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Jul

17

2016

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कश्मीरी खड़ा बाजार में

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कश्मीरी खड़ा बाजार में

जम्मू से कटरा के लिए टेढ़ीमेढ़ी पहाड़ियों पर चढ़ते हुए कटरा से मां वैष्णो देवी के दरबार के लिए साढ़े बारह सौ रुपए में जाने वाले हेलीकॉप्टर के विज्ञापन के साथ ही कुटॉन्स शर्ट के भी बड़े-बड़े विज्ञापन नजर आ जाते हैं। साफ है बिना मुनाफे के विज्ञापन नहीं हो सकता। यानी बड़ी-बड़ी कंपनियों को अपने प्रोडक्ट बेचने के लिए मांवैष्णो देवी के दरबार में आने वाले भक्तों पर भरोसा है।ये बाजारका वो पक्ष है जो, अक्सर इसका विरोध करने वालों को कभी नजर नहीं आता। पिछले दो दशकों से आतंकवाद की वजह से जमाने पुरानी जिंदगी जी रहे लोगों को बाजार ने नई रंगत दे दी है।

जम्मू से श्रीनगर के लिए फ्लाइटका सफर शुरू होते ही एक बार फिर सुरक्षा की कड़ी जांच इस बात का अहसास दिलाती है कि हवा में कुछ दहशत है। लेकिन, श्रीनगर हवाईअड्डे पर उतरने के बाद टैक्सी में इस दहशत को दूर करता है फिर वही बाजार। लेकिन, बाजार यहां प्रोडक्ट बेचने के बजाए सुरीले रस घोलता है।बिग 92.7 एफएम पर सबकी आंखों का तारारेडियोजॉकी सारा आपकोनए पुराने सुनाकर कश्मीर की फिजां को और खूबसूरत बनाती है।

जनवरी -फरवरी का समय कश्मीर के लिए पीक सीजन नहीं होता यानी धरती

Jul

01

2016

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गरीबी के जहन्नुम में पाकिस्तान

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गरीबी के जहन्नुम में पाकिस्तान

मोहम्मद इकबाल ने अलग देश नहीं मांगा था। इलाहाबद के मुस्लिम लीग के जलसे में उन्होंने जो मांग रखी थी वह अलग राज्य की मांग थी। पहली बार इकबाल ने भारत के पश्चिमी हिस्से को चिन्हित किया था जो आगे चलकर पाकिस्तान बना। वे अलग राज्य चाहते थे जहां हिन्दुओं का दखल न हो। लेकिन अल्लामा इकबाल की मौत के बाद जिन्ना उसके आगे गये। उन्होंने अलग देश मांगा। इस अलग देश को पहला आर्थिक समर्थन दिया अवध के राजा महबूबाबाद ने। राजा महबूबाबाद मोहम्मद आमिर अहमद खान जिन्ना के मित्र भी थे और मुस्लिम लीग के नेता भी। जिन्ना को अलग पाकिस्तान के लिए शुरुआती फंडिंग उन्होंने ही की लेकिन फिर बाद में पंजाब के मुस्लिम कारोबारियों ने यह काम अपने हाथ में ले लिया।

पंजाब के मुस्लिम कारोबारी यह मानते थे कि आजादी आई तो हिन्दुओं के साथ व्यापार में बराबरी नहीं कर पायेंगे। उनका ऐसा सोचने के पीछे कारण था। पंजाब के सबसे बड़े शहर लाहौर में हिन्दू अल्पसंख्यक थे लेकिन उनका कारोबारी निजाम मुसलमानों से बड़ा था। लाहौर और कराची का कारोबार कमोबेश गैर मुस्लिमों के हाथ में था। मुस्लिम कारोबारी भी उस हिस्से में पनप रहे थे जहां हिन्दुओं या सिखों की आबादी ज्यादा

