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May

30

2016

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भारत के साथ ईरान, पाकिस्तान परेशान

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भारत के साथ ईरान, पाकिस्तान परेशान

जाहिर है, सबके अपने निजाम और मंसूबे हैं। इनमें लाहौर का मंसूबा सबसे मुखर है। लाहौर में बैठे मौलवी, जनरल, कमांडर और जाट सियासतदान पाकिस्तान को अघोषित रूप से एक सुन्नी मुल्क घोषित कर चुके हैं। इसलिए हिन्दुओं, सिखों के खात्मे के बाद पाकिस्तान के नये अल्पसंख्यक शिया, अहमदिया और मोहाजिर हमेशा उनके निशाने पर होते हैं। जिसका असर ईरान के साथ रिश्तों पर अब साफ दिखाई देने लगा है।

हाल में ही कथित रूप से गिरफ्तार रॉ एजेन्ट कुलभूषण याधव की गिरफ्तारी को जिस तरह से ईरान ने खारिज किया और पूरे मामले को प्रोपेगेण्डा करार दिया उससे पाकिस्तान के सुन्नी हुक्मरान काफी नाराज हुए। पाकिस्तान के टीवी चैनलों पर खुलकर ईरान की निंदा की गयी और ईरान के ही बहाने शिया मुसलमानों को भी मुल्क का गैर वफादार वाशिंदा बताया गया। जाहिर है, यह पाकिस्तान नहीं बल्कि सुन्नी इस्लाम बोल रहा था। इन लोगों ने यह भी याद कराया कि यमन में सऊदी अरब के कहने के बाद भी हऊदियों के खिलाफ पाकिस्तान जंग में शामिल नहीं हुआ लेकिन ईरान इसका बदला यह दे रहा है कि वह पाकिस्तान के खिलाफ होनेवाली गतिविधियों को
दे रहा है।

असल
ान और पाकिस्तान का संबंध इतना भी नीचे

May

15

2016

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सूख गया तालाबों का शहर

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दरभंगा के बाबा सागरदास तालाब पर अतिक्रमण करके कालोनी बसा दी गयी है दरभंगा के बाबा सागरदास तालाब पर अतिक्रमण करके कालोनी बसा दी गयी है

लहेरियासराय के बेता गामी पोखर को इन दिनों आप उसके चारो ओर बने किसी मकान की छत पर चढ़े बगैर नहीं देख सकते. कभी पांच एकड़ जमीन में फैला यह तालाब आज एक छोटे डबरे जैसा दिखता है. आज इसका रकबा मुश्किल से एक एकड़ रह गया होगा. इसकी इस दशा के जिम्मेदार इसके चारो तरफ बने निजी अस्पताल और दूसरी इमारतें हैं, जिसने पिछले चार-पांच सालों में इसे लगभग पूरी तरह निगल लिया है. तालाब में जो थोड़ा बहुत पानी बचा है, वह भी अगले साल साल शायद ही नजर आये. क्योंकि वह जमीन भी पूरी की पूरी बिक गयी है. और वहां तेजी से कंस्ट्रक्शन चल रहा है.

एक बाबा सागर दास तालाब है. कुछ महीने पहले जब उसमें कचरा फेंका जा रहा था तो उसे देखने जल पुरुष राजेन्द्र सिंह पहुंचे थे. आज वह तालाब समतल मैदान बन चुका है. कई मकानों के पिलर खड़े हो गये हैं. स्थानीय लोग बताते हैं कि पिछले महीने ही यह सब हुआ है. कबरा घाट मोहल्ले में भी एक तालाब हाल के दिनों में समतल ही गया है, दूसरे को आधा भरा जा चुका है और तीसरे में कचरा फेंका जा रहा है. वार्ड 25 में शाही मनसफी में

May

15

2016

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गजवा ए हिन्द की गुहार

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गजवा ए हिन्द की गुहार

गजवा ए हिन्द (हिन्दुस्तान की फतेह) पर वे भी वही बोलते हैं तो जो कोई भी कुरान और हदीस का जानकार बोलता है। वैसे यह गजवा ए हिन्द भारत के पूरब में नहीं है। पूर्वी बंगाल से बांग्लादेश बनने के बाद अभी मौलवियों की जमात ने हिन्दुस्तान को फतेह करने का कोई फतवा तो नहीं दिया है लेकिन हिन्दुस्तान से पश्चिम में हर रोज यह फतवा दिया जाता है। कभी टीवी पर बैठकर। कभी तकरीरों में। कभी जलसों और जुलूसों में।

