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Jul

12

2014

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'अ'सरकारी गंगा मंथन

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'अ'सरकारी गंगा मंथन

जल संसाधन और नदी विकास के साथ ही नये मंत्रालय गंगा पुनर्जीवन की मंत्री उमाश्री भारती ने गंगा पर राष्ट्रीय संवाद में कहा कि पूरा देश गंगोत्री से गंगा सागर तक गंगा के अविरल और निर्मल प्रवाह के लिए वचनबद्ध है। इस संवाद के निष्कर्षों को सरकार ईमानदारी से पूरा करेगी। गंगा पुनरूद्धार के लिए धन की कोई कमी नहीं रहेगी। वे समाज को संवेदनशील और जागरुक बनाने के साथ ही गंगा संरक्षण के लिए कानून बनाने की पक्षधर भी रही हैं। अपने गंगा यात्रा के दौरान उन्होंने गंगा नदी बेसिन प्राधिकरण को विफल बताया था। उमाश्री भारती नदियों के संरक्षण के लिए लोगों का सहयोग चाहती हैं। इसके लिए आम लोगों में नदियों के प्रति श्रद्धा, आस्था और विश्वास को पुनर्जीवित करना जरूरी होगा। सुश्री भारती ने कहा कि आने वाले समय में नदियां और जल ही लोगों का जीवन बचा सकेंगी।

हालांकि सरकार के स्तर पर बहुत बड़ा बदलाव फिलहाल दिखाई नहीं दे रहा। सबसे बड़ा परिवर्तन यही दिखाई देता है कि गंगा की स्वच्छता से आगे बढ़कर गंगा संरक्षण की बात शुरू हो गई है। इस सरकार की दूसरी सबसे बड़ी बात है- गंगा के मिशन को विश्व बैंक और भारत सरकार से आगे ले जाकर देश

Jul

11

2014

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संघ की शह पर शहं'शाह'

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संघ की शह पर शहं'शाह'

मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद स्वंयसेवकों को यह लगने लगा है कि संघ का ढांचा कही ज्यादा प्रभावी तरीके से राजनीति को साध सकता है। ऐसे में स्वयंसेवक अगर देश भर में बीजेपी की सत्ता बनाने के लिये राज्यवार भी निकले तो फिर बीजेपी अपने बूते हर जगह सरकार क्यों नहीं बना सकती है? इसलिये संघ के तीन मंत्र अब बीजेपी में नजर आने वाले हैं। पहला, हर राज्य में बीजेपी का प्रदेश अध्यक्ष बदला जायेगा। इसमे गुजरात के प्रदेश अध्यक्ष आरसी फलदू भी होंगे। दूसरा, संघ की शाखाओं से जिसका वास्ता रहा है या फिर एवीबीपी के जरीये जिसने राजनीति का ककहरा पढ़ा है, उसे नंबर एक और नंबर दो के तहत महत्व दिया जायेगा। और इन्हें ही प्रदेश अध्यक्ष बनाया जायेगा। तीसरा जो भी प्रदेश अध्यक्ष की कुर्सी की कीमत लगाते रहे हैं या फिर गठबंधन की राजनीति के जरिये बीजेपी को सत्ता में लाने का सपना परोसते रहे हैं, उन्हे दरकिनार किया जायेगा।

संघ परिवार के भीतर हमेशा यह संवाद बना रहता है कि राजनीतिक प्रचार के जरिये संघ का स्वयंसेवक बीजेपी के लिये तो राजनीतिक जमीन तैयार कर सकता है लेकिन गठबंधन के दलों को इसका लाभ क्यों मिलना चाहिये? इसलिये अमित शाह का टारगेट

