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May

20

2013

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कितना अहम, कितना वहम?

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कितना अहम, कितना वहम?

चीनी नेतृत्व भले ही आपसी संबंधों के मामले में थोड़ा लचीलापन दिखा रहा है लेकिन सीमा विवाद पर फिलहाल कोई अहम पहल करने के मूड में नहीं दिखता। ली क्विंग की यात्रा का फोकस कारोबारी संबंधों पर अधिक है, जो हमारी दीर्घकालीन चिंताओं के समाधान के लिहाज से कोई बड़ी घटना नहीं है। हाँ, अगर भारत सरकार चीन के साथ व्यापार असंतुलन की समस्या को थोड़ा भी हल कर सके तो वह एक बड़ी उपलब्धि होगी। उधर हामिद करजई के आगे अफगानिस्तान के अनिश्चित भविष्य का सवाल मुँह बाए खड़ा है। अमेरिकी फौज़ की वापसी के बाद उन्हें तालिबान, पाकिस्तान, आंतरिक सुरक्षा, अर्थव्यवस्था और विकास जैसी जटिल गुत्थियों में उलझना है। दोनों देशों के आपसी संबंधों में गर्मजोशी बनी रहना दोनों देशों के हित में है। तालिबान और पाकिस्तान के प्रति दोनों की आशंकाएँ उन्हें एक दूसरे के करीब लाती हैं।

अलबत्ता, भारत आने वाले मेहमानों की तुलना में खुद भारतीय प्रधानमंत्री के विदेश दौरे हमारे लिए ज्यादा अहम दिखाई देते हैं, खासकर चीन को लेकर उपजी ताजा चिंताओं के मद्देनजर। प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह जून या सितंबर-अक्तूबर में अमेरिका जाने वाले हैं। इस दौरे की अहमियत इस बात में है कि उसके लिए आनन-फानन में तैयारी की गई

May

20

2013

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कितना सर्वोच्च है सर्वोच्च न्यायालय?

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कितना सर्वोच्च है सर्वोच्च न्यायालय?

राजनीति के चतुर सुजान दिग्विजय सिंह तो प्रतीक्षा मे थे ही। उन्होने सर्वोच्च न्यायालय की इस मौखिक टिप्पणी को आधार बनाकर सर्वोच्च न्यायालय के विरूद्ध एक वैचारिक बहस छेड़ दी। अब तक किसी भी व्यक्ति ने दिग्विजय के पक्ष मे खुलकर कोई बयान नही दिया किन्तु आतंरिक चर्चाओ में हर पढा लिखा आदमी दिग्विजय की बात से सहमत दिखता है, और ऐसे ही सहमत लोगो में मै भी एक हॅू।

भारत का हर व्यक्ति जानता है कि पण्डित नेहरू अर्ध तानाशाही प्रवृत्ति के व्यक्ति थे। गांधी उनकी प्रवृत्ति के सबसे बड़े बाधक थे, तथा राम मनोहर लोहिया, जय प्रकाश, गांधी विचारो के समर्थक। गांधी जी के मरते ही पण्डित नेहरू ने समाजवाद का मुखौटा लगाकर लोकतंत्र को कमजोर करना शुरू कर दिया। लोकतंत्र में विधायिका कार्यपालिका और न्यायपालिका एक दूसरे के पूरक भी होते है, और नियंत्रक भी। तीनों के अधिकार भी बराबर होते है तथा सीमाएं भी। लोकतंत्र की तीनों इकाइयों में से कोई एक सर्वोच्च होने की बात सोच भी नही सकता। नेहरू जी ने कार्यपालिका प्रमुख राष्ट्रपति को सम्बंधो के आधार

पूरी तरह पंगु कर दिया जिससे कार्यपालिका अब तक नही उबर सकी है। नेहरू जी ने समय समय पर न्यायपालिका के भी पंख कतरे तथा शीघ्र

