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Jul

24

2014

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भारतीय भाषाओं पर अंग्रेज़ी की कालिख

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भारतीय भाषाओं पर अंग्रेज़ी की कालिख

डॉ दौलत सिंह कोठारी की अनुशंसाओं के आधार पर वर्ष 1979 में सिविल सेवा परीक्षा में अंग्रेजी के साथ भारतीय भाषाओं में भी उत्त र देने की छूट दी गई थी। लेकिन 2011 से लागू नई परीक्षा पद्धति के बाद भारतीय भाषाएँ अंग्रेज़ी के वर्चस्व से हाशिये पर आ गई. नई प्रणाली में प्रारंभिक परीक्षा के अंतर्गत एक पेपर सामान्य अध्ययन और दूसरा सिविल सर्विसिज़ एप्टिट्यूड टेस्ट यानी सी-सैट का होता है. हिंदी माध्यम छात्रों के लिए यही दूसरा पेपर परेशानी का सबब बना हुआ है. 2011 से पहले हिंदी सहित भारतीय भाषाओँ में प्रारंभिक परीक्षा पास कर मुख्य परीक्षा लिखने वाले छात्रों की संख्या जहां लगभग पचास प्रतिशत हुआ करती थी वह सी सैट आने के बाद घटकर मात्र पन्द्रह से बीस प्रतिशत रह गई है. यदि अंतिम चयनित अभ्यर्थियों की संख्या देखें तो 2011 से पूर्व अंतिम चयनित सूची में भारतीय भाषाओँ के उम्मीदवारों की हिस्सेदारी पंद्रह से बीस फ़ीसदी हुआ करती थी जो अब केवल 2 से 3 प्रतिशत ही बची है. इस वर्ष के घोषित परिणामों में 1122 छात्रों में हिंदी माध्यम के केवल 26 और अन्य भारतीय भाषाओँ को मिला लिया जाए तो भी यह संख्या सौ का आँकड़ा नहीं छूती. यदि पिछले तीन वर्षों

Jul

23

2014

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भगत भरोसे छत्तीसगढ़

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भगत भरोसे छत्तीसगढ़

छत्तीसगढ़ राज्य योजना आयोग में उनकी नियुक्ति को इस नजरिए से भी देखा जा सकता है। बहरहाल आयोग के अन्य नामचीन अशासकीय सदस्य हैं डॉ. दामोदर आचार्य, डॉ. दिनेश मरोठिया तथा अरविंद पनगरिया। विभिन्न क्षेत्रों के इन विशेषज्ञों के अलावा तीन मंत्री एवं कुछ शासकीय अधिकारी भी आयोग में हैं। मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह अध्यक्ष हैं। योजना आयोग को सुदृढ़ बनाने की सरकार की कवायद पूरी हो गई और अब बैठकों एवं विचार-विमर्श का दौर चलने वाला है।

राज्य योजना आयोग का काम राज्य के लिए विकास योजनाएं बनाना तथा फंड के लिए केन्द्रीय योजना आयोग में पैरवी करना है। राज्य की  पंचवर्षीय योजनाएं सभी क्षेत्रों की आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर तैयार की जाती हैं। काम महत्वपूर्ण है क्योंकि इन्ही योजनाओं के आधार पर राज्य के विकास की दिशा तय होती है। इस लिहाज से आयोग का जनता की आवश्यकताओं एवं समस्याओं से भिज्ञ रखना अतिआवश्यक है। जो आयोग इस सन्दर्भ में जितना चैतन्य होगा उसी के अनुरूप योजनाओं का खाका तय हो सकेगा। चूंकि छत्तीसगढ़ राज्य योजना आयोग में पहली बार विशेषज्ञों को शामिल किया गया है अत: उम्मीद की जानी चाहिए उसे एक नई दृष्टि मिलेगी जिसकी झलक उसके कामकाज में नजर आएगी।

लेकिन सवाल है, राज्य

Jul

23

2014

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यस, माई लार्ड महेन्द्र सिंह धोनी

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यस, माई लार्ड महेन्द्र सिंह धोनी