Jul

11

2014

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फेल बजट

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फेल बजट

रेल बजट के बारे में कुछ सोचने से पहले आप सबसे पहले खुद से यह पूछिए कि एक यात्री के रूप में सबसे ज्यादा समस्या आपको किस बात से होती है या कौन सा ऐसा बड़ा सुधार आप रेलवे के क्षेत्र में करना चाहेंगे? निश्चित ही आपकी पहली प्रतिक्रया होगी कि जिस भी जगह आप जाना चाहें वहां के लिए आरक्षण मिल जाय आपको. हालांकि सवा अरब से ज्यादा की जनसंख्या का बोझ ढोने वाले, अस्त्रेइल्या की जनसंख्या के बराबर करीब 2 करोड 30 लाख लोगों को रोज गंतव्य तक पहुचाने वाले दुनिया के इस सबसे बड़े नेटवर्क के लिए ऐसा किया जाना इतना आसान भी नहीं है. खास कर तब जबकि पिछले 67 वर्ष में देश में दस हज़ार किलोमीटर भी रेल लाइन न बिछाया गया हो. मात्र 10,000 ट्रेन के भरोसे ही यह रेल यात्रा आज भी संपन्न होती हो. रेल पांत का यह आंकडा कितना कम है यह इसी बात से जाना जा सकता है कि साम्राज्यवादी फिरंगी शासन भी देश छोड़ कर जाने के समय करीब 56,000 किलोमीटर की रेल पांत हमारे लिए छोड़ गए थे. तो भले मांगने पर टिकट उपलब्ध कराने की व्यवस्था करना कठिन हो लेकिन नेतृत्व की पहचान भी तो तभी होती

Jul

11

2014

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दंगा केवल अर्थ अधारा

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दंगा केवल अर्थ अधारा

अब मुल्कों में जंग नहीं होती। अब एक ही मुल्क के लोग आपस में कट मरते हैं। सीरिया और इराक में चल रही लड़ाइयां इसका सबसे ताजा उदाहरण हैं। दोनों ही देशों में चल रहे सिविल वार में शामिल हर शख्स मुसलमान है। कोई राजा है तो कोई राजा बनने के लिए लड़ रहा है। जो हैरानी की बात है वह यह है कि पश्चिम एशिया में सत्ता पर कब्जा करने की जो जद्दोजहद चल रही है, उस हर लड़ाई में खून इंसान का बह रहा है, आम आदमी का बह रहा है, ऐसे लोगों का खून बह रहा है जिनको इस लड़ाई में या तो मौत मिलेगी या गरीबी। लड़ाई की अगुवाई करने वालों को राज मिलेगा, वे जिसकी कठपुतलियां हैं उनको आर्थिक लाभ होगा, अमेरिका और रूस इस इलाके में हो रही लड़ाई में अपने-अपने हित साध रहे हैं, उनकी कठपुतलियां पूरे अरब को रौंद रही हैं, और आम आदमी की जिंदगी तबाह कर रही हैं और अपने देश का मुस्तकबिल उन्हीं ताकतों के हवाले कर रही हैं जिन्होंने पूरी अरब दुनियां को आज से सौ साल पहले टुकड़े-टुकड़े कर दिया था। विश्वयुद्ध के प्रमुख कारणों में से एक अरब इलाकों में मिले तेल पर कब्जा करना भी

Jul

10

2014

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मोदी सरकार की मृत संजीवनी

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मोदी सरकार की मृत संजीवनी

बजट में रक्षा और बीमा क्षेत्र में 26 प्रतिशत एफडीआई को बढाकर 49 प्रतिशत करने का प्रस्ताव रखा गया है. वित्त मंत्री चाहते हैं कि इन दोनों क्षेत्रों में पूंजीगत निवेश बढ़े. उनको लगता है कि  इस क्षेत्र की बेहतरी के लिये एफडीआई सबसे अच्छा विकल्प है, क्योंकि इन दोनों क्षेत्रों में मुनाफे की जबर्दस्त गुंजाईश है और अच्छे रिटर्न की आशा में विदेशी संस्थागत निवेशक इन दोनों क्षेत्रों में आसानी से निवेश कर सकते हैं. चूँकि रक्षा एक संवेदनशील क्षेत्र है, अस्तु इस क्षेत्र को बेहतर बनाने के लिये इस साल के बजट में 2   लाख 29 हजार करोड़ रूपये का प्रावधान रखा गया है. बजट में सरकारी बैंकों के शेयर को बेचने का निर्णय लिया गया है. दरअसल, आजकल सरकारी बैंक बासेल-3 और बढते एनपीए के कारण पूंजी की कमी का सामना कर रहे हैं. फिलहाल इन्हें इन दोनों चुनौती से निपटने के लिये एक बड़ी रकम की दरकार है और इस कमी को सरकार बैंकों के शेयर को बेचकर पूरा कर सकती है. पूंजी की कमी दूर हो, इसके लिये 6  नये वसूली अधिकरण बनाये जाने का भी प्रस्ताव भी वित्त मंत्री ने बजट में रखा है, ताकि एनपीए की कारगर ढंग से वसूली हो सके.