May

20

2013

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उनकी भाषा अपना न्याय

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उनकी भाषा अपना न्याय

स्वतंत्रता पूर्व भारत मे सरकारी समारोहों में ‘गाड सेव द किंग’ या ‘गाड सेव द क़्वीन’ गाया जाता था. पर्ंतु 15 अगस्त 1947 से उसका स्थान ‘जन-गण-मन-अधिनायक जय हे’ ने लिया. रातोंरात सभी सरकारी भवनो पर से ‘यूनियन जैक’ झंडा उतारकर तिरंगा झंडा लहरा दिया गया. भारत में स्वतंत्रता का जश्न मनाया गया. भारत को यह स्वतंत्रता लाखो स्वतंत्रता सेनानियों के बलिदानों की कीमत पर मिली थी. पहली बार भारत के लोगों ने आज़ादी का अर्थ समझा था. देश का संविधान बनाने की प्रक्रिया आरम्भ हो चुकी थी और 26 जनवरी 1950 को भारत का संविधान लागू किया गया. किसी भी राष्ट्र के लिये राष्ट्रध्वज, राष्ट्रगान और और राष्ट्रभाषा का बहुत महत्व होता है. इसी महत्ता के चलते देश का राष्ट्रध्वज और राष्ट्रगान तय हो गया परंतु बहुभाषी भारत मे राष्ट्रभाषा का चुनाव करने में बहुत समय लगा. देश का यह दुर्भाग्य ही है कि आज भी अपने देश की कोई राष्ट्रभाषा नही है. हिन्दी के प्रचलन के चलते हिन्दी को राजभाषा का दर्जा जरूर दे दिया गया है.

हिन्दी को राजभाषा का दर्जा
क्रांतिकारियों के संघर्षो के कारण देश को स्वाधीनता मिली परंतु संविधान सभा का गठन स्वतंत्रता-पूर्व जुलाई, 1946 में ही हो गया था. 11 दिसम्बर 1946 को

May

20

2013

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वेलकम टू सट्टा बाजार

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क्रिकेट में भ्रष्टाचार के लिए बीसीसीआई में बैठे राजीव शुक्ला जैसे ऊंचे ओहदेदार ज्यादा दोषी हैं क्रिकेट में भ्रष्टाचार के लिए बीसीसीआई में बैठे राजीव शुक्ला जैसे ऊंचे ओहदेदार ज्यादा दोषी हैं

हर खेल ‘गेम’ बन चुका है
कार्यपालिका, न्याविधायिका में जब कोई भ्रष्टाचारी पकड़ा जाता है तो उसे अपने भ्रष्टाचार के मुकद्दमे से रिहाई के लिए व्यवस्था के तमाम भ्रष्टाचारियों से अपनी लूट की रकम का बंटवारा करना पड़ता है। संबंधित विभाग में मामला ताजा रहने तक भ्रष्टाचार फूंक-फूंक कर किया जाता है। क्रिकेट के इस भ्रष्टाचार में संलिप्तता के दौरान बेपर्दा हुए लोगों को इतनी चिंता भी जरूरी नहीं है। हर कोई टीवी कैमरों के सामने नैतिकता की चाहे जितनी कसमें खाए कैमरा हटते ही उनकी नैतिकता का पतन हो जाता है। खेल धर्म की चाहे जितनी बातें की जाएं सच यही है कि लगभग हर खेल ‘गेम’ बन चुका है अैहर गेम का नियंत्रण खिलाड़ियों की बजाय खेल संस्थानों के संचालकों, प्रायोजकों, जुआरियों और फिक्सरों के हाथ में है। मैच फिक्सिंग के धंधे के पर्दाफाश के मामले में भी हमारा समाज यूरोप से दशकों पिछड़ा हुआ है। अंतर सिर्फ इतना है कि पश्चिम के खेलों में सटोरिए और फिक्सर घुसपैठ का प्रयास करते हैं जबकि हिन्दुस्तान में क्रिकेट नामक खेल के फिक्सर ही उसके नियंता हैं। जब कभी खेल में फिक्सिंग की दुर्गंध आम हो जाती है तो पुलिस या जांच एजेंसियों के सहयोग से किसी श्रीसंत की

May

19

2013

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फिक्सिंग के दलदल में क्रिकेट

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फिक्सिंग के दलदल में क्रिकेट

यह खुलासा बताता है कि फिक्सिंग, बेईमानी और दशर्कों के साथ फरेब करना हमारी फितरत में शामिल हो चुका है। वैसे भी आईपीएल के दौरान फिक्सिंग का यह कोई पहला मामला नहीं है। पिछले साल भी एक निजी टीवी चैनल ने बताया था कि आईपीएल के दौरान खिलाड़ी किसी भी तरह की फिक्सिंग के लिए तैयार थे। उस स्टिंग में साफ दिखा कि युवा खिलाड़ी पैसे के लिए किसी भी हद तक गिरने को तैयार थे। मामला सामने आने के बाद भारतीय क्रिकेट बोर्ड ने आनन-फानन में उन पांचों खिलाड़ियों पर पाबंदी लगा दी, लेकिन इससे बीमारी खत्म नहीं हुई।

