Rambahadur Rai

सत्ता के चिंतन में हो गये चरित्रहीन

उत्तर प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी की राजनीति को लेकर पूरे देश में कोहराम मचा हुआ है। पार्टी में बसपा से आये ...

दगाबाज रथयात्री

वह भी अक्टूबर ही था और यह भी वही महीना है। लेकिन तब के अक्टूबर और अब के अक्टूबर में जमीन आसमान ...

इमरजंसी का डर मत दिखाओ
 

इमरजंसी का डर मत दिखाओ

इस समय देश की जो राजनीतिक परिस्थितियां हैं उसकी तुलना 1975 के जून महीने से नहीं की जा सकती. 25 जून की रात इंदिरा गांधी ने देश पर इमरजंसी थोपी, लोकतंत्र की हत्या की और इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले से जो उनकी कुर्सी छिन रही थी उसे बचा लिया. प्रधानमंत्री की कुर्सी बचाने की कीमत देकर इस देश में उस वक्त लोकतंत्र की हत्या की गयी. ... Full story

अन्ना की टोली पर बातों की गोली
 

अन्ना की टोली पर बातों की गोली

अप्रैल में शुरू हुए आंदोलन का फैसला हो गया। अगर मनमोहन सिंह सरकार ने बाबा रामदेव और उनके समर्थकों को रामलीला मैदान से लाठी-डंडों से पीटकर भगा दिया तो अन्ना हजारे की टोली को बातों की गोली मारकर भगा दिया गया है। अब अन्ना हजारे को दिग्विजय सिंह जैसे नेता धमकी दे रहे हैं कि दोबारा अनशन हुआ तो उनके साथ भी वैसा ही सुलूक होगा जैसा बाबा रामदेव के साथ हुआ। हम जिस केन्द्र सरकार के शासन में सांसे ले रहे हैं उससे इसी तरह की उम्मीद की जा सकती है. मनमोहन सिंह की सरकार के नुमाइंदे जो बोल रहे हैं उसमें आश्चर्यजनक कुछ नहीं है, वे अगर ऐसा नहीं बोलते तो जरूर आश्चर्य होता. ... Full story

नई दिल्ली में पत्रकारों से रूबरू बाबा रामदेव
 

रामदेव का सत्याग्रह शुरू होने पर संकट बरकरार

बाबा रामदेव द्वारा दिल्ली के रामलीला मैदान में सत्याग्रह शुरू करने में अब कुछ घण्टे ही बचे हैं. लेकिन ये घण्टे बेहद महत्वपूर्ण हैं. सरकार और बाबा रामदेव दोनों के कैंप के लिए यह रात कत्ल की रात साबित हो रही है. बाबा रामदेव के कैम्प में बैठकों का दौर जारी है और दिन भर सरकार की ओर से की गयी बातचीत पर मंथन हो रहा है तो दूसरी ओर सरकार भी बेचैन है और उसने संकेत देने शुरू कर दिये हैं कि कालेधन को राष्ट्रीय संपत्ति मानने की दिशा में ठोस पहल की जा सकती है. ... Full story

रामदेव की राजनीति
 

रामदेव की राजनीति

दिल्ली के रामलीला मैदान पर रामदेव ने दस्तक दे दी है. बुधवार को उन्होंने रामलीला मैदान पर मीडिया को संबोधित किया और मीडिया ने यह प्रचारित करने की कोशिश की है कि रामदेव 4 जून से अपने अनशन के फैसले पर अडिग है. लेकिन रामदेव के इस अनशन को अगर आंदोलन मान भी लें तो क्या वे जनता की उम्मीदों पर खरे उतर रहे हैं. क्या उनके आंदोलन से समाज का समर्थन मिलेगा और किसी बड़े राजनीतिक परिवर्तन की राह निकलेगी या फिर रामदेव जन भावनाओं के साथ छल कर रहे हैं? ... Full story

