Sunil Amar

नैय्या पार लगाएंगे नरेन्द्र मोदी

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ अब नरेन्द्र मोदी की नांव में सवार हो गया है. पहले उन्हें एसआईटी की रिपोर्ट के बाद दिल्ली ...

टूट गये मिथक, मिट गई खुदाई

देश की लोकतांत्रिक राजनीति में व्यक्ति से लेकर जाति और धर्म तक के कई मिथक पहले चुनाव से ही गढ़ लिये गये ...

भाजपा के नेता हैं या पोरस के हाथी?
 

भाजपा के नेता हैं या पोरस के हाथी?

उत्तर प्रदेश विधानसभा के चुनाव नजदीक आते ही भारतीय जनता पार्टी के अंतर्विरोध एक-एक कर यूँ सामने आने लगे हैं जैसे राजे-रजवाड़ों के समय में उनके अंत:पुर के षडयंत्र उद्धाटित हुआ करते थे। दिल्ली से लेकर राज्यों तक भाजपा की पिछले कुछ समय की गतिविधियों को देखने-समझने पर ऐसा लगता है जैसे इसका हर बड़ा नेता अपना मनोरथ पूरा करने के लिए बेहद जल्दबाजी में हो। ... Full story

‘अदम’ जो आजीवन अदम ही रहे
 

‘अदम’ जो आजीवन अदम ही रहे

डेढ़-दो दशक पहले की बात है। प्रदेश की ग्राम पंचायतों के चुनाव हुए थे और उन्हें आर्थिक अधिकार भी दिए गए थे। जनपद फैजाबाद के नवनिर्वाचित प्रधानों ने वहाँ मुख्यालय स्थित सभागार नरेन्द्रालय में एक सम्मेलन किया और आयोजकों ने उसमें ‘अदम’ जी को भी आमंत्रित किया था। उन्हें आशीर्वचन देने के लिए जब आयोजकों ने मंच पर बुलाया तो माइक पकड़ते ही ‘अदम’ जी ने जो दो पंक्तियाँ पढ़ी थीं वो अदम जैसे अदम्य साहस और आग से भरे हुए आदमी से ही सुनी जा सकती थीं -‘‘जितने हरामखोर थे पुरवो-जवार में, प्रधान बनके आ गए अगली कतार में।’’ ... Full story

वह भाषण जो लालकिले से पढ़ा नहीं गया
 

वह भाषण जो लालकिले से पढ़ा नहीं गया

मेरे प्यारे देशवासियों ......आज आजादी को याद करने का दिन है। आजादी की कीमत वही समझ सकता है जो गुलाम हो। वैसे ही, जैसे खाने की कीमत वही समझ सकता है जो भूखा हो। यह अच्छी बात है कि हम आप न तो गुलाम हैं और न ही भूखे। यह हमारे देश के महान नेताओं की मेहनत और त्याग का फल है। हमें आपको यह बताते हुए बहुत खुशी हो रही है कि हमने देश के चौतरफा मौजूद खतरों को नेस्तनाबूद कर दिया है। हमने बिना कुछ किए ऐसी-ऐसी चालें चलीं कि हमारे सभी पड़ोसी दुश्मन एक-एक कर परास्त होते चले गए। ... Full story

बुंन्देलखण्ड से बड़ी संख्या में पलायन थम नहीं रहा है
 

बुन्देले मत बोलो कि...

बुंदेलखण्ड की बीर गाथाएं न जाने कहां खो गयी हैं। अब तो यहां चहुं ओर सिर्फ करुण कहानियों का बोलबाला है। बुंदेलखण्ड देश का दूसरा विदर्भ बनता जा रहा है। केन्द्र और राज्य सरकारों के तमाम घोषित उपायों के बावजूद यहॉ के किसानों द्वारा की जा रही आत्महत्याओं का सिलसिला थम नहीं रहा है। स्थिति की भयावहता का अनुमान इस बात से लगाया जा सकता है कि इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने समाचार पत्रों में छप रही आत्महत्याओं की खबरों पर स्वत: संज्ञान लेते हुए केन्द्र व उ.प्र. सरकार से कैफियत तलब की है। ... Full story

2010 में भगवान बालाजी को 5 करोड़ का मुकुट भेंट करते जनार्दन रेड्डी (दाहिने)
 