इस बार कहीं ज्यादा संगीन मामला सामने आने के बाद बीसीसीआई के मुखिया एन श्रीनिवासन को कहना पड़ा है कि यह एक तरह से बोर्ड की भी नाकामी है क्योंकि हमारी एंटी करप्शन यूनिट इस गड़बड़झाले को नहीं पकड़ पायी। बीसीसीआई को इस विवाद से होने वाले नुकसान का अंदाजा है, लिहाजा वह तुरंत हरकत में आई है। आईपीएल गवर्निंग काउंसिल ने भी स्पॉट फिक्सिंग में संलिप्त खिलाड़ियों पर सख्त कार्रवाई की बात कही है। ऐसे में इन युवा क्रिकेटरों का करियर खत्म होता दिख रहा है। लेकिन सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या इन खिलाड़ियों पर पाबंदी लगाने

May

17

2013

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मुस्लिम मत की कालाबाजारी

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मुस्लिम मत की कालाबाजारी

इस्लाम में व्यक्ति पूजा वर्जित है। पैसों के लिए, सियासी पदों के लिए ईमान बेचना वर्जित है। हुकूमत की चमचागिरी करना वर्जित है। भ्रष्ट और अनैतिक व्यक्ति को नायक बनाना या मानना भी इस्लाम में वर्जित है। फिजूलखर्जी की बिल्कुल मनाही है। इस्लाम के इन क्रांतिकारी और मानवीय पक्षों का व्यापार होने लगे तो आप इसे क्या कह सकते हैं? मुल्ला-मौलवी और मुस्लिम नेता इस्लाम के क्रांतिकारी और मानवीय पक्ष को व्यापार बना रहे हैं। मुल्ला-मौलवी व्यक्ति पूजा, फिजूलखर्ची, चमचागिरी की गर्त में जाने से परहेज नहीं कर रहे हैं। इससे भी आगे की बात यह है कि रुपये के चंद टुकड़ों के लिए, सियासी पदों के लालच में मुल्ला-मौलवी खुद इस्लाम और गरीब मुसलमानों को ढाल बना रहे हैं और उनकी बुनियादी समस्याओं के लिए कोई सार्थक काम करने की जगह अपनी सियासी राजनीति को चमका रहे हैं।

सेमिनार चार घंटे का खर्च करोड़ से अधिक
हजरत मुहम्मद किस प्रकार से फिजूलखर्ची और दिखावे के विरोधी थे उसका एक उदाहरण बहुत चर्चित हैं और असली मुसलमान उस उदाहरण का सौ प्रतिशत पालन करते हैं। एक बार हजरत मुहम्मद के पास अतिरिक्त पैसा आ गया। यह जानकर उनके समर्थकों ने उनसे अपील की कि अतिरिक्त धन से मस्जिद की छत

May

17

2013

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एक और स्वयंभू संत

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अपने आपको कबीरपंथी कहनेवाले संत रामपाल अपने आपको कबीरपंथी कहनेवाले संत रामपाल

हमारे देश में न केवल विभिन्न धर्मों,विश्वासों व आस्थाओं के अनुयायी रहते हैं तथा अपनी आस्था के अनुसार अपने धर्मस्थल संचालित करते हैं बल्कि आए दिन यहां किसी न किसी नए आश्रम, नए डेरे या किसी न किसी स्वयंभू अवतारी पुरुष द्वारा अपना नया 'धर्म उद्योग' स्थापित करने के समाचार भी मिलते रहते हैं। हमारे देश की भोली-भाली जनता है कि इनमें से तमाम लेाग अपने पारंपरिक धर्मों व विश्वासों से नाता तोड़कर किसी नए स्वयंभू धर्मगुरु द्वारा चलाए जाने वाले नए आश्रमों या डेरों से ही अपनी आस्था जोड़ बैठती है। ऐसा ही एक आश्रम हरियाणा के रोहतक जि़ले के करौंथा गांव में स्थित है। इसके संचालक हैं स्वयंभू संत रामपाल जी।