Jul

01

2016

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तेजस का जस

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तेजस का जस

स्वेदशी जंगी विमान बनाने का सपना एयरफोर्स ने उसी दिन देख लिया था जिस दिन देश आजाद हुआ था। उसकी पहली कोशिश कुर्त टैंक के 'मारुत' डिजाइन से शुरू हुई लेकिन यह प्रयोग कुछ विदेशी हथियार लॉबी और कुछ तकनीकि के तेजी से बदलते दौर में बहुत जल्द गायब हो गया। इस विमान को इसकी उम्र से पहले रिटायर कर दिया गया। वायुसेना ने अपनी निर्भरता मिग-२१ और मिग-२७ विमानों पर बढ़ा दी। इकहत्तर की भारत पाक जंग के बाद वायुसेना ने विदेशों से बड़ी संख्या में फाइटर जेट खरीदे जिसमें मिराज-२०००, जगुआर स्पेशकैट जैसे चौथी पीढ़ी के उन्नत विमान शामिल थे लेकिन मुख्यरूप से उसकी निर्भरता सोवियत संघ के मिग विमानों पर ही थी। लेकिन जैसा कि दुनियाभर की एयरफोर्स इंडस्ट्री में होता है यहां भविष्य की तैयारियां बहुत पहले शुरू कर दी जाती हैं, इसलिए अस्सी के दशक में आधिकारिक रूप से स्वदेशी हल्केे लड़ाकू विमान की बुनियाद रख दी गयी। इसे लाइट कॉबैट एयरक्राफ्ट का नाम दिया गया।

मूल योजना थी कि बीस साल के भीतर इन विमानों को सेना में शामिल कर लिया जाएगा। १९८३ से अगर देखें तो यह विमान परियोजना एक दशक से भी ज्यादा देरी से पीछे चल रही है। लेकिन अगर

Jun

24

2016

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लोक स्वराज्य का लक्ष्य

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लोक स्वराज्य का लक्ष्य

इसमें न तो व्यक्ति की उच्श्रृंखला को छूट दी गई है न ही व्यक्ति की स्वतंत्रता में बाधा उत्पन्न करने को। व्यक्ति को अपनी व्यक्तिगत सीमा में निर्णय करने की पूरी स्वतंत्रता है किन्तु उसकी अन्तिम सीमा व्यक्तिगत निर्णय तक ही निर्धारित है। स्वामी जी ने जो परिभाषा बनाई उसमें व्यक्ति के बाद सीधे समाज मान लिया जबकि व्यक्ति के बाद परिवार, स्थान, जिला, प्रदेश, राष्ट्र, और तब समाज का नंबर आना चाहिये था।

कार्ल माक्र्स और गाॅधी भी ऐसे महापुरुष हुए जिन्होने इस संबंध में व्यापक विचार विमर्श किया। मार्क्स और गांधी दोनों ने व्यक्ति को व्यक्तिगत निर्णय की स्वतंत्रता देने की वकालत की है। किन्तु मार्क्स और गाॅधी के विचारों में कुछ फर्क भी रहा है। माक्र्स ने शासन रहित व्यवस्था की बात कही है और गाॅधी ने शासन मुक्त व्यवस्था की। मार्क्स का सिद्धांत यह था कि व्यक्ति भय से ही ठीक ठीक संचालित हो सकता है। भय तीन प्रकार के है- 1 ईश्वर का 2 समाज का 3 शासन का। ईश्वर का भय न के बराबर होने से प्रभावहीन हो गया है। अब तो अनेक हिन्दू भगवान का नाम डकैती और चोरी जैसे कार्यो में सफलता के लिये लेने लगे हैं जबकि मुसलमान तो खुदा के

Jun

05

2016

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पर्यावरण दिवस की चेतावनी

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पर्यावरण दिवस की चेतावनी

चिंताजनक सच
सच है कि हमने
40 सालों में प्रकृति के एक-तिहाई दोस्त खो दिए हैं। एशियाई बाघों की संख्या में 70 फीसदी गिरावट आई है। मीठे पानी पर रहने वाले पशु व पक्षी भी 70 फीसदी तक घटे हैं। भागलपुर की गंगा में डॉलफिन रिजर्व बना है; फिर भी डॉलफिन के अस्तित्व पर ही खतरे मंडराने की खबरें मंडरा रही हैं। उष्ण कटिबंधीय क्षेत्रों में कई प्रजातियों की संख्या 60 फीसदी तक घट गई है। थार रेगिस्तान के आठ किलोमीटर प्रति वर्ष की रफ्तार से बढ़ने  के आंकङे ने भी भारत की जैव विविधता कम नहीं घटाई।