हिन्दुस्तान को जीतने के ये फतवे कुरान और हदीस की रोशनी में दिये जाते हैं जब मोहम्मद साहब ने अपने चाहनेवालों से कहा था कि दो फौजें निकलेंगी। एक वहां से पश्चिम जाएंगी और दूसरी हिन्द की तरफ। हिन्द के लिए जो फौज जाएगी वह जीत हासिल करेगी और वहां के राजा या राजाओं को जंजीरों में जकड़कर ले आयेगी। इस जंग में जो कुर्बान होंगे वे जन्नत जाएंगे और जो बच जाएंगे वे नर्क की आग में नहीं फेंके जाएंगे। इस तरह यह जंग आगे चीन तक जाएगी और वहां भी इस्लाम का परचम लहरायेगी और इस तरह इस खित्ते में खिलाफत कायम हो जाएगी।

मोहम्मद साहब को गये जमाना हो गया। इस बीच मोहम्मद बिन

Apr

20

2016

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नायक और खलनायक की छवि के बीच डॉ अंबेडकर

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नायक और खलनायक की छवि के बीच डॉ अंबेडकर

भिन्न-भिन्न क्षेत्रों में भिन्न-भिन्न वर्ग होते हैं। प्रवृत्ति के आधार पर दो वर्ग होते है-1. दैवीय प्रवृत्ति वाले 2. आसुरी प्रवृत्ति वाले। धर्म के आधार पर भी दो वर्ग होते है - 1. गुण प्रधान 2. पहचान प्रधान। सामाजिक कार्यो में संलग्न लोगों में भी दो वर्ग होते है- 1. संस्थागत कार्य करने वाले 2. संगठनात्मक स्वरुप वाले। आर्थिक आधार पर भी दो वर्ग होते है- 1. बुद्धिप्रधान 2. श्रम प्रधान। राजनैतिक आधार पर भी दो वर्ग होते है- 1. संचालक या शासक 2. शासित या संचालित। चूॅकि अम्बेडकर जी जीवन भर राजनीतिज्ञ के रुप में कार्य करते रहे इसलिए हम अन्य वर्गो के आधार पर उनकी समीक्षा न करके राजनैतिक वर्ग विश्लेषण तक सीमित रहेंगे।

राजनीति में दो वर्ग होते है-1 शासक और 2 शासित। तानाशाही में शासक व्यक्ति होता है और मालिक के रुप में होता है। जबकि लोकस्वराज्य में शासक प्रतिनिधि होता है और प्रबंधक होता है, मैंनेजर होता है। जहाॅ लोकतंत्र होता है वहाॅ और विशेष कर भारतीय लोकतंत्र में शासक शासितों द्वारा चुने हुए व्यक्तियो का गुट होता है। यह गुट संरक्षक की भूमिका में होता है जबकि समाज इस गुट के अन्तर्गत संरक्षित होता है। शासक समाज को अयोग्य,नाबालिग मानकर अप्रत्यक्ष रुप से अपनी

Mar

29

2016

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'अल्लाह' नहीं 'मुल्ला' का क़ानून है मुस्लिम पर्सनल लॉ

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'अल्लाह' नहीं 'मुल्ला' का क़ानून है मुस्लिम पर्सनल लॉ

