May
22
2013
कांग्रेस का गौमांस भक्षण
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क्या कांग्रेस ने मान लिया है कि फुड सेक्यूरिटी बिल के सहारे देश को दो जून की रोटी देना संभव नहीं है? तो क्या इसी खातिर कांग्रेस सरकार गौ-मांस परोसने की चिंता में दुबली होती जा रही है? आप कहेंगे कि इस देश के एफसीआई गोदामों में अनाज सड़ रहे हैं जिन्हें कोर्ट की फटकार के बावजूद जरूरत मंदों के बीच यूपीए सरकार नहीं बांट पाई है। आप सोच रहे होंगे कि बाबरी विध्वंस के बाद से नाराज चल रहे मुसलमानों के वोट हासिल करने के लिए गौ-मांस के प्रबंध की सारी कवायद हो रही है। पर मुसलमानों की खुशामद तो एक पक्ष है... इस एक तीर से अनेक निशाना साधा जाता है और ये खेल पुराना है।
कांग्रेस के अलावा वामपंथियों, समाजवादियों, दलितवादियों और पिछड़ावादियों के सामुहिक राजनीतिक हित इस बात पर कंवर्ज करते कि हिंदू आस्था कमजोर पड़ी रहे। इनका आकलन है कि गौ-हत्या जारी रखने और ब्राम्हणों पर गौ-भक्षी होने का इल्जाम लगाते रहने से इस देश के हिन्दू हतोत्साहित रहेंगे। पर इस मुद्दे से पिछड़ावादी दूरी बना लेते और इसका समर्थन नहीं करते। पिछड़ावादी मोटे तौर पर कृष्ण के गौ-प्रेम को भुला नहीं पाते। लेकिन इस देश के दलितवादी हिंदू धर्म को अपने पतन का कारण
May
20
2013
कितना अहम, कितना वहम?
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चीनी नेतृत्व भले ही आपसी संबंधों के मामले में थोड़ा लचीलापन दिखा रहा है लेकिन सीमा विवाद पर फिलहाल कोई अहम पहल करने के मूड में नहीं दिखता। ली क्विंग की यात्रा का फोकस कारोबारी संबंधों पर अधिक है, जो हमारी दीर्घकालीन चिंताओं के समाधान के लिहाज से कोई बड़ी घटना नहीं है। हाँ, अगर भारत सरकार चीन के साथ व्यापार असंतुलन की समस्या को थोड़ा भी हल कर सके तो वह एक बड़ी उपलब्धि होगी। उधर हामिद करजई के आगे अफगानिस्तान के अनिश्चित भविष्य का सवाल मुँह बाए खड़ा है। अमेरिकी फौज़ की वापसी के बाद उन्हें तालिबान, पाकिस्तान, आंतरिक सुरक्षा, अर्थव्यवस्था और विकास जैसी जटिल गुत्थियों में उलझना है। दोनों देशों के आपसी संबंधों में गर्मजोशी बनी रहना दोनों देशों के हित में है। तालिबान और पाकिस्तान के प्रति दोनों की आशंकाएँ उन्हें एक दूसरे के करीब लाती हैं।
अलबत्ता, भारत आने वाले मेहमानों की तुलना में खुद भारतीय प्रधानमंत्री के विदेश दौरे हमारे लिए ज्यादा अहम दिखाई देते हैं, खासकर चीन को लेकर उपजी ताजा चिंताओं के मद्देनजर। प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह जून या सितंबर-अक्तूबर में अमेरिका जाने वाले हैं। इस दौरे की अहमियत इस बात में है कि उसके लिए आनन-फानन में तैयारी की गई
May
20
2013
कितना सर्वोच्च है सर्वोच्च न्यायालय?