आजादी के बाद भारत बार बार लॉर्ड्स में इंग्लैंड से टकराया, लेकिन जीत का स्वाद मिलने से हर बार भारत दूर ही रहा। 1974 में लॉर्ड्स ने ही भारत को सबसे शर्मनाक पहचान दी। इंग्लैंड ने ना सिर्फ 628 रन की विशाल पारी खेली बल्कि बारत ने सारे रिकॉर्ड तोड़कर इंग्लैंड के खिलाफ दूसरी पारी में सिर्फ 42 रन बनाये। और भारत की टीम में उस वक्त गावस्कर, विश्वनाथ, वाडेकर, आबिद अली, इंजीनियर सरीखे बल्लेबाज थे। लेकिन 5 रन से ज्यादा कोई ना बना सका। सबसे ज्यादा 18 रन सोल्कर ने बनाये। तो लॉर्ड्स में जीत के लिये तड़पती भारतीय क्रिकेट टीम को पहली बार जीत भी मिली तो इतिहास बना गयी। क्योंकि यह जीत विश्वकप जीतने वाली थी। लेकिन 1983 के इस जश्न में सामने इंग्लैंड नहीं वेस्ट इंडीज था। भारत जीता और जश्न लॉर्ड्स से लेकर दिल्ली तक मना। लेकिन तब भी इंतजार लॉर्ड्स में इंग्लैंड को पीटने का था।

क्रिकेट का मक्का लॉर्ड्स तो क्लासिक क्रिकेट के लिये जाना जाता था और दुनिया में माना यही जाता रहा कि जबतक टेस्ट मैच में जीत नहीं मिलेगी तबतक क्रिकेट की बादशाहत को कोई मतलब नहीं है। फिर 1986 में कमोवेश वही टीम लॉर्ड्स में इग्लैड के खिलाफ

Jul

23

2014

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कठमुल्लाओं की कठपुतली

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कठमुल्लाओं की कठपुतली

दिल्ली से बग़दाद कितनी दूर है? ठीक-ठीक 3159 किलोमीटर. बीच में ईरान, अफ़ग़ानिस्तान और पाकिस्तान. किसने सोचा था कि आग वहाँ लगेगी तो आँच तीन देशों को पार करते हुए अपने यहाँ तक आ जायेगी. वैसे तो इराक़ पिछले दस-बारह सालों से युद्ध से झुलस रहा है, लेकिन पहले कभी आज जैसी तपिश महसूस नहीं की गयी. तपिश नहीं, साज़िश. गहरी और भयानक साज़िश! अबू बकर अल बग़दादी ने ‘इसलामी ख़िलाफ़त’ की स्थापना कर अपने को इसलाम का स्वयंभू ख़लीफ़ा घोषित कर सबकी नींद उड़ा दी है. बड़ी मुसलिम आबादी वाले दुनिया के तमाम देश पुनरोत्थानवादी कट्टरपंथी इसलाम के बीज फैलने के ख़तरों से चौकन्ना हैं. लेकिन भारत के लिए स्थिति कहीं ज़्यादा नाज़ुक हो सकती है. और कहीं ज़्यादा जटिल भी. क्योंकि यहाँ समस्या के कई और पहलू हैं, जो और कहीं नहीं हैं!

पुनरोत्थानवादी कट्टरपंथी इसलाम के कुछ डरावने, ज़हरीले, शर्मनाक नमूने हम पिछले कुछ बरसों में पड़ोसी अफ़ग़ानिस्तान और पाकिस्तान में देख चुके हैं! बामियान बुद्ध की ऐतिहासिक धरोहर को तहस-नहस करने से ले कर एक मासूम बच्ची मलाला यूसुफ़ज़ई पर क़ातिलाना हमले तक मनुष्य विरोधी, लोकतंत्र विरोधी, समानता विरोधी और प्रगति विरोधी इस सोच ने इन देशों में आतंक और ख़ौफ़ का साम्राज्य स्थापित कर रखा

Jul

19

2014

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समाजवादी लोकतंत्र अथवा लोकतांत्रिक समाजवाद

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समाजवादी लोकतंत्र अथवा लोकतांत्रिक समाजवाद

