Virendra Jain

गुटबाजों के कारण गर्दिश में फंसे दल

कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी का यह बयान कि कांग्रेस पार्टी के नेता गुटबाजी से नाता तोड़कर पार्टी की मजबूती से नाता जोड़े, ...

वे भारतीय जो मूर्ख नहीं हैं काटजू साहब....

सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश के रूप में अपने फैसलों और प्रैस परिषद के अध्यक्ष के रूप में प्रैस, प्रैस मालिकों, और सरकारों ...

शिवराज सिंह की सरकार भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने में असफल रही है
 

सरकारी धन कुबेरों का प्रदेश

मध्य प्रदेश में शायद ही कोई सप्ताह ऐसा जाता हो जब किसी अफसर, इंस्पेक्टर, क्लर्क, चपरासी, ठेकेदार, व्यापारी, नेताओं के दलाल आदि के यहाँ आयकर या लोकायुक्त का छापा न पड़ता हो या और उस छापे में अकूत धन सम्पत्ति आदि न बरामद होती हो। बरामद की गयी ये अनुपातहीन सम्पत्ति रिश्वत, कमीशन, आदि के द्वारा अर्जित की जाती है जो या तो अदालत दर अदालत लम्बे चले मुकदमों के बाद वापिस उसी व्यक्ति के पास पहुँच जाती है, या मामूली जुर्माने आदि लगा कर मामले को रफा दफा कर दिया जाता है। ... Full story

अखिलेश यादव के शपथ ग्रहण के बाद मंच पर उपद्रव करते नौजवान इसी लम्पट राजनीति का उदाहरण है
 

लम्पट नौजवानों की राजनीति

पिछले दिनों हुए पाँच विधानसभा चुनावों में से उत्तर प्रदेश के चुनावों का अपना एक अलग महत्व है। यह महत्व केवल इसलिए ही नहीं है कि वह देश का सबसे बड़ा राज्य है, अपितु इसलिए भी है कि इसमें चुनाव परिणामों के प्रति जो भी कयास लगाये जा रहे थे, या प्रीपोल सर्वेक्षण थे जिसमें गठबन्धन को अवश्यम्भावी बताया जा रहा था, उन सब को झुठलाते हुए मतदाताओं ने एक पार्टी को स्पष्ट बहुमत दिया जिसका नेतृत्व एक युवा के हाथों में दिया गया है। उल्लेखनीय है कि इन चुनावों में दो करोड़ युवा मतदाता नये जुड़े थे और राज्य के चतुष्कोणीय चुनाव में पुराने मूल्यों में विश्वास रखने वाली भाजपा को छोड़ कर शेष तीन पार्टियों का नेतृत्व भी युवा नेताओं के पास था। यही कारण है कि मतदान में हुयी तीव्र बढोत्तरी के बाबजूद भाजपा के मतों में दो प्रतिशत की कमी आयी है और उसकी सीटें ग्यारह प्रतिशत घट गयी हैं। ... Full story

बैंडिट किंग पान सिंह तोमर
 

बैंडिट किंग पान सिंह तोमर

पान सिंह तोमर की कहानी देश के लिए मेडल जीतने वाले एक जाँबाज़ धावक के बागी हो जाने की वैसी ही सच्ची कहानी है जैसी कि फूलन देवी के जीवन के पूर्वार्ध की कहानी थी और जिस पर उसके जीवन काल में ही ‘बेंडिट क्वीन’ के नाम से एक सफल फिल्म बनी थी भले ही उसके बाद का जीवन भी घटनाओं से भरा रहा था और उसका अंत बहुत दुखद हुआ। उसके असली हत्यारे भी आज तक पकड़े नहीं जा सके। सांसद चुने जाने के कुछ वर्ष बाद उसको उसके बंगले के बाहर ही गोली मार दी गयी थी। फिल्म पर बेंडिट क्वीन का प्रभाव होना इसलिए स्वाभाविक है क्योंकि दोनों ही फिल्में सच्ची जीवन कथाओं पर आधारित हैं, जिनमें देश की पुलिस, प्रशासन और न्याय व्यवस्था पर विश्वास खो देने के बाद ही कथा नायक/नायिका ने बन्दूक उठा कर अपनी दम पर अपने लिए अपना न्याय स्वयं अर्जित करने की कोशिश की है। ... Full story

अति के आगे अंत
 

अति के आगे अंत

उत्तर प्रदेश में शर्मनाक अति हो चुकी है। वहाँ एनआरएचएम घोटालों से जुड़े नौ व्यक्तियों की सन्देहात्मक परिस्तिथियों में क्रमशः मृत्यु हो चुकी है और इन मौतों के हत्या होने में शायद ही किसी को सन्देह हो। इतना ही नहीं इन मौतों में से ज्यादातर को आत्महत्या बनाने की कोशिशें भी हुयी हैं। कुछ मौतें तो सरकारी कस्टडी में हुयी हैं। इससे पहले भ्रष्टाचार से जुड़े मामलों में शायद ही इतने ठंडे तरीके से किसी चर्चित मामले में क्रमशः हत्याओं का दुस्साहस पूर्ण कारनामा हुआ हो। ... Full story

