Dr. Ved Pratap Vaidik

प्रतिभा ताई का 'महान त्याग'

हमारे राजनीतिक नेताओं को अपनी निजी गरिमा की तो खास चिंता होती ही नहीं है, लेकिन अगर वे अपने पद की गरिमा ...

फिर गड़गड़ाई बोफोर्स

बोफोर्स की तोप 25 साल बाद एक बार फिर गड़गड़ाने लगी है। अब से 25 साल पहले चित्र सुब्रह्यमण्यम ने बोफोर्स की ...

जिन शरद यादव को कल अन्ना हजारे ने अपने मंच पर बैठाया था, बाद में उन्हीं की आलोचना बताता है कि टीम अन्ना अपरिपक्व और अराजक है
 

सौ मन की संसद और टके भर की टीम अन्ना

अन्ना हजारे की टीम से संसद का खफा होना बिल्कुल स्वाभाविक है। यह मामला अब सिर्फ काँग्रेस तक सीमित नहीं रह गया है। अन्ना टीम ने अपने बर्ताव से यह सिद्ध किया है कि वह अपने दुश्मन खड़े करने की कला में प्रवीण है। अब काँग्रेस ही नहीं, वे पार्टियाँ भी अन्ना-आंदोलन की विरोधी हो गई हैं, जो कल तक उसका समर्थन कर रही थी। सुषमा स्वराज जैसी उदार और गंभीर सांसद को संसद में खड़े होकर अन्ना-टीम के विरूद्ध बोलना पड़े, इससे ज्यादा दुखद बात क्या हो सकती है। शरद यादव जैसे जनवादी और जिम्मेदार राजनेता के भाषण को अपनी सभा में काट-पीटकर पर्दे पर दिखाना और उनकी सहानुभूति खो देना क्या किसी परिपक्व नेतृत्व का सबूत है? ... Full story

दौरा दस गुना ज्यादा पर किसलिए?
 

दौरा दस गुना ज्यादा पर किसलिए?

केंद्र सरकार के मंत्रियों ने इस साल कमाल कर दिया। उन्होंने देश और विदेश का चप्पा-चप्पा छान डाला। राष्ट्र-सेवा के लिए जितनी दौड़-धूप पिछले साल की, उससे दस गुणा ज्यादा इस साल की। जी हां, दस गुणा ज्यादा इसका पता हमें कैसे चला? इसका पता हमें जनता ने नहीं दिया, जिसकी सेवा में उन्होंने दिन-रात कर दिए। इसका पता हमें चला, ताजा बजट की चर्चा के दौरान। ... Full story

उत्तर प्रदेश के दस जवाब
 

उत्तर प्रदेश के दस जवाब

उत्तर प्रदेश के चुनाव परिणाम यह बताते हैं कि भारत की राजनीति में कुछ मौलिक परिवर्तनों का शुभारंभ हो रहा है। इन चुनाव-परिणामों से इतने संकेत उभर रहे हैं कि यहां उनका वर्णन सूत्र रूप में ही किया जा सकता है। उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के दस निष्कर्ष निकाले जा सकते हैं जो इस प्रकार हैं. ... Full story

इंगलिश मीडियम का अत्याचार
 

इंगलिश मीडियम का अत्याचार

खबर तो एक ही है लेकिन इसे कोई अच्छी भी कह सकता है और कोई बहुत बुरी भी! इस समय भारत में दो करोड़ बच्चे ऐसे हैं जो अंग्रेजी-माध्यम के स्कूलों में पढ़ रहे हैं। आठ साल पहले इनकी संख्या मुश्किल से 60-65 लाख थी। इस अंग्रेजी-प्रेम की व्याख्या आप कैसे करेंगे? ... Full story