दरअसल बोर्ड और जमीयत उलमा-ए-हिंद झूठ बोल रहे हैं। सच्चाई तो ये है कि भारत में लागू “शरियत” “अल्लाह” का नहीं बल्कि “मुल्ला” का बनाया हुआ क़ानून है। इसके कई प्रावधान “क़ुरआन" की आयतों के उलट और इसकी मूल भावना के ख़िलाफ़ है। कई प्रावधान महिलाओं और यतीमों को उनके अधिकारों से वंचित करते हैं। ये क़ानून सूरः निसा की आयत न. 35 में वर्णित तलाक़ की पूर्व शर्त “आर्बिट्रेशन” के ज़रिए आपसी सहमति बनाने की कोशिश किए बग़ैर ही तलाक को मान्यात दे देता है। क़ुरान की सात सूरतों में तलाक़ से संबधित कुल 44 आयते हैं। इनमें तलाक़ का तरीक़ा एकदम साफ़-साफ़ बताया गया है। इसके मुताबिक़ अगर पति-पत्नी के बीच संबध ठीक नहीं हैं और तलाक़ की नौबत आती हो तो पहले दोनों की तरफ़ से एक-एक वकील तय होगा। दोनों मिलकर पति-पत्नी के बाच सुलह कराने की कोशिश करेंगे। सुलह की कोई सूरत न होने पर पति पत्नी को तलाक़ देगा। तलाक़ महावारी ख़त्म होने पर पाकी की हालत में दी जाएगी। तलाक़ के बाद पत्नी-पति का अलग-अलग बिस्तर होगा। इस तलाक़ की इद्दत तीन महीने दस दिन या तीन महावारी तक होगी। इस बीच अगर दोनों में सुलह हो जाए तो तलाक़ ख़त्म हो जाएगी।

Feb

24

2016

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विस्थापन से ज्यादा पुनर्वास की पीड़ा

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विस्थापन से ज्यादा पुनर्वास की पीड़ा

सबसे बड़ी बात यह भी सामने आई है कि इसमें कई रसूखदार भी शामिल हैं। कई फर्जी रजिस्ट्रियां ऐसी भी सामने आई हैं जिसमें दर्शाए गए भू-खंड पर किसी रसूखदार का कब्जा है, जबकि रजिस्ट्री किसी विस्थापित के नाम पर है। अनुमान लगाया जा रहा है कि विस्थापन की आड़ में हुई फर्जी रजिस्ट्रियों का यह भ्रष्टाचार 1,700 करोड़ से अधिक का हो सकता है। चार जनवरी को सरदार सरोवर बांध विस्थापितों को फर्जी रजिस्ट्री के जरिए छले जाने के मामले की जांच के लिए गठित जस्टिस एसएस झा आयोग रिपोर्ट पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने रिपोर्ट को रिकॉर्ड पर लेकर आगे की कार्रवाई सुनिश्चित करने की व्यवस्था दे दी है। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस अजय माणिकराव खानविलकर व जस्टिस केके त्रिवेदी की डबल बेंच ने इस मामले की सुनवाई की। इस दौरान जनहित याचिका पेश करते हुए नर्मदा बचाओ आंदोलन की प्रमुख मेधा पाटकर ने अपना पक्ष स्वयं रखा। पाटकर कहती हैं कि हाईकोर्ट में पेश रिपोर्ट सरदार सरोवर परियोजना में हुए भ्रष्टाचार की पोल खोलेगी। रिपोर्ट में पुनर्वास के नाम पर किए गए अधिकांश कार्यों में भारी अनियमितताएं एवं घोटाला सामने आया है। इस रिपोर्ट को सात साल की जांच के बाद तैयार की गई

Feb

24

2016

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डिफेन्स दलालों के दलदल में तेजस

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डिफेन्स दलालों के दलदल में तेजस

रक्षा खरीदारी के लिए तेरहवीं और चौदहवीं रक्षा पंचवर्षीय योजना में 22 लाख 50 हजार करोड़ रूपये रक्षा खरीदारी पर खर्च करने का बजट निर्धारित किया गया है। इसमें एयरफोर्स के हिस्से में 7 लाख 58 हजार करोड़ रूपये की खरीदारी होगी। जाहिर सी बात है 2015 में दुनिया का सबसे बड़ा हथियार आयातक देश संभवत: एक दशक तक दुनिया के सबसे बड़े खरीदार के पायदान पर खड़ा रहेगा। इसलिए दुनियाभर के डिफेन्स सौदागर और दलाल दिल्ली में डेरा जमाये रहेंगे। रूस, ब्रिटेन, फ्रांस, इजरायल और अमेरिका हमेशा से भारत को सैन्य साजो सामान बेचनेवाले सबसे बड़े देश रहे हैं। बरतानिया हकूमत से आजादी के बाद भी ब्रिटेन ही भारत का सबसे बड़ा हथियार सप्लायर था। फिर भारत के समाजवादी झुकाव ने यह जगह रूस को दे दी। इस बीच फ्रांस अमेरिका और इजरायल भी भारत के हथियार सप्लायरों की लिस्ट में शामिल होते गये और आज 2016 में रूस और अमेरिका भारत में हथियारों की सप्लाई के लिए बढ़त हासिल करने की जंग लड़ रहे हैं।