Jul

09

2014

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नर्सों के वापसी की नसीहत

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नर्सों के वापसी की नसीहत

नर्सों की वापसी ने भारतीय राजनीति और कूटनीति के संदर्भ में कई अच्छे संकेत दिए हैं। यह देखना सुखद है कि भारत की सरकारें अब संकटग्रस्त क्षेत्रों में फंसे अपने नागरिकों की सुरक्षित वापसी के लिए लगभग उसी तरह की तेजी और प्रतिबद्धता दिखा रही हैं, जैसी पश्चिम की सरकारें दिखाया करती हैं। यह सिलसिला आगे भी जारी रहना चाहिए क्योंकि विश्व भर में अपने नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना हमारी सरकारों का लोकतांत्रिक और प्रशासनिक दायित्व है। इस घटना ने यह भी दिखाया है कि राज्य और केंद्र की सरकारें भले ही अलग-अलग दलों द्वारा संचालित हों, इच्छा-शक्ति हो तो वे अच्छे तालमेल के साथ कार्य कर सकती हैं और इसके सुखद नतीजे सामने आ सकते हैं। नर्सों की वापसी नरेंद्र मोदी सरकार की बड़ी कूटनीतिक विजय है। हालाँकि अभी इराक में भारत की चुनौती खत्म नहीं हुई है क्योंकि और भी कई भारतीय नागरिक वहाँ फंसे हुए हैं, जिन्हें सुरक्षित स्वदेश लाया जाना बाकी है। कहा जाता है कि समूचे इराक में फंसे भारतीयों की संख्या दस हजार के आसपास हो सकती है। हालाँकि युद्धग्रस्त क्षेत्रों में अटके लोगों की संख्या बहुत सीमित, लगभग सौ, है। इनमें इमारती कामकाज करने वाले चालीस भारतीय मजदूर भी शामिल हैं जिनका

Jul

07

2014

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सदा आनंद कैसे रहे रेलवे?

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सदा आनंद कैसे रहे रेलवे?

एक अनुमान के अनुसार सुरक्षा तंत्रों को पुख्ता करने, विधुतीकरण एवं आधुनिकीकरण के लिये रेलवे को दो लाख करोड़ रूपये की जरूरत होगी। इसका यह अर्थ हुआ कि रेलवे को हर साल 40000 करोड़ रूपये की दरकार होगी। फिलहाल भारतीय रेल हर साल तकरीबन 10,000 से 15,000 करोड़ रूपये मुनाफा कमाता है। इस हिसाब से उसे हर साल 25,000 से 30,000 करोड़ रूपये उगाहने होंगे। किराये-भाड़े में वृद्धि करके इस वर्ष रेलवे ने 6000 करोड़ रूपये इकठ्ठा किया है। स्पष्ट है शेष राशि की व्यवस्था सरकार को बजटीय प्रावधान से करनी होगी। बजटीय सहायता से पिछले साल रेलवे ने 29 हजार करोड़ रुपये हासिल किये थे। इस साल उसे 19000 से 24000 करोड़ रूपये की जरूरत हो सकती है। गौरतलब है कि प्रत्येक साल इतनी बड़ी रकम जुटाना रेलवे के लिये आसान नहीं होगा। इसके लिये उसे हर साल रेल किराये-भाड़े में बढ़ोतरी करनी होगी। साथ ही, उसे अपने आंतरिक संसाधनों को भी बढ़ाना होगा। इस आलोक में रेलवे बिना जरूरत के पड़ी हुई ज़मीनों के व्यावसायिक उपयोग, बाजार से धन जुटाने, विज्ञापन आदि विकल्पों का सहारा ले सकता है। 

सुरक्षा और आधुनिकीकरण के फ्रंट पर रेलवे को हर पांच साल में 19 हजार किलोमीटर रेलवे ट्रैक का नवीनीकरण करना

Jul

07

2014

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पुरुष उत्पीड़न का काला कानून

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पुरुष उत्पीड़न का काला कानून

