संभावनाओं के रूप में देखा जा सकता है? 25 जनवरी को घोर नक्सली इलाके अबूझमाड़ के छोटेडोंगर से अपहृत किए गए पांचों जवानों की सकुशल वापसी निश्चित रूप से स्वामी अग्निवेश और नक्सलियों के बीच संवाद की वजह से संभव हुई। ... Full story

नक्सलियों के नायक सरकार के खलनायक
 

नक्सलियों के नायक सरकार के खलनायक

छत्तीसगढ़ जनसुरक्षा अधिनियम के तहत गिरफ्तार एवं जिला सत्र न्यायालय से उम्रकैद की सजा पा चुके विनायक सेन की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। उनकी जमानत याचिका पर बिलासपुर हाईकोर्ट में सुनवाई चल रही है। उनकी ओर से प्र्रख्यात वकील राम जेठमलानी ने पैरवी की। आगामी 9 फरवरी को हाईकोर्ट की डिवीजनल बैंच शासन के पक्ष को सुनेगी। सुनवाई के पूर्ण होने के बाद विनायक सेन को जमानत मिल पाएगी या नहीं, इस पर देश का ही नहीं, विश्व के अनेक देशों का ध्यान लगा हुआ है। यह मामला अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर कितना गरमाया हुआ है, इसकी झलक यूरोपीय संघ के 8 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल की बिलासपुर हाईकोर्ट में मौजूदगी से मिलती है। इस प्रतिनिधिमंडल में इंग्लैंड, हंगरी, बेल्जियम, फ्रांस, डेनमार्क तथा स्वीडन के सदस्य शामिल है। इस सवाल पर भी बहस छिड़ी हुई है कि यूरोपीय प्रतिनिधिमंडल के इस मामले में रूचि लेने के क्या मायने हैं? क्या इसके पीछे अन्तर्राष्ट्रीय दबाव बनाने के नीयत है या भारत की न्यायिक व्यवस्था पर अविश्वास? ... Full story

कठिन समय में कांग्रेस
 

कठिन समय में कांग्रेस

यकीनन कांग्रेस के दिन अच्छे नहीं चल रहे हैं। इसकी शुरूआत अक्टूबर 2010 में नई दिल्ली में आयोजित राष्ट्रमंडल खेलों में भारी भ्रष्टाचार के खुलासे से हुई। इस प्रकरण में लिप्त भारतीय ओलम्पिक एसोसिएशन के अध्यक्ष एवं कांग्रेस के सांसद सुरेश कलमाड़ी, नई दिल्ली सरकार, केन्द्र सरकार के कुछ अधिकारी, निर्माण कार्य एवं उपकरणों का आयात करने वाली एजेंसियों के कर्ताधर्ता जांच के घेरे में हैं। राष्ट्रमंडल घोटाले के पूर्व भ्रष्टाचार की सुगबुगाहट आईपीएल3 में प्रतिध्वनित हुई थी जब फ्रेंचाइजी में आर्थिक लाभ कमाने के आरोप में विदेश मंत्री शशि थरूर को इस्तीफा देना पड़ा था। ... Full story

Author info

Diwakar Muktibodh Diwakar Muktibodh दिवाकर मुक्तिबोध प्रसिद्ध कवि गजानन माधव मुक्तिबोध के पुत्र और वरिष्ठ पत्रकार हैं. दैनिक भास्कर के रायपुर-विलासपुर संस्करण के संपादक रहे. वर्तमान समय में रायपुर से प्रकाशित एक स्थानीय दैनिक के संपादक. संपादन और लेखन के साथ साथ सामाजिक रूप से भी सक्रिय.

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