वैसे तो यह स्वयं को कबीरपंथी विचारधारा का संत बताया करते हैं। परंतु अपनी चतुर  बुद्धि व तथाकथित 'ज्ञान' के आधार पर इन्होंने अपने प्रवचनों के माध्यम से लोगों को यह समझाने की कोशिश शुरु कर दी कि वे एक सिद्ध पुरुष हैं, अवतारी व्यक्ति हैं तथा उन्हें ईश्वर का दर्शन प्राप्त हो चुका हैं। अपने कोमल स्वभाव के अनुसार आम लोग स्वयंभू संत रामपाल के आश्रम से जुडऩे लगे। और धीरे-धीरे उनकी संख्या हज़ारों में पहुंच गई। अभी उनका प्रचार-प्रसार चल ही रहा था तथा अपने

May

17

2013

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क्रिकेट पर कालिख

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क्रिकेट पर कालिख

पुलिस ने इन तीनों क्रिकेटरों और कई बुकियों को गिरफ्तार कर लिया है। इनके खिलाफ धोखाधड़ी और आपराधिक साजिश का केस दर्ज किया गया है। इन तीनों क्रिकेटरों सहित अन्य को ५ दिनों की पुलिस रिमांड पर भेज दिया गया है। ये तीनों ही खिलाड़ी राजस्थान रॉयल्स टीम में थे। हालांकि पुलिस ने टीम मालिकों के प्रकरण में शामिल होने से इनकार करते हुए कहा है कि प्रारंभिक जांच में उनके खिलाफ पुख्ता साक्ष्य नहीं मिले हैं। इससे पूर्व भी आईपीएल-५ में स्पॉट फिक्सिंग के जिन्न में खूब तहलका मचाया था। उस दौरान जिन क्रिकेटरों को स्पॉट फिक्सिंग में पकड़ा गया वो थे, पुणे वॉरियर्स के मोहनीश मिश्रा, किंग्स इलेवन पंजाब के शलभ श्रीवास्तव, डेक्कन चार्जर्स के टी पी सुधींद्र, किंग्स इलेवन पंजाब के अमित यादव और दिल्ली के एक क्रिकेटर अभिनव बाली। इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) में मैच फिक्सिंग से लेकर स्पॉट फिक्सिंग की बातें पहले भी उठती रही हैं किन्तु न तो भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड और न ही सरकार ने इस ओर कोई ठोस कदम उठाये|

ऐसा प्रतीत होता है कि आईपीएल में काले धन को सफ़ेद करने की प्रक्रिया का दायरा बीसीसीआई के बूते से कहीं आगे निकल गया है। किसी फ्रेंचाइजी पर सीधे उंगली नहीं

May

17

2013

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बड़ी कठिन है डगर पनघट की

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बड़ी कठिन है डगर पनघट की

जल संरक्षण की दिशा में कदम उठाते हुए केन्द्रीय मंत्रिमंडल ने वर्ष 2013 को ‘जल संरक्षण वर्ष’ के रूप में मनाने की घोषणा की है। इस दौरान पानी और जल स्त्रोतों के सरंक्षण और उसके विवेकपूर्ण इस्तेमाल के बारे में बड़े पैमाने पर जागरूकता अभियान चलाए जाएंगे। अभियान के द्वारा जल के महत्व एवं उसकी उपयोगिता को विभिन्न जनंसचार माध्यमों द्वारा जनमानस तक पहुंचाने के साथ ही जल संरक्षण की प्रति जागरूकता का प्रचार-प्रसार किया जाएगा। जल से संबंधित विभिन्न विषयों जैसे जल संरक्षण, जल प्रबंधन, जल को प्रदूषण से मुक्त करना आदि को इस अभियान के माध्यम से आम जनता तक पहुंचाया जाएगा। साथ ही जल के प्रभावी एवं मितव्ययिता से उपयोग करने के लिए सभी को प्रेरित किया जाएगा ताकि जल का संरक्षण किया जा सके। इसके लिए देश के विभिन्न हिस्सों में अनेक जागरूकता अभियान आरंभ किए जाएंगे।

तेजी से बढती जनसंख्या ने पानी की जरूरत और उसकी मांग के बीच एक गहरी खाई पैदा कर दी है। देश के अधिकतर किसान जल की कमी का सामना कर रहे है। दूसरी तरफ कुछ ऐसी निजी कंपनियां भी हैं जो जल का व्यापार कर भारी मात्रा में धन कमाने में लगी है। पूरे विश्व में पानी का व्यापार

May

15

2013

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पंजाबी रिपब्लिक ऑफ पाकिस्तान

