Rajiv Yadav

सियासत का गुनाह और बेगुनाहों की सियासत

सवाल आतंकवाद के नाम पर जेलों में बंद बेगुनाह मुस्लिम नौजवानों का नहीं और न ही लोकतांत्रिक ढांचे के पुलिस तंत्र और ...

शत्रु बनाते बीत गये चौंसठ साल

राष्ट्रीय सुरक्षा, एकता, संप्रभुता जैसे तमाम सवालों के बीच जब एक बार फिर स्वतंत्रतता दिवस का जश्न मनाने जा रहे हैं तो ...

लश्कर-हूजी का हौव्वा
 

लश्कर-हूजी का हौव्वा

मुंबई में हुए बम धमाकों के बाद इसकी जांच कर रही केंद्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) और मुंबई पुलिस के आतंकवाद निरोधी दस्ते (एटीएस) के बीच उपजे विवाद ने इस मामले पर कई दृष्टिकोणों से सोचने के लिए मजबूर कर दिया है। अव्वल तो आखिर वो कौन से तथ्य थे जिनको एटीएस ने नकार दिया और एनआईए को जांच में सहयोग नहीं किया, दूसरा आखिर इन तथ्यों में क्या अंतर्विरोध क्या थे? ... Full story

आजमगढ़ का नाम बदनाम न करो
 

आजमगढ़ का नाम बदनाम न करो

मुंबई में 13 जुलाई को हुए बम धमाकों के बाद उत्तर प्रदेश के अखबारों में आजमगढ़ फोबिया फिर सुरुर पर है और पत्रकारों में कथित खूफिया सूत्रों, कथित स्रोतों की आड़ में खूब कुलांचे मार-मार के फर्जी खबरें की होड मच गई है। मिसाल के तौर पर अमर उजाला लखनऊ के 16 जुलाई के अंक को ही लेते हैं जिसकी मुख्य पृष्ठ की पहली लीड स्टोरी ‘‘संजरपुर के सैकड़ों मोबाइल फोन पर खूफिया निगाहें’’ को ही लेते हैं। यह खबर न सिर्फ आजमगढ़ को बदनाम करने की शातिर कोशिश है बल्कि कई पहलुओं से तो हास्यास्पद भी बन गई है। ... Full story

जमीन पर छिड़ी जमीन की जंग
 

जमीन पर छिड़ी जमीन की जंग

2006 दादरी, 2007 घोड़ी बछेड़ा, 2008 बादलपुर, 2009 टप्पल, 2011 कचरी और बारा समेत तमाम ऐसी तारीखें हैं जो अब यूपी में किसान आंदोलन का इतिहास बना चुकी हैं। यूपी में दादरी से शुरु हुआ भूमि अधिग्रहण के खिलाफ किसान आंदोलन की धमक आज सैकडों किलोमीटर दूर पूरब में कचरी करछना में प्रतिरोध के नए प्रतिमान स्थापित कर रहा है, तो वहीं इलाहाबाद के बारा के किसानों ने जेपी के पावर प्लांट के लिए भूमि-अधिग्रहण और पुर्नस्थापना नीति के विरुद्ध अपनी उपजाउ जमीनों को बचाने के लिए आंदोलन का बिगुल फूंक दिया है। दरअसल किसानों का यह असंतोष जमीनों को औने-पौने दामों में अधिग्रहित करने के लिए अंग्रेजों के जमाने में बनाए गए भूमि-अधिग्रहण कानून 1894 को बदलने के लिए भी है। ... Full story

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Rajiv Yadav Rajiv Yadav इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक राजीव दिल्ली स्थित आईआईएमसी से मीडिया में मास्टर डिग्री ले चुके हैं. फिलहाल इलाहाबाद में रहकर मुक्त पत्रकारिता और जनाधिकार के मुद्दों पर सक्रिय कार्य कर रहे हैं. विस्फोट पर लेखन.

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