नियंत्रित लोकतंत्र की अनियंत्रित वकालत
 

नियंत्रित लोकतंत्र की अनियंत्रित वकालत

केन्द्रीय मंत्री फारुख अब्दुल्ला का कहना है कि अब देश में नियंत्रित लोकतंत्र अपनाने का समय आ गया है। उनका कहना एक ओर तो समस्याओं की ओर उनकी चिंताओं को दर्शाता है किंतु दूसरी ओर ऐसा हल प्रस्तुत करता है जिसकी स्वीकार्यता बनाने के लिए एक तानाशाही शासन स्थापित करना होगा। स्मरणीय है कि लोकतंत्र का सुख भोग चुके समाज में अब यह सहज सम्भव नहीं है। श्रीमती इन्दिरागान्धी ने एमरजैंसी लगाने के बाद चुनाव हारा था और दुबारा चुन कर आने के बाद कहा था कि वे अब दुबारा कभी एमरजैंसी नहीं लगायेंगीं। ... Full story

ब्रांड बनने की बच्चन परंपरा
 

ब्रांड बनने की बच्चन परंपरा

पिछले दिनों फिल्मी अभिनेता अभिषेक- एश्वर्या दम्पत्ति के यहाँ एक पुत्री ने जन्म लिया है। यह परिवार चकाचौंध वाली फिल्मी दुनिया में हिन्दी भाषी क्षेत्र का सबसे बड़ा स्टार परिवार है, जिसकी लोकप्रियता का प्रारम्भ हिन्दी के सुपरिचित कवि डा. हरिवंश राय बच्चन से होता है। किसी समय इलाहाबाद न केवल संयुक्त प्रांत की राजधानी ही थी अपितु लम्बे समय तक वह हिन्दी साहित्य की राजधानी भी मानी जाती रही। वहाँ स्वतंत्रता संग्राम के सबसे लोकप्रिय नेताओं में से जवाहरलाल नेहरू और मोती लाल नेहरू ही नहीं रहे अपितु अन्य सैकड़ों लोकप्रिय राष्ट्रीय नेताओं का कार्यक्षेत्र भी इलाहाबाद रहा है। ... Full story

मीडिया का मार्कण्डेय पुराण
 

मीडिया का मार्कण्डेय पुराण

सर्वोच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति मार्कण्डेय काटजू के न्याय का तराजू इन दिनों मीडिया के कर्मों को तौल रहा है. जिस दिन से वे भारतीय प्रेस परिषद के अध्यक्ष बने हैं वे मीडिया (खासकर टेलीवीजन मीडिया) पर आक्रामक रुख अख्तियार किये हुए हैं. तने चेहने पर गुस्से में वे मीडिया को जिस तरह से मूर्खों की मंडली साबित करने में लगे हुए हैं उससे एक आशंका यह भी उभरती है कि आनेवाले दिनों में कहीं वे खुद भी मूर्ख न साबित हो जाएं. वे भूल रहे हैं कि अब वे न्यायमूर्ति नहीं हैं और अब उनके द्वारा बोले या लिखे गये शब्द निर्णायक नहीं माने जाएंगे. ऐसे में वीरेन्द्र जैन का मानना है कि मार्कण्डेय काटजू को मीडिया पुराण में प्रवेश करने से पहले कुछ सावधानियां बरतनी चाहिए ताकि गेहूं के साथ घुन भी न पीस दिया जाए. ... Full story

न्याय प्रणाली पर जिरह की जरूरत
 

न्याय प्रणाली पर जिरह की जरूरत

अभी सरकारी अधिकारियों, चुनाव लड़ने वालों, मंत्रियों, सांसदों विधायकों आदि जन प्रतिनिधियों के साथ न्यायधीशों की सम्पत्ति की घोषणा से सम्बन्धित बहस शांत ही नहीं हुयी थी कि न्यायिक सुधारों से सम्बन्धित नये विधेयक की सुगबुगाहट सुनाई देने लगी है। इस सम्भावित विधेयक के अनुसार न केवल न्यायधीशों के आचरणों को ही नियंत्रित करने का ही प्रयास होगा अपितु किसी प्रकरण में फैसला भी अनावश्यक समय के लिये टाला नहीं जा सकेगा। इतना ही नहीं उक्त निर्देशों का पालन सुनिश्चित करने के लिये जाँच समिति और निगरानी समिति भी स्थापित किये जाने की व्यवस्था की गई है। ... Full story

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Virendra Jain Virendra Jain सन 1969 से देश की विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हो रहे वीरेन्द्र जैन जनवादी लेखक संघ के भोपाल ईकाई के अध्यक्ष रहे हैं. व्यंग पर चार पुस्तकें प्रकाशित. संप्रति भोपाल में निवास और स्वतंत्र लेखन.

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