Zafar Naqvi

मोहन भागवत का झूठ पुराण

अगर कोई अतिवादी और कटट्रपंथी संगठन यह घोषणा करे कि उसके यहां कोई कटट्रपंथी नहीं है और न ही उसके लिए कोई ...

भारत-अमेरिका दोस्ती व मुस्लिम राष्ट्र

कोई कुछ भी कहे, विकीलीक्स ने अमेरिका की कलई खोल कर रख दी है, इसके साथ ही उन देशों का भी छुपा ...

कुछ तो समझे ख़ुदा करे कोई
 

कुछ तो समझे ख़ुदा करे कोई

जैसे-जैसे दिन गुज़रते जा रहे हैं वैसे-वैसे अयोध्या विवाद पर इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ बैंच का फैसला भी प्रभावहीन होता जा रहा है। सुलह और समझदारी की बातें अब सौदेबाजी, अप्रत्यक्ष धमकियों व चेतावनी के रूप में सामने आ रही हैं। यही वजह है कि सभी पक्ष न्याय की अंतिम सीढ़ी सुप्रीम कोर्ट की ओर देख रहे हैं, वो भी जो फैसला आने पर दिखावटी रूप से खुश हुए और वो भी जो वास्तविक रूप में निराश हुए। देर सवेर फैसले को अपनी जीत बताने वालों के कंठ में दबे हुए विचार बाहर आने लगे हैं कि हाई कोर्ट ने विवादित भूमि का जो हिस्सा बंटवारा किया, वो अनुचित और अमान्य है अर्थात फैसला आने के बाद उदारता, सहिष्णुता के साथ शांति का प्रवर्तक बनने और दिखाने की जो तात्कालिक होड़ शुरू हुई थी, उसकी हवा निकल चुकी है। ... Full story

सेकुलरिज़्म ऐसा है तो फिर हिन्दू राष्ट्र में बुराई क्या?
 

सेकुलरिज़्म ऐसा है तो फिर हिन्दू राष्ट्र में बुराई क्या?

हमारे संचार माध्यमों में प्रतिदिन सर्वाधिक सुर्खियों में रहने वाला शब्द 'धर्म निरपेक्षता’ ही है। बाबरी मस्जिद विवाद पर अदालत का फैसला आने के बाद अब ये हर एक की जुबान पर है। राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के मुखपत्र 'पांचजन्य’ के सम्पादक तरुण विजय का एक लेख नज़र से गुजरा। जिस में उन्होंने लिखा है कि ''अयोध्या पर फैसला आने के बाद 'सेकुलर’ समझ नहीं पा रहे हैं कि कुछ तनाव, झगड़ा और मारकाट तो हुई नहीं इसलिये अब कैसे अपने झंडे उठाए और अमन की मोमबत्तियां जला कर रखें। ... Full story

Author info

Zafar Naqvi Zafar Naqvi पिछले 34 साल से पत्रकारिता के मिशन में जुड़े हुए हैं. हिन्दी और उर्दू दोनों भाषाओं में लिखते हैं. साथ ही एक हिन्दी और उर्दू साप्ताहिक का प्रकाशन भी करते हैं. एम ए इकोनामिक्स पढ़ाई करनेवाले जफर नकवी की समकालीन राजनीतिक सामाजिक समझ बहुत अच्छी मानी जाती है. दिल्ली से प्रकाशित अवामे हिन्द के संयुक्त संपादक और विस्फोट.कॉम के स्तंभलेखक हैं.

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