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राजनीति के चतुर सुजान दिग्विजय सिंह तो प्रतीक्षा मे थे ही। उन्होने सर्वोच्च न्यायालय की इस मौखिक टिप्पणी को आधार बनाकर सर्वोच्च न्यायालय के विरूद्ध एक वैचारिक बहस छेड़ दी। अब तक किसी भी व्यक्ति ने दिग्विजय के पक्ष मे खुलकर कोई बयान नही दिया किन्तु आतंरिक चर्चाओ में हर पढा लिखा आदमी दिग्विजय की बात से सहमत दिखता है, और ऐसे ही सहमत लोगो में मै भी एक हॅू।
भारत का हर व्यक्ति जानता है कि पण्डित नेहरू अर्ध तानाशाही प्रवृत्ति के व्यक्ति थे। गांधी उनकी प्रवृत्ति के सबसे बड़े बाधक थे, तथा राम मनोहर लोहिया, जय प्रकाश, गांधी विचारो के समर्थक। गांधी जी के मरते ही पण्डित नेहरू ने समाजवाद का मुखौटा लगाकर लोकतंत्र को कमजोर करना शुरू कर दिया। लोकतंत्र में विधायिका कार्यपालिका और न्यायपालिका एक दूसरे के पूरक भी होते है, और नियंत्रक भी। तीनों के अधिकार भी बराबर होते है तथा सीमाएं भी। लोकतंत्र की तीनों इकाइयों में से कोई एक सर्वोच्च होने की बात सोच भी नही सकता। नेहरू जी ने कार्यपालिका प्रमुख राष्ट्रपति को सम्बंधो के आधार
पूरी तरह पंगु कर दिया जिससे कार्यपालिका अब तक नही उबर सकी है। नेहरू जी ने समय समय पर न्यायपालिका के भी पंख कतरे तथा शीघ्रMay
20
2013
उनकी भाषा अपना न्याय
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स्वतंत्रता पूर्व भारत मे सरकारी समारोहों में ‘गाड सेव द किंग’ या ‘गाड सेव द क़्वीन’ गाया जाता था. पर्ंतु 15 अगस्त 1947 से उसका स्थान ‘जन-गण-मन-अधिनायक जय हे’ ने लिया. रातोंरात सभी सरकारी भवनो पर से ‘यूनियन जैक’ झंडा उतारकर तिरंगा झंडा लहरा दिया गया. भारत में स्वतंत्रता का जश्न मनाया गया. भारत को यह स्वतंत्रता लाखो स्वतंत्रता सेनानियों के बलिदानों की कीमत पर मिली थी. पहली बार भारत के लोगों ने आज़ादी का अर्थ समझा था. देश का संविधान बनाने की प्रक्रिया आरम्भ हो चुकी थी और 26 जनवरी 1950 को भारत का संविधान लागू किया गया. किसी भी राष्ट्र के लिये राष्ट्रध्वज, राष्ट्रगान और और राष्ट्रभाषा का बहुत महत्व होता है. इसी महत्ता के चलते देश का राष्ट्रध्वज और राष्ट्रगान तय हो गया परंतु बहुभाषी भारत मे राष्ट्रभाषा का चुनाव करने में बहुत समय लगा. देश का यह दुर्भाग्य ही है कि आज भी अपने देश की कोई राष्ट्रभाषा नही है. हिन्दी के प्रचलन के चलते हिन्दी को राजभाषा का दर्जा जरूर दे दिया गया है.
हिन्दी को राजभाषा का दर्जा
क्रांतिकारियों के संघर्षो के कारण देश को स्वाधीनता मिली परंतु संविधान सभा का गठन स्वतंत्रता-पूर्व जुलाई, 1946 में ही हो गया था. 11 दिसम्बर 1946 को
May
20
2013
वेलकम टू सट्टा बाजार
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हर खेल ‘गेम’ बन चुका है
कार्यपालिका, न्याविधायिका में जब कोई भ्रष्टाचारी पकड़ा जाता है तो उसे अपने भ्रष्टाचार के मुकद्दमे से रिहाई के लिए व्यवस्था के तमाम भ्रष्टाचारियों से अपनी लूट की रकम का बंटवारा करना पड़ता है। संबंधित विभाग में मामला ताजा रहने तक भ्रष्टाचार फूंक-फूंक कर किया जाता है। क्रिकेट के इस भ्रष्टाचार में संलिप्तता के दौरान बेपर्दा हुए लोगों को इतनी चिंता भी जरूरी नहीं है। हर कोई टीवी कैमरों के सामने नैतिकता की चाहे जितनी कसमें खाए कैमरा हटते ही उनकी नैतिकता का पतन हो जाता है। खेल धर्म की चाहे जितनी बातें की जाएं सच यही है कि लगभग हर खेल ‘गेम’ बन चुका है अैहर गेम का नियंत्रण खिलाड़ियों की बजाय खेल संस्थानों के संचालकों, प्रायोजकों, जुआरियों और फिक्सरों के हाथ में है। मैच फिक्सिंग के धंधे के पर्दाफाश के मामले में भी हमारा समाज यूरोप से दशकों पिछड़ा हुआ है। अंतर सिर्फ इतना है कि पश्चिम के खेलों में सटोरिए और फिक्सर घुसपैठ का प्रयास करते हैं जबकि हिन्दुस्तान में क्रिकेट नामक खेल के फिक्सर ही उसके नियंता हैं। जब कभी खेल में फिक्सिंग की दुर्गंध आम हो जाती है तो पुलिस या जांच एजेंसियों के सहयोग से किसी श्रीसंत की
