SATISH SINGH

सूचना की बत्ती जला दो

बिहार की राजधानी पटना के श्रीकृष्ण मेमोरियल हॉल में हाल ही में सूचना का अधिकार (आरटीआई) कानून पर दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय ...

निजी बैंकों का बेहतर पूंजी प्रबंधन

वार्षिक लेखाबंदी के निकट आते ही खासकर के मार्च के महीने में सरकारी बैंकों में गैर निष्पादित परिसंपत्ति (एनपीए) के स्तर को ...

आरटीआई के बल पर बदलाव
 

आरटीआई के बल पर बदलाव

निश्चित तौर पर भारत में आरटीआई़़ ने एक नई क्रांति का सूत्रपात किया है। इस कानून के तहत आम एवं खास दोनों सूचना मांग सकते हैं। केन्द्र एवं राज्य सरकार के अधीनस्थ महकमों में सूचना मांगने की अलग-अलग व्यवस्था है, पर सूचना मांगने की प्रक्रिया सरल है। इस कारण इस कानून की लोकप्रियता दिन-प्रति-दिन बढ़ती जा रही है। ... Full story

मनमोहन के विकास का मायाजाल
 

मनमोहन के विकास का मायाजाल

प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने संयुक्त राष्ट्र महासभा को संबोधित करते हुए भारत के विकास की जो कहानी कही है उसकी सच्चाई उनके संयुक्त राष्ट्र की आमसभा में जाने से पहले ही योजना आयोग बयान कर चुका है. हमारे प्रधानमंत्री संयुक्त राष्ट्र की महासभा में संतुलित, समग्र और स्थाई विकास की गाथा जरूर गाकर वापस आ गये हैं लेकिन खुद भारत में ये तीन शब्द अप्रासंगिक हो गये हैं. भारत में जो मनमोहनामिक्स पिछले बीस बाइस सालों से कायम है उसी का कमाल है कि आज 2011 में योजना आयोग 32 रूपये रोजाना की आय को भरापुरा जीवन जीने के लिए पर्याप्त बता रहा है. ... Full story

सरकार ने ही कर दिया महाराजा को कंगाल
 

सरकार ने ही कर दिया महाराजा को कंगाल

नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) की ताजा रिर्पोट ने फिर से पूरे देश में बवाल खड़ा दिया है। अपनी इस रिर्पोट में कैग ने यह कहा है कि नागरिक एवं उड्डयन मंत्रालय की गलत नीतियों तथा एयर इंडिया एवं इंडियन एयरलाइंस प्रबंधन के अंदर व्याप्त खामियों की वजह से महाराजा कंगाल हुआ है। ... Full story

कॅारपोरेट घरानों को बैंकिंग लाइसेंस देना कितना जायज ?
 

कॅारपोरेट घरानों को बैंकिंग लाइसेंस देना कितना जायज ?

कॅारपोरेट्स घरानों को बैंकिग लाइसेंस देने का रास्ता अब साफ हो गया है। इनको लाइसेंस देने के लिए जरुरी कवायद तकरीबन छह माह से किया जा रहा था। वित्तमंत्री ने अपने बजट भाषण में घोषणा कि थी कि चालू वित्तीय वर्ष यानि 2011-12 के अंत तक बैंकिंग लाइसेंस देने के नियमों की घोषणा कर दी जाएगी। गौरतलब है कि बैंकिंग लाइसेंस हासिल करने के लिए कारोबारी घराने लाबीइंग के जरिए सरकार को अपने पक्ष में करने की कोशिश कई सालों से कर रहे थे। ... Full story

अमेरिकी कर्ज के भंवर में फंसने का खतरा
 

अमेरिकी कर्ज के भंवर में फंसने का खतरा

स्टैंडर्ड एंड पुअर्स ने अमेरिका की लॉन्ग टर्म कर्ज की रेटिंग को ‘ट्रिपल ए’ से कम करके ‘एए प्लस’ कर दिया है। रेटिंग कम होने से ज्यादा खतरनाक अवस्था अमेरिकी अर्थव्यवस्था में सुधार की रफ्तार का बहुत ज्यादा सुस्त होना है। डर की वजह से सरकार एतहियाती रवैया अपनाने की नाकाम कोशिश कर रही है। यूरोप और मध्य पूर्व देशों के हालत भी अच्छे नहीं हैं। दिन प्रति दिन इन देशों में कर्ज का संकट और भी गहराता चला जा रहा है। अब सब कुछ इन देशों की सरकार पर निर्भर करता है कि वे किस तरह से इस कर्ज संकट से मुकाबला करते हैं। ... Full story

राखी आई चीन से
 

राखी आई चीन से

रक्षाबंधन भाई-बहन के प्यार को जताने का त्यौहार माना जाता है। इस पर्व में बहनें अपने भाईयों की कलाई पर राखी बाँधती है। भारत में इस त्यौहार को बड़े धूम-धाम के साथ मनाया जाता है। लेकिन भारत के इस त्यौहार में अब चीन भी धूमधाम से जुड़ गया है। गौरतलब है कि सीधा-सीधा इस त्यौहार का भले ही चीन से कोई सरोकार नहीं है, फिर भी व्यापार के लिहाज से चीन ने इस त्यौहार से गहरा रिश्ता जोड़ लिया है। ... Full story

सन्नाटे में सुशासन बाबू
 

सन्नाटे में सुशासन बाबू

कर्नाटक, दिल्ली और उत्तर प्रदेश के बाद अब बिहार भी घोटालों के घेरे में आ गया है। सुशासन बाबू के सुशासन की हवा निकल गई है। ताजा विवाद भूमि आवंटन को लेकर है। वैसे तो इस घोटाले की सुगबुगाहट विपक्षी पार्टियों के बीच एक अरसे से थी। किन्तु विगत सप्ताह से असंतोष में जबर्दस्त इजाफा हुआ है। ... Full story

पूरा मुजफ्फरपुर बीमार, सुशासन बाबू हुए बेकार
 

पूरा मुजफ्फरपुर बीमार, सुशासन बाबू हुए बेकार

सुशासन का दंभ भरने वाली नीतीश कुमार की सरकार बिजली के मुद्दे पर पहले ही असफल हो चुकी है और अब स्वास्थ के मामले में भी नाकारा साबित हो रही है। सुशासन बाबू के दावों की पोल खोली है मुजफ्फरपुर में फैली अज्ञात बीमारी ने जिसने विगत एक पखवाड़े में बिहार के मुजफ्फरपुर जिले में 59 बच्चों की जान ले चुका है। पहले इस बीमारी को जापानी इंसेफ्लाइटिस माना जा रहा था, लेकिन अब तक जितने परीक्षण हुए हैं उसमें बीमारी का पता नहीं चल पाया है। साफ है, इतनी मासूम जानों के जाने के बाद अभी तक सुशासन बाबू की सरकार बीमारी का पता लगाने में भी बेकार साबित हो रही है। ... Full story

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SATISH SINGH SATISH SINGH लंबे समय तक मुख्यधारा की पत्रकारिता करने के सतीश सिंह पिछले एक साल से स्वतंत्र पत्रकारिता और लेखन कर रहे हैं. दैनिक हिन्दुस्तान, दैनिक जागरण, प्रभात खबर, हिन्दुस्तान टाईम्स के लिए काम किया. वर्तमान समय में दिल्ली में कार्यरत.

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