ऐसी हालत मे समाज मे आर्थिक सम्पन्नता भी भूख पैदा की जाती है तथा लोकतांत्रिक स्वतंत्रता की भूख को दबाया जाता है। ऐसी स्थिति मे समाज पूरी तरह शासन का मुखापेक्षी बनता चला जाता है। जिसका दूसरा अर्थ होता है अप्रत्यक्ष गुलामी। सत्ता का लगातार केन्द्रीयकरण होता है। आर्थिक विकास की  भूख बढती जाती है तथा पूर्ति मे समाज की अन्य इकाइयों से दूरी बन जाने के कारण अब्यवस्था बढती चली जाती है। विश्व स्तरीय सिद्धान्त है कि विकृत लोकतंत्र हमेशा ही अब्यवस्था का विस्तार करता है जिसका दो ही  समाधान होता है। एक, लोकतंत्र को लोक स्वराज्य की दिशा देना। दो, तानाशाही। स्पष्ट दिख रहा कि भारत मे प्रबल तानाशाही की भूख पैदा होती रही है क्योकि आम तौर पर लोग महसूस कर रहे थे कि इस अब्यवस्था से तो अंग्रेजो का राज्य अच्छा था अथवा इससे तो अच्छा है कि सैनिक तानाशाही आ जाती।

स्वतंत्रता के बाद के सरसठ वर्षो तक भारत का समाजवादी लोकतंत्र किस दिशा मे गया और इसके परिणाम क्या हुए, यह विचारणीय है। लोकतांत्रिक भारत मे केन्द्र मे सारी सत्ता एक परिवार के इर्द गिर्द ही घूमती रही। या तो वह परिवार स्वयं सत्ता मे रहा अथवा विपक्ष की भूमिका मे भी रहकर कोई

Jul

18

2014

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जंग लगा जेपी को

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जंग लगा जेपी को

कर्ज ने बढ़ाया मर्ज
जेपी ग्रुप ने पिछमें सीमेंट और पावर कोराबार में तगड़ा क्षमता विस्तार किया। लेकिन ये क्षमता विस्तार कर्ज के जरिए हुआ है। जिससें ग्रुप भारी भरकम कर्ज में डूबा है जेपी ऐसोसिएट के अधिकारियों के अनुसार,कंपनी ने पिछले 7 साल में सीमेंट क्षमता 90 लाख टन से बढ़ाकर 3.35 करोड़ टन कर ली है। पिछले 7 साल में करचम, वांगटू, वास्पा, जैसे बड़े प्रोजेक्टस जोड़े हैं। इनके विस्तार के कारण कंपनी पर कर्ज बढ़ता गया,जो 85,000 करोड़ रुपए तक पहुंच गया है। आज जेपी ग्रुप के सीमेंट कारोबार पर 16,500 करोड़ रुपए का कर्ज, जयप्रकाश पावर पर 23,000 करोड़ रुपए का कर्ज और जेपी इंफ्रा पर 8000 करोड़ रुपए का कर्ज है। वित्त वर्ष 2013 के अंत तक ग्रुप पर 60,283 करोड़ रुपए का कंसोलिडेटेड और 25,000 करोड़ रुपए का स्टैंडअलोन कर्ज था। जेपी एसोसिएट्स पर आईसीआईसीआई बैंक, एसबीआई और आईडीबीआई का भारी भरकम कर्ज है। जेपी एसोसिएट्स को अपने एबिटडा का 60 फीसदी सिर्फ  ब्याज लागत को चुकता करने में खर्च करना पड़ता है।

12 महिने में चार संपतियों के सौदे
जेपी एसोसिएट्ïस ने पिछले 12 महीनों के दौरान परिसंपत्ति बिक्री के चार सौदे कर बाजार को आश्चर्यचकित कर दिया है। इन सौदों के

Jul

18

2014

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मोदी को बहुजन का बहुमत

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मोदी को बहुजन का बहुमत

दरअसल ये सेकुलरवाद एक विचारधारा से अधिक मुस्लिम वोटरों को अपने पक्ष में करने का एक घटिया जरिया बन गया था और इसके निरंतर हो रहे राजनीतिकरण ने इसे इतना विकृत कर दिया था कि यह अपना मूल अर्थ ही खो बैठा था। सेकुलर भाव-विचार हमें आधुनिकता की ओर अग्रसर करते हैं। नेहरु-आम्बेडकर की वैचारिकी आदर्श सेकुलर वैचारिकी है और इससे हम आज भी सीखना चाहते हैं। लेकिन जो नेता खुद अपने भाव-विचारों में आधुनिक सोच का नहीं है, वह किस तरह सेकुलर हो सकता है? लालू प्रसाद या मुलायम सिंह यादव के सेकुलर होने के क्या आधार हैं ? लेकिन सेकुलर-राजनीति का प्रसाद तो यही बांट रहे थे। इसी पर इनकी राजनीतिक दुकानें भी चल रही थीं। इन्होंने अपने भाषणों, बयानों और कार्यकलापों से मुसलमानों को मानसिक तौर पर और पिछड़ा बनाया। इनका ध्यान उनके बीच जज्बाती ख्याल उभारने पर ज्यादा होता था, क्योंकि इसी से उनके वोट इन्हें आसानी से मिल सकते थे। बौद्धिक सेकुलरवादियों ने भी मुसलमानों के बीच सामाजिक जागरण या सुधार भाव जाग्रत करने का प्रयास नहीं किया। उन लोगों ने भी कबीर से अधिक अकबर व दाराशिकोह की वैचारिकी को रेखांकित किया। मुसलमानों के एक खास तबके के लिए ऐसे सेकुलर विचार बहुत काम

