Usha Chandna
शादी नहीं साथी की तलाश
विवाह ऐसी सामाजिक व्यवस्था है जो एक स्त्री और पुरुष को साथ रहने का अवसर प्रदान करती है। लेकिन पिछले कुछ दशकों ...
आडवाणी की अगवानी, माफिया और मीडिया
लालकृष्ण आडवाणी की चेतना यात्रा जब गुजरात पहुंची थी उससे पूर्व 5 नवंबर की रात को दमन में अडवाणी जी की सभा ...
मोदी ने उपवास तोड़ दिया
नरेन्द्र मोदी ने अपना तीन दिवसीय उपवास तोड़ दिया. तीन दिन के अपवास के दौरान उन्होंने उपवास के सारे नियम और सिद्धांत भी तोड़ दिये जो उपवास को गरिमामय बनाते हैं. उपवास के दौरान वे जमीन पर बैठने की बजाय कुर्सी पर बैठे. सद्भावना के नाम पर मुसलमानों के साथ उनकी दुर्भावना प्रकट हो ही गई. मेजोरिटी और माइनोरिटी से ऊपर उठकर उन्होंने एक बार फिर छह करोड़ गुजरातियों का नारा दिया और गुजरातियों को देश का माइनारिटी साबित कर दिया. ... Full story
शुरू हुआ मोदी का उपवास महोत्सव
भारतीय जनता पार्टी के लौह पुरुष लालकृष्ण आडवाणी की "गरिमामय" उपस्थिति में शांति और सद्भावना के लिए गुजरात के मुख्यमंत्री नरेन्द्र मोदी ने गांधीवादी तरीके से सद्भावना मिशन की शुरूआत कर दी है. भारी तामझाम और चाक चौबंद सुरक्षा के बीच वे सुबह से उपवास की कुर्सी पर बैठ गये हैं. उपवास की कुर्सी पर बैठने से पहले नरेन्द्र मोदी ने राष्ट्र के नाम एक संदेश दिया है जो देश के कुछ बड़े अखबारों में पूरे पेज के विज्ञापन के रूप में छपा है. कोट पैण्ट में किसी विज्ञापन एजंसी द्वारा संवारी गई सज्जायुक्त फोटो के साथ मोदी ने अपने पत्र में लिखा है कि 2002 में गुजरात ने दंगों को झेला लेकिन जातिवाद और साम्प्रदायिकता से किसी का भला नहीं होता. ... Full story
फाइव स्टार उपवास बनाम सड़क का सत्याग्रह
गुजरात के मुख्यमंत्री नरेन्द्र मोदी के सद्भावना मिशन को चुनौती देने के लिए अब गुजरात कांग्रेस के चुनावी अध्यक्ष शंकरसिंह वाघेला और अर्जुनसिह मोढवडिया ने उपवास पर बैठने की घोषणा कर दी है. अब यह उपवास फाइव स्टार वर्सिस फुटपाथ होगा, क्योंकि जहां एक ओर मोदी 17 सितंबर से गुजरात खनिज विकास उद्योग भवन मैदान के समीप यूनिवर्सिटी के एयरकंडीशन हॉल में अपना फाइव स्टार उपवास रखेंगे वहीं दूसरी ओर शंकरसिंह वाघेला साबरमती आश्रम के फुटपाथ के सामने खुले मैदान में अपना तीन दिन का उपवास रखेंगे. ... Full story
मोदी का उपवास कांग्रेस ने कहा बकवास
2002 के दंगों की जांच में सुप्रीम कोर्ट से राहत मिलने के बाद पहली बार नरेन्द्र मोदी ने अपना मौन तोड़ा और ऐसा तोड़ा कि सीधी उपवास करने की घोषणा कर दी. नरेन्द्र मोदी द्वारा उपवास की यह घोषणा सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर खुशी मनाने के लिए तो बिल्कुल नहीं है. उपवास आनंद से नहीं बल्कि प्रायश्चित से जुड़ा हुआ कर्म होता है. तो क्या सुप्रीम कोर्ट द्वारा राहत मिलने के बाद नरेन्द्र मोदी सद्भावना मिशन के नाम पर जो उपवास करने जा रहे हैं वह उनका प्रायश्चित है? लेकिन कांग्रेस ने मोदी के उपवास को बकवास करार देकर खारिज कर दिया है. ... Full story
गुजरात में लोकायुक्त का राजनीतिक दांव
गुजरात में राज्यपाल की पहल पर लोकायुक्त की नियुक्ति आगामी चुनाव के मद्देनजर कांग्रेस की ओर से चला गया ऐसा राजनीतिक दांव है जिसका इस्तेमाल वह 2012 में होनेवाले चुनाव में करना चाहती है. 2012 में गुजरात में विधानसभा चुनाव होनेवाले हैं और इस बार कांग्रेस ने परंपरागत सांप्रदायिकता के मुद्दे को छोड़कर भ्रष्टाचार को मुद्दा बनाने का निश्चय किया है. राज्य में मुख्यमंत्री नरेन्द्र मोदी को घेरने के लिए करीब एक लाख करोड़ के घोटालों की लिस्ट तैयार की गई है और हो सकता है इसमें से चुनाव से पहले कुछ घोटालों की जांच लोकायुक्त शुरू कर दें. ... Full story
हरेन की हत्या पर संस्पेस बरकरार
गुजरात के भूतपूर्व गृहमंत्री हरेन पंड्या की निर्मम हत्या के मामले में दिवंगत हरेन पांड्या के मामले में भले ही हाईकोर्ट ने आरोपियों को बरी कर दिया हो लेकिन अभी भी संस्पेस बरकार है. हरेन पांड्या की विधवा जागृति बेन ने अडवानी और मोदी से मदद की गुहार लगाकर यह संस्पेंस और बढ़ा दिया है क्योंकि कुछ साल पहले तक यही जागृति बेन मोदी को हरेन की हत्या का दोषी करार दे रही थीं. ... Full story
गुजरात में लोकायुक्त पर आर-पार का संग्राम
एक ओर जहां अन्ना हजारे हर राज्य में लोकायुक्त बनाने के लिए अनशन पर बैठे हैं वहीं दूसरी ओर गुजरात की राज्यपाल कमला देवी ने अपने विशेषाधिकार का उपयोग कर उच्च-न्यायालय के भूतपूर्व जस्टिस आर.ए.मेहता को लोकायुक्त पद पर नियुक्त कर दिया है. हांलाकि राज्य की भाजपा सरकार ने इसे असंवैधानिक करार देते हुए अदालत का दरवाजा खटखटाया है। उच्च-न्यायालय ने इस मामले की सुनवाई 30 अगस्त रखी है. ... Full story
मोदी के गुजरात में सच बोलने की सजा
गांधी के गुजरात में तीन बंदर के अक्स के रुप में हमेशा यह संदेश उभरते रहें हैं कि ‘बुरा मत देखो”, ’बुरा मत सुनो’, ‘बुरा मत कहो’, लेकिन अब यह गांधी का गुजरात नहीं है, मोदी का गुजरात है इसीलिए अब इस गुजरात में ‘ना सच देखो’, ‘ना सुनो’, ‘ना कहो” होना चाहिए और अगर सच कहने की जुर्रत की तो नौकरी गंवानी पड़ सकती है फिर चाहे वह पुलिस महकमे का आला अधिकारी ही क्यों ना हो? राहुल शर्मा का मामला इसी सच्चाई को बयान करता है। ... Full story