ताजा खबर है कि गिद्धों की आबादी चार करोङ से घटकर चार लाख पर पहुंच गई है। बढ़ रहे हैं, तो सिर्फ वीरानी के निशान के रूप में जाने जाने वाले कबूतर। तीन जून को चंडीगढ़ में गिद्धों की आबादी बढ़ाने को लेकर एक बङा कार्यक्रम किया गया। पर्यावरण मंत्री ने कहा कि प्रजनन बढ़ाकर गिद्ध बढ़ायेंगे। अच्छा है कि वन्य जीवों का अवैध व्यापार रुके; कुदरत के सबसे सर्वश्रेष्ठ सफाई कर्मचारी गिद्ध का प्रजनन बढे़; किंतु क्या वन्य जीवन की संख्या संतुलन बिगङने का कारण अवैध व्यापार और प्रजनन का घटना मात्र हैं ?

वनवासियों की वन निष्ठा

Jun

05

2016

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चाबहार की बहार

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चाबहार की बहार

चीन व पाकिस्तान के मध्य हुए ग्वादर बंदरगाह समझौते से लगभग दस वर्ष पूर्व भारतीय प्रधानमंत्री अटलबिहारी वाजपेयी ने खाड़ी स्थित ग्वादर व चाबहार बंदरगाह के सामरिक महत्त्व को दूरदृष्टि से समझ लिया था व ईरान के साथ चाबहार परियोजना समझौते के प्रारम्भिक दस्तावेजों पर वर्ष 2003 में हस्ताक्षर भी कर दिए थे किन्तु खेद और विडंबना कि बाद की कांग्रेसी मनमोहन सरकार ने दस वर्षों के कार्यकाल में इस ओर ध्यान ही नहीं दिया फलस्वरूप यह योजना कागजों में डंप हो गई. वस्तुतः भारत द्वारा ईरान के साथ सम्बंधों को स्वतंत्रता के बाद ही विकसित करना प्रारंभ कर देना चाहिए था, यदि ऐसा हो जाता तो आज खाड़ी और समूचे एशिया में भारत की स्थिति कुछ और होती. उधर चीन की सामरिक दृष्टि पाकिस्तान के ग्वादर बंदरगाह पर गिद्ध की भांति गड़ गई और वह बेहद तेजी से पाकिस्तान के साथ ग्वादर बंदरगाह को विकसित करनें में लग गया.

वो तो भला हो नरेंद्र मोदी सरकार का कि उसनें आते से अटलबिहारी वाजपेयी के इस अधूरे स्वप्न पर कार्य प्रारंभ कर दिया और इस माह भारत व ईरान ने चाबहार बंदरगाह विकास परियोजना के द्विपक्षीय समझौते पर हस्ताक्षर भी कर दियें हैं. इससे भारत के लिए पाकिस्तान जाए बिना

Jun

05

2016

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हरी नदी पर हर हर गंगे

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सलमा डैम पर साल 2015 में अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के मौके पर योगाभ्यास का आयोजन किया गया था सलमा डैम पर साल 2015 में अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के मौके पर योगाभ्यास का आयोजन किया गया था

सलमा डैम पिछले साल ही बनकर तैयार हो गया था लेकिन इसका औपचारिक उद्घाटन इस साल चार जून को भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और अफगानिस्तान के राष्ट्रपति अशरफ गनी ने किया। सलमा डैम से अफगानिस्तान के हेरात प्रांत को सिंचाई की सुविधा मिलेगी बल्कि उस खोस्त प्रांत को भी पानी देने की योजना है जिसके अधिकांश हिस्सों पर फिलहाल तालिबान का कब्जा है। हेरात ईरान से सटा इलाका है और शुरूआत में ईरान ने सलमा डैम को बनाने का विरोध भी किया था लेकिन आखिरकार चार दशक की मेहनत के बाद यह बांध बनकर तैयार हो गया। भारत सरकार ने इस बांध को बनाने के लिए अफगानिस्तान को 275 मिलियन डॉलर की मदद की है।