Jul

18

2014

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शाह के सिर पर जीत का सेहरा

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शाह के सिर पर जीत का सेहरा

वैसे भी चुनाव जीतने और सरकार बनाने के लिए भाजपा ने पूर्व में भी किसी भी तरह के नैतिक मूल्य नहीं माने और भारतीय लोकतंत्र में विद्यमान अधिकांश विकृतियों का प्रारम्भ उन्हीं से होता रहा है। साम्प्रदायिक ध्रुवीकरण तो उनके दल की स्थापना का मुख्य आधार रहा ही है। विभाजन के दौरान पाकिस्तान क्षेत्र में चले गये स्थानों से आये शरणार्थियों के घावों को हरा रख कर ही उन्होंने राजनीतिक दलों के बीच अस्तित्व बनाया था। पहले आम चुनावों में कांग्रेस तो स्वतंत्रता आन्दोलन के इतिहास, अछूतोद्धार, और धर्मनिरपेक्षता के मूल्यों के कारण चुनाव जीतने के प्रति आश्वस्त रहती थी पर भाजपा जब जनसंघ के नाम से थी, तब भी उसने. अयोध्या की बाबरी मस्ज़िद में रामलला की मूर्ति रखवाने वाले कलैक्टर के. के नायर को टिकिट दे संसद में भेजने व उनकी पत्नी को टिकिट देने का काम सबसे पहले किया था। आज भी सबसे अधिक पूर्व प्रशासनिक अधिकारी, पुलिस अधिकारी, सेना अधिकारियों को टिकिट देने वाली यह प्रमुख पार्टी है। चुनाव खर्चों में शुचिताओं का उल्लंघन करने का प्रारम्भ भी इसी पार्टी ने किया जिसे बाद में दूसरों ने भी अपनाया। दलबदल को प्रोत्साहित करने और उससे बनी सरकारों में सम्मलित होने के प्रति वे सदा उत्साहित रहे।

Jul

16

2014

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कांठ की गांठ

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कांठ की गांठ

बताते हैं कि रामगंगा में आने वाली बाढ़ से तंग कर आकर कुछ लोगों ने सत्तर के दशक में मुरादाबाद-धामपुर हाइवे के किनारे घर बना लिए थे, जिनकी बाद में संख्या बढ़ती चली गई। गाँव सभा में कुल मतदाता पैंतीस सौ के आसपास हैं, जिनमें चार-पाँच सौ के करीब जाटव मतदाता हैं। यहाँ प्रधान पद के लिए कमरुल हसन चुने जाते रहे हैं। भले, शालीन और सभ्य लोगों में शुमार कमरुल हसन स्थानीय स्तर पर काफी लोकप्रिय हैं। पिछले पंचायत चुनाव में प्रधान पद अनुसूचित महिला वर्ग के लिए आरक्षित हो गया, तो कमरुल हसन ने अपने नौकर घसीटा राम  जाटव की पत्नी ओमवती को उम्मीदवार बना दिया और वह आसानी से जीत गई, लेकिन चुनाव जीतने के बाद घसीटा राम ने कमरुल हसन से विद्रोह कर दिया और ग्राम पंचायत के निर्णय स्वयं लेने लगा। पत्नी की  जगह सभी कार्य घसीटा राम ही करते हैं।

कांठ विधान सभा क्षेत्र के विधायक अनीसुर्रहमान एडवोकेट इसी विवादित मजरा अकबरपुर चैदरी के ही निवासी हैं, जो पिछला चुनाव पीस पार्टी के टिकट पर जीते थे, लेकिन उत्तर प्रदेश के कद्दावर नगर विकास मंत्री  आजम खाँ के खास माने जाते हैं, इसलिए एक तरह से अघौषित सपाई कहे जा सकते हैं, इसलिए पुलिस-प्रशासन

