S N Singh

सुरक्षा के ताबूत में स्वार्थ की कील

राष्ट्रीय आतंकरोधी केंद्र यानी एनसीटीसी की स्थापना की कोशिश ठंडे बस्ते के हवाले हो गयी है. इस तरह कारगिल पर पाकिस्तानी घुसपैठ ...

अंबेडकर के कार्टून पर नासमझी भरा विवाद

२८ अगस्त १९४९ को शंकर्स वीकली में छपे एक कार्टून को लेकर डॉ अंबेडकर के नाम पर वोट की भीख मांगने वालों ...

कॉमरेड कैफ़ी आजमी
 

कॉमरेड कैफ़ी आजमी

जहां तक शायरी और साहित्य की बात है मैं कैफ़ी आजमी के बारे में कुछ भी लिख सकने का हक़दार नहीं हूँ. मुझे साहित्य की समझ नहीं है लेकिन एक शायर के रूप में बाकी दुनिया में अपनी पहचान बनाने वाले कैफ़ी आज़मी एक बेहतरीन इंसान थे. आज़मगढ़ जिले के मिजवां में जन्मे अतहर हुसैन रिज़वी ही बाद में कैफ़ी आज़मी बने. कैफ़ी बहुत ही संवेदनशील इंसान थे, बचपन से ही. जो आदमी सारी दुनिया की तकलीफों को ख़त्म कर देने वालों की जमात में जाकर शामिल हुआ, सबके दर्द को गीतों के ज़रिये ताक़त दी और इंसाफ़ की लड़ाई में जिसके गीत अगली कतार में हों, वह अपना दर्द कभी बयान नहीं करता था. ... Full story

एनसीटीसी पर चित्त हो गये चिदम्बरम
 

एनसीटीसी पर चित्त हो गये चिदम्बरम

केंद्रीय गृह मंत्रालय के प्रिय प्रोजेक्ट, एनसीटीसी पर राजनीतिक ब्रेक लग गया है. सम्मलेन के बाद गृहमंत्री ने घोषणा की कि ३ मुख्यमंत्रियों ने एनसीटीसी का विरोध किया है जबकि कुछ ने शर्तों के साथ समर्थन किया. उन्होंने यह भी कहा कि कई मुख्यमंत्रियों ने उसका समर्थन किया. एक सवाल के जवाब में उन्होंने साफ़ किया कि एनसीटीसी को आईबी के अधीन रखने का प्रस्ताव २००१ में गठित ग्रुप आफ मिनिस्टर्स ने तय किया था. उन दिनों अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार थी. यह दिलचस्प है कि शनिवार को जिन तीन मुख्यमंत्रियों ने एनसीटीसी का सबसे ज्यादा विरोध किया वे अटल बिहारी वाजपेये की सरकार का हिस्सा रह चुके हैं. ... Full story

महात्मा गांधी और सरदार पटेल की धर्मनिर्पेक्षता एक थी
 

मधु लिमये के समाजवादी सरदार

आरएसएस और बीजेपी ने अपने फायदे के लिए देशभर में यह भ्रम फैला रखा है कि सरदार पटेल उन्हीं की तरह हिन्दूवादी थे. आरएसएस ने यह भ्रम तबसे फैलाना शुरू किया जबसे बाबरी मस्जिद विध्वंस को आरएसएस ने अपने एजेण्डे पर ले लिया था. लेकिन क्या सरदार वल्लभ भाई पटेल उसी तरह के हिन्दूवादी थे जैसे आरएसएस के लोग हैं. नहीं. यह निरा झूठ है. सरदार पटेल बहुत धर्मनिर्पेक्ष व्यक्ति थे. मधु लिमये ने "सरदार पटेल: सुव्यवस्थित राज्य के प्रणेता" में बताया है कि सरदार पटेल कैसे धर्मनिर्पेक्ष और समाजवादी विचारधारा के पैरोकार थे. मधु लिमय के जन्मदिन 1 मई पर शेष नारायण सिंह की खोजबीन- ... Full story

माया नहीं अखिलेश है, ब्रह्मा विष्णु महेश है
 

माया नहीं अखिलेश है, ब्रह्मा विष्णु महेश है

करीब डेढ़ महीने पहले उत्तर प्रदेश में नई सरकार ने शपथ ली थी. इन पैंतालीस दिनों में उत्तर प्रदेश में बहुत कुछ बदला है, लेकिन अजीब बात है कि उस परिवर्तन के बारे में कुछ भी लिखा नहीं जा रहा है. दिल्ली के सत्ता के गलियारों में जहां कहीं भी एकाध लोग यह कहते पाए जाते हैं कि उत्तर प्रदेश में हालात पहले से बेहतर हैं, उन्हें फ़ौरन नकलेल लगाने की कोशिश की जाती है. उन्हें डांट दिया जाता है कि सरकार की चापलूसी करने की ज़रुरत नहीं है. यह उपदेश देनेवालों में वे लोग भी शामिल होते हैं जो राहुल गांधी के दलित प्रेम के बारे में टेलिविज़न पर राग दरबारी में राहुल रासो गाया करते थे. लेकिन ऐसे लोगों को समझना चाहिए कि उत्तर प्रदेश के इतिहास में अखिलेश यादव वह साबित होने जा रहे हैं जो अब तक कोई मुख्यमंत्री नहीं हो पाया. डेढ़ महीने में उन्होंने इसकी आहट दे दी है. ... Full story