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मीनार-ए-पाकिस्तान, लाहौर। मीनार-ए-पाकिस्तान, लाहौर।

पाकिस्तान में नेशनल असेंबली के साथ-साथ चार प्रांतीय असेंबली के चुनाव हुए है। नवाज शरीफ नेशनल असेंबली में बहुमत हासिल कर चुके है। चारो प्रांतीय असेंबली में अलग-अलग चुनाव परिणाम आए है। नेशनल असेंबली में पीपुल्स पार्टी जो 2008 के चुनाव में 97 सीटें ले गई थी इस बार बुरी तरह से हारी। हालांकि इमरान खान का हवाई प्रचार हवा हो गया। लेकिन पश्तून अस्मिता और तालिबान समर्थन ने खैबर पख्तूनखवा में उन्हें मजबूत कर दिया है। उन्हें नेशनल असेंबली में इसी राज्य से सबसे ज्यादा सीटें मिली है। लेकिन जिस पंजाब से इमरान खान को नेशनल असेंबली में काफी उम्मीद थी वहां पर वो साफ हो गए। पाकिस्तानी नेशनल असेंबली के चुनाव परिणामों कई अर्थों में महत्वपूर्ण है।

दरसअल नेशनल असेंबली के चुनाव ने इस्लामिक रिपब्लिक  ऑफ पाकिस्तान की धारणा समेटा है। नवाज शरीफ को पंजाबी रिपब्लिक ऑफ पाकिस्तान में बहुमत मिला है। उन्हें नेशनल असेंबली की 90 प्रतिशत सीटें पंजाब से मिली है। चारों राज्यों के चुनाव परिणाम देखा जाए तो नेशनल असेंबली के चुनाव में जाति, प्रांत और एथनिक पहचान हावी था। जाति, क्षेत्रीए अस्मिता ने चुनाव परिणामों को प्रभावित किया। यही आने वाले समय में नवाज शरीफ को चुनौती होगी। अगर जातीय और प्रांतीय अस्मिता

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Seetaram Yechuri

Seetaram Yechuri

हैदराबाद के ब्राह्मण कुल में पैदा हुए सीताराम येचुरी भारत में कम्युनिस्ट आंदोलन के कुछ चेहरों में एक बन गये हैं. सेंट स्टीफेन और जेएनयू से शिक्षा. 1974 में एसएफआई में सक्रिय और बाद में सीपीआईएम से जुड़े. 1984 में सीपीआई सेन्ट्रल कमेटी में शामिल हुए. वर्तमान में सीपीआई (एम) पोलित ब्यूरो के मेम्बर और ऐसे सक्रिय राजनीतिज्ञ जिनसे मिलने की तमन्ना बराक ओबामा भी रखते हों.
Rajiv Yadav

Rajiv Yadav

इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक राजीव दिल्ली स्थित आईआईएमसी से मीडिया में मास्टर डिग्री ले चुके हैं. फिलहाल इलाहाबाद में रहकर मुक्त पत्रकारिता और जनाधिकार के मुद्दों पर सक्रिय कार्य कर रहे हैं. विस्फोट पर लेखन.
Ashok Wankhade

Ashok Wankhade

यवतमाल में पैदा हुए अशोक वानखेडे पढ़ने के लिए इंदौर आये तो पत्रकारिता का कैरियर साथ में लेकर इंदौर से बाहर निकले. फ्री प्रेस जर्नल से पत्रकारिता शुरू करनेवाले अशोक वानखेडे चौथा संसार में काम करने दिल्ली आये तो यहीं के होकर रह गये. करीब पचीस साल के अपने पत्रकारीय कैरियर में अंग्रेजी, हिन्दी और मराठी तीनों भाषाओं के लिए काम किया है. इलेक्ट्रानिक का जमाना आया तो विडियो जर्नलिज्म में भी हाथ आजमाया. अब एक अखबार के राजनीतिक संपादक होने के साथ साथ नये मीडिया को नारा-ए-मस्ताना बनाना चाहते हैं.
Dr. Ashish Vashisth

Dr. Ashish Vashisth

डॉ. आशीष वशिष्ठ लखनऊ में रहनेवाले स्वतंत्र पत्रकार हैं. विभिन्न विषयों पर समसामयिक टिप्पणी और लेखन.
Harsh Vardhan