1. 19 जुलाई, 2005 में सुप्रीम कोर्ट ने भारतीय दण्ड संहिता की धारा 498-ए को कानूनी आतंकवाद की संज्ञा दी।
2. 11 जून, 2010 सुप्रीम कोर्ट ने भारतीय दण्ड संहिता की धारा 498-ए के सम्बन्ध में कहा कि पतियों को अपनी स्वतंत्रता को भूल जाना चाहिये।
14 अगस्त, 2010 सुप्रीम कोर्ट ने भारत सरकार से भारतीय दण्ड संहिता की धारा 498-ए में संशोधन करने के लिए कहा।
4. 04 फरवरी, 2010 पंजाब के अम्बाला कोर्ट ने स्वीकार कि भारतीय दण्ड संहिता की धारा 498-ए के प्रावधानों का दुरूपयोग हो रहा है।
5. 16 अप्रेल,
ॉम्बे हाई कोर्ट ने और 22 अगस्त, 2010 को बैंगलौर हाई कोर्ट ने भी भारतीय दण्ड संहिता की धारा 498-ए के दुरूपयोग की बात को स्वीकारा।
6. 22 अगस्त, 2010 को केन्दीय सरकार ने सभी प्रदेश सरकारों की पुलिस को भारतीय दण्ड संहिता की धारा 498-ए के प्रावधानों के दुरुपयोग के बारे में चेतावनी दी।
7. विधि आयोग ने अपनी
ं रिपोर्ट में इस बात को साफ शब्दों में स्वीकारा कि भारतीय दण्ड संहिता की धारा 498-ए के प्रावधानों का दुरुपयोग हो रहा है।
8. नवम्बर, 2012 में सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश द्वय टीएस ठाकुर और ज्ञानसुधा मिश्रा की बेंच ने कहा कि धारा 498-ए

Jul

07

2014

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ग्राउंड जीरो पर ग्रीनपीस

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ग्राउंड जीरो पर ग्रीनपीस

इन दोनों युवकों को उठाकर एक अज्ञात ठिकाने पर ले जाया गया। फिर इस मकान में बचे लोगों ने परिचितों को फोन लगाने शुरू किए। बात फैली, तो पलटकर प्रशासन के पास भी दिल्लीो-लखनऊ से फोन आए। काफी देर बाद पता लग सका कि इन्हें छत्तीटसगढ़ की सीमा से लगे माडा थाने की पुलिस उठाकर ले गई है। इन दो युवकों के अलावा दो और व्यक्तियों को उठाकर पुलिस माडा थाने में ले आई थी। थाने में पहले से ही एस्सार कम्पनी के तीन अधिकारी बैठे हुए थे। वे रात भर बैठकर पुलिस को एफआईआर लिखवाते रहे। चारों पकड़े गए लोगों के ऊपर धारा 392, 353 और 186 के तहत मुकदमा दर्ज किया गया। अगले दिन अदालत में पेशी के बाद इन्हें  न्यालयिक हिरासत में भेज दिया गया। फिर जबलपुर उच्च न्यायालय से जब एक बड़े वकील राघवेंद्र यहां आए, तब कहीं जाकर चार में से तीन की ज़मानत अगले दिन हो सकी। चौथे शख्स पर शायद तीसेक साल पहले कोई मुकदमा हुआ था, जिसका फायदा उठाकर पुलिस उसे 28 दिनों तक जेल में रखने में कामयाब हो सकी।

ये कहानी विनीत, अक्षय, विजय शंकर सिंह और बेचन लाल साहू की है। विनीत और अक्षय शहरों से पढ़े-लिखे युवा हैं

Jul

03

2014

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काबा पर कहर?