सलमा डैम को भारत अफगानिस्तान मैत्री बांध का नाम दिया गया है। लेकिन शनिवार को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के दौरे से पहले जो कहा गया वह बांध को दोनों देशों के बीच रिश्ते में सेतुबंध का संदेश देता है। अशरफ घानी ने पीएम मोदी का स्वागत करते हुए अफगानिस्तान को पीएम मोदी का दूसरा घर घोषित कर दिया। अगर भारत पाक अफगानिस्तान रिश्तों के हवाले से इस संदेश को सुना जाए तो यह अफगानिस्तान का बहुत बड़ा संदेश है जिसमें भारत सरकार की

May

30

2016

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भारत के साथ ईरान, पाकिस्तान परेशान

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भारत के साथ ईरान, पाकिस्तान परेशान

जाहिर है, सबके अपने निजाम और मंसूबे हैं। इनमें लाहौर का मंसूबा सबसे मुखर है। लाहौर में बैठे मौलवी, जनरल, कमांडर और जाट सियासतदान पाकिस्तान को अघोषित रूप से एक सुन्नी मुल्क घोषित कर चुके हैं। इसलिए हिन्दुओं, सिखों के खात्मे के बाद पाकिस्तान के नये अल्पसंख्यक शिया, अहमदिया और मोहाजिर हमेशा उनके निशाने पर होते हैं। जिसका असर ईरान के साथ रिश्तों पर अब साफ दिखाई देने लगा है।

हाल में ही कथित रूप से गिरफ्तार रॉ एजेन्ट कुलभूषण याधव की गिरफ्तारी को जिस तरह से ईरान ने खारिज किया और पूरे मामले को प्रोपेगेण्डा करार दिया उससे पाकिस्तान के सुन्नी हुक्मरान काफी नाराज हुए। पाकिस्तान के टीवी चैनलों पर खुलकर ईरान की निंदा की गयी और ईरान के ही बहाने शिया मुसलमानों को भी मुल्क का गैर वफादार वाशिंदा बताया गया। जाहिर है, यह पाकिस्तान नहीं बल्कि सुन्नी इस्लाम बोल रहा था। इन लोगों ने यह भी याद कराया कि यमन में सऊदी अरब के कहने के बाद भी हऊदियों के खिलाफ पाकिस्तान जंग में शामिल नहीं हुआ लेकिन ईरान इसका बदला यह दे रहा है कि वह पाकिस्तान के खिलाफ होनेवाली गतिविधियों को
दे रहा है।

असल
ान और पाकिस्तान का संबंध इतना भी नीचे

May

15

2016

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सूख गया तालाबों का शहर

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दरभंगा के बाबा सागरदास तालाब पर अतिक्रमण करके कालोनी बसा दी गयी है दरभंगा के बाबा सागरदास तालाब पर अतिक्रमण करके कालोनी बसा दी गयी है

लहेरियासराय के बेता गामी पोखर को इन दिनों आप उसके चारो ओर बने किसी मकान की छत पर चढ़े बगैर नहीं देख सकते. कभी पांच एकड़ जमीन में फैला यह तालाब आज एक छोटे डबरे जैसा दिखता है. आज इसका रकबा मुश्किल से एक एकड़ रह गया होगा. इसकी इस दशा के जिम्मेदार इसके चारो तरफ बने निजी अस्पताल और दूसरी इमारतें हैं, जिसने पिछले चार-पांच सालों में इसे लगभग पूरी तरह निगल लिया है. तालाब में जो थोड़ा बहुत पानी बचा है, वह भी अगले साल साल शायद ही नजर आये. क्योंकि वह जमीन भी पूरी की पूरी बिक गयी है. और वहां तेजी से कंस्ट्रक्शन चल रहा है.

एक बाबा सागर दास तालाब है. कुछ महीने पहले जब उसमें कचरा फेंका जा रहा था तो उसे देखने जल पुरुष राजेन्द्र सिंह पहुंचे थे. आज वह तालाब समतल मैदान बन चुका है. कई मकानों के पिलर खड़े हो गये हैं. स्थानीय लोग बताते हैं कि पिछले महीने ही यह सब हुआ है. कबरा घाट मोहल्ले में भी एक तालाब हाल के दिनों में समतल ही गया है, दूसरे को आधा भरा जा चुका है और तीसरे में कचरा फेंका जा रहा है. वार्ड 25 में शाही मनसफी में

