Niranjan Parihar

कांग्रेस के पोर्न स्टार की कसमसाहट

अभिषेक मनु सिंघवी कसमसा रहे हैं। सिंघवी को कांग्रेस का नया पोर्न स्टार कहा जा सकता है। इस पोर्न स्टार की कसमसाहट ...

वसुंधरा की धरा पर भाजपा की औकात

वसुंधरा राजे एक बार फिर खबरों में है। यह तो खैर कोई खबर है ही नहीं कि राजस्थान बीजेपी में घनघोर अंतर्कलह ...

सिनेमा और जिंदगी के असली आदमी थे देवानंद
 

सिनेमा और जिंदगी के असली आदमी थे देवानंद

देव आनंद (देवानंद) खबरों में रहें हों या न रहे हों लेकिन वे हमेशा बहुत महत्वपूर्ण बने रहे। वैसे वे महत्वहीन तो कभी नहीं थे, लेकिन मौत ने उनको एक बार फिर बहुत महत्वपूर्ण बना दिया है। 4 दिसंबर 2011 को लंदन में उन्होंने इस संसार को अलविदा कह दिया। वे जिंदगी भर, जिंदगी के सामने, जिंदगी से भी बड़े सवाल खड़े करते रहे। और जीते जीते तो कर ही रहे थे, जाते जाते भी जिंदगी को यह सवाल दे गए कि कि आखिर 88 साल की ऊम्र तक जीवन के आखरी पड़ाव पर भी कोई इंसान इतना सक्रिय कैसे रह सकता है? ... Full story

दिवंगत पत्रकार ज्योतिर्मय डे
 

अपराधी हो गये अपराध को रिपोर्ट करते करते

राजनीति कवर करते करते बहुत सारे पत्रकार नेता बन गए। फिल्में कवर करते करते कई पत्रकार फिल्मों में एक्टिंग करने के अलावा निर्माण और निर्देशन में लग गए। खेल कवर करते करते कई पत्रकार खेल बोर्ड के चेयरमेन, टीम मैनेजर और टूर्नामेंट के आयोजक बन गए। बिजनेस कवर करते करते कई पत्रकार स्टॉक ब्रोकर और बिजनसमैन बन गए, तो अपराध की दुनिया की खबरों को जीनेवाले किसी पत्रकार का मुकाम क्या होगा ? अगर वह अपराधियों की गोलियों का शिकार बन जाए, या जेल चला जाए, तो किस मामले की हाय तौबा और किस बात की तकलीफ ? ... Full story

कमीशन की कमाई पर लोकतंत्र से लड़ाई
 

कमीशन की कमाई पर लोकतंत्र से लड़ाई

कुल मिलाकर दो बार। पहली बार एक लाख बहत्तर हजार डॉलर। और दूसरी बार एक लाख सत्तानवे हजार डॉलर। दोनों को जोड़कर देखें तो कुल मिलाकर तीन लाख उनहत्तर हजार डॉलर। एक डॉलर यानी आज की तारीख में हमारे हिंदुस्तान के 46 रुपए। 3 लाख 69 हजार डॉलर को भारतीय मुद्रा में आज के हिसाब से तब्दील करके देखें तो कुल एक करोड़ 69 लाख 74 हजार रुपए। दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र को चुनौती देनेवाले आंदोलन के बाद, आपकी जानकारी के लिए, कम से कम अब तो यह बताना जरूरी हो गया है कि ईमानदारी की प्रतिमा और आंदोलन के प्रज्ञापुरुष के रूप में अचानक उभर कर सामने आए अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया को ये करीब पौने चार लाख डॉलर तो अमरीका से ही सहायता के रूप में हासिल हुए हैं। ... Full story

अन्ना हजारे के साथ रामलीला मैदान में अरविन्द केजरीवाल
 

काजल की कोठरी में अन्ना के अरविन्द

अरविन्द केजरीवाल पर सरकार हल्ला बोले और अन्ना हजारे चुप रहें यह कैसे हो सकता है? सरकार उनके आयकर बकाये की रकम मांग रही है तो रालेगढ़ सिद्धी में अन्ना हजारे ने सरकार को चेतावनी दे डाली कि बेवजह अरविन्द केजरीवाल को सरकार परेशान न करे. चेतावनी को थोड़ा धमकी की हद तक ले जाते हुए अन्ना हजारे ने कहा कि अगर सरकार ऐसे ही परेशान करती है तो हमें "दूसरी" तरह से सोचना पड़ेगा. अन्ना ने अरविन्द को क्लीनचिट देते हुए कहा कि जो सरकार कर रही है वह ठीक नहीं है क्योंकि अरविन्द केजरीवाल ने अपना सारा जीवन समाज कार्य के लिए समर्पित कर दिया है. ... Full story

