Pankaj Chaturvedi
राजनीतिक मनमर्जी की निर्मम बनर्जी
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की राजीनति की अपनी एक निराली शैली है। शायद इसी निराली शैली का कमाल है कि ...
मौज होगी या मनाएंगे मातम?
बढ़ती जनसँख्या और खाद्यान्नों की आसमान चूमती कीमतों के मध्य सरकार का सस्ते दामों पर अनाज का कानून निश्चय ही प्रशंसा का ...
आरएसएस का इस्लाम प्रेम
भारत को हिन्दूराष्ट्र बतानेवाला संघ यदि मुस्लिम प्रेम की बात करें तो कुछ अजीब सा लगता है। विगत दिनों मध्यप्रदेश के राजगढ़ में आयोजित संघ के एक कार्यक्रम में स्वयंसेवकों की भारी भीड़ में संघ प्रमुख मोहन भागवत ने जो बोला उसका आशय यही है कि संघ अब मुसलमानों से प्रेम करेगा यह प्रेम वास्तविक होगा या छलवा इसका उत्तर तो समय के गर्भ में है। ... Full story
अन्ना आंदोलन का टूटता तिलिस्म
यह एक पुरानी कहावत है कि जो जितना तेजी से ऊपर जाता है वो उतना ही तेजी से नीचे भी आता है। ऊँचाइयों पर पहुचना आसान है किन्तु ऊंचाईयों पर टिके रहना कठिन है। अन्ना आंदोलन के बाद वर्तमान परिदृश्यों को देखते हुए ऐसा लगता है कि यह सब अन्ना और उनके सहयोगियों के साथ भी घटित हो रहा है। जिस तरह से टीम अन्ना के अगुआ अपनी टीम को बचाये रखने और कोर कमेटी को भंग न करने का ऐलान कर रहे हैं उससे लग रहा है कि अंदर भितरघात का अंतहीन दौर चल पड़ा है जिसका नकारात्मक असर पूरे अन्ना के आंदोलन पर पड़ सकता है। ... Full story
खार खाये देश का प्यार
पाकिस्तान की युवा विदेश मंत्री हिना रब्बानी खार जब भारत आई थीं तो द्विपक्षीय संबंधों में नयी उम्मीद जगाकर गई थीं. अब उन्हीं हिना रब्बानी खार ने एक ऐसी घोषणा की है जो 35 सालों से प्रतिक्षित था. हिना ने हाल में ही कहा है कि पाकिस्तान भारत को एमएफएन (मोस्ट फेवर्ड नेशन) का दर्जा देगा. भारत से हमेशा खार खाए रहने वाले पाकिस्तान की खार का बयान सुखद और आश्चर्यजनक है. ... Full story
अन्ना के निशाने पर सिर्फ कांग्रेस क्यों?
देश में कब और कहाँ आम चुनाव होते हैं शायद यह साधारण आदमी की रूचि का विषय नहीं होता है। इन आम चुनावों की प्रक्रिया और परिणामों से सिर्फ उसी का सरोकार होता है, जिसके क्षेत्र का उपचुनाव हो। लेकिन हरियाण के हिसार का लोकसभा उपचुनाव जन-लोकपाल से जननायक बने अन्ना हजारे के कांग्रेस से सीधे-सीधे दो हाथ करने की वजह से, इस समय का सबसे चर्चित उपचुनाव बन गया है। अब तो चुनाव परिणाम ही बताएंगे कि अन्ना की अपील का हिसार में क्या असर हुआ लेकिन राजनितिक विश्लेषकों की माने तो इस सबसे कांग्रेस को नुकसान हुआ है। ... Full story
देश की वर्तमान परिस्थितियां और मध्यावधि चुनाव
पिछले एक पखवाड़े से देश में मध्यावधि चुनाव की चर्चा आम है। देश की मुख्य विपक्षी पार्टी भाजपा बड़े जोर-शोर से इस बात को प्रचारित और प्रसारित करने में जुटी है कि दिल्ली की वर्तमान कांग्रेस सरकार लड़खड़ते हुए चल रही है ,ऐसा लगता है की यह २०१४ तक का सफर तय नहीं कर पाएगी। इस सब में वास्तविकता कम और राजनीति अधिक नजर आती है। या यह कहा जाये कि यह भाजपा की आत्ममुग्धता है तो गलत नहीं होगा। ... Full story
अंतरात्मा को आंदोलित करने की जरूरत
यह सब बातें अन्ना की चौकडी से लेकर अन्ना जिन्दाबाद करने वाले हर आदमी से लेकर आप और मुझ पर भी लागू होती है कि क्या हमारा अन्तकरण निस्वार्थ और शुद्ध है? यदि हम सब अपना स्वयं का जनलोकपाल बना लें और स्वयं को उसके दायरें में शामिल कर गलती पर स्वदंड निर्धारित कर लें तो फिर किसी अन्ना और आन्दोलन की जरुरत ही नहीं पड़ेगी। लेकिन तकलीफ यह है की हमारे अंदर का आंदोलन मर चुका है है और हम अपने नैतिक उद्धार के लिए बाहरी आंदोलनों के मोहताज है। हमरी अंतरात्मा सो रही है। यदि यह सब जागृत हो जाये तो हो सकता की भविष्य में इस तरह के आंदोलनों पर खर्च होने वाले संसाधन चाहे वो किसी ने भी जुटाए हो, देश निर्माण में या अन्य किसी जरूरतमंद के काम आ सकें। ... Full story
इतनी बड़ी आबादी फिर भी खाने की बरबादी
क्या भारत को पाकिस्तान से प्रेरित होकर कुछ करना चाहिए? निश्चय ही हममें से अधिकांश का उत्तर ना में होगा। लेकिन इस विषय में कुछ ऐसा ही है कि जो पाकिस्तान ने किया है हमे उसका अनुसरण करना चाहिए। विगत दिनों हमारे देश में भी इस परिपेक्ष्य में केंद्रीय स्तर पर विचार-विमर्श हुआ। चर्चा का केंद्र पाकिस्तान का वन–डिश कानून है, जो सार्वजनिक और व्यक्तिगत समरोह में भोजन-पानी की बर्बादी रोकने का एक सटीक उपाय है। ... Full story
सिर्फ नर्मदा में नहाने से नहीं सुधरेंगे आदिवासियों के हालात
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने बड़े दावे के साथ मध्य प्रदेश में नर्मदा नदी के किनारे नर्मदा कुंभ का आयोजन किया. इस कुंभ में दावा किया गया कि सिर्फ नर्मदा माई का स्नान करवाकर संघ भटके हुए आदिवासियों को भारत की मुख्यधारा में शामिल कर देगा. लेकिन क्या ऐसा संभव है? ईसाई संगठनों और राजनीतिक दलों के विरोध के बीच राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने भले ही अपना हेतु पूरा कर लिया हो लेकिन आदिवासियों का हित कहीं से भी पूरा नहीं होता है. ... Full story