Harsh Vardhan

हर्षवर्धन टीवी पत्रकार हैं. अमर उजाला में लंबे समय तक काम करने के बाद सीएनबीसी आवाज में काम किया. बतंगड़ नाम से नियमित ब्लाग भी लिखनेवाले हर्षवर्धन राजनीतिक विश्लेषक के तौर पर स्थापित हैं.
Vinod Upadhyay

Vinod Upadhyay

मूलत: बक्सर बिहार के रहनेवाले विनोद उपाध्याय भोपाल में रहकर पत्रकारिता करते हैं. दैनिक राष्ट्रीय हिन्दी मेल से पत्रकारिता में प्रवेश. वर्तमान में भोपाल से ही प्रकाशित होनेवाले दैनिक अग्निबाण से जुड़े हुए हैं.
Arvind Tripathi

Arvind Tripathi

अरविन्द त्रिपाठी देश के कई बड़े समाचार पत्रों व पत्रिकाओं में काम करने के बाद वर्तमान में दिल्ली से प्रकाशित हो रही "सामना" हिंदी पत्रिका में उत्तर प्रदेश से विशेष संवाददाता के पद पर कार्यरत हैं. साथ ही पानी और पर्यावरण के मुद्दे पर राजेन्द्र सिंह के साथ काम कर रहे हैं.
Sanjeet Tripathi

Sanjeet Tripathi

रायपुर के रहनेवाले संजीत त्रिपाठी वैसे तो प्रिंट मीडिया के लिए ही काम करते हैं लेकिन प्रिंट से ज्यादा आनलाइन मीडिया में सक्रियता. ब्लाग लिखने से लेकर फेसबुक सक्रियता तक संजीत सब जगह नजर आते हैं. आवारा बंजारा नाम से ब्लाग लेखन करनेवाले संजीत फिलहाल रायपुर में एक अखबार के साथ काम कर रहे हैं.
Anushikha Tripathi

Anushikha Tripathi

भोपाल में ही पढ़ाई लिखाई और अब भोपाल में ही रहकर पत्रकारिता. माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय से 2011 में पत्रकारिता की डिग्री.
S Rajen Todariya

S Rajen Todariya

लंबे समय से पत्रकारिता में सक्रिय एस राजेन टोडरिया दैनिक भास्कर में बतौर स्थानीय संपादक काम कर चुके हैं। इस वक्त देहरादून से प्रकाशित पाक्षिक पत्रिका जनपक्ष टुडे के प्रधान संपादक हैं।
Awesh Tiwari

Awesh Tiwari

मेरे लिए खबरें सिर्फ सूचनाओं को कलमबंद करने का जरिया नहीं है ,ये जरुरी है कि जिनके लिए भी हम खबरें लिख रहे हैं उनको उन ख़बरों से कुछ मिले |पिछले एक दशक से उत्तर भारत के सोन-बिहार -झारखण्ड क्षेत्र में आदिवासी किसानों की बुनियादी समस्याओं ,नक्सलवाद ,विस्थापन ,प्रदूषण और असंतुलित औद्योगीकरण को लेकर की गयी अब तक की रिपोर्टिंग में हमने अपने इस सिद्धांत को जीने की कोशिश की है। इस वक्त नई दुनिया के विशेष संवाददाता।
Anshuman Tiwari

Anshuman Tiwari

मूलत: उत्तर प्रदेश के रहनेवाले अंशुमान तिवारी ने आर्थिक पत्रकारिता को हिन्दी में बहुत शुरूआती दौर से देखा समझा है. अमर उजाला कारोबार के लिए काम किया और बाद में दैनिक जागरण समूह से जुड़े. वर्तमान में दैनिक जागरण के ब्यूरो चीफ हैं. इसके साथ ही अर्थार्थ नाम से ब्लाग भी लिखते हैं.
Sanjay Tiwari

Sanjay Tiwari

आप जहां तक सोच सकते हैं इंटरनेट आपको वह करने का मौका देता है. अभी तक मानव सभ्यता ने जितने भी मीडिया माध्यमों का उपयोग किया है यह उन सबमें अनूठा, प्रभावी और सर्वगुण संपन्न है. सूचना लेने देने के तीन माध्यमों दृश्य, श्रवण और पाठ को एक ही धागे में लपेटे नया मीडिया उत्पादन और पहुंच दोनों के लिहाज से सर्वश्रेष्ठ है. ऐसे नये मीडिया का जनहित के लिए भरपूर उपयोग हो, विस्फोट.कॉम उसी दिशा में उठा एक कदम है. visfot@visfot.com
Sanjay Swadesh