May

15

2016

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गजवा ए हिन्द की गुहार

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गजवा ए हिन्द की गुहार

गजवा ए हिन्द (हिन्दुस्तान की फतेह) पर वे भी वही बोलते हैं तो जो कोई भी कुरान और हदीस का जानकार बोलता है। वैसे यह गजवा ए हिन्द भारत के पूरब में नहीं है। पूर्वी बंगाल से बांग्लादेश बनने के बाद अभी मौलवियों की जमात ने हिन्दुस्तान को फतेह करने का कोई फतवा तो नहीं दिया है लेकिन हिन्दुस्तान से पश्चिम में हर रोज यह फतवा दिया जाता है। कभी टीवी पर बैठकर। कभी तकरीरों में। कभी जलसों और जुलूसों में।

हिन्दुस्तान को जीतने के ये फतवे कुरान और हदीस की रोशनी में दिये जाते हैं जब मोहम्मद साहब ने अपने चाहनेवालों से कहा था कि दो फौजें निकलेंगी। एक वहां से पश्चिम जाएंगी और दूसरी हिन्द की तरफ। हिन्द के लिए जो फौज जाएगी वह जीत हासिल करेगी और वहां के राजा या राजाओं को जंजीरों में जकड़कर ले आयेगी। इस जंग में जो कुर्बान होंगे वे जन्नत जाएंगे और जो बच जाएंगे वे नर्क की आग में नहीं फेंके जाएंगे। इस तरह यह जंग आगे चीन तक जाएगी और वहां भी इस्लाम का परचम लहरायेगी और इस तरह इस खित्ते में खिलाफत कायम हो जाएगी।

मोहम्मद साहब को गये जमाना हो गया। इस बीच मोहम्मद बिन

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Seetaram Yechuri

Seetaram Yechuri

हैदराबाद के ब्राह्मण कुल में पैदा हुए सीताराम येचुरी भारत में कम्युनिस्ट आंदोलन के कुछ चेहरों में एक बन गये हैं. सेंट स्टीफेन और जेएनयू से शिक्षा. 1974 में एसएफआई में सक्रिय और बाद में सीपीआईएम से जुड़े. 1984 में सीपीआई सेन्ट्रल कमेटी में शामिल हुए. वर्तमान में सीपीआई (एम) पोलित ब्यूरो के मेम्बर और ऐसे सक्रिय राजनीतिज्ञ जिनसे मिलने की तमन्ना बराक ओबामा भी रखते हों.
Rajiv Yadav

Rajiv Yadav

इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक राजीव दिल्ली स्थित आईआईएमसी से मीडिया में मास्टर डिग्री ले चुके हैं. फिलहाल इलाहाबाद में रहकर मुक्त पत्रकारिता और जनाधिकार के मुद्दों पर सक्रिय कार्य कर रहे हैं. विस्फोट पर लेखन.
Ashok Wankhade

Ashok Wankhade

यवतमाल में पैदा हुए अशोक वानखेडे पढ़ने के लिए इंदौर आये तो पत्रकारिता का कैरियर साथ में लेकर इंदौर से बाहर निकले. फ्री प्रेस जर्नल से पत्रकारिता शुरू करनेवाले अशोक वानखेडे चौथा संसार में काम करने दिल्ली आये तो यहीं के होकर रह गये. करीब पचीस साल के अपने पत्रकारीय कैरियर में अंग्रेजी, हिन्दी और मराठी तीनों भाषाओं के लिए काम किया है. इलेक्ट्रानिक का जमाना आया तो विडियो जर्नलिज्म में भी हाथ आजमाया. अब एक अखबार के राजनीतिक संपादक होने के साथ साथ नये मीडिया को नारा-ए-मस्ताना बनाना चाहते हैं.
Dr. Ashish Vashisth

Dr. Ashish Vashisth

डॉ. आशीष वशिष्ठ लखनऊ में रहनेवाले स्वतंत्र पत्रकार हैं. विभिन्न विषयों पर समसामयिक टिप्पणी और लेखन.
Harsh Vardhan

Harsh Vardhan

हर्षवर्धन टीवी पत्रकार हैं. अमर उजाला में लंबे समय तक काम करने के बाद सीएनबीसी आवाज में काम किया. इस वक्त पी7न्यूज में कार्यरत। बतंगड़ नाम से नियमित ब्लाग भी लिखनेवाले हर्षवर्धन राजनीतिक विश्लेषक के तौर पर स्थापित हैं.
Vinod Upadhyay