जंगे मैदान के एयरफोर्स में एक तीसरा किरदार भी शामिल हुआ और वह था फ्रांस। फ्रांस की जिस डसां एविएशन ने भारत को मिराज 2000 लड़ाकू विमान दिया था उसने एडवांस मल्टीरोल

Feb

02

2016

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रोहित वेमुला की आत्महत्या और समाज का दोहरापन

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रोहित वेमुला की आत्महत्या और समाज का दोहरापन

उसका यह अकेलापन बहुत ही शर्मनाक है, क्योंकि रोहित वेमुला पिछले दस दिनों से अपने चार अन्य साथियों के साथ खुले आसमान के नीचे सो रहा था, क्योंकि हैदराबाद विश्वविद्यालय की कार्य परिषद् एक प्रस्ताव पास कर उनने हॉस्टल से निकाल दिया था. और इन पाँचों छात्रों का प्रवेश विश्वविद्यालय के हर सार्वजनिक स्थान पर प्रतिबंधित कर दिया गया था. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आर.एस.एस.) व भारतीय जनता पार्टी का छात्र संगठन अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के कार्यकर्ताओं से मारपीट करने का आरोप था. यह सूचना उसके कुछ साथियों ने सोशल साईट पर भी डाली थी. आखिर कहां गये वे सब संगठन जो दलितों आदिवासियों और अल्पसंख्यक लोगों के नाम पर चलते हैं. यह चुप्पी और भी खतरनाक है, आखिर कोई छात्र, शोधार्थी और शिक्षक क्यों लड़ेगा समाज के लिए? आखिर कौन बोलेगा और कौन लड़ेगा? जब लोग चुप रहेंगे?

हैदराबाद केंद्रीय विश्वविद्यालय का दलित छात्र संगठन अम्बेडकर स्टूडेंटस एसोसिएशन, जब उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरपुर नगर जिले के दंगों पर बनी फिल्म “मुजफ्फरपुर अभी बाक़ी” के दिखाये जाने को लेकर प्रतिबद्ध थी, तो भी हैदराबाद विश्वविद्यालय के मुस्लिम छात्रों और हैदराबाद शहर के मुस्लिम संगठनों ने उनका कोई साथ नहीं दिया. फिर अम्बेडकर स्टूडेंटस एसोसिएशन और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आर.एस.एस.) व

Feb

02

2016

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क्या बहुसंख्यक के वर्चस्व से जनतंत्र खत्म हो रहा है?

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क्या बहुसंख्यक के वर्चस्व से जनतंत्र खत्म हो रहा है?

यह धारा पॅूजीवाद की तरफ तो बहुत तेजी से बढ़ रही है किन्तु साथ ही बहुसंख्यक तुष्टिकरण की दिशा में भी थोड़ा थोड़ा सरक रही है। राजेश जोशी जी पिछली सरकार की उपज हैं। यह बात निर्विवाद है कि राजनेताओं ने अपने अधिकांश चरणों और भाटों को साहित्यकार, कवि,नाटककार आदि सिद्ध करके उन्हें सम्मानित किया। उन्हें अनेक पुरस्कार भी दिये। ऐसे पुरस्कार प्राप्त लोगों में कुछ योग्य लोग भी पुरस्कार पाये होंगे। अब सरकार बदली है और वह अपने चारणों भाटों को पुरस्कृत कर रही है। तो पिछले चारणों को बहुत कष्ट हो रहा है जो नहीं होना चाहिए। कुछ लोगों ने तो उचित समझकर अपने पुरस्कार वापस भी किये है। किन्तु अनेक लोग अब भी ऐसे गलत पुरस्कारों को अपने पास रखे हुए है। मैं नही कह सकता कि राजेश जी की क्या स्थिति है।

सुना है कि भारतीय संविधान में धर्म-निरपेक्षता और समाजवाद शब्द बाद में जोड़े गये जो स्वतंत्रता के प्रारंभ से संविधान के भाग नहीं। मेरी जानकारी के अनुसार जनतंत्र की वास्तविक परिभाषा मात्र यह है कि उस देश मे व्यक्ति को मौलिक अधिकार प्राप्त होते है। ये अधिकार भी चार ही होते हैं-1. जीने की स्वतंत्रता 2. अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता 3. सम्पत्ति 4. स्वनिर्णय।