May
19
2013
फिक्सिंग के दलदल में क्रिकेट
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यह खुलासा बताता है कि फिक्सिंग, बेईमानी और दशर्कों के साथ फरेब करना हमारी फितरत में शामिल हो चुका है। वैसे भी आईपीएल के दौरान फिक्सिंग का यह कोई पहला मामला नहीं है। पिछले साल भी एक निजी टीवी चैनल ने बताया था कि आईपीएल के दौरान खिलाड़ी किसी भी तरह की फिक्सिंग के लिए तैयार थे। उस स्टिंग में साफ दिखा कि युवा खिलाड़ी पैसे के लिए किसी भी हद तक गिरने को तैयार थे। मामला सामने आने के बाद भारतीय क्रिकेट बोर्ड ने आनन-फानन में उन पांचों खिलाड़ियों पर पाबंदी लगा दी, लेकिन इससे बीमारी खत्म नहीं हुई।
इस बार कहीं ज्यादा संगीन मामला सामने आने के बाद बीसीसीआई के मुखिया एन श्रीनिवासन को कहना पड़ा है कि यह एक तरह से बोर्ड की भी नाकामी है क्योंकि हमारी एंटी करप्शन यूनिट इस गड़बड़झाले को नहीं पकड़ पायी। बीसीसीआई को इस विवाद से होने वाले नुकसान का अंदाजा है, लिहाजा वह तुरंत हरकत में आई है। आईपीएल गवर्निंग काउंसिल ने भी स्पॉट फिक्सिंग में संलिप्त खिलाड़ियों पर सख्त कार्रवाई की बात कही है। ऐसे में इन युवा क्रिकेटरों का करियर खत्म होता दिख रहा है। लेकिन सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या इन खिलाड़ियों पर पाबंदी लगाने
May
17
2013
मुस्लिम मत की कालाबाजारी
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इस्लाम में व्यक्ति पूजा वर्जित है। पैसों के लिए, सियासी पदों के लिए ईमान बेचना वर्जित है। हुकूमत की चमचागिरी करना वर्जित है। भ्रष्ट और अनैतिक व्यक्ति को नायक बनाना या मानना भी इस्लाम में वर्जित है। फिजूलखर्जी की बिल्कुल मनाही है। इस्लाम के इन क्रांतिकारी और मानवीय पक्षों का व्यापार होने लगे तो आप इसे क्या कह सकते हैं? मुल्ला-मौलवी और मुस्लिम नेता इस्लाम के क्रांतिकारी और मानवीय पक्ष को व्यापार बना रहे हैं। मुल्ला-मौलवी व्यक्ति पूजा, फिजूलखर्ची, चमचागिरी की गर्त में जाने से परहेज नहीं कर रहे हैं। इससे भी आगे की बात यह है कि रुपये के चंद टुकड़ों के लिए, सियासी पदों के लालच में मुल्ला-मौलवी खुद इस्लाम और गरीब मुसलमानों को ढाल बना रहे हैं और उनकी बुनियादी समस्याओं के लिए कोई सार्थक काम करने की जगह अपनी सियासी राजनीति को चमका रहे हैं।
सेमिनार चार घंटे का खर्च करोड़ से अधिक
हजरत मुहम्मद किस प्रकार से फिजूलखर्ची और दिखावे के विरोधी थे उसका एक उदाहरण बहुत चर्चित हैं और असली मुसलमान उस उदाहरण का सौ प्रतिशत पालन करते हैं। एक बार हजरत मुहम्मद के पास अतिरिक्त पैसा आ गया। यह जानकर उनके समर्थकों ने उनसे अपील की कि अतिरिक्त धन से मस्जिद की छत
May
17
2013
एक और स्वयंभू संत
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हमारे देश में न केवल विभिन्न धर्मों,विश्वासों व आस्थाओं के अनुयायी रहते हैं तथा अपनी आस्था के अनुसार अपने धर्मस्थल संचालित करते हैं बल्कि आए दिन यहां किसी न किसी नए आश्रम, नए डेरे या किसी न किसी स्वयंभू अवतारी पुरुष द्वारा अपना नया 'धर्म उद्योग' स्थापित करने के समाचार भी मिलते रहते हैं। हमारे देश की भोली-भाली जनता है कि इनमें से तमाम लेाग अपने पारंपरिक धर्मों व विश्वासों से नाता तोड़कर किसी नए स्वयंभू धर्मगुरु द्वारा चलाए जाने वाले नए आश्रमों या डेरों से ही अपनी आस्था जोड़ बैठती है। ऐसा ही एक आश्रम हरियाणा के रोहतक जि़ले के करौंथा गांव में स्थित है। इसके संचालक हैं स्वयंभू संत रामपाल जी।