Sanjay Swadesh

किरोडीमल कॉलेज स्नातकोत्तर के बाद केंद्रीय हिंदी संस्थान दिल्ली से पत्रकारिता में डिप्लोमा। दैनिक हिंदुस्तान, नवभारत टाईम्स, सहारा समय, दैनिक भास्कर में काम. कई पत्र-पत्रिकाओं में स्वतंत्र लेखन के साथ स्थानीय जनअभियानों से जुड़े हैं।
Naresh Sirohi

Naresh Sirohi

महैन्द्र सिंह टिकैत की टीम में शामिल होकर पश्चिमी उत्तर प्रदेश में किसान आंदोलन से अपना सार्वजनिक जीवन शुरू करनेवाले नरेश सिरोही अभी भी मूल रूप से किसान आंदोलन से ही जुड़े हुए हैं। स्वदेशी आंदोलन में सक्रियता। संप्रति भाजपा किसान मोर्चा के राष्ट्रीय महासचिव।
Rakesh Sinha

Rakesh Sinha

अकादमिक पृष्ठभूमि से ताल्लुक रखनेवाले प्रो. राकेश सिन्हा संघ विचारधारा के बीच सक्रिय समानतावादी विचारक हैं. राकेश सिन्हा हिन्दुत्व की प्रखर धारा के पैरोकार हैं. लेकिन ऐसा करने के लिए वे हिंसक विवाद की बजाय अहिसक "संवाद" को अपना जरिया बनाते हैं. इंडिया पॉलिसी फाउण्डेशन के मानद निदेशक के रूप में शोध, अध्ययन और संवाद को आगे बढ़ा रहे हैं.
Virender Singh Chauhan

Virender Singh Chauhan

वीरेंद्र सिंह चौहान एक दशक से अधिक समय तक हिंदी पत्रकारिता की मुख्यधारा से जुड़े रहे. दैनिक दिव्य हिमाचल में बतौर उप संपादक और बाद में अमर उजाला और दैनिक ट्रिब्यून में स्टाफ रिपोर्टर के नाते कार्य किया. इस दौरान हरियाणा यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट्स के प्रदेश अध्यक्ष. सितम्बर 2007 से पत्रकारिता के शिक्षण में. सम्प्रति चौधरी देवी लाल विश्वविद्यालय, सिरसा के पत्रकारिता व जनसंचार विभाग में एसोसिएट प्रोफेसर और विभागाध्यक्ष.
S N Singh

S N Singh

शेष नारायण सिंह मूलतः इतिहास के विद्यार्थी हैं. शुरू में इतिहास के शिक्षक रहे. .बाद में पत्रकारिता की दुनिया में आये...प्रिंट, रेडियो और टेलिविज़न में काम किया. इन्होने १९२० से १९४७ तक की महात्मा गाँधी की जीवनी के उस पहलू पर काम किया है जिसमें वे एक महान कम्युनिकेटर के रूप में देखे जाते हैं..1992 से अब तक तेज़ी से बदल रहे राजनीतिक व्यवहार पर अध्ययन करने के साथ साथ विभिन्न मीडिया संस्थानों में नौकरी की. अब मुख्य रूप से लिखने पढने के काम में लगे हैं. एक अखबार में काम और विस्फोट.कॉम के सम्मानित स्तंभलेखक.
Rajesh Singh

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मुंबई में रहनेवाले राजेश सिंह मानवाधिकार कार्यकर्ता और पत्रकार हैं. वर्तमान समय में नागरिक विकल्प नामक पत्रिका का संपादन और मानवाधिकार संस्था का संचालन.
SATISH SINGH

SATISH SINGH

लंबे समय तक मुख्यधारा की पत्रकारिता करने के सतीश सिंह पिछले एक साल से स्वतंत्र पत्रकारिता और लेखन कर रहे हैं. दैनिक हिन्दुस्तान, दैनिक जागरण, प्रभात खबर, हिन्दुस्तान टाईम्स के लिए काम किया. वर्तमान समय में दिल्ली में कार्यरत.
Abhishek Singh