Jan

31

2016

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दहेज तो नहीं मांगा, लेकिन अब मौत मांग रहे हैं दीनदयाल

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दहेज तो नहीं मांगा, लेकिन अब मौत मांग रहे हैं दीनदयाल

दीनदयाल शर्मा दिल्ली के यमुना विहार कालोनी में रहते हैं। 2003 में अपने एयरफोर्स अधिकारी बेटे की शादी एक फौजी की बेटी से किया था। बहू आयी। रानी बनकर रही। एक बेटा भी हुआ। छह साल कब बीत गये किसी को पता न चला। फिर छह साल बाद अचानक से बहू घर छोड़कर मायके चली गयी। इसके बाद वही हुआ जो आमतौर पर एक सामान्य हिन्दू परिवार का सबसे बड़ा डर बन गया है। बहू ने 2012 में दहेज उत्पीड़न का केस दर्ज करा दिया और बीते तीन सालों से अब उनकी अपनी बहू और पोते से कोर्ट में ही मुलाकात होती है।

दीनदयाल कह रहे हैं कि जब छह साल दहेज नहीं मांगा तो छठे साल में ऐसा क्या हो गया कि बहू ने दहेज उत्पीड़न का मामला दर्ज करा दिया? दीनदयाल के मुताबिक बहू ने मांग रखी थी कि घर उसके नाम कर दिया जाए जिसे सास ससुर ने नहीं माना। हो सकता है बेटे ने बीबी का साथ देने की बजाय अपने मां बाप का साथ दिया और बात बिगड़ गयी। बहू मायके चली गयी। तकरार बढ़ती चली गयी और मामला अदालत में उलझ गया है। किसी सत्तर साल के बुजुर्ग के लिए रोज रोज कोर्ट

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Seetaram Yechuri

Seetaram Yechuri

हैदराबाद के ब्राह्मण कुल में पैदा हुए सीताराम येचुरी भारत में कम्युनिस्ट आंदोलन के कुछ चेहरों में एक बन गये हैं. सेंट स्टीफेन और जेएनयू से शिक्षा. 1974 में एसएफआई में सक्रिय और बाद में सीपीआईएम से जुड़े. 1984 में सीपीआई सेन्ट्रल कमेटी में शामिल हुए. वर्तमान में सीपीआई (एम) पोलित ब्यूरो के मेम्बर और ऐसे सक्रिय राजनीतिज्ञ जिनसे मिलने की तमन्ना बराक ओबामा भी रखते हों.
Rajiv Yadav

Rajiv Yadav

इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक राजीव दिल्ली स्थित आईआईएमसी से मीडिया में मास्टर डिग्री ले चुके हैं. फिलहाल इलाहाबाद में रहकर मुक्त पत्रकारिता और जनाधिकार के मुद्दों पर सक्रिय कार्य कर रहे हैं. विस्फोट पर लेखन.
Ashok Wankhade

Ashok Wankhade

यवतमाल में पैदा हुए अशोक वानखेडे पढ़ने के लिए इंदौर आये तो पत्रकारिता का कैरियर साथ में लेकर इंदौर से बाहर निकले. फ्री प्रेस जर्नल से पत्रकारिता शुरू करनेवाले अशोक वानखेडे चौथा संसार में काम करने दिल्ली आये तो यहीं के होकर रह गये. करीब पचीस साल के अपने पत्रकारीय कैरियर में अंग्रेजी, हिन्दी और मराठी तीनों भाषाओं के लिए काम किया है. इलेक्ट्रानिक का जमाना आया तो विडियो जर्नलिज्म में भी हाथ आजमाया. अब एक अखबार के राजनीतिक संपादक होने के साथ साथ नये मीडिया को नारा-ए-मस्ताना बनाना चाहते हैं.
Dr. Ashish Vashisth

Dr. Ashish Vashisth

डॉ. आशीष वशिष्ठ लखनऊ में रहनेवाले स्वतंत्र पत्रकार हैं. विभिन्न विषयों पर समसामयिक टिप्पणी और लेखन.
Harsh Vardhan