Vinod Upadhyay

मूलत: बक्सर बिहार के रहनेवाले विनोद उपाध्याय भोपाल में रहकर पत्रकारिता करते हैं. दैनिक राष्ट्रीय हिन्दी मेल से पत्रकारिता में प्रवेश. वर्तमान में भोपाल से ही प्रकाशित होनेवाले दैनिक अग्निबाण से जुड़े हुए हैं.
Arvind Tripathi

Arvind Tripathi

अरविन्द त्रिपाठी देश के कई बड़े समाचार पत्रों व पत्रिकाओं में काम करने के बाद वर्तमान में दिल्ली से प्रकाशित हो रही "सामना" हिंदी पत्रिका में उत्तर प्रदेश से विशेष संवाददाता के पद पर कार्यरत हैं. साथ ही पानी और पर्यावरण के मुद्दे पर राजेन्द्र सिंह के साथ काम कर रहे हैं.
Sanjeet Tripathi

Sanjeet Tripathi

रायपुर के रहनेवाले संजीत त्रिपाठी वैसे तो प्रिंट मीडिया के लिए ही काम करते हैं लेकिन प्रिंट से ज्यादा आनलाइन मीडिया में सक्रियता. ब्लाग लिखने से लेकर फेसबुक सक्रियता तक संजीत सब जगह नजर आते हैं. आवारा बंजारा नाम से ब्लाग लेखन करनेवाले संजीत फिलहाल रायपुर में एक अखबार के साथ काम कर रहे हैं.
Anushikha Tripathi

Anushikha Tripathi

भोपाल में ही पढ़ाई लिखाई और अब भोपाल में ही रहकर पत्रकारिता. माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय से 2011 में पत्रकारिता की डिग्री.
Awesh Tiwari

Awesh Tiwari

मेरे लिए खबरें सिर्फ सूचनाओं को कलमबंद करने का जरिया नहीं है ,ये जरुरी है कि जिनके लिए भी हम खबरें लिख रहे हैं उनको उन ख़बरों से कुछ मिले |पिछले एक दशक से उत्तर भारत के सोन-बिहार -झारखण्ड क्षेत्र में आदिवासी किसानों की बुनियादी समस्याओं ,नक्सलवाद ,विस्थापन ,प्रदूषण और असंतुलित औद्योगीकरण को लेकर की गयी अब तक की रिपोर्टिंग में हमने अपने इस सिद्धांत को जीने की कोशिश की है।
Anshuman Tiwari

Anshuman Tiwari

मूलत: उत्तर प्रदेश के रहनेवाले अंशुमान तिवारी ने आर्थिक पत्रकारिता को हिन्दी में बहुत शुरूआती दौर से देखा समझा है. अमर उजाला कारोबार के लिए काम किया और बाद में दैनिक जागरण समूह से जुड़े. वर्तमान में दैनिक जागरण के ब्यूरो चीफ हैं. इसके साथ ही अर्थार्थ नाम से ब्लाग भी लिखते हैं.
Sanjay Tiwari

Sanjay Tiwari

आप जहां तक सोच सकते हैं इंटरनेट आपको वहां तक काम करने का मौका देता है. अभी तक मानव सभ्यता ने जितने भी मीडिया माध्यमों का उपयोग किया है यह उन सबमें अनूठा, प्रभावी और सर्वगुण संपन्न है. सूचना लेने देने के तीन माध्यमों दृश्य, श्रवण और पाठ को एक ही धागे में लपेटे नया मीडिया उत्पादन और पहुंच दोनों के लिहाज से सर्वश्रेष्ठ है. ऐसे नये मीडिया का जनहित के लिए भरपूर उपयोग हो, विस्फोट.कॉम उसी दिशा में उठा एक कदम है. visfot@visfot.com
Arun Tiwari

Arun Tiwari

अरुण तिवारी दिल्ली में रहने वाले स्वतंत्र लेखक हैं।
Sanjay Swadesh

Sanjay Swadesh

किरोडीमल कॉलेज स्नातकोत्तर के बाद केंद्रीय हिंदी संस्थान दिल्ली से पत्रकारिता में डिप्लोमा। दैनिक हिंदुस्तान, नवभारत टाईम्स, सहारा समय, दैनिक भास्कर में काम. कई पत्र-पत्रिकाओं में स्वतंत्र लेखन के साथ स्थानीय जनअभियानों से जुड़े हैं।
Naresh Sirohi

