Rajiv Sharma
नरेगा के प्याले में कर्मचारियों का तूफान
मजदूरों को काम का अधिकार देने वाले नरेगा कानून से अब उसके कार्मिक ही खफा हो गये है। राजस्थान भर में 15 ...
रोजाना बढ़ रही है अशोक गहलोत की मुश्किलें
यूं तो दिवाली बहुत नजदीक है, लेकिन राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के लिए लगता है ये दिवाली सुखद नहीं है। बीते ...
जाट लॉबी के सामने पस्त हुये गहलोत
राजस्थान में बहुत जल्द किसी बड़े परिवर्तन की उम्मीद में नजर नहीं आ रही है। राष्ट्रपति को लेकर मंत्री अमीन खां ने एक बयान भर दिया था गहलोत ने आनन फानन में मंत्री का इस्तीफा ले लिया लेकिन भंवरी के मामले में गहलोत ने शुरू से ही चुप्पी साध रखी थी। रही सही कसर सीबीआई को जॉच सुपुर्द कर पूरी कर दी। भंवरी के मामले में धीरे धीरे जाट लॉबी ने जिस तरह से दबाब बनाया लगता है अब कांग्रेस और सरकार दोनों को ही कुछ करना मुश्किल हो गया है। ... Full story
राजस्थान सरकार पर सितमों का सितंबर
दिसंबर 2011 में तीन साल का कार्यकाल पूरा करने जा रही राजस्थान सरकार के लिए सितंबर का महीना सितमों से भरा गुजरा है। एक के बाद एक ऐसे मामले सामने आऐ है कि सरकार हिल रही है। हिचकोलों के साथ चल रही सरकार अपना कार्यकाल पूरा कर पाऐगी इसकी उम्मीद कम ही है। सरकार चली तो अशोक गहलोत के ऊपर संकट के बादल जरूर गहराने लगे है। हो सकता है कुछ भी न हो लेकिन बीते सितंबर ने सरकार को बैकफुट पर जरूर ला दिया है। ... Full story
खूनी राजनीतिक का शिकार पूर्वी सिंह द्वार
राजस्थान का पूर्वी सिंह द्वार है भरतपुर। इतिहास में भले ही लोगागढ कहा गया हो वर्तमान में खस्ताहाल है। राजनीति की बिसात पर हमेशा से उपेक्षा का शिकार ये जिला रहा है। लेकिन सितंबर के शुरू से ही भवरी के भवरजाल में उलझी सरकार का सुकून इस जिले ने भी छीन रखा है। तथाकथित पुस्तक विवाद से पीछा छूटा तो मेवात के इलाके में गर्मी बढ गई है। पोखर की एक जमीन को लेकर दो पक्षों में विवाद होता है और दर्जनभर लोग हलाक हो जाते हैं। हालात बेकाबू है लेकिन नियंत्रण में होने की बाते कहीं जा रही है। न मौतों की संख्या को सही करके बताया जा रहा है न घटना को लेकर कोई कुछ कह पा रहा है। वैसे इन दोनों घटनाओं में कोई साम्य नजर नहीं आ रहा है लेकिन दोनों को अलग करके देखना भी मुश्किल काम है। पुस्तक विवाद की महापंचायत में प्रदेश में ‘‘तीसरे मोर्चे’’ को लेकर चर्चा हुई। पूर्व सांसद विश्वेन्द्र की ओर से हालिया मामले में चुप्पी साध रखी है। मेवात को लेकर हमेशा से मुखर रहने वाले वि’वेन्द्र की चुप्पी लोगों में सवाल पैदा कर रही है। ... Full story
कलक्टर को नहीं मिल रहे मुख्यमंत्री के पत्र