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सऊदी अरब के अल हरम मस्जिद के मध्य में मौजूद पवित्र काला पत्थर सऊदी अरब के अल हरम मस्जिद के मध्य में मौजूद पवित्र काला पत्थर

अबू तुरैब ने अपने आपको जिस आइसिस का जेहादी बताया था यह वही चरमपंथी इस्लामिक संगठन है जो बीते कुछ सालों से सीरिया में और अब इराक में इस्लामिक स्टेट के लिए लड़ रहा है। उसका इरादा है कि एक दिन वह सऊदी अरब पर भी कब्जा करेगा और अल्लाह की मर्जी का इस्लामिक स्टेट स्थापित करेगा। और जिस दिन ऐसा होगा उस दिन पहली गाज गिरेजी उस काबा पर जिसे इस्लाम में सबसे पवित्र स्थान का दर्जा हासिल है। आतंकियों का कहना है कि इराक में अनबार प्रांत के बाद वे सऊदी अरब के अरूर इलाके में दाखिल होकर मक्का तक पहुंचेंगे जहां पवित्र काबा मौजूद है। आइसिस के जेहादियों का कहना है कि इसके बाद वे पवित्र काबा को जमींदोज कर देंगे। और ऐसा इसलिए करेंगे क्योंकि उनके मुताबिक यहां बुतपरस्ती की जाती है जो कि रसूल द्वारा बताये गये इबादत के उसूल के खिलाफ है।

पैंगम्बर हज़रत मोहम्मद साहब का जन्म वर्तमान सउदी अरब के इसी मक्का प्रांत के कुरैशी कबीले में हुआ था। मक्का में ही मौजूद हीरा की गुफाओं म्मद साहब मक्का छोड़कर इस्लाम के प्रचार के लिए बाहर गये तो कुरैशियों ने उनके भी दोबारा काबा लौटने पर रोक लगा दी थी।

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Seetaram Yechuri

Seetaram Yechuri

हैदराबाद के ब्राह्मण कुल में पैदा हुए सीताराम येचुरी भारत में कम्युनिस्ट आंदोलन के कुछ चेहरों में एक बन गये हैं. सेंट स्टीफेन और जेएनयू से शिक्षा. 1974 में एसएफआई में सक्रिय और बाद में सीपीआईएम से जुड़े. 1984 में सीपीआई सेन्ट्रल कमेटी में शामिल हुए. वर्तमान में सीपीआई (एम) पोलित ब्यूरो के मेम्बर और ऐसे सक्रिय राजनीतिज्ञ जिनसे मिलने की तमन्ना बराक ओबामा भी रखते हों.
Rajiv Yadav

Rajiv Yadav

इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक राजीव दिल्ली स्थित आईआईएमसी से मीडिया में मास्टर डिग्री ले चुके हैं. फिलहाल इलाहाबाद में रहकर मुक्त पत्रकारिता और जनाधिकार के मुद्दों पर सक्रिय कार्य कर रहे हैं. विस्फोट पर लेखन.
Ashok Wankhade

Ashok Wankhade

यवतमाल में पैदा हुए अशोक वानखेडे पढ़ने के लिए इंदौर आये तो पत्रकारिता का कैरियर साथ में लेकर इंदौर से बाहर निकले. फ्री प्रेस जर्नल से पत्रकारिता शुरू करनेवाले अशोक वानखेडे चौथा संसार में काम करने दिल्ली आये तो यहीं के होकर रह गये. करीब पचीस साल के अपने पत्रकारीय कैरियर में अंग्रेजी, हिन्दी और मराठी तीनों भाषाओं के लिए काम किया है. इलेक्ट्रानिक का जमाना आया तो विडियो जर्नलिज्म में भी हाथ आजमाया. अब एक अखबार के राजनीतिक संपादक होने के साथ साथ नये मीडिया को नारा-ए-मस्ताना बनाना चाहते हैं.
Dr. Ashish Vashisth

Dr. Ashish Vashisth

डॉ. आशीष वशिष्ठ लखनऊ में रहनेवाले स्वतंत्र पत्रकार हैं. विभिन्न विषयों पर समसामयिक टिप्पणी और लेखन.
Harsh Vardhan

Harsh Vardhan

हर्षवर्धन टीवी पत्रकार हैं. अमर उजाला में लंबे समय तक काम करने के बाद सीएनबीसी आवाज में काम किया. इस वक्त पी7न्यूज में कार्यरत। बतंगड़ नाम से नियमित ब्लाग भी लिखनेवाले हर्षवर्धन राजनीतिक विश्लेषक के तौर पर स्थापित हैं.