Jul

16

2014

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ट्रैक टू डिप्लोमेटिक ट्रिप

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जून 2013 में पाकिस्तान यात्रा के समय प्रधानमंत्री नवाज शरीफ के साथ डॉ वैदिक जून 2013 में पाकिस्तान यात्रा के समय प्रधानमंत्री नवाज शरीफ के साथ डॉ वैदिक

वैसे माना यह भी जाता है कि पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ मोदी के शपथ ग्रहण में आ जाये इसके लिये वेद प्रताप वैदिक भी लगातार अपनी डिप्लामेसी चला रहे थे। वह लगातार पाकिस्तान सरकार के संपर्क में थे। वहीं दूसरी तरफ विपक्ष में रहने के दौरान बीजेपी ने हमेशा पाकिस्तान को जिस तल्खी के साथ निशाने पर लिया उसके बाद सत्ता में आने के बाद मोदी सरकार के सामने भी संकट रहा कि वह कैसे संबंधों को आगे बढाये। क्योंकि पाकिस्तान के साथ युद्ध या हमले का रास्ता मोदी की उस छवि को धो देता जिसके आसरे विकास का ककहरा चुनाव प्रचार के दौरान देश में पढ़ाया गया था। इसलिये ध्यान दें तो पाकिस्तान क पीएम के साथ पहली मुलाकात के बाद से ही विकास की लकीर खिंचने के मद्देनजर ही समझौतों का जिक्र पाकिस्तान से हुआ। यहां तक कि सार्क सैटेलाइट के जिक्र पर प्रधानमंत्री मोदी ने जतलाया कि भारत का रुख पाकिस्तान को लेकर बिलकुल अलग ही नहीं संबधों को खासा आगे बढ़ाने का है।

इसी दायरे में वेद प्रताप वैदिक ने पाकिस्तान की यात्रा की और पाकिस्तान के प्रभावी लोगों से मुलाकातों में मोदी सरकार के प्रति राय बदलने की पहल भी की। यानी चाहे

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Seetaram Yechuri

Seetaram Yechuri

हैदराबाद के ब्राह्मण कुल में पैदा हुए सीताराम येचुरी भारत में कम्युनिस्ट आंदोलन के कुछ चेहरों में एक बन गये हैं. सेंट स्टीफेन और जेएनयू से शिक्षा. 1974 में एसएफआई में सक्रिय और बाद में सीपीआईएम से जुड़े. 1984 में सीपीआई सेन्ट्रल कमेटी में शामिल हुए. वर्तमान में सीपीआई (एम) पोलित ब्यूरो के मेम्बर और ऐसे सक्रिय राजनीतिज्ञ जिनसे मिलने की तमन्ना बराक ओबामा भी रखते हों.
Rajiv Yadav

Rajiv Yadav

इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक राजीव दिल्ली स्थित आईआईएमसी से मीडिया में मास्टर डिग्री ले चुके हैं. फिलहाल इलाहाबाद में रहकर मुक्त पत्रकारिता और जनाधिकार के मुद्दों पर सक्रिय कार्य कर रहे हैं. विस्फोट पर लेखन.
Ashok Wankhade

Ashok Wankhade

यवतमाल में पैदा हुए अशोक वानखेडे पढ़ने के लिए इंदौर आये तो पत्रकारिता का कैरियर साथ में लेकर इंदौर से बाहर निकले. फ्री प्रेस जर्नल से पत्रकारिता शुरू करनेवाले अशोक वानखेडे चौथा संसार में काम करने दिल्ली आये तो यहीं के होकर रह गये. करीब पचीस साल के अपने पत्रकारीय कैरियर में अंग्रेजी, हिन्दी और मराठी तीनों भाषाओं के लिए काम किया है. इलेक्ट्रानिक का जमाना आया तो विडियो जर्नलिज्म में भी हाथ आजमाया. अब एक अखबार के राजनीतिक संपादक होने के साथ साथ नये मीडिया को नारा-ए-मस्ताना बनाना चाहते हैं.
Dr. Ashish Vashisth

Dr. Ashish Vashisth

डॉ. आशीष वशिष्ठ लखनऊ में रहनेवाले स्वतंत्र पत्रकार हैं. विभिन्न विषयों पर समसामयिक टिप्पणी और लेखन.
Harsh Vardhan

