Sanjay Dwivedi

भेड़ियों की भीड़ में मेमनों सी मिमियाहटें

उड़ीसा और छत्तीसगढ़ की सरकारें दो कलेक्टरों और एक विधायक के अपहरण से सदमे से फिर उबर आई हैं। लेकिन यह सवाल ...

पूर्ण बहुमत का परिपक्व जनादेश

उत्तर प्रदेश के लोग कुछ भले न कर पा रहे हों, पिछले दो विधानसभा चुनावों में वे एक स्थिर सरकार जरूर दे ...

विरथ रथी की बेबसी
 

विरथ रथी की बेबसी

भारतीय जनता पार्टी के शीर्ष नेता लालकृष्ण आडवाणी मुख्यधारा में रहे हैं, नेपथ्य में रहना उन्हें नहीं आता। बस संकट यह है कि अटलबिहारी वाजपेयी के पास लालकृष्ण आडवानी थे किंतु जब आडवानी मैदान में थे तो उनके अपने पास कोई नहीं था। यह आडवानी की बेबसी भी है और पार्टी की भी। इसी बेबसी ने भाजपा और उसके रथयात्री को सत्ता के रथ से विरथ किया। किंतु आडवानी इस राजनीतिक बियाबान में भी अपनी कहने और सुनाने के लिए निकल पड़ते हैं,पार्टी पीछे से आती है, संघ परिवार भी पीछे से आता है। कल्पना कीजिए इस यात्रा में अगर आडवाणी सरीखा उत्साह पूरा दल और संघ परिवार दिखा पाता तो क्या यह अकेली यात्रा पूरी सरकार पर भारी नहीं पड़ती? ... Full story

नया रायपुर फाउण्डिंग स्टोन
 

अब सिर्फ गेंदा फूल भर नहीं है रायपुर

एक नवंबर को छत्तीसगढ़ ने अपनी स्थापना के दस साल पूरे कर लिये. छोटे राज्यों की अवधारणा पर एनडीए शासन द्वारा बनाये गये छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर है. पिछले दिनों आई फिल्म दिल्ली-6 के गाने-‘सास गारी देवे, देवर जी समझा लेवे, ससुराल गेंदा फूल...’. में रायपुर का भी जिक्र आता है। इस गाने के बोल छत्तीसगढ़ी भाषा में हैं, जिसे पहली बार रायपुर की ही प्रसिद्ध जोशी बहनों ने गाया है। हालांकि अब जोशी बहनों को दुख है कि इस गीत के लिए फिल्मकार ने छत्तीसगढ़ को क्रेडिट नहीं दिया है। वे दर्द से कहती हैं ‘हमें रूपया नहीं चाहिए बस इतना तो हो कि हमारे शहर या राज्य छत्तीसगढ़ का उल्लेख हो जाए।‘ जोशी बहनें ठीक ही कह रहीं हैं, लेकिन रायपुर अब किसी सिनेमा के गाने में नाम आने से कहीं अधिक बड़ा है. ... Full story

अरुन्धती रॉय ने कहा है कि वे अन्ना हजारे के आंदोलन का समर्थन नहीं कर सकती
 

अन्ना की आलोचना करनेवालों, स्माइल प्लीज!

देश के तमाम बुद्धिजीवियों ने अन्ना हजारे के आंदोलन की अपने-अपने तरीके से आलोचना प्रारंभ कर दी है। क्या मराठी के विद्वान कुमार केतकर और क्या देश में तथाकथित जन आंदोलनों की सर्वेसर्वा विचारक अरुन्धती राय. सब विरोध में लामबंद हो रहे हैं. वे जो सवाल उठा रहे हैं वे भटकाव भरे तो हैं ही, साथ ही उससे चीजें सुलझने के बजाए उलझती हैं। किंतु हमें एक निहत्थे देहाती आदमी की इस बात के लिए तारीफ करनी चाहिए कि उसने दिल्ली में आकर केंद्रीय सत्ता के आतंक, चमकीले प्रलोभनों और कुटिल वकीलों व हावर्ड से पढ़कर लौटे मंत्रियों को जनशक्ति के आगे घुटने टेकने पर मजबूर कर दिया। आंदोलन में एक बेहद भावात्मक अपील होने के बावजूद देश में घटी इस घटना को एक ऐतिहासिक समय कहा जा सकता है। ... Full story

 देह की मर्यादाएं हट रही हैं, गोपन अब ओपन हो रहा है
 

औरत खड़ी बाजार में

हिन्दुस्तानी औरत इस समय बाजार के निशाने पर है। एक वह बाजार है जो परंपरा से सजा हुआ है और दूसरा वह बाजार है जिसने औरतों के लिए एक नया बाजार पैदा किया है। औरत की देह इस समय मीडिया के चौबीसों घंटे चलने वाले माध्यमों का सबसे लोकप्रिय विमर्श है। लेकिन परंपरा से चला आ रहा देह बाजार भी नए तरीके से अपने रास्ते बना रहा है। ... Full story

