Prakash Chandalia

बदलाव के नाम पर बदले की राजनीति

यस वी कैन- बराक ओबामा ने सन् 2008 में अमेरिकी राष्ट्रपति पद की जंग में इन तीन शब्दों को मनोहारी नारा बनाकर ...

ममता बनर्जी से बंगाल को एलर्जी

4 साल के वामपंथी शासन से पश्चिम बंगाल को मुक्त कराने वाली ममता बनर्जी की मां-माटी-मानुष की सरकार का हनीमून शायद खत्म ...

पेट काटकर कार के लिए रास्ता
 

पेट काटकर कार के लिए रास्ता

सियासी चालों और कारोबारी नैनों के बीच चल रहे कार और पेट के इस खेल में जीत शायद कार की हो जाए, पर यह जीत देश के करोड़ों गरीबों को किसी नैनो के तले कुचलने जैसे अपराध से कमतर हरगिज न होगी। नेताओ, बस इतना जवाब दे दो-चुनाव नैनो के मसले पर पर लड़ते हो या पेट और भूख के मसले पर... ... Full story

केन्द्र पर ममता के दबाव का दांव
 

केन्द्र पर ममता के दबाव का दांव

मंहगाई के मुद्दे पर प्रधानमंत्री के सामने जा रहे ममता बनर्जी के सांसद ऐसा कुछ भी नहीं कहने वाले जिससे सरकार के अस्तित्व को खतरा उत्पन्न हो. हालांकि खबर यह है कि ममता बनर्जी के सांसदों ने आपस में मीटिंग करके यह तय किया है कि वे सरकार को बाहर से समर्थन देने का प्रस्ताव करेंगे. अगर ऐसा है तो फिर ममता बनर्जी ने उनसे आखिरी निर्णय न लेने के लिए क्यों कहा है? प्रकाश चंडालिया बता रहे हैं कि यह ममता की केन्द्र पर कड़ी पकड़ बनाये रखने की रणनीति है. ... Full story

ये भी अन्ना वो भी अन्ना
 

ये भी अन्ना वो भी अन्ना

अन्ना हजारे आज कई शब्दों के पर्यायवाची बन गए हैं। वे महात्मा गांधी के भी पर्यायवाची बना दिए गए हैं और भ्रष्टाचार विरोध के भी। वे पिछले 8 दिनों से अनशन पर हैं और जी भरकर दो नंबरी धंधे से जुड़े लोग भी उनकी लीला देखने रामलीला मैदान भ्रमण करने आते-जाते हैं। इस अभियान को 8 दिन हो गए हैं। आज एक दिन और बीत जाए तो लोगों को नवरात्रे का पुण्य भी मिल सकता है...। ... Full story

Author info

Prakash Chandalia Prakash Chandalia प्रकाश चण्डालिया का राजस्थान के चुरू जिले के राजलदेसर गाँव में जन्म. साहित्यानुरागी पितामह की प्रेरणा से १९८२ से पत्रकारिता में. सन्मार्ग, सेंटीनेल, नवभारत टाईम्स , राजस्थान पत्रिका, खेल हलचल, सरीखे समाचारपत्रों के लिए नियमित लेखन के बाद सन्डे मेल और जनसत्ता में १९९१ से १९९५ तक रिपोर्टिंग. आकाशवाणी और दूरदर्शन के लिए लगातार वार्ताएं की. सन १९९६ से २००० तक सांध्य महानगर गार्जियन और २००१ से अब तक राष्ट्रीय महानगर का संपादन-प्रकाशन.

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