Naresh Sirohi

महैन्द्र सिंह टिकैत की टीम में शामिल होकर पश्चिमी उत्तर प्रदेश में किसान आंदोलन से अपना सार्वजनिक जीवन शुरू करनेवाले नरेश सिरोही अभी भी मूल रूप से किसान आंदोलन से ही जुड़े हुए हैं। स्वदेशी आंदोलन में सक्रियता। संप्रति भाजपा किसान मोर्चा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष।
Rakesh Sinha

Rakesh Sinha

अकादमिक पृष्ठभूमि से ताल्लुक रखनेवाले प्रो. राकेश सिन्हा संघ विचारधारा के बीच सक्रिय समानतावादी विचारक हैं. राकेश सिन्हा हिन्दुत्व की प्रखर धारा के पैरोकार हैं. लेकिन ऐसा करने के लिए वे हिंसक विवाद की बजाय अहिसक "संवाद" को अपना जरिया बनाते हैं. इंडिया पॉलिसी फाउण्डेशन के मानद निदेशक के रूप में शोध, अध्ययन और संवाद को आगे बढ़ा रहे हैं.
Virender Singh Chauhan

Virender Singh Chauhan

वीरेंद्र सिंह चौहान एक दशक से अधिक समय तक हिंदी पत्रकारिता की मुख्यधारा से जुड़े रहे. दैनिक दिव्य हिमाचल में बतौर उप संपादक और बाद में अमर उजाला और दैनिक ट्रिब्यून में स्टाफ रिपोर्टर के नाते कार्य किया. इस दौरान हरियाणा यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट्स के प्रदेश अध्यक्ष. सितम्बर 2007 से पत्रकारिता के शिक्षण में. सम्प्रति चौधरी देवी लाल विश्वविद्यालय, सिरसा के पत्रकारिता व जनसंचार विभाग में एसोसिएट प्रोफेसर और विभागाध्यक्ष.
S N Singh

S N Singh

शेष नारायण सिंह मूलतः इतिहास के विद्यार्थी हैं. शुरू में इतिहास के शिक्षक रहे. .बाद में पत्रकारिता की दुनिया में आये...प्रिंट, रेडियो और टेलिविज़न में काम किया. इन्होने १९२० से १९४७ तक की महात्मा गाँधी की जीवनी के उस पहलू पर काम किया है जिसमें वे एक महान कम्युनिकेटर के रूप में देखे जाते हैं..1992 से अब तक तेज़ी से बदल रहे राजनीतिक व्यवहार पर अध्ययन करने के साथ साथ विभिन्न मीडिया संस्थानों में नौकरी की. अब मुख्य रूप से लिखने पढने के काम में लगे हैं. एक अखबार में काम और विस्फोट.कॉम के सम्मानित स्तंभलेखक.
Rajesh Singh

Rajesh Singh

मुंबई में रहनेवाले राजेश सिंह मानवाधिकार कार्यकर्ता और पत्रकार हैं. वर्तमान समय में नागरिक विकल्प नामक पत्रिका का संपादन और मानवाधिकार संस्था का संचालन.
SATISH SINGH

SATISH SINGH

सतीश सिंह वर्तमान में भारतीय स्टेट बैंक में एक अधिकारी के रूप में पटना में कार्यरत हैं और विगत तीन वर्षों से स्वतंत्र लेखन कर रहे हैं। भारतीय जनसंचार संस्थान से सत्र 1994-95 में (हिन्दी पत्रकारिता में) स्नात्कोतर डिप्लोमा करने के बाद 1995 से जून 2000 तक मुख्यधारा की पत्रकारिता में इनकी सक्रिय भागीदारी रही है।
Abhishek Singh

Abhishek Singh

अभिषेक रंजन सिंह ने 2007-08 में नई दिल्ली के भारतीय जनसंचार संस्थान से पत्रकारिता की पढ़ाई पूरी की। करियर की शुरूआत सकाल मीडिया गुप्र से किया। इन दिनों दक्षिण एशिया की प्रमुख ब्रॉडकास्ट एजेंसी सीवीबी न्यूज सर्विस में कार्यरत हैं। इसके अलावा विस्फोट सहित देश के प्रमुख हिंदी समाचार पत्र और पत्रिकाओं में समसामयिक मुद्दों पर नियमित लेखन कर रहे हैं।
SANDEEP SINGH