आप न आते तो अच्छा होता
 

आप न आते तो अच्छा होता

मुंबई में बम फटे। धमाके हुए। लोग मरे। और बहुत सारे घायल भी हुए। इन धमाकों के बाद सोनिया गांधी मुंबई आईं। साथ में अपने प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को भी लाईं। रस्म निभाने के लिए दोनों विस्फोट स्थलों पर गए। रिवाज के तहत मृतकों के परिजनों से मिले। उनको ढाढ़स बंधाया। जख्मों पर मरहम लगाने अस्पतालों में भी गए। घायलों से मिले। उनको सांत्वना दी। मुंबई के सामान्य लोग बेचारे बाग – बाग, कि तकलीफ के मौके पर देश के दो सबसे बड़े नेता शहर को संभालने दिल्ली से दौड़े चले आए। मगर क्या तो उनका आना, और क्या जाना। इस शहर की जिंदगी के असली आसमान पर मनमोहन और सोनिया गांधी का आज कोई असर नहीं है। ... Full story

राजीव शुक्ला की तिलस्मी ताबीज
 

राजीव शुक्ला की तिलस्मी ताबीज

वे संबंधों के समानांतर संसार की संकरी गलियों के रिश्तों की राजनीति के राज पता नहीं वे कब जान गए थे। इसीलिए कांग्रेस से लेकर क्रिकेट, मीडिया से लेकर ग्लैमर और ङद्योग जगत से लेकर राजनीति के लोगों के बीच सामंजस्य भी वे बहुत सहजता से बिठा लेते हैं। राजनीति में रिश्ते और रिश्तों की राजनीति की अहमियत अपन भी जानते हैं। और यह भी जानते हैं कि इनको सम्हालने के लिए एक अलग किस्म की ऊर्जा हासिल करनी होती है। मगर यह सवाल आज भी जवाब का मोहताज है कि बिल्कुल आपकी और हमारी तरह के हाड़ मांस से बने राजीव शुक्ला नामक यह आदमी इतनी सारी ऊर्जा पाता कहां से है? ... Full story

आतंक की राजधानी
 

आतंक की राजधानी

मुंबई को अब तक हम देश की आर्थिक राजधानी कहते रहे हैं। कुछ लोग इसे ग्लैमर की राजधानी भी मानते हैं। गालिब के दिल बहलाने वाले ख़याल की तरह इस शहर को हम आगे भी भले ही यही उपमाएं देते रहें। मगर हकीकत यह नहीं है। आतंकवाद ने देश की इस आर्थिक राजधानी के ग्लैमर को लील लिया है। और बीते कुछेक सालों के इतिहास पर नजर डालें तो, सबसे बड़ी हकीकत यही है कि मुंबई अब सिर्फ आतंक की राजधानी है। मगर, यह शहर बार बार अपने पर लगते आतंक के इस तमगे को हर बार हटाकर फिर से अचानक अपने असली अस्तित्व में आ जाता है। ... Full story

बम धमाकों से दहल गई मुंबई
 

बम धमाकों से दहल गई मुंबई

मुंबई एक बार फिर दहल गई है। जवेरी बाजार, ऑपेरा हाउस और दादर में धमाके हुए। 21 लोगों के मारे जाने की सरकारी पुष्टि हो चुकी है और करीब सवा सौ लोग घायल हैं। शहर के इन सबसे भीड़ भरे तीन इलाकों की तासीर एक ही है। तीनों बेहद व्यस्ततम व्यापारिक इलाके हैं। जवेरी बाजार देश का सबसे बड़ा सोने का थोक बाजार है, ऑपेरा हाउस देश का सबसे बड़ा डायमंड बाजार और दादर रिटेल बाजार है। लेकिन तीनों ही इलाके बेहद भीड़भाड़ वाले हैं। हालांकि दादर मध्य मुंबई में है और जवेरी बाजार और ऑपेरा हाउस दोनों दक्षिण मुंबई में है। मगर तीनों ही इलाकों की तासीर यही है कि शाम के समय यहां लोगों की आवाजाही कुछ ज्यादा ही बढ़ जाती है। ... Full story

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Niranjan Parihar Niranjan Parihar मीडिया में प्रभाष जोशी और एसपी सिंह के प्रति बेहद कृतज्ञ निरंजन परिहार ने पंद्रह साल तक प्रिंट और सन 2000 के बाद से टीवी की खबरों को जो धार बख्शी, वह मुंबई की पत्रकारिता के लिए मिसाल हैं। बेजान खबरें लिखे जाने की परंपरागत शैली को उलटकर रख देने वाले परिहार का सफर नवभारत टाइम्स से शुरू हुआ और जनसत्ता में एक दशक तक रहने के बाद दो साल तक प्रात:काल दैनिक के स्थानीय संपादक भी रहे। सहारा समय टीवी नेटवर्क में संपादकीय समन्वयक और आइटीएन टीवी में सीनियर एडीटर भी रहे। और डॉक्यूमेंट्री फिल्में भी बनाई।

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