हर तरफ चाहिए एक संजय तिवारी
 

हर तरफ चाहिए एक संजय तिवारी

मुंबई के कृपाशंकर की कहानी अकेली नहीं है। अभी उन्होंने मुंबई के कांग्रेस अध्यक्ष पद से इस्तीफा दिया है। वे कांग्रेस की प्रादेशिक सरकार में गृह मंत्री भी रहे हैं। इस बार उन्हें मुंबई के उच्च न्यायालय ने दबोच लिया है। न्यायालय ने मुंबई के पुलिस कमिश्नर को निर्देश दिया है कि कृपाशंकर, उनकी पत्नी, बेटे और बहू की अकूत संपत्तियों की विस्तृत जांच की जाए और पता लगाए जाए कि मूल रूप से आलू प्याज बेचने वाले इस कृपाशंकर के पास इतनी संपत्तियां कैसी इकट्ठी हो गई? अदालत ने यह कार्रवाई किसी संजय तिवारी की याचिका पर की है। ... Full story

सुप्रीम कोर्ट का विचित्र फैसला
 

सुप्रीम कोर्ट का विचित्र फैसला

रामलीला पर सर्वोच्च न्यायालय ने जो निर्णय दिया है, वह अपने आप में बड़ा विचित्र है। सबसे पहले तो सर्वोच्च न्यायालय की सराहना करनी होगी कि उसने आगे होकर इस रावणलीला को मुकदमे का विषय बनाया। लेकिन छ: माह तक खोदा पहाड़ और उसमें से निकाला क्या? निकाला यह है कि चार जून को बर्बरतापूर्ण कार्रवाई के लिए सिर्फ दिल्ली पुलिस जिम्मेदार है। क्या अदालत को यह पता नहीं कि दिल्ली पुलिस भारत के गृहमंत्रालय के अंर्तगत है? ... Full story

अंग्रेजी का हठ और कारपोरेट मठ
 

अंग्रेजी का हठ और कारपोरेट मठ

अपने देश में कारपोरेट घराने हिन्दी से उतना ही मतलब रखते हैं जितने से उनका मुनाफा बढ़ता हो अन्यथा उनके लिए भाषा तो केवल अंग्रेजी ही है। कारपोरेट घरानों की इस मठाधीशी को आज तक कोई चुनौती नहीं दे पाया है। यही कारण है कि अभी हाल में ही मध्य प्रदेश के दौरे पर आये कारपोरेट घरानों के प्रतिनिधियों ने मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को सलाह दे दिया कि वे अपने प्रदेश में अंग्रेजी को बढ़ावा दें। क्या कारपोरेट घराने मध्य प्रदेश को चीन समझ रहे हैं जो इस तरह की बेतुकी बातें कर रहे हैं? ... Full story

केरल के कामरेड ईसा
 

केरल के कामरेड ईसा

आजकल केरल में बड़ी मजेदार राजनीतिक बहस चल रही है। इस बहस में अभी तो सिर्फ स्थानीय कम्युनिस्ट नेता और पादरी लोग ही उलझे हैं, लेकिन यह बहस यदि थोड़ी लंबी जाए तो यह विश्व-स्तर की भी बन सकती है। केरल के कम्युनिस्टों ने ईसा मसीह को एक महान क्रांतिकारी बताकर ... Full story

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Dr. Ved Pratap Vaidik Dr. Ved Pratap Vaidik डॉ वेदप्रताप वैदिक भारतीय पत्रकारिता में जीवित किंवदन्ती बन गये हैं. अपना शोध प्रबंध उस वक्त हिन्दी में लिखा जब शोध का अर्थ ही अंग्रेजी होता था. 1971 में जेएनयू से अंतरराष्ट्रीय मामलों में पीएचडी हासिल करने के बाद पत्रकारिता में आये. नवभारत टाइम्स के संपादक (विचार) फिर समाचार एजंसी भाषा के संपादक रहे. वर्तमान में भारतीय भाषा सम्मेलन और भारतीय विदेशनीति परिषद के अध्यक्ष के रूप में कार्य और नियमित लेखन.

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