D. P. Mishra

बर्बादी के कगार पर बारहसिंघा

उत्तर प्रदेश के एकमात्र दुधवा नेशनल पार्क के हरे-भरे मैदानों में कभी विशाल झुण्डों के रूप में पाया जाने वाला अद्वितीय मृग ...

बाघ के लिए त्रासदी बना इंसान

केंद्र सरकार बाघों के संरक्षण के लिए दो दशक पूर्व से ‘प्रोजेक्ट टाइगर‘ चला रही है। किंतु प्रोजेक्ट टाइगर यूं सफल नहीक ...

गैंडों को बसाएंगे पर हाथी कहां जाएंगे?
 

गैंडों को बसाएंगे पर हाथी कहां जाएंगे?

उत्तर प्रदेश के एकमात्र दुधवा नेशनल पार्क के गैंडा परिवार पर मंडरा रहे आनुवांषिक प्रदूषण से निपटने के उद्देश्य से आसाम से जल्दी ही एक नर गैंडा दुधवा लाया जाएगा। नए गैंडा का परिवार बसाने के लिए गैंडा पुनर्वास परियोजना का क्षेत्रफल भी बढ़ाने की योजना है। इसके अंतर्गत सैकड़ों एकड़ में फैले प्राकृतिक भादीताल के वनक्षेत्र को ऊर्जाबाड़ से घेरकर संरक्षित किया जाएगा। दुधवा के तीस सदस्यीय गैंडा परिवार के लिए आशियाने का विस्तार भले ही ऊपर से ठीकठाक लग रहा हो लेकिन भादीताल इलाका को अपना पंसदीदा शरणगाह बनाकर रहने वाले लगभग चार दर्जन हाथी क्या ऊर्जा बाड़ के भीतर रह पाएंगे? ... Full story

बाघ के रास्ते में खड़ा इंसान
 

बाघ के रास्ते में खड़ा इंसान

पिछले तीन सालों में उत्तर प्रदेश के जिला खीरी एवं पीलीभीत के जंगलों से निकले बाघों के द्वारा खीरी, पीलीभीत, शाहजहांपुर, सीतापुर, बाराबंकी, लखनऊ, फैजाबाद में करीब दो दर्जन के लोग बाघ का शिकार बन चुके हैं. इसे हम इंसानों के लिए त्रासदी कह सकते हैं लेकिन जितनी त्रासदी यह इंसानों के लिए है उससे अधिक त्रासदी उन बाघों के लिए जो इंसानों का शिकार कर रहे हैं. बाघ जन्म से हिंस्रक और खूंखार तो होता है, लेकिन मानवभक्षी नहीं होता। इंसानों से डरने वाले वनराज बाघ को मानवजनित अथवा प्राकृतिक परिस्थितियां मानव पर हमला करने को विवश करती हैं। ... Full story

Author info

D. P. Mishra D. P. Mishra आईआईएम लखनऊ से स्नातक डी. पी. मिश्र वन्यजीव प्रेमी और पत्रकार हैं. वे कहते हैं कि जब वे अपने आस पास की घटनाओं से परेशान होते हैं तो कलम का सहारा लेते हैं. सामाजिक सक्रियता, वन्यजीवन पर कार्य के अलावा सक्रिय लेखन और पत्रकारिता.

Navigate archive

2011

Latest comments