Vishnu Gupt
मुकेश अंबानी के ताल पर मीडिया का नंगा नाच
हमारे अखबार और टीवी चैनल अपने ईमान की लंगोटी कमर में कम बांधते हैं हाथ में ज्यादा लहराते हैं. बस, कोई ऐसा ...
कद से बड़े पद की चाह
अपने व्यापारिक स्वार्थ के लिए राष्ट्रगान से घृणा करने वाले नारायण मूर्ति राष्ट्रपति बनना चाहते हैं। इस प्रसंग को किस रूप में ...
मोदी विरोध की कांग्रेसी कठपुतलियां
कठपुतलियां खुद नहीं नाचती हैं। वह तो नचाने वाली उगंलियों की गुलाम होती है। पर्दे के पीछे खड़े व्यक्ति के हाथों के उंगलियों के विसात पर कठपुतलियों अपनी करतब दिखाती हैं। नरेन्द्र मोदी के विरोध में कांग्रेस और तथाकथित धर्मनिरपेक्ष जमात जो आईएसआई व अन्य राष्टविरोधी पैसों पर पलती हैं और अपना करतब दिखाती हैं ने एक पर एक ऐसी कठपुतलियां खड़ी की जिसकी पोल समय-समय पर खुलती रही हैं। पहले अरूंधती राय की गुजरात दंगों पर अतिरंजित व प्रत्यारोपित कहानियों की पोल खुली और उसके बाद तिस्ता सीतलवाड़ का फर्जीवाड़ा कर न्यायिक प्रक्रिया को धोखे में रखने की भी पोल खुल गयी। अब पुलिस अधिकारी संजीव भट्ट की मोदी विरोधी की असली कारस्तानी की पोल खुली है। ... Full story
नरभक्षी के वेश में आतंकवादियों का देश
सच यह है कि पाकिस्तान एक आतंकवादी देश है। सच यह भी है कि पाकिस्तान की प्रमुख आय का स्रोत आतंकवाद की खेती और आउटसोर्सिंग है। सच यह भी है कि आतंकवाद को पहले संरक्षित कर और बाद में उसके प्रबंधन के लिए डॉलर वसूलना उसकी कूटनीति है। वह जानता है कि अगर आतंकवाद समाप्त हो गया तो फिर उसे डॉलर कौन देगा? किसके पैसे पर पाकिस्तान की सेना और राजनीतिक नेतृत्व अपनी जेंबे गर्म करेंगे? बाघ के मुंह में जब मनुष्य का खून लग जाता है तब वह नरभक्षी हो जाता है। पाकिस्तान के आतंकवादी मुंह में डॉलर का खून लग गया है। डॉलर वसूलना उसकी नीति और मानसिकता रही है। डॉलर वसूलने की नीति के तहत ही उसने अलकायदा के सरगना ओसामा बिन लादेन को अपनी सैनिक छावनी की गोद में छिपा रखा था। लेकिन अमेरिका ने ओसामा बिन लादेन को मार कर पाकिस्तान के डॉलर वसूलने के उसके जन्मसिद्ध अधिकार पर सेंसर लगा दिया। ... Full story
मोदी विरोध की दुकानदारी
दोहरे चरित्र रखने वाले व अति हिन्दू विरोध से लथपथ देश के बुद्धीजीवियों व गैर तथाकथित धर्मनिरपेक्ष राजनीतिक संवर्ग निश्चित तौर पर मुस्लिम आबादी के शुभचिंतक नहीं, उनके वोट बैंक पर कुदृष्टि डाले गिद्ध है और गुजरात के मुख्यमंत्री नरेन्द्र मोदी की असली शक्ति हैं। नरेन्द्र मोदी का जितना अधिक विरोध और उनके खिलाफ राजनीतिक/न्यायिक प्रक्रियाएं चलती हैं उतना ही गुजरात का जनमानस नरेन्द्र मोदी के साथ निकट चला आता है। ... Full story
इस्लामिक आतंकवाद का खूनी नजरिया
इस्लामिक आतंकवाद पर नया नजरिया देखिए। यह नया नजरिया देश की कांग्रेसी सरकार कदापि नहीं देख सकती है। अगर कांग्रेस सरकार नयी दृष्टि देखेगी तो उसका तुष्टिकरण का खेल व वोटों की राजनीति का फिर होगा क्या? क्या वह अपने वोट बैंक को विदकने देगी? आतंकवाद पर नयी दृष्टि है क्या? नयी दृष्टि भारत की आबादी की विभिन्नता है और 22 करोड़ की विशेष वोट शक्ति है। इस दृष्टि के लिए आपको तुष्टिकरण/कथित उदारता/कथित पंतनिरपेक्षता और कथित धर्मनिरपेक्षता के दुराग्रह से मुक्त होना होगा और इस्लामिक आतंकवाद की समस्या व उसके जड़ के असली पोषक तत्वों पर कठोर रूख व व्यवहार स्थापित करना होगा। ... Full story