Harsh Vardhan

हर्षवर्धन टीवी पत्रकार हैं. अमर उजाला में लंबे समय तक काम करने के बाद सीएनबीसी आवाज में काम किया. इस वक्त पी7न्यूज में कार्यरत। बतंगड़ नाम से नियमित ब्लाग भी लिखनेवाले हर्षवर्धन राजनीतिक विश्लेषक के तौर पर स्थापित हैं.
Vinod Upadhyay

Vinod Upadhyay

मूलत: बक्सर बिहार के रहनेवाले विनोद उपाध्याय भोपाल में रहकर पत्रकारिता करते हैं. दैनिक राष्ट्रीय हिन्दी मेल से पत्रकारिता में प्रवेश. वर्तमान में भोपाल से ही प्रकाशित होनेवाले दैनिक अग्निबाण से जुड़े हुए हैं.
Arvind Tripathi

Arvind Tripathi

अरविन्द त्रिपाठी देश के कई बड़े समाचार पत्रों व पत्रिकाओं में काम करने के बाद वर्तमान में दिल्ली से प्रकाशित हो रही "सामना" हिंदी पत्रिका में उत्तर प्रदेश से विशेष संवाददाता के पद पर कार्यरत हैं. साथ ही पानी और पर्यावरण के मुद्दे पर राजेन्द्र सिंह के साथ काम कर रहे हैं.
Sanjeet Tripathi

Sanjeet Tripathi

रायपुर के रहनेवाले संजीत त्रिपाठी वैसे तो प्रिंट मीडिया के लिए ही काम करते हैं लेकिन प्रिंट से ज्यादा आनलाइन मीडिया में सक्रियता. ब्लाग लिखने से लेकर फेसबुक सक्रियता तक संजीत सब जगह नजर आते हैं. आवारा बंजारा नाम से ब्लाग लेखन करनेवाले संजीत फिलहाल रायपुर में एक अखबार के साथ काम कर रहे हैं.
Anushikha Tripathi

Anushikha Tripathi

भोपाल में ही पढ़ाई लिखाई और अब भोपाल में ही रहकर पत्रकारिता. माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय से 2011 में पत्रकारिता की डिग्री.
Awesh Tiwari

Awesh Tiwari

मेरे लिए खबरें सिर्फ सूचनाओं को कलमबंद करने का जरिया नहीं है ,ये जरुरी है कि जिनके लिए भी हम खबरें लिख रहे हैं उनको उन ख़बरों से कुछ मिले |पिछले एक दशक से उत्तर भारत के सोन-बिहार -झारखण्ड क्षेत्र में आदिवासी किसानों की बुनियादी समस्याओं ,नक्सलवाद ,विस्थापन ,प्रदूषण और असंतुलित औद्योगीकरण को लेकर की गयी अब तक की रिपोर्टिंग में हमने अपने इस सिद्धांत को जीने की कोशिश की है।
Anshuman Tiwari

Anshuman Tiwari

मूलत: उत्तर प्रदेश के रहनेवाले अंशुमान तिवारी ने आर्थिक पत्रकारिता को हिन्दी में बहुत शुरूआती दौर से देखा समझा है. अमर उजाला कारोबार के लिए काम किया और बाद में दैनिक जागरण समूह से जुड़े. वर्तमान में दैनिक जागरण के ब्यूरो चीफ हैं. इसके साथ ही अर्थार्थ नाम से ब्लाग भी लिखते हैं.
Sanjay Tiwari

Sanjay Tiwari

आप जहां तक सोच सकते हैं इंटरनेट आपको वहां तक काम करने का मौका देता है. अभी तक मानव सभ्यता ने जितने भी मीडिया माध्यमों का उपयोग किया है यह उन सबमें अनूठा, प्रभावी और सर्वगुण संपन्न है. सूचना लेने देने के तीन माध्यमों दृश्य, श्रवण और पाठ को एक ही धागे में लपेटे नया मीडिया उत्पादन और पहुंच दोनों के लिहाज से सर्वश्रेष्ठ है. ऐसे नये मीडिया का जनहित के लिए भरपूर उपयोग हो, विस्फोट.कॉम उसी दिशा में उठा एक कदम है. visfot@visfot.com
Arun Tiwari