Abhishek Singh

अभिषेक रंजन सिंह ने 2007-08 में नई दिल्ली के भारतीय जनसंचार संस्थान से पत्रकारिता की पढ़ाई पूरी की। करियर की शुरूआत सकाल मीडिया गुप्र से किया। इन दिनों दक्षिण एशिया की प्रमुख ब्रॉडकास्ट एजेंसी सीवीबी न्यूज सर्विस में कार्यरत हैं। इसके अलावा विस्फोट सहित देश के प्रमुख हिंदी समाचार पत्र और पत्रिकाओं में समसामयिक मुद्दों पर नियमित लेखन कर रहे हैं।
Pranay vikram  Singh

Pranay vikram Singh

श्रमजीवी पत्रकार प्रणव विक्रम सिंह सामाजिक, राजनीतिक और आर्थिक मुद्दों पर पिछले कई सालों से लेखन कर रहे हैं.
A N Sibli

A N Sibli

1993 से हिन्दी, उर्दू और अंग्रेजी के विभिन्न राष्ट्रीय अखबारों और पत्रिकाओं में लेखन कर रहे अब्दुल नूर सिबली इस वक्त दिल्ली से प्रकाशित हिन्दुस्तान एक्सप्रेस में बतौर ब्यूरो चीफ कार्यरत हैं. विभिन्न वेबसाइटों पर नियमित लेखन.
Prem Shukla

Prem Shukla

मुंबई से प्रकाशित हिन्दी सामना के कार्यकारी संपादक. पिछले 20 सालों से पत्रकारिता. पत्रकारिता के साथ ही मुबंई में हिन्दीभाषी समाज के विभिन्न सांस्कृतिक और सामाजिक गतिविधियों में भी सक्रिय. विस्फोट.कॉम के नियमित स्तंभ लेखक.
Puja Shukla

Puja Shukla

पेश से टीवी पत्रकार पूजा शुक्ला धाकड़ लिक्खाड़ हैं. घर परिवार की जिम्मेदारी और टीवी पत्रकारिता के साथ साथ कलम को तलवार की तरह इस्तेमाल करती हैं. दिल्ली युनिवर्सिटी से पढ़ी लिखी पूजा दिल्ली में ही रहती है.
Rajesh Shukla

Rajesh Shukla

राजेश शुक्ला तो बस राजेश शुक्ला है. कला की समीक्षा के अलावा समाज और राजनीति की भी कलात्मक समीक्षा करने में महारत. मीडिया की मजूरी और कलम की गुलामी के अलावा दुनिया में फक्कड़ी ही पसंद आती है.
Balendu Sharma

Balendu Sharma

माईक्रोसाफ्ट के मोस्ट वैलुएबल प्रोफेशनल पुरस्कार से सम्मानित बालेन्दु दाधीच वेब पोर्टल प्रभासाक्षी के समूह संपादक है. तकनीकि के घोड़े पर हिन्दी की काठी बांधनेवाले बालेन्दु दाधीच केवल तकनीकि के जानकार ही नहीं बेहतरीन पत्रकार भी हैं.
Rajiv Sharma

Rajiv Sharma

राजीव शर्मा राजस्थान में रहकर मुक्त पत्रकारिता कर रहे हैं.इससे पूर्व कइ अखवारों के लिए रिपोटिंग कर चुके हें। राजनीति के अलावा पानी-पर्यावरण के मुद्दे पर संवेदनशील रिपोर्टिंग के लिए प्रयासरत। विस्फोट के लिए राजस्थान से नियमित लेखन और रिपोर्टिंग.
Arjun Sharma

Arjun Sharma

जालंधर के रहनेवाले अर्जुन शर्मा बीस साल से पत्रकारिता कर रहे हैं. बीस साल में 10 मीडिया घरानों की सैर कर चुके अर्जुन शर्मा का ट्रैक रिकार्ड बताता है कि उन्होंने कलम के साथ कभी कोई समझौता नहीं किया. मीडिया में नये आनेवाले पत्रकारों के लिए व्यावहारिक पत्रकारिता नाम की एक पुस्तक भी लिखी है. विस्फोट.कॉम के लिए पंजाब और हिमाचल का प्रभार. journalistarjun@gmail.com
Devinder Sharma

Devinder Sharma

इंडियन एक्सप्रेस में कृषि रिपोर्टर रहे देवेन्द्र शर्मा अब कृषि और खाद्य मामलों में भारत के जाने-माने नाम हैं. दुनिया में जहां कहीं भी खेती-किसानी से जुड़ी नीतियों की बात चलती है देवेन्द्र शर्मा का नाम लिया जाता है. एक्सपर्ट के साथ साथ अब जन आंदोलनों में भी सक्रिय.