Harsh Vardhan

हर्षवर्धन टीवी पत्रकार हैं. अमर उजाला में लंबे समय तक काम करने के बाद सीएनबीसी आवाज में काम किया. इस वक्त पी7न्यूज में कार्यरत। बतंगड़ नाम से नियमित ब्लाग भी लिखनेवाले हर्षवर्धन राजनीतिक विश्लेषक के तौर पर स्थापित हैं.
Vinod Upadhyay

Vinod Upadhyay

मूलत: बक्सर बिहार के रहनेवाले विनोद उपाध्याय भोपाल में रहकर पत्रकारिता करते हैं. दैनिक राष्ट्रीय हिन्दी मेल से पत्रकारिता में प्रवेश. वर्तमान में भोपाल से ही प्रकाशित होनेवाले दैनिक अग्निबाण से जुड़े हुए हैं.
Arvind Tripathi

Arvind Tripathi

अरविन्द त्रिपाठी देश के कई बड़े समाचार पत्रों व पत्रिकाओं में काम करने के बाद वर्तमान में दिल्ली से प्रकाशित हो रही "सामना" हिंदी पत्रिका में उत्तर प्रदेश से विशेष संवाददाता के पद पर कार्यरत हैं. साथ ही पानी और पर्यावरण के मुद्दे पर राजेन्द्र सिंह के साथ काम कर रहे हैं.
Sanjeet Tripathi

Sanjeet Tripathi

रायपुर के रहनेवाले संजीत त्रिपाठी वैसे तो प्रिंट मीडिया के लिए ही काम करते हैं लेकिन प्रिंट से ज्यादा आनलाइन मीडिया में सक्रियता. ब्लाग लिखने से लेकर फेसबुक सक्रियता तक संजीत सब जगह नजर आते हैं. आवारा बंजारा नाम से ब्लाग लेखन करनेवाले संजीत फिलहाल रायपुर में एक अखबार के साथ काम कर रहे हैं.
Anushikha Tripathi

Anushikha Tripathi

भोपाल में ही पढ़ाई लिखाई और अब भोपाल में ही रहकर पत्रकारिता. माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय से 2011 में पत्रकारिता की डिग्री.
S Rajen Todariya

S Rajen Todariya

लंबे समय से पत्रकारिता में सक्रिय एस राजेन टोडरिया दैनिक भास्कर में बतौर स्थानीय संपादक काम कर चुके हैं। इस वक्त देहरादून से प्रकाशित पाक्षिक पत्रिका जनपक्ष टुडे के प्रधान संपादक हैं।
Awesh Tiwari

Awesh Tiwari

मेरे लिए खबरें सिर्फ सूचनाओं को कलमबंद करने का जरिया नहीं है ,ये जरुरी है कि जिनके लिए भी हम खबरें लिख रहे हैं उनको उन ख़बरों से कुछ मिले |पिछले एक दशक से उत्तर भारत के सोन-बिहार -झारखण्ड क्षेत्र में आदिवासी किसानों की बुनियादी समस्याओं ,नक्सलवाद ,विस्थापन ,प्रदूषण और असंतुलित औद्योगीकरण को लेकर की गयी अब तक की रिपोर्टिंग में हमने अपने इस सिद्धांत को जीने की कोशिश की है।
Anshuman Tiwari

Anshuman Tiwari

मूलत: उत्तर प्रदेश के रहनेवाले अंशुमान तिवारी ने आर्थिक पत्रकारिता को हिन्दी में बहुत शुरूआती दौर से देखा समझा है. अमर उजाला कारोबार के लिए काम किया और बाद में दैनिक जागरण समूह से जुड़े. वर्तमान में दैनिक जागरण के ब्यूरो चीफ हैं. इसके साथ ही अर्थार्थ नाम से ब्लाग भी लिखते हैं.
Sanjay Tiwari

Sanjay Tiwari

आप जहां तक सोच सकते हैं इंटरनेट आपको वहां तक काम करने का मौका देता है. अभी तक मानव सभ्यता ने जितने भी मीडिया माध्यमों का उपयोग किया है यह उन सबमें अनूठा, प्रभावी और सर्वगुण संपन्न है. सूचना लेने देने के तीन माध्यमों दृश्य, श्रवण और पाठ को एक ही धागे में लपेटे नया मीडिया उत्पादन और पहुंच दोनों के लिहाज से सर्वश्रेष्ठ है. ऐसे नये मीडिया का जनहित के लिए भरपूर उपयोग हो, विस्फोट.कॉम उसी दिशा में उठा एक कदम है. visfot@visfot.com
Sanjay Swadesh