Arun Tiwari

अरुण तिवारी दिल्ली में रहने वाले स्वतंत्र लेखक हैं।
Sanjay Swadesh

Sanjay Swadesh

किरोडीमल कॉलेज स्नातकोत्तर के बाद केंद्रीय हिंदी संस्थान दिल्ली से पत्रकारिता में डिप्लोमा। दैनिक हिंदुस्तान, नवभारत टाईम्स, सहारा समय, दैनिक भास्कर में काम. कई पत्र-पत्रिकाओं में स्वतंत्र लेखन के साथ स्थानीय जनअभियानों से जुड़े हैं।
Naresh Sirohi

Naresh Sirohi

महैन्द्र सिंह टिकैत की टीम में शामिल होकर पश्चिमी उत्तर प्रदेश में किसान आंदोलन से अपना सार्वजनिक जीवन शुरू करनेवाले नरेश सिरोही अभी भी मूल रूप से किसान आंदोलन से ही जुड़े हुए हैं। स्वदेशी आंदोलन में सक्रियता। संप्रति भाजपा किसान मोर्चा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष।
Rakesh Sinha

Rakesh Sinha

अकादमिक पृष्ठभूमि से ताल्लुक रखनेवाले प्रो. राकेश सिन्हा संघ विचारधारा के बीच सक्रिय समानतावादी विचारक हैं. राकेश सिन्हा हिन्दुत्व की प्रखर धारा के पैरोकार हैं. लेकिन ऐसा करने के लिए वे हिंसक विवाद की बजाय अहिसक "संवाद" को अपना जरिया बनाते हैं. इंडिया पॉलिसी फाउण्डेशन के मानद निदेशक के रूप में शोध, अध्ययन और संवाद को आगे बढ़ा रहे हैं.
Virender Singh Chauhan

Virender Singh Chauhan

वीरेंद्र सिंह चौहान एक दशक से अधिक समय तक हिंदी पत्रकारिता की मुख्यधारा से जुड़े रहे. दैनिक दिव्य हिमाचल में बतौर उप संपादक और बाद में अमर उजाला और दैनिक ट्रिब्यून में स्टाफ रिपोर्टर के नाते कार्य किया. इस दौरान हरियाणा यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट्स के प्रदेश अध्यक्ष. सितम्बर 2007 से पत्रकारिता के शिक्षण में. सम्प्रति चौधरी देवी लाल विश्वविद्यालय, सिरसा के पत्रकारिता व जनसंचार विभाग में एसोसिएट प्रोफेसर और विभागाध्यक्ष.
S N Singh

S N Singh

शेष नारायण सिंह मूलतः इतिहास के विद्यार्थी हैं. शुरू में इतिहास के शिक्षक रहे. .बाद में पत्रकारिता की दुनिया में आये...प्रिंट, रेडियो और टेलिविज़न में काम किया. इन्होने १९२० से १९४७ तक की महात्मा गाँधी की जीवनी के उस पहलू पर काम किया है जिसमें वे एक महान कम्युनिकेटर के रूप में देखे जाते हैं..1992 से अब तक तेज़ी से बदल रहे राजनीतिक व्यवहार पर अध्ययन करने के साथ साथ विभिन्न मीडिया संस्थानों में नौकरी की. अब मुख्य रूप से लिखने पढने के काम में लगे हैं. एक अखबार में काम और विस्फोट.कॉम के सम्मानित स्तंभलेखक.
Rajesh Singh

Rajesh Singh

मुंबई में रहनेवाले राजेश सिंह मानवाधिकार कार्यकर्ता और पत्रकार हैं. वर्तमान समय में नागरिक विकल्प नामक पत्रिका का संपादन और मानवाधिकार संस्था का संचालन.
SATISH SINGH

SATISH SINGH

सतीश सिंह वर्तमान में भारतीय स्टेट बैंक में एक अधिकारी के रूप में पटना में कार्यरत हैं और विगत तीन वर्षों से स्वतंत्र लेखन कर रहे हैं। भारतीय जनसंचार संस्थान से सत्र 1994-95 में (हिन्दी पत्रकारिता में) स्नात्कोतर डिप्लोमा करने के बाद 1995 से जून 2000 तक मुख्यधारा की पत्रकारिता में इनकी सक्रिय भागीदारी रही है।
Abhishek Singh