वैसे तो यह स्वयं को कबीरपंथी विचारधारा का संत बताया करते हैं। परंतु अपनी चतुर बुद्धि व तथाकथित 'ज्ञान' के आधार पर इन्होंने अपने प्रवचनों के माध्यम से लोगों को यह समझाने की कोशिश शुरु कर दी कि वे एक सिद्ध पुरुष हैं, अवतारी व्यक्ति हैं तथा उन्हें ईश्वर का दर्शन प्राप्त हो चुका हैं। अपने कोमल स्वभाव के अनुसार आम लोग स्वयंभू संत रामपाल के आश्रम से जुडऩे लगे। और धीरे-धीरे उनकी संख्या हज़ारों में पहुंच गई। अभी उनका प्रचार-प्रसार चल ही रहा था तथा अपने
May
17
2013
क्रिकेट पर कालिख
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पुलिस ने इन तीनों क्रिकेटरों और कई बुकियों को गिरफ्तार कर लिया है। इनके खिलाफ धोखाधड़ी और आपराधिक साजिश का केस दर्ज किया गया है। इन तीनों क्रिकेटरों सहित अन्य को ५ दिनों की पुलिस रिमांड पर भेज दिया गया है। ये तीनों ही खिलाड़ी राजस्थान रॉयल्स टीम में थे। हालांकि पुलिस ने टीम मालिकों के प्रकरण में शामिल होने से इनकार करते हुए कहा है कि प्रारंभिक जांच में उनके खिलाफ पुख्ता साक्ष्य नहीं मिले हैं। इससे पूर्व भी आईपीएल-५ में स्पॉट फिक्सिंग के जिन्न में खूब तहलका मचाया था। उस दौरान जिन क्रिकेटरों को स्पॉट फिक्सिंग में पकड़ा गया वो थे, पुणे वॉरियर्स के मोहनीश मिश्रा, किंग्स इलेवन पंजाब के शलभ श्रीवास्तव, डेक्कन चार्जर्स के टी पी सुधींद्र, किंग्स इलेवन पंजाब के अमित यादव और दिल्ली के एक क्रिकेटर अभिनव बाली। इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) में मैच फिक्सिंग से लेकर स्पॉट फिक्सिंग की बातें पहले भी उठती रही हैं किन्तु न तो भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड और न ही सरकार ने इस ओर कोई ठोस कदम उठाये|
ऐसा प्रतीत होता है कि आईपीएल में काले धन को सफ़ेद करने की प्रक्रिया का दायरा बीसीसीआई के बूते से कहीं आगे निकल गया है। किसी फ्रेंचाइजी पर सीधे उंगली नहीं
May
17
2013
बड़ी कठिन है डगर पनघट की
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जल संरक्षण की दिशा में कदम उठाते हुए केन्द्रीय मंत्रिमंडल ने वर्ष 2013 को ‘जल संरक्षण वर्ष’ के रूप में मनाने की घोषणा की है। इस दौरान पानी और जल स्त्रोतों के सरंक्षण और उसके विवेकपूर्ण इस्तेमाल के बारे में बड़े पैमाने पर जागरूकता अभियान चलाए जाएंगे। अभियान के द्वारा जल के महत्व एवं उसकी उपयोगिता को विभिन्न जनंसचार माध्यमों द्वारा जनमानस तक पहुंचाने के साथ ही जल संरक्षण की प्रति जागरूकता का प्रचार-प्रसार किया जाएगा। जल से संबंधित विभिन्न विषयों जैसे जल संरक्षण, जल प्रबंधन, जल को प्रदूषण से मुक्त करना आदि को इस अभियान के माध्यम से आम जनता तक पहुंचाया जाएगा। साथ ही जल के प्रभावी एवं मितव्ययिता से उपयोग करने के लिए सभी को प्रेरित किया जाएगा ताकि जल का संरक्षण किया जा सके। इसके लिए देश के विभिन्न हिस्सों में अनेक जागरूकता अभियान आरंभ किए जाएंगे।
तेजी से बढती जनसंख्या ने पानी की जरूरत और उसकी मांग के बीच एक गहरी खाई पैदा कर दी है। देश के अधिकतर किसान जल की कमी का सामना कर रहे है। दूसरी तरफ कुछ ऐसी निजी कंपनियां भी हैं जो जल का व्यापार कर भारी मात्रा में धन कमाने में लगी है। पूरे विश्व में पानी का व्यापार