भ्रष्टाचार के खिलाफ माओवाद
 

भ्रष्टाचार के खिलाफ माओवाद

यह कहना कितना आसान है कि माओवादी भी अब भ्रष्टाचार के दानव से लड़ना चाहते हैं। लेकिन यह एक सच है और अपने ताजा बयान में माओवादियों ने सरकार से कहा है कि वह शांति वार्ता (नक्सलियों के साथ) का प्रस्ताव देने से पहले भ्रष्टाचार में लिप्त लोगों के खिलाफ सरेआम कार्रवाई करे। साथ ही विदेशी मुल्कों के बैंकों में जमा सारा काला धन स्वेदश वापस लाए। कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) की केंद्रीय समिति के प्रवक्ता अभय ने मीडिया को जारी विज्ञप्ति में कहा है कि सरकार ने प्राकृतिक संसाधनों के दोहन के लिए औद्योगिक व व्यवसायिक घरानों के साथ लाखों-करोड़ों के समझौते किए हैं। इन्हें रद किया जाए। भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया को तत्काल रोका जाए। साथ ही सरकार भ्रष्टाचारियों को सरेआम सजा देने की व्यवस्था करे। ... Full story

कायरता की पटकथा पर माओवाद का मातम
 

कायरता की पटकथा पर माओवाद का मातम

भारतीय राज्य की निर्ममता और बहादुरी के किस्से हमें दिल्ली के रामलीला मैदान में देखने को मिले। यहां भारतीय राज्य अपने समूचे विद्रूप के साथ अहिंसक लोगों के दमन पर उतारू था। लेकिन देश का एक इलाका ऐसा भी है जहां इस बहादुर राज्य की कायरता की कथा लिखी जा रही है। यहां हमारे जवान रोज मारे जा रहे हैं और राज्य के हाथ बंधे हुए लगते हैं। ... Full story

बलिराम को आखिरी सलाम
 

बलिराम को आखिरी सलाम

जिन्होंने बलिराम कश्यप को देखा था, उनकी आवाज की खनक सुनी है और उनकी बेबाकी से दो-चार हुए हैं-वे उन्हें भूल नहीं सकते। भारतीय जनता पार्टी की वह पीढ़ी जिसने जनसंघ से अपनी शुरूआत की और विचार जिनके जीवन में आज भी सबसे बड़ी जगह रखता है, बलिराम जी उन्हीं लोगों में थे। बस्तर के इस सांसद और दिग्गज आदिवासी नेता का जाना, सही मायने में इस क्षेत्र की सबसे प्रखर आवाज का खामोश हो जाना है। अपने जीवन और कर्म से उन्होंने हमेशा बस्तर के लोगों के हित व विकास की चिंता की। भारतीय जनता पार्टी की राजनीति में उनका एक खास स्थान था। ... Full story

वाया भाजपा कांग्रेस का सफाया
 

वाया भाजपा कांग्रेस का सफाया

देश के पांच राज्यों की छः विधानसभा सीटों पर हुए उपचुनाव के संदेश भारतीय जनता पार्टी के लिए अच्छी खबर लेकर आए हैं। मध्यप्रदेश, छ्त्तीसगढ़, झारखंड, गुजरात की पांच विधानसभा सीटों पर भाजपा की जीत बताती है कि कांग्रेस ने कई राज्यों में मैदान उसके लिए छोड़ दिया है। यह एक संयोग ही है कि इन सभी राज्यों में भाजपा ही सत्तारूढ़ दल है। झारखंड की खरसांवा सीट की बात न करें, जहां राज्य के मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा खुद उम्मीदवार थे तो बाकी सीटों पर बड़े अंतर से भाजपा की जीत बताती है कि कांग्रेस इन चुनावों में गहरे विभ्रम का शिकार थी जिसके चलते मध्यप्रदेश की दोनों सीटें कुक्षी और सोनकच्छ दोनों उसके हाथ से निकल गयीं। ये दोनों कांग्रेस की परंपरागत सीटें थीं,जहां कांग्रेस का लंबे अंतर से हारना एक बड़ा झटका है। मध्यप्रदेश की ये दोनों सीटें हारना दरअसल कांग्रेस के लिए एक ऐसे झटके की तरह है जिस पर उसे गंभीरता से विचार जरूर करना चाहिए। ... Full story

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Sanjay Dwivedi Sanjay Dwivedi बी.ए.लखनऊ विश्वविद्यालय से किया, फिर पत्रकारिता में बी.जे. और एम.जे. एम.सी. की डिग्री भोपाल के माखनलाल पत्रकारिता विश्वविद्यालय से ली। दैनिक भास्कर भोपाल, स्वदेश के भोपाल, रायपुर के संस्करणों के अलावा नवभारत-मुंबई, दैनिक भास्कर-बिलासपुर, हरिभूमि-रायपुर में समाचार संपादक, कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता विश्वविद्यालय में रीडर आदि महत्वपूर्ण पदों पर कार्य। छत्तीसगढ़ राज्य के प्रमुख दैनिक समाचार पत्र हरिभूमि में स्थानीय संपादक एवं छत्तीसगढ़ के प्रथम सैटेलाइट चैनल जी-24 घंटे, छत्तीसगढ़ के एडिटर इन्पुट रहे। विभिन्न सांस्कृतिक संगठनों से संबंद्ध । संप्रतिः विभागाध्यक्ष, जनसंचार विभाग, माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय

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