Sanjay Swadesh

किरोडीमल कॉलेज स्नातकोत्तर के बाद केंद्रीय हिंदी संस्थान दिल्ली से पत्रकारिता में डिप्लोमा। दैनिक हिंदुस्तान, नवभारत टाईम्स, सहारा समय, दैनिक भास्कर में काम. कई पत्र-पत्रिकाओं में स्वतंत्र लेखन के साथ स्थानीय जनअभियानों से जुड़े हैं।
Naresh Sirohi

Naresh Sirohi

महैन्द्र सिंह टिकैत की टीम में शामिल होकर पश्चिमी उत्तर प्रदेश में किसान आंदोलन से अपना सार्वजनिक जीवन शुरू करनेवाले नरेश सिरोही अभी भी मूल रूप से किसान आंदोलन से ही जुड़े हुए हैं। स्वदेशी आंदोलन में सक्रियता। संप्रति भाजपा किसान मोर्चा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष।
Rakesh Sinha

Rakesh Sinha

अकादमिक पृष्ठभूमि से ताल्लुक रखनेवाले प्रो. राकेश सिन्हा संघ विचारधारा के बीच सक्रिय समानतावादी विचारक हैं. राकेश सिन्हा हिन्दुत्व की प्रखर धारा के पैरोकार हैं. लेकिन ऐसा करने के लिए वे हिंसक विवाद की बजाय अहिसक "संवाद" को अपना जरिया बनाते हैं. इंडिया पॉलिसी फाउण्डेशन के मानद निदेशक के रूप में शोध, अध्ययन और संवाद को आगे बढ़ा रहे हैं.
Virender Singh Chauhan

Virender Singh Chauhan

वीरेंद्र सिंह चौहान एक दशक से अधिक समय तक हिंदी पत्रकारिता की मुख्यधारा से जुड़े रहे. दैनिक दिव्य हिमाचल में बतौर उप संपादक और बाद में अमर उजाला और दैनिक ट्रिब्यून में स्टाफ रिपोर्टर के नाते कार्य किया. इस दौरान हरियाणा यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट्स के प्रदेश अध्यक्ष. सितम्बर 2007 से पत्रकारिता के शिक्षण में. सम्प्रति चौधरी देवी लाल विश्वविद्यालय, सिरसा के पत्रकारिता व जनसंचार विभाग में एसोसिएट प्रोफेसर और विभागाध्यक्ष.
S N Singh

S N Singh

शेष नारायण सिंह मूलतः इतिहास के विद्यार्थी हैं. शुरू में इतिहास के शिक्षक रहे. .बाद में पत्रकारिता की दुनिया में आये...प्रिंट, रेडियो और टेलिविज़न में काम किया. इन्होने १९२० से १९४७ तक की महात्मा गाँधी की जीवनी के उस पहलू पर काम किया है जिसमें वे एक महान कम्युनिकेटर के रूप में देखे जाते हैं..1992 से अब तक तेज़ी से बदल रहे राजनीतिक व्यवहार पर अध्ययन करने के साथ साथ विभिन्न मीडिया संस्थानों में नौकरी की. अब मुख्य रूप से लिखने पढने के काम में लगे हैं. एक अखबार में काम और विस्फोट.कॉम के सम्मानित स्तंभलेखक.
Rajesh Singh

Rajesh Singh

मुंबई में रहनेवाले राजेश सिंह मानवाधिकार कार्यकर्ता और पत्रकार हैं. वर्तमान समय में नागरिक विकल्प नामक पत्रिका का संपादन और मानवाधिकार संस्था का संचालन.
SATISH SINGH

SATISH SINGH

सतीश सिंह वर्तमान में भारतीय स्टेट बैंक में एक अधिकारी के रूप में पटना में कार्यरत हैं और विगत तीन वर्षों से स्वतंत्र लेखन कर रहे हैं। भारतीय जनसंचार संस्थान से सत्र 1994-95 में (हिन्दी पत्रकारिता में) स्नात्कोतर डिप्लोमा करने के बाद 1995 से जून 2000 तक मुख्यधारा की पत्रकारिता में इनकी सक्रिय भागीदारी रही है।
Abhishek Singh

