Anil Pandey
टीपू कैसे बना सुल्तान?
इतिहास में मैसूर सल्तनत के टीपू सुल्तान को समय से आगे जाकर सोचने और उसके अनुसार रणनीति बनाने के लिए जाना जाता ...
तालमेल का घालमेल
उत्तर प्रदेश में चुनाव आखिरी चरण में पहुंच चुका है. चुनावी पंडितों के मुताबिक उत्तर प्रदेश में किसी को बहुमत मिलता नहीं ...
नयी सोच का समाजवाद
कहते हैं, इतिहास खुद को दोहराता है. कभी उत्तर प्रदेश की राजनीति एक साथ दो नौजवानों को देखा जो अमेरिका से पढ़कर राजनीति के मैदान में उतरे थे. इसमें से एक अजीत सिंह थे और दूसरे राजीव गांधी. एक बार फिर भारतीय राजनीति में ऐसे दो युवाओं का उदय हुआ है, जो अपने अपने तरीके से युवाओं के जरिए राजनीतिक बदलाव की कोशिश कर रहे हैं. उत्तर प्रदेश के चुनावी माहौल में आजकल इन दोनों युवराजों की खूब चर्चा है. विदेश से शिक्षा-दीक्षा पाने वाले दोनों ही, युवाओं के दम पर राजनीतिक बदलाव की बाते करते हैं. इनमें एक हैं पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी के पुत्र राहुल गांधी, तो दूसरे हैं धरतीपुत्र कहे जाने वाले उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव के पुत्र अखिलेश यादव. ... Full story
नितिन गडकरी का गेमप्लान
उत्तर प्रदेश में बाबू सिंह कुशवाहा कांड भाजपा को इतना भारी पड़ेगा इसका अंदाज नितिन गडकरी को भी नहीं था. कुशवाहा की इस आवाजाही में क्या सचमुच भाजपा का नुकसान हुआ है या पूर्व योजना के अनुसार चलते रहने पर भाजपा को फायदा, इसे सटीक रूप में अभी बता पाना मुश्किल है. लेकिन व्यावसायिक पृष्ठभूमि के भाजपा अध्यक्ष एक गेमप्लान के तहत कुशवाहा जैसे नेताओं को भाजपा में लाने की हरी झंडी दिखा रहे थे. नितिन गडकरी चाहते थे कि उत्तर प्रदेश में पिछड़े वर्ग के नेताओं के भरोसे मैदान मार लिया जाए, इसीलिए उन्होंने यह कदम उठाया. लेकिन नितिन गडकरी का यह अकेला प्रयास नहीं है. 2012 के विधानसभा चुनावों को भाजपा अध्यक्ष नितिन गडकरी कैसी रणनीति और तैयारी से लड़ रहे हैं इसका जायजा ले रहे हैं अनिल पांडेय. ... Full story
कोयले की खान में हीरा
अगर मौका मिले तो तिल में ताड़ की ऊंचाई छूने की भरपूर संभावना होती है. ओमप्रकाश, किंसु, कालू, बंटी, अमरलाल ने इसे साबित कर दिखाया है. ओमप्रकाश भी एक दुबला पतला सा सरकारी स्कूल में पढ़ने वाला लड़का है. जैसे गांव के अमूनन बच्चे शर्मीले होते हैं, वैसा ही ओम प्रकाश भी दिखता है. लेकिन जैसे ही आप उससे बातचीत शुरु करते हैं, आपकी यह धारणा टूट जाएगी. देश-दुनिया को बदलने का उसका जज्बा आप को हैरानी में डाल देगा. उसके साहसिक कारनामों को सुनकर आप भी हमारी तरह ही दांतो-तले उंगली दबा लेंगे. कई देशों की यात्रा कर चुका ओमप्रकाश जैसा दिखता है, दरअसल वैसा है नहीं. ... Full story
हम अनएम्प्लॉयड यूथ नहीं, अनएम्प्लॉयड फादर पैदा कर रहे हैं