Vinod Upadhyay

मूलत: बक्सर बिहार के रहनेवाले विनोद उपाध्याय भोपाल में रहकर पत्रकारिता करते हैं. दैनिक राष्ट्रीय हिन्दी मेल से पत्रकारिता में प्रवेश. वर्तमान में भोपाल से ही प्रकाशित होनेवाले दैनिक अग्निबाण से जुड़े हुए हैं.
Arvind Tripathi

Arvind Tripathi

अरविन्द त्रिपाठी देश के कई बड़े समाचार पत्रों व पत्रिकाओं में काम करने के बाद वर्तमान में दिल्ली से प्रकाशित हो रही "सामना" हिंदी पत्रिका में उत्तर प्रदेश से विशेष संवाददाता के पद पर कार्यरत हैं. साथ ही पानी और पर्यावरण के मुद्दे पर राजेन्द्र सिंह के साथ काम कर रहे हैं.
Sanjeet Tripathi

Sanjeet Tripathi

रायपुर के रहनेवाले संजीत त्रिपाठी वैसे तो प्रिंट मीडिया के लिए ही काम करते हैं लेकिन प्रिंट से ज्यादा आनलाइन मीडिया में सक्रियता. ब्लाग लिखने से लेकर फेसबुक सक्रियता तक संजीत सब जगह नजर आते हैं. आवारा बंजारा नाम से ब्लाग लेखन करनेवाले संजीत फिलहाल रायपुर में एक अखबार के साथ काम कर रहे हैं.
Anushikha Tripathi

Anushikha Tripathi

भोपाल में ही पढ़ाई लिखाई और अब भोपाल में ही रहकर पत्रकारिता. माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय से 2011 में पत्रकारिता की डिग्री.
S Rajen Todariya

S Rajen Todariya

लंबे समय से पत्रकारिता में सक्रिय एस राजेन टोडरिया दैनिक भास्कर में बतौर स्थानीय संपादक काम कर चुके हैं। इस वक्त देहरादून से प्रकाशित पाक्षिक पत्रिका जनपक्ष टुडे के प्रधान संपादक हैं।
Awesh Tiwari

Awesh Tiwari

मेरे लिए खबरें सिर्फ सूचनाओं को कलमबंद करने का जरिया नहीं है ,ये जरुरी है कि जिनके लिए भी हम खबरें लिख रहे हैं उनको उन ख़बरों से कुछ मिले |पिछले एक दशक से उत्तर भारत के सोन-बिहार -झारखण्ड क्षेत्र में आदिवासी किसानों की बुनियादी समस्याओं ,नक्सलवाद ,विस्थापन ,प्रदूषण और असंतुलित औद्योगीकरण को लेकर की गयी अब तक की रिपोर्टिंग में हमने अपने इस सिद्धांत को जीने की कोशिश की है।
Anshuman Tiwari

Anshuman Tiwari

मूलत: उत्तर प्रदेश के रहनेवाले अंशुमान तिवारी ने आर्थिक पत्रकारिता को हिन्दी में बहुत शुरूआती दौर से देखा समझा है. अमर उजाला कारोबार के लिए काम किया और बाद में दैनिक जागरण समूह से जुड़े. वर्तमान में दैनिक जागरण के ब्यूरो चीफ हैं. इसके साथ ही अर्थार्थ नाम से ब्लाग भी लिखते हैं.
Sanjay Tiwari

Sanjay Tiwari

आप जहां तक सोच सकते हैं इंटरनेट आपको वहां तक काम करने का मौका देता है. अभी तक मानव सभ्यता ने जितने भी मीडिया माध्यमों का उपयोग किया है यह उन सबमें अनूठा, प्रभावी और सर्वगुण संपन्न है. सूचना लेने देने के तीन माध्यमों दृश्य, श्रवण और पाठ को एक ही धागे में लपेटे नया मीडिया उत्पादन और पहुंच दोनों के लिहाज से सर्वश्रेष्ठ है. ऐसे नये मीडिया का जनहित के लिए भरपूर उपयोग हो, विस्फोट.कॉम उसी दिशा में उठा एक कदम है. visfot@visfot.com
Sanjay Swadesh

Sanjay Swadesh

किरोडीमल कॉलेज स्नातकोत्तर के बाद केंद्रीय हिंदी संस्थान दिल्ली से पत्रकारिता में डिप्लोमा। दैनिक हिंदुस्तान, नवभारत टाईम्स, सहारा समय, दैनिक भास्कर में काम. कई पत्र-पत्रिकाओं में स्वतंत्र लेखन के साथ स्थानीय जनअभियानों से जुड़े हैं।
Naresh Sirohi