Abhishek Singh

अभिषेक रंजन सिंह ने 2007-08 में नई दिल्ली के भारतीय जनसंचार संस्थान से पत्रकारिता की पढ़ाई पूरी की। करियर की शुरूआत सकाल मीडिया गुप्र से किया। इन दिनों दक्षिण एशिया की प्रमुख ब्रॉडकास्ट एजेंसी सीवीबी न्यूज सर्विस में कार्यरत हैं। इसके अलावा विस्फोट सहित देश के प्रमुख हिंदी समाचार पत्र और पत्रिकाओं में समसामयिक मुद्दों पर नियमित लेखन कर रहे हैं।
SANDEEP SINGH

SANDEEP SINGH

सजग युवा पत्रकार व गांधीनगर में रहकर गुजरात केंद्रीय विश्वविद्यालय में शोधरत, सिनेमा व रंगमंच को लेकर विशेष हस्तक्षेप, सामाजिक व राजनीतिक मुद्दों पर खास नजर, विभिन्न अखबारों, पत्र-पत्रिकाओं व वेब पोर्टलों के लिये स्वतंत्र लेखन.
Pranay vikram  Singh

Pranay vikram Singh

श्रमजीवी पत्रकार प्रणव विक्रम सिंह सामाजिक, राजनीतिक और आर्थिक मुद्दों पर पिछले कई सालों से लेखन कर रहे हैं.
Dhananjay Singh

Dhananjay Singh

सिमटते सिमटते कुल परिचय इतना ही शेष रह गया है कि फिलहाल घुमक्कड़ी, सधुक्कड़ी और हाथ में कलम की लकड़ी। गाजीपुर से काशी हिन्दू विश्वविद्यालय होते हुए देहरादून तक पहुंचे हैं। काम काज बहुत किया अब लिखकर अकाज करते हैं।
A N Sibli

A N Sibli

1993 से हिन्दी, उर्दू और अंग्रेजी के विभिन्न राष्ट्रीय अखबारों और पत्रिकाओं में लेखन कर रहे अब्दुल नूर सिबली इस वक्त दिल्ली से प्रकाशित हिन्दुस्तान एक्सप्रेस में बतौर ब्यूरो चीफ कार्यरत हैं. विभिन्न वेबसाइटों पर नियमित लेखन.
Prem Shukla

Prem Shukla

मुंबई से प्रकाशित हिन्दी सामना के कार्यकारी संपादक. पिछले 20 सालों से पत्रकारिता. पत्रकारिता के साथ ही मुबंई में हिन्दीभाषी समाज के विभिन्न सांस्कृतिक और सामाजिक गतिविधियों में भी सक्रिय. विस्फोट.कॉम के नियमित स्तंभ लेखक.
Puja Shukla

Puja Shukla

पेश से टीवी पत्रकार पूजा शुक्ला धाकड़ लिक्खाड़ हैं. घर परिवार की जिम्मेदारी और टीवी पत्रकारिता के साथ साथ कलम को तलवार की तरह इस्तेमाल करती हैं. दिल्ली युनिवर्सिटी से पढ़ी लिखी पूजा दिल्ली में ही रहती है.
Rajesh Shukla

Rajesh Shukla

राजेश शुक्ला तो बस राजेश शुक्ला है. कला की समीक्षा के अलावा समाज और राजनीति की भी कलात्मक समीक्षा करने में महारत. मीडिया की मजूरी और कलम की गुलामी के अलावा दुनिया में फक्कड़ी ही पसंद आती है.
Abhishek Shrivastav

Abhishek Shrivastav

अभिषेक श्रीवास्तव के परिचय वाला पन्ना आमतौर पर खाली ही रहता है। खुद अपना कुछ पता नहीं। कोई परिचय नहीं। लेकिन हाथ में कलम और एक अदद कैमरा पकड़ लें तो बहुत सारी छुपी अक्सों को परिचय दे देते हैं। संघर्ष जिन्दगी का संघर्ष नहीं, बल्कि जीने का फलसफा है। स्वतंत्र पत्रकार तो हैं ही।
Arvind Shesh

Arvind Shesh

नास्तिकता और नौकरी दोनों साथ साथ। घोषित तौर पर। बिना किसी हिचक के। परिचय के नाम पर सिर्फ इतना कि जनसत्ता में नौकरी। लेकिन काम के नाम पर बहुत कुछ। खासकर लेखन के क्षेत्र में। मुद्दों को कविता और कहानी की शक्ल तो दे ही देते हैं, कभी कभी कविता और कहानी को भी मुद्दा बना देते हैं। दिल्ली में डेरा, बाकी सब तरफ कलम का घेरा।