Abhishek Singh

अभिषेक रंजन सिंह ने 2007-08 में नई दिल्ली के भारतीय जनसंचार संस्थान से पत्रकारिता की पढ़ाई पूरी की। करियर की शुरूआत सकाल मीडिया गुप्र से किया। इन दिनों दक्षिण एशिया की प्रमुख ब्रॉडकास्ट एजेंसी सीवीबी न्यूज सर्विस में कार्यरत हैं। इसके अलावा विस्फोट सहित देश के प्रमुख हिंदी समाचार पत्र और पत्रिकाओं में समसामयिक मुद्दों पर नियमित लेखन कर रहे हैं।
SANDEEP SINGH

SANDEEP SINGH

सजग युवा पत्रकार व गांधीनगर में रहकर गुजरात केंद्रीय विश्वविद्यालय में शोधरत, सिनेमा व रंगमंच को लेकर विशेष हस्तक्षेप, सामाजिक व राजनीतिक मुद्दों पर खास नजर, विभिन्न अखबारों, पत्र-पत्रिकाओं व वेब पोर्टलों के लिये स्वतंत्र लेखन.
Pranay vikram  Singh

Pranay vikram Singh

श्रमजीवी पत्रकार प्रणव विक्रम सिंह सामाजिक, राजनीतिक और आर्थिक मुद्दों पर पिछले कई सालों से लेखन कर रहे हैं.
Dhananjay Singh

Dhananjay Singh

सिमटते सिमटते कुल परिचय इतना ही शेष रह गया है कि फिलहाल घुमक्कड़ी, सधुक्कड़ी और हाथ में कलम की लकड़ी। गाजीपुर से काशी हिन्दू विश्वविद्यालय होते हुए देहरादून तक पहुंचे हैं। काम काज बहुत किया अब लिखकर अकाज करते हैं।
A N Sibli

A N Sibli

1993 से हिन्दी, उर्दू और अंग्रेजी के विभिन्न राष्ट्रीय अखबारों और पत्रिकाओं में लेखन कर रहे अब्दुल नूर सिबली इस वक्त दिल्ली से प्रकाशित हिन्दुस्तान एक्सप्रेस में बतौर ब्यूरो चीफ कार्यरत हैं. विभिन्न वेबसाइटों पर नियमित लेखन.
Prem Shukla

Prem Shukla

मुंबई से प्रकाशित हिन्दी सामना के कार्यकारी संपादक. पिछले 20 सालों से पत्रकारिता. पत्रकारिता के साथ ही मुबंई में हिन्दीभाषी समाज के विभिन्न सांस्कृतिक और सामाजिक गतिविधियों में भी सक्रिय. विस्फोट.कॉम के नियमित स्तंभ लेखक.
Puja Shukla

Puja Shukla

पेश से टीवी पत्रकार पूजा शुक्ला धाकड़ लिक्खाड़ हैं. घर परिवार की जिम्मेदारी और टीवी पत्रकारिता के साथ साथ कलम को तलवार की तरह इस्तेमाल करती हैं. दिल्ली युनिवर्सिटी से पढ़ी लिखी पूजा दिल्ली में ही रहती है.
Rajesh Shukla

Rajesh Shukla

राजेश शुक्ला तो बस राजेश शुक्ला है. कला की समीक्षा के अलावा समाज और राजनीति की भी कलात्मक समीक्षा करने में महारत. मीडिया की मजूरी और कलम की गुलामी के अलावा दुनिया में फक्कड़ी ही पसंद आती है.
Abhishek Shrivastav

Abhishek Shrivastav

अभिषेक श्रीवास्तव के परिचय वाला पन्ना आमतौर पर खाली ही रहता है। खुद अपना कुछ पता नहीं। कोई परिचय नहीं। लेकिन हाथ में कलम और एक अदद कैमरा पकड़ लें तो बहुत सारी छुपी अक्सों को परिचय दे देते हैं। संघर्ष जिन्दगी का संघर्ष नहीं, बल्कि जीने का फलसफा है। स्वतंत्र पत्रकार तो हैं ही।
Arvind Shesh

Arvind Shesh

नास्तिकता और नौकरी दोनों साथ साथ। घोषित तौर पर। बिना किसी हिचक के। परिचय के नाम पर सिर्फ इतना कि जनसत्ता में नौकरी। लेकिन काम के नाम पर बहुत कुछ। खासकर लेखन के क्षेत्र में। मुद्दों को कविता और कहानी की शक्ल तो दे ही देते हैं, कभी कभी कविता और कहानी को भी मुद्दा बना देते हैं। दिल्ली में डेरा, बाकी सब तरफ कलम का घेरा।