Naresh Sirohi

महैन्द्र सिंह टिकैत की टीम में शामिल होकर पश्चिमी उत्तर प्रदेश में किसान आंदोलन से अपना सार्वजनिक जीवन शुरू करनेवाले नरेश सिरोही अभी भी मूल रूप से किसान आंदोलन से ही जुड़े हुए हैं। स्वदेशी आंदोलन में सक्रियता। संप्रति भाजपा किसान मोर्चा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष।
Rakesh Sinha

Rakesh Sinha

अकादमिक पृष्ठभूमि से ताल्लुक रखनेवाले प्रो. राकेश सिन्हा संघ विचारधारा के बीच सक्रिय समानतावादी विचारक हैं. राकेश सिन्हा हिन्दुत्व की प्रखर धारा के पैरोकार हैं. लेकिन ऐसा करने के लिए वे हिंसक विवाद की बजाय अहिसक "संवाद" को अपना जरिया बनाते हैं. इंडिया पॉलिसी फाउण्डेशन के मानद निदेशक के रूप में शोध, अध्ययन और संवाद को आगे बढ़ा रहे हैं.

Virender Singh Chauhan

वीरेंद्र सिंह चौहान एक दशक से अधिक समय तक हिंदी पत्रकारिता की मुख्यधारा से जुड़े रहे. दैनिक दिव्य हिमाचल में बतौर उप संपादक और बाद में अमर उजाला और दैनिक ट्रिब्यून में स्टाफ रिपोर्टर के नाते कार्य किया. इस दौरान हरियाणा यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट्स के प्रदेश अध्यक्ष. सितम्बर 2007 से पत्रकारिता के शिक्षण में. सम्प्रति चौधरी देवी लाल विश्वविद्यालय, सिरसा के पत्रकारिता व जनसंचार विभाग में एसोसिएट प्रोफेसर और विभागाध्यक्ष.
S N Singh

S N Singh

शेष नारायण सिंह मूलतः इतिहास के विद्यार्थी हैं. शुरू में इतिहास के शिक्षक रहे. .बाद में पत्रकारिता की दुनिया में आये...प्रिंट, रेडियो और टेलिविज़न में काम किया. इन्होने १९२० से १९४७ तक की महात्मा गाँधी की जीवनी के उस पहलू पर काम किया है जिसमें वे एक महान कम्युनिकेटर के रूप में देखे जाते हैं..1992 से अब तक तेज़ी से बदल रहे राजनीतिक व्यवहार पर अध्ययन करने के साथ साथ विभिन्न मीडिया संस्थानों में नौकरी की. अब मुख्य रूप से लिखने पढने के काम में लगे हैं. एक अखबार में काम और विस्फोट.कॉम के सम्मानित स्तंभलेखक.
Rajesh Singh

Rajesh Singh

मुंबई में रहनेवाले राजेश सिंह मानवाधिकार कार्यकर्ता और पत्रकार हैं. वर्तमान समय में नागरिक विकल्प नामक पत्रिका का संपादन और मानवाधिकार संस्था का संचालन.
SATISH SINGH

SATISH SINGH

सतीश सिंह वर्तमान में भारतीय स्टेट बैंक में एक अधिकारी के रूप में पटना में कार्यरत हैं और विगत तीन वर्षों से स्वतंत्र लेखन कर रहे हैं। भारतीय जनसंचार संस्थान से सत्र 1994-95 में (हिन्दी पत्रकारिता में) स्नात्कोतर डिप्लोमा करने के बाद 1995 से जून 2000 तक मुख्यधारा की पत्रकारिता में इनकी सक्रिय भागीदारी रही है।
Abhishek Singh

Abhishek Singh

अभिषेक रंजन सिंह ने 2007-08 में नई दिल्ली के भारतीय जनसंचार संस्थान से पत्रकारिता की पढ़ाई पूरी की। करियर की शुरूआत सकाल मीडिया गुप्र से किया। इन दिनों दक्षिण एशिया की प्रमुख ब्रॉडकास्ट एजेंसी सीवीबी न्यूज सर्विस में कार्यरत हैं। इसके अलावा विस्फोट सहित देश के प्रमुख हिंदी समाचार पत्र और पत्रिकाओं में समसामयिक मुद्दों पर नियमित लेखन कर रहे हैं।
SANDEEP SINGH