अल्पसंख्यक मंत्री का अल्पसंख्यक विरोधी कारनामा
 

अल्पसंख्यक मंत्री का अल्पसंख्यक विरोधी कारनामा

अभी अभी उत्तर प्रदेश चुनाव बीता है और कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता तथा अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री सलमान खुर्शीद ने मुसलमानों का मसीहा बनने के लिए चुनाव आयोग तक को चुनौती दे डाली दी थी. आरक्षण बांटने निकले हमारे अल्पसंख्यक मंत्री की एक हकीकत और है. यह हकीकत है अल्पसंख्यक विरोधी चरित्र. अल्पसंख्यक मामलों के केन्द्रीय मंत्री सलमान खुर्शीद के मंत्रालय ने न केवल मुसलमानों के लिए आवंटित धन को खर्च करने में कोताही की बल्कि मुसलमान बच्चों के लिए वजीफे तक नहीं बांटे जिससे सरकार द्वारा जारी किया गया पैसा वापस सरकार के पास पहुंच गया. शेष नारायण सिंह की खास रिपोर्ट- ... Full story

नेशनल म्यूजियम पर निजीकरण का खतरा
 

नेशनल म्यूजियम पर निजीकरण का खतरा

नैशनल म्यूज़ियम हमारे इतिहास का एक खजाना है लेकिन उसके रखरखाव और प्रबंधन के काम में सरकार ने बहुत ही गैरज़िम्मेदार तरीका अपना रखा है. संस्कृति मंत्रालय के काम पर नज़र रखने वाली संसद की स्थायी समिति ने अपने १६७वीं रिपोर्ट में लिखा है कि अगर ऐसे ही हालात रहे तो नैशनल म्यूज़ियम में कुछ समय बाद कोई भी सरकारी कर्मचारी नहीं रह जाएगा और सरकार को बहाना मिल जाएगा कि नैशनल म्यूज़ियम जैसी राष्ट्रीय महत्व की संस्था किसी प्राइवेट कंपनी को दे दी जाए. ... Full story

अंबेडकर दर्शन से अनभिज्ञ
 

अंबेडकर दर्शन से अनभिज्ञ

पिछली सदी के सामाजिक और राजनीतिक दर्शन के जानकारों में डा. बीआर अंबेडकर का नाम बहुत ही सम्मान के साथ लिया जाता है। महात्मा गांधी के समकालीन रहे अंबेडकर ने अपने दर्शन की बुनियादी सोच का आधार जाति प्रथा के विनाश को माना था। उनको विश्वास था कि जब तक जाति का विनाश नहीं होगा, तब तक न तो राजनीतिक सुधार लाया जा सकता है और न ही आर्थिक सुधार लाया जा सकता है। जाति के विनाश के सिद्धांत को प्रतिपादित करने वाली उनकी किताब, The Annihilation of caste, ने हर तरह की राजनीतिक सोच को प्रभावित किया है। आज सभी पार्टियां डॉ अंबेडकर के नाम की रट लगाती हैं लेकिन उनकी बुनियादी सोच से बहुत बड़ी संख्या में लोग अनभिज्ञ हैं। ... Full story

ब्राह्मणवादी व्यवस्था के खिलाफ बहुजन क्रांति का बिगुल
 

ब्राह्मणवादी व्यवस्था के खिलाफ बहुजन क्रांति का बिगुल

बीसवीं सदी के उथल पुथल भरे भारत के इतिहास में जिन पांच किताबों का सबसे ज़्यादा योगदान है, हिंद स्वराज का नाम उसमें सर्वोपरि है। इसके अलावा जिन चार किताबों ने भारत के राजनीतिक सामाजिक चिंतन को प्रभावित किया उनके नाम हैं, भीमराव अंबेडकर की जाति का विनाश, मार्क्‍स और एंगेल्स की कम्युनिस्ट मैनिफेस्टो, ज्योतिराव फुले की गुलामगिरी और वीडी सावरकर की हिंदुत्व। ... Full story

Author info

S N Singh S N Singh शेष नारायण सिंह मूलतः इतिहास के विद्यार्थी हैं. शुरू में इतिहास के शिक्षक रहे. .बाद में पत्रकारिता की दुनिया में आये...प्रिंट, रेडियो और टेलिविज़न में काम किया. इन्होने १९२० से १९४७ तक की महात्मा गाँधी की जीवनी के उस पहलू पर काम किया है जिसमें वे एक महान कम्युनिकेटर के रूप में देखे जाते हैं..1992 से अब तक तेज़ी से बदल रहे राजनीतिक व्यवहार पर अध्ययन करने के साथ साथ विभिन्न मीडिया संस्थानों में नौकरी की. अब मुख्य रूप से लिखने पढने के काम में लगे हैं. एक अखबार में काम और विस्फोट.कॉम के सम्मानित स्तंभलेखक.

Latest comments