इनके पिता तीन बार सूबे के मुख्यमंत्री रहे हैं. इनकी पढ़ाई विलायत में हुई है, लेकिन इन दिनों उत्तर प्रदेश में इनकी सहज उपलब्धता और साइकिल की सवारी उन्हें दूसरे हाई प्रोफाइल नेता पुत्रों से जुदा कर रही है. हमेशा मुस्कराने और खिलखिलाने वाला उनका चेहरा कार्यकर्ताओं में जोश भर देता है. प्रदेश में सबसे पहले चुनावी यात्रा का बिगुल बजाने वाले अखिलेश यादव से उन्नाव गेस्ट हाउस में हुई अनिल पांडेय की लंबी बातचीत. ... Full story
पीएचडी का गोरखधंधा, राज्यपाल पर भी फंदा
अभी हाल में ही विस्फोट ने पीएचडी देने की प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए इसे नेट के बराबर न करने की दलील दी थी. पीएचडी का गोरखधंधा कैसा है और कैसे लोग पीएचडी हासिल कर लेते हैं यह घटना उसका जीता जागता उदाहरण है. पीएचडी का गोरखधंधा केवल दिल्ली में हो रहा है ऐसा नहीं है. देश के दूरदराज के इलाकों में भी नकली पीएचडी के जरिए नौकरियां की जा रही हैं. पता चल जाने पर अगर प्रोफेसर बर्खास्त हो जाता है तो अपनी जोड़ जुगत से वह दोबारा नौकरी पाने की लाइन में लग जाता है. नैनीताल स्थित कुमाऊं विश्वविद्यालय में हुई ऐसी ही एक धोखाधड़ी को देखकर आप भी जानिये कि इस देश में नकली पीएचडी के जरिए नौकरी का कैसा गोरखधंधा चल रहा है. ... Full story
जो टिका रहा वो टिकैत
कभी मैं सामने चारपाई पर लेटे शख्स को देखता, कभी लेटे हुए शख्स के सिरहाने लगी तस्वीर को. दोनों चेहरे एक ही थे, लेकिन परिस्थतियां अलग अलग... एक वह चेहरा था जो मौत को चुनौती दे रहा था, तो दूसरा वह, जो दूसरा सत्ता को. यह अप्रैल के आखिरी हफ्ते की बात है. मैं मुजफ्फरनगर में भारतीय किसान यूनियन के अध्यक्ष चौधरी महेंद्र सिंह टिकैट के पास बैठा था. वह बोन कैंसर जैसी जानलेवा बीमारी से जूझ रहे थे. डाक्टरों का कहना था कि कैंसर का आखिरी (थर्ड) स्टेज है. चारपाई पर लेटे टिकैट की जबान लडख़ड़ा रही थी, पर कड़क बरकरार. ... Full story
जातिमेव जयते!
उत्तर प्रदेश में मायावती को सत्ता से बाहर करने के लिए सूबे के राजनितक दलों ने कमर कस ली है. सभी दल 'मिशन 2012' की तैयारी में जुट गए हैं. रैलियों और सम्मेलनों के जरिए राजनीतिक दल अपने कार्यकर्ताओं और समर्थकों में जोश भरने की कोशिश कर रहे हैं. बसपा को पछाडऩे के लिए सभी दलों ने उसके मजबूत वोट बैंक में सेंध लगाने की रणनीति बनाई है. दरअसल बसपा ने पिछले विधानसभा चुनाव में जिस तरह से सोशल इंजीनियरिंग की व्यूह रचना करते हुए दलित, सवर्ण और पिछड़ों का नया जातीय गठजोड़ बना कर सत्ता हासिल की थी, विपक्षी दल उसी गठजोड़ को तोडऩे में जुटे हुए हैं. ... Full story
बीहड़ के बियाबान में
प्रतिष्ठा, प्रतिशोध और प्रताडना चंबल के खून में है. यह धरती डाकू भी पैदा करती है और सिपाही भी. कई घरों में तो ऐसा है कि एक भाई डाकू है तो दूसरा भाई सिपाही. हमने दस्यु प्रभावित क्षेत्र ग्वालियर, शिवपुरी, गुना, भिंड, मुरैना, इटावा और आगरा के विभिन्न इलाकों का दौरा किया. इस दौरान पाया कि यहां आजादी के साठ साल बाद भी विकास की बयार कहीं दिखाई नहीं देती. गांवों में न सड़कें है और न ही दूसरी बुनियादी सुविधाएं. बीहडों में कई जगह हालत यह थी कि हमें अपनी गाड़ी दूर छोड़कर पैदल सफर करना पड़ता था. ... Full story