SANDEEP SINGH

सजग युवा पत्रकार व गांधीनगर में रहकर गुजरात केंद्रीय विश्वविद्यालय में शोधरत, सिनेमा व रंगमंच को लेकर विशेष हस्तक्षेप, सामाजिक व राजनीतिक मुद्दों पर खास नजर, विभिन्न अखबारों, पत्र-पत्रिकाओं व वेब पोर्टलों के लिये स्वतंत्र लेखन.
Pranay vikram  Singh

Pranay vikram Singh

श्रमजीवी पत्रकार प्रणव विक्रम सिंह सामाजिक, राजनीतिक और आर्थिक मुद्दों पर पिछले कई सालों से लेखन कर रहे हैं.
Dhananjay Singh

Dhananjay Singh

सिमटते सिमटते कुल परिचय इतना ही शेष रह गया है कि फिलहाल घुमक्कड़ी, सधुक्कड़ी और हाथ में कलम की लकड़ी। गाजीपुर से काशी हिन्दू विश्वविद्यालय होते हुए देहरादून तक पहुंचे हैं। काम काज बहुत किया अब लिखकर अकाज करते हैं।
A N Sibli

A N Sibli

1993 से हिन्दी, उर्दू और अंग्रेजी के विभिन्न राष्ट्रीय अखबारों और पत्रिकाओं में लेखन कर रहे अब्दुल नूर सिबली इस वक्त दिल्ली से प्रकाशित हिन्दुस्तान एक्सप्रेस में बतौर ब्यूरो चीफ कार्यरत हैं. विभिन्न वेबसाइटों पर नियमित लेखन.
Prem Shukla

Prem Shukla

मुंबई से प्रकाशित हिन्दी सामना के कार्यकारी संपादक. पिछले 20 सालों से पत्रकारिता. पत्रकारिता के साथ ही मुबंई में हिन्दीभाषी समाज के विभिन्न सांस्कृतिक और सामाजिक गतिविधियों में भी सक्रिय. विस्फोट.कॉम के नियमित स्तंभ लेखक.
Puja Shukla

Puja Shukla

पेश से टीवी पत्रकार पूजा शुक्ला धाकड़ लिक्खाड़ हैं. घर परिवार की जिम्मेदारी और टीवी पत्रकारिता के साथ साथ कलम को तलवार की तरह इस्तेमाल करती हैं. दिल्ली युनिवर्सिटी से पढ़ी लिखी पूजा दिल्ली में ही रहती है.
Rajesh Shukla

Rajesh Shukla

राजेश शुक्ला तो बस राजेश शुक्ला है. कला की समीक्षा के अलावा समाज और राजनीति की भी कलात्मक समीक्षा करने में महारत. मीडिया की मजूरी और कलम की गुलामी के अलावा दुनिया में फक्कड़ी ही पसंद आती है.
Abhishek Shrivastav

Abhishek Shrivastav

अभिषेक श्रीवास्तव के परिचय वाला पन्ना आमतौर पर खाली ही रहता है। खुद अपना कुछ पता नहीं। कोई परिचय नहीं। लेकिन हाथ में कलम और एक अदद कैमरा पकड़ लें तो बहुत सारी छुपी अक्सों को परिचय दे देते हैं। संघर्ष जिन्दगी का संघर्ष नहीं, बल्कि जीने का फलसफा है। स्वतंत्र पत्रकार तो हैं ही।
Arvind Shesh

Arvind Shesh

नास्तिकता और नौकरी दोनों साथ साथ। घोषित तौर पर। बिना किसी हिचक के। परिचय के नाम पर सिर्फ इतना कि जनसत्ता में नौकरी। लेकिन काम के नाम पर बहुत कुछ। खासकर लेखन के क्षेत्र में। मुद्दों को कविता और कहानी की शक्ल तो दे ही देते हैं, कभी कभी कविता और कहानी को भी मुद्दा बना देते हैं। दिल्ली में डेरा, बाकी सब तरफ कलम का घेरा।