निराले लोकतंत्र के खेल निराले हैं

कर्नाटक के माइन किंग यानी खान-माफिया और सरकार के मंत्री (या सच कहें तो सरकार के माई-बाप) जनार्दन रेड्डी ढ़ाई करोड़ रुपये की कीमत वाले सोने के भगवान की पूजा करते हैं और इतनी ही कीमत की सोने की कुर्सी पर बैठते भी हैं। सोने और चॉदी के बर्तनों में ही खाते भी हैं। यह उन्होंने वहॉ के लोकायुक्त को दिए अपने शपथ पत्र में घोषित किया है। अब यह उन्होंने उसमें साफ नहीं किया है कि वे खाते क्या हैं! चाल और चरित्र की बातें करने वाली एक नेत्री 40-50 हजार रुपये की साड़ी, और अब जैकेट भी, पहनने की शौकीन हैं तो देश में एक ताजा बनी मुख्यमंत्री भी ऐसी ही शानो-शौकत का रिकार्ड काफी पहले तोड़ते हुए 1997 में जेल यात्रा कर चुकी हैं। वे जब उस यात्रा पर जाने लगी थीं तो पता चला था कि उनकी जूतियॉ, चप्पलें, सैंडिलें और कपड़े-जेवर गिनने के लिए स्वयंसेवकों की आवश्यकता पड़ी थी। गरीबों की चिन्ता में दिन-रात घुलती रहने वाली एक और मुख्यमंत्री हैं जिनके सोफे, कुर्सियां और बाथरुम आदि के सामान मात्र कुछ अरब रुपयों में विदेशों से मॅगा लिए गये थे। ... Full story

पेट भरें या पर्यावरण बचाएं किसान?
 

पेट भरें या पर्यावरण बचाएं किसान?

भारतीय कृषि शोध संस्थान ने अपनी एक ताजा रपट में बताया है कि देश की कुल 14 करोड़ हैक्टेयर कृषि योग्य जमीन में से 12करोड़ हैक्टेयर की उत्पादकता काफी घट चुकी है और इसमें से भी 84लाख हैक्टेयर जमीन जलभराव और खारेपन की समस्या से ग्रस्त है। इस सरकारी शोध संस्थान ने अपनी 'विजन 2030' नामक रपट में इस तथ्य का खुलासा किया है। उधर संसद में बजट पेश होने से पूर्व पेश की गई एक रपट में केन्द्रीय कृषि मंत्री शरद पवार ने बताया था कि बीते दो दशक में देश की कुल कृषि योग्य जमीन में 28लाख हैक्टेयर की कमी विभिन्न कारणों से आई है। एक तरफ ताजा जनगणना से प्राप्त ऑंकड़े कि देश की कुल आबादी सवा अरब के करीब हो गई है और दूसरी तरफ कृषि योग्य जमीन और उसकी उत्पादन क्षमता में हो रही निरन्तर कमी,ये स्थितियॉ आने वाले दिनों में खाद्यान्न संकट का कारण बन सकती हैं। ... Full story

राजनीति का बेशर्म विदूषक
 

राजनीति का बेशर्म विदूषक

राजनीति! कितनी उबाऊ, नीरस, प्रपंची और आपराधिक रुप से तिलस्मी है, इसके बारे में अब किसी को बताना क्या, सभी जानते ही हैं। कभी-कभी मैं सोचता हूं कि अगर इसमें अमर सिंह जैसे लोग न होते तो यह जंगल कितना बियाबान होता? जेठ की तपती दुपहरिया में मीलों फैले निर्जन और वृक्षहीन रास्ते में, एक पथिक को जो राहत किसी पेड़ को देखकर होती है, भले ही वो पेड़ बबूल का क्यों न हो, वही नखलिस्तानी सुकून देश के मौजूदा राजनीतिक माहौल में अमर सिंह की बचकानी हरकतों से मिल रहा है। ... Full story

अन्ना के आगे बेबस हुए रामदेव
 

अन्ना के आगे बेबस हुए रामदेव

अचानक सूरदास याद आने लगे हैं! ऑंख के अन्धे एक संत ने ऑंख वालों के लिए कैसा बढ़िया-बढ़िया उपदेश दिया है -‘उधो! मन न भये दस-बीस।’ कुछ लोग निश्चित ही बहुत पछताते होंगें कि उनके 10-20 मन क्यों नहीं हुआ! एक इसकी वफादारी में लगाए रहते तो एक श्रद्धापूर्वक अगले की जड़ काटने में। एक इधर मामला सेट करता तो एक उधर भी लाइन फिट किए रहता। वैसे बहुत से लोग ऐसा कर भी लेते हैं, लेकिन बाबा रामदेव ऐसा नहीं कर पा रहे हैं। ... Full story

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Sunil Amar Sunil Amar लखनऊ में रहनेवाले सुनील अमर लगभग 20 साल तक कई पत्र-पत्रिकाओं में नौकरी करने के बाद पिछले कुछ वर्षों से स्वतंत्र पत्रकारिता और लेखन कर रहे हैं। कृषि, शिक्षा, ग्रामीण अर्थव्यवस्था तथा महिला सशक्तिकरण व राजनीतिक विश्लेषण जैसे विषयों से लगाव है। लोकमत, राष्ट्रीय सहारा, हरिभूमि, स्वतंत्र वार्ता, इकोनोमिक टाईम्स, ट्रिब्यून, जनमोर्चा जैसे कई अख़बारों व पत्रिकाओं तथा दो फीचर एजेंसियों के लिए नियमित लेख के साथ साथ विस्फोट पर भी लेखन। आकाशवाणी और दूरदर्शन पर भी वार्ताएं।

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