राष्ट्रीय पार्टियों के खिलाफ जनता का जनादेश
 

राष्ट्रीय पार्टियों के खिलाफ जनता का जनादेश

देश में पांच राज्यों विधानसभा चुनाव के नतीजे सामने आ गये हैं. पांचों राज्य के चुनाव परिणामों का अगर विश्लेषण करें तो समझ में आता है कि ये चुनाव परिणाम राष्ट्रीय पार्टियों के खिलाफ जनता का जनादेश है. सीपीएम हो, कांग्रेस या फिर गर्त में गयी भाजपा तीनों ही राष्ट्रीय दलों की स्थिति बहुत दयनीय साबित हुई है. नब्बे के दशक में जिस तरह से छोटे दलों पर जनता ने विश्वास दिखाया था और राष्ट्रीय पार्टियों को गठबंधन की राजनीति के लिए मजबूर कर दिया था उसी तरह इक्कीसदीं सदी के दूसरे दशक की शुरूआत में आये पांच राज्यों के चुनाव नतीजे राष्ट्रीय दलों पर अविश्वास दिखा रहे हैं. रामबहादुर राय का विश्लेषण. ... Full story

आंदोलन नहीं था अन्ना का अनशन
 

आंदोलन नहीं था अन्ना का अनशन

यह नहीं भूलना चाहिए कि यह अनिश्चिकालीन अनशन था, आमरण अनशन नहीं। यह एक अभियान था। जो व्यक्ति अनशन पर बैठा हुआ था, वह उसे आंदोलन नहीं कह रहा था। यह तो एक कानून के लिए चला अभियान था। अभियान और आंदोलन में बुनियादी फर्क है। आंदोलन स्थायी महत्व के परिवर्तन के लिए होता है और अभियान होता है तात्कालिक लक्ष्य को पाने के लिए। अन्ना के अनशन का तात्कालिक लक्ष्य था, इसे आंदोलन नहीं समझना चाहिए। ... Full story

अमेरिका की सरपरस्ती करती राजनीति
 

अमेरिका की सरपरस्ती करती राजनीति

विकीलीक्स के खुलासों से पहले अमेरिकी प्रशासन में खलबली मची और अब भारत की राजनीतिक दुनिया में भूचाल आ गया है। 15 मार्च से "द हिन्दू" ने विकीलीक्स के जरिये इंडिया कैबल्स के तथ्यों का खुलासा करना शुरू किया। ये दस्तावेज वे हैं, जो अमेरिकी दूतावास से वाशिंगटन भेजे गए और इनमें करीब 36 लाख शब्द हैं। इनमें सिर्फ चार साल अर्थात 2005 से 2009 तक के कैबल्स हैं। जो तथ्य इसमें आए हैं या आने वाले हैं, उनका दायरा बहुत व्यापक है। ... Full story

सिर पर सवार सत्ता का शैतान
 

सिर पर सवार सत्ता का शैतान

भाजपा नेता लालकृष्ण आडवाणी के बारे में जसवंत सिंह ने जो कुछ कहा है उससे यह बात साफ हो जाती है कि आडवाणी जी पर सत्ता का शैतान हावी रहा है. इक्कीसवीं सदी के पहले दशक में उन्होंने सत्ता के नशे में हमेशा पार्टी को परास्त करने की कोशिश की है. जसवंत सिंह का बयान हो या आडवाणी जी द्वारा राम मंदिर आंदोलन के संदर्भ में दिया गया बयान, साबित करता है कि आडवाणी जी पर सत्ता का शैतान हावी रहा है. सत्ता के इस शैतान ने विरोधियों की नजर में भी ईमानदारी की धमक रखनेवाले आडवाणी को राजनीतिक महत्वाकांक्षा का हैवान बना दिया है. वरिष्ठ पत्रकार रामबहादुर राय का विश्लेषण. ... Full story

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Rambahadur Rai Rambahadur Rai पत्रकार. छात्र आंदोलन से राजनीति और राजनीति से पत्रकारिता में आये रामबहादुर राय हिन्दी में खोजी पत्रकारिता के शीर्षपुरूष समझे जाते हैं. वर्तमान में प्रथम प्रवक्ता के सलाहकार संपादक और विस्फोट.कॉम के सम्मानित स्तंभलेखक.

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