SANDEEP SINGH

सजग युवा पत्रकार व गांधीनगर में रहकर गुजरात केंद्रीय विश्वविद्यालय में शोधरत, सिनेमा व रंगमंच को लेकर विशेष हस्तक्षेप, सामाजिक व राजनीतिक मुद्दों पर खास नजर, विभिन्न अखबारों, पत्र-पत्रिकाओं व वेब पोर्टलों के लिये स्वतंत्र लेखन.
Pranay vikram  Singh

Pranay vikram Singh

श्रमजीवी पत्रकार प्रणव विक्रम सिंह सामाजिक, राजनीतिक और आर्थिक मुद्दों पर पिछले कई सालों से लेखन कर रहे हैं.
Dhananjay Singh

Dhananjay Singh

सिमटते सिमटते कुल परिचय इतना ही शेष रह गया है कि फिलहाल घुमक्कड़ी, सधुक्कड़ी और हाथ में कलम की लकड़ी। गाजीपुर से काशी हिन्दू विश्वविद्यालय होते हुए देहरादून तक पहुंचे हैं। काम काज बहुत किया अब लिखकर अकाज करते हैं।
A N Sibli

A N Sibli

1993 से हिन्दी, उर्दू और अंग्रेजी के विभिन्न राष्ट्रीय अखबारों और पत्रिकाओं में लेखन कर रहे अब्दुल नूर सिबली इस वक्त दिल्ली से प्रकाशित हिन्दुस्तान एक्सप्रेस में बतौर ब्यूरो चीफ कार्यरत हैं. विभिन्न वेबसाइटों पर नियमित लेखन.
Prem Shukla

Prem Shukla

मुंबई से प्रकाशित हिन्दी सामना के कार्यकारी संपादक. पिछले 20 सालों से पत्रकारिता. पत्रकारिता के साथ ही मुबंई में हिन्दीभाषी समाज के विभिन्न सांस्कृतिक और सामाजिक गतिविधियों में भी सक्रिय. विस्फोट.कॉम के नियमित स्तंभ लेखक.
Puja Shukla

Puja Shukla

पेश से टीवी पत्रकार पूजा शुक्ला धाकड़ लिक्खाड़ हैं. घर परिवार की जिम्मेदारी और टीवी पत्रकारिता के साथ साथ कलम को तलवार की तरह इस्तेमाल करती हैं. दिल्ली युनिवर्सिटी से पढ़ी लिखी पूजा दिल्ली में ही रहती है.
Rajesh Shukla

Rajesh Shukla

राजेश शुक्ला तो बस राजेश शुक्ला है. कला की समीक्षा के अलावा समाज और राजनीति की भी कलात्मक समीक्षा करने में महारत. मीडिया की मजूरी और कलम की गुलामी के अलावा दुनिया में फक्कड़ी ही पसंद आती है.
Abhishek Shrivastav

Abhishek Shrivastav

अभिषेक श्रीवास्तव के परिचय वाला पन्ना आमतौर पर खाली ही रहता है। खुद अपना कुछ पता नहीं। कोई परिचय नहीं। लेकिन हाथ में कलम और एक अदद कैमरा पकड़ लें तो बहुत सारी छुपी अक्सों को परिचय दे देते हैं। संघर्ष जिन्दगी का संघर्ष नहीं, बल्कि जीने का फलसफा है। स्वतंत्र पत्रकार तो हैं ही।
Arvind Shesh

Arvind Shesh

नास्तिकता और नौकरी दोनों साथ साथ। घोषित तौर पर। बिना किसी हिचक के। परिचय के नाम पर सिर्फ इतना कि जनसत्ता में नौकरी। लेकिन काम के नाम पर बहुत कुछ। खासकर लेखन के क्षेत्र में। मुद्दों को कविता और कहानी की शक्ल तो दे ही देते हैं, कभी कभी कविता और कहानी को भी मुद्दा बना देते हैं। दिल्ली में डेरा, बाकी सब तरफ कलम का घेरा।