बिना मांगे अन्ना हजारे को मेरी एक सलाह
महात्मा गांधी, राम मनोहर लोहिया, जय प्रकाश नारायण और वीपी सिंह से अन्ना को बड़ा मानना भूल होगी। अन्ना को जयप्रकाश नारायण कहने वाली शक्तियां थोड़ी जल्दीबाजी में हैं और रातों-रात ही नहीं बल्कि मिनटों में वह व्यवस्था परिवर्तन का स्वपन देख रही हैं। ऐसी बातें, ऐसे स्वप्न की बुनियाद निराशा व हताशा ही होती हैं। भ्रष्टाचार, कदाचार, भाई-भतीजावाद और लोकतंत्र में आम आदमी की तंग होती पहुंच से भारतीय आम आबादी हताशा, निराशा में ही नहीं हैं, अपितु उनके अंदर में धधकता/उमड़ता आक्रोश की अग्नि भी है। यह क्रोध की अग्नि केवल दिल्ली की सड़कों पर दिख रही है,ऐसी बात भी नहीं है। क्रोध की अग्नि का आकार देशव्यापी है। फिर भी हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि अन्ना को परिवर्तन का प्रतीक बनने के लिए या जयप्रकाश नारायण बनने के लिए रास्ते लम्बे हैं, जटिल हैं, अवरोधों से भरे हुए है। ... Full story
पत्रकारिता के माथे का कलंक
आईबीएन समूह के सर्वेसर्वा राजदीप सरदेसाई अगर ब्रिटेन या अन्य यूरोपीय देशों में होते तो निश्चित मानिए कि उनकी जगह जेल होती और उनके न्यूज चैनल आईबीएन पर ताला जड़ गया होता। सामाजिक जलालत अलग से झेंलनी पड़ती। कानूनों की घेरेबंदी में इनकी ईमानदारी के पचखडे उड़ गये होते। इनकी पेज थ्री संस्कृति जमींदोज हो जाती। सड़कों पर चलने के दौरान इनके उपर अंडे-टमाटरों की बरसात होती। इनकी ज्ञात और अज्ञात संपति भी अपराध की श्रेणी में खड़ी होती। लेकिन ऐसा अभी तक नहीं हुआ है जिसका मतलब है कि अनैतिक, पतनशील और भ्रष्ट सत्ता वाली व्यवस्था के अंतर्गत ही राजदीप सरदेसाई जैसी संस्कृति जन्म ले सकती है और फल-फूल सकती है। ... Full story
मौत की पटरी पर दौड़ती रेल
कालका एक्सप्रेस की घटना पर रेल मंत्रालय की गर्जना सुनने में काफी अच्छी लगती है। रेल मंत्रालय के एक कनिष्ठ मंत्री का कहना है कि कालका दुर्घटना के दोषियों को बख्सा नहीं जायेगा और उन पर लापरवाही के कानून का सौटा चलेगा। यह गर्जना सिर्फ और सिर्फ दिखावे के लिए है। दुर्घटना में हताहत परिवारों और अन्य जनाक्रोशों पर पानी डालने के लिए है। अगर ऐसा नहीं है तो फिर रेल मंत्रालय को कई सवालों का जवाब भी देना होगा। ... Full story
आग का गोला बना तेलगांना
भारतीय लोकतांत्रिक सत्ता राजनीति पहले गढ्ढे खोदती है और फिर उस गढ्ढे में खुद गिरकर संकटग्रस्त होती है, इसके बाद गढ्ढे से निकलने और गढ्ढे को भरने के लिए शंतरंज की तरह चालें चलती हैं। कई ऐसे खतरनाक समस्याएं देश के अंदर में हैं जो राष्ट-राज्य के संबधों को ही नहीं प्रभावित कर रहे है बल्कि देश की एकता और अंखडता पर भी कील ठोक रहीं हैं। फिर भी उन खतरनाक समस्याओं का जनाकाक्षा की कसौटी पर हल ढूंढने या प्रबंधन करने की राजनीतिक दशा-दिशा भटकती रहती है। उदाहरण के लिए हम तेलंगाना अलग राज्य के प्रश्न को ही गंभीरता से देख लें। आज तेलंगाना का प्रश्न खतरनाक स्थिति धारण कर लिया है। तेलंगाना क्षेत्र के सभी कांग्रेसी विधायक और सांसद विधान सभा और लोकसभा की सदस्यता से इस्तीफा दे चुके हैं। ... Full story