मुख्यमंत्री खुद कलक्टरों को पत्र लिखते हों ऐसा कम ही होता है। आम तौर पर मुख्यमंत्री कार्यालय से पत्र व्यवहार किया जाता है। जयपुर स्थित शासन सचिवालय के मुख्यभवन में मुख्यमंत्री के एक विशेषाधिकारी बैठते है। प्रदेश भर से मुख्यमंत्री के नाम इस कार्यालय में आने वाले शिकायतकर्ताओं, उनके पत्रों को दर्ज किया जाता है। इस कार्यालय के विशेषाधिकारी ललित कुमार सभी सवंधित विभागों,कलक्टरों को मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से आव’यक कार्यवाही हेतू पत्र लिखते है। इन पत्र की प्रति शिकायतकर्ता को भी प्रेषित करने का प्रावधान है। भरतपुर में एक मामला ऐसा सामने आया है जिसमें शिकायतकर्ता को तो पत्र की प्रति मिल गई है लेकिन जिला कलक्टर को पत्र नहीं मिला है। ये पूरा मामला सूचना के अधिकार के तहत माँगी गई जानकारी से सामने आया है। वैसे ये केवल एक पत्र का मिलना भर नहीं है। पूरे मामले में गंभीर लोच है। ... Full story
गहलोत की कांग्रेस को मिल गया प्रदेश अध्यक्ष
दो साल की कशमकश और खींचतान के बाद राजस्थान प्रदेश कांग्रेस को नया अध्यक्ष मिल गया है। मई 2009 में डां सी पी जोशी के केन्द्रीय मंत्री बनने के बाद से प्रदेश कांग्रेस को नये अध्यक्ष की तलाश थी। कई बार सरगर्मिया बढने के बाद भी इसे लेकर कोई फैसला नहीं हो पाया था। हाल ही में सोनिया गाँधी के प्रदेश दौरे के बाद एक बार फिर से जोर आजमाईश शुरू हुई थी। दर्जनों नामों के बीच से डां चंद्रभान को ये जिम्मेदारी दी गई है। लोगों की माने तो इसके बाद कांग्रेस में जातीय गणित गडबडा गया है। ऐसे में ये देखना होगा कि आगे के चुनावों में इसका क्या असर पडता है। ... Full story
न जन आये न ज्वार उठा
भ्रष्टाचार के खिलाफ शुरू हुए अन्ना दे आंदोलन का करीब 25 दिनों में ही ऐसा दम निकल जाएगा इसकी कल्पना भी नहीं की जा सकती. जंतर मंतर के बाद पहली रैली बनारस में होनी थी. इंडिया अगेन्स्ट करप्शन के कर्ता धर्ता जंतर मंतर पर मिले अपार जनसमर्थन अभिभूत इतने हैं कि खुमार उतारे नहीं उतर रहा. लेकिन 29 अप्रैल को बनारस में अन्ना के नाम पर आयोजित फ्लाप शो को देखकर यकीन करना मुश्किल हो जाता है कि भ्रष्टाचार के खिलाफ अन्ना के आंदोलन का दम इतनी जल्दी कैसे निकल गया? न जमीन पर जनता नजर आयी और न खबरों में अन्ना हजारे. बनारस से लौटकर राजीव शर्मा की रिपोर्ट ... Full story
हजारे नहीं पर हजारों आयेगें
दिल्ली के जंतर के बाद अन्ना हजारे की बनारस में असली परीक्षा होने होने वाली थी। 29 अप्रैल शुक्रवार को यहॉ एक आमसभा होनी है। लेकिन अब उस सभा में अन्ना हजारे शिरकत नहीं करेगें। बीमारी ने उन्हें यहॉ आने की इजाजत नहीं दी। बाबा विश्वनाथ की नगरी में इस सूचना के बाद मायूसी जरूर नजर आई। लेकिन भारत माता मन्दिर से आजाद पार्क तक निकाले गये युवाओं के मशाल जुलूस ने ये संदेश देने की कोशिश की है कि भले ही अगुवा न आ रहे हों अपना समर्थन देने लोग हजारों की तादाद में जुटेगें। ... Full story
कवि तुझसे होड़ है मेरी
'काल तुझसे होड़ है मेरी।' ये उस कवि की कविता है जिसका जन्मशती समारोह मनाया जा रहा है। कवियों का जमकर जमावड़ा हुआ है. कुछ जाने कुछ अनजाने कवि शमशेर को याद करने के बहाने अपने आपको साबित करने में लगे हुए हैं. कवि शमशेर ने भले ही कालजयी कविता लिख काल से होड़ लेने की कोशिश की हो लेकिन उनकी जन्मशती उत्सव को देखकर लगा जैसे वहां मौजूद लोग साबित करने में लगे हुए हैं कि कवि तुझसे होड़ है मेरी. कवियों ने यह होड़ शायद उन कवि शमशेर से भी लगा रखी है जिनकी याद में इकट्ठा हुए हैं. ... Full story
