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COMMENTARY

May

16

2012

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रेखा की रासलीला पर जया का जलजला

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रेखा की रासलीला पर जया का जलजला

जया की शिकायत जायज है. पहली बात तो यह है कि आखिर सरकार ने क्या सोचकर रेखा गणेशन को राज्यसभा की सीट दिया. रेखा मशहूर अदाकारा रही हैं लेकिन कांग्रेस के राज में सिर्फ अदाकारा, गुलकारा होने से राज्यसभा की पात्रता नहीं बनती है. इसके लिए राजनीतिक उद्येश्य होना जरूरी होता है. फिर चाहे सचिन तेन्दुलकर हों कि रेखा गणेशन. राज्यसभा की हर मनोनीत सीट का अपना संदेश होता है. इसलिए नेपथ्य में जा चुकी अभिनेत्री रेखा को दी गई यह सीट पूरी तरह से राजनीतिक गुणा गणित लगती है. तो क्या कांग्रेस के रणनीतिकारों ने रेखा को यह सीट इसलिए दी क्योंकि समाजवादी पार्टी ने जया बच्चन को राज्यसभा भेज दिया था. अमिताभ बच्चन परिवार से घांदी परिवार की पुरानी दुश्मनी देखते हुए तो यही शक बनता है.

अब राज्यसभा भेज भी दिया तो सीट अगल बगल करने का क्या तुक था? जया बच्चन अर्थात पुराने जमाने की जया भादुड़ी अब अमिताभ बच्चन की बुजुर्ग जीवन संगिनी हैं और नाती पोतों से भरा पुरा उनका परिवार है. अब क्या यह याद दिलाया जाना जरूरी है कि किसी जमाने में रेखा अमिताभ बच्चन की प्रेमिका हुआ करती थीं? कुछ लोग तो यह भी कहते हैं कि यह प्रेम कभी पुराना

May

16

2012

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अपना डीएनए उनको दे दो तिवारी

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अपना डीएनए उनको दे दो तिवारी

इस विषय में सह-रजिस्ट्रार को पूरा अधिकार दे दिया है कि वह तिवारी  के रक्त का नमूना जबरन प्राप्त  कर  सकता  है . दो दिनों पूर्व के आदेशों के अनुसार तिवारी को आज शाम तक दिल्ली हाईकोर्ट में अपना जवाब दाखिल करना था कि वह रोहित शेखर की याचिका पर कोर्ट के आदेशनुसार डीएनए परिक्षण के लिए स्वयं अपने रक्त का नमूना देंगे या पुलिस की सहायता से कोर्ट को अपने आदेशों की पालना सुनिश्चित करनी पड़ेगी. बताते चलें कि इससे पूर्व भी दिल्ली उच्च न्यायालय परिक्षण के आदेश दे चुका है जिस पर रोक लगाने के लिए तिवारी ने सर्वोच्च न्यायालय में अपील की थी परन्तु सर्वोच्च न्यायालय ने रोक लगाने से इंकार करते हुए याचिका ख़ारिज कर दी थी. आज के आदेशनुसार अब २१ मई तक यदि तिवारी अपने रक्त का नमूना नहीं देंगे तो कोर्ट के रजिस्ट्रार पुलिस की सहायता से जबरन उनके रक्त का नमूना लिया जायेगा. राजनेताओं के रंगीन मिजाजी से जुडा यह बहुत ही दिलचस्प मामला है. रोहित शेखर नाम के एक युवक जिसने बहुत ही हिम्मत रख अदालत से गुहार लगाईं है कि एनडी तिवारी के उसकी मां मां उज्ज्वला शर्मा के साथ गहरे ताल्लुकात थे और उन्होंने उनकी मां से शादी करने

May

13

2012

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अंबेडकर के कार्टून पर नासमझी भरा विवाद

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अंबेडकर के कार्टून पर नासमझी भरा विवाद

यह मानने का कोई कारण नहीं है कि इस देश में डॉ अंबेडकर की राजनीति को समझने वालों की कमी है. हालांकि मैं यह भी अब मुकम्मल तौर पर मानने लगा हूँ कि डॉ अंबेडकर के नाम पर वोट की भीख माँगने वालों को उनके राजनीतिक दर्शन के बारे में बिलकुल सही जानकारी नहीं है. जिस कार्टून के हवाले से संसद में हंगामा हुआ वह हमारे नेताओं की बौद्धिक क्षमता का एक अहम नमूना है.

सबको मालूम है कि संसद में हमेशा ऐसे लोगों का बहुमत होता है जो इस देश के इतिहास और राजनीति को अच्छी तरह से समझते हैं. हाँ इस बात से भी इनकार नहीं किया जा सकता कि संसद में कुछ ऐसे लोग भी पंहुच गए हैं जिनको भारत के समकालीन इतिहास की कोई जानकारी नहीं है. यहाँ यह जान लेना बहुत ज़रूरी है कि डॉ अंबेडकर उदारवादी राजनीतिक दार्शनिक थे. अपनी आलोचना करने वालों को हमेशा ही अपने  मिशन को पूरा करने वालों में शामिल मानते थे. अपने विरोधियों के प्रति कभी भी हिंसा का समर्थन नहीं किया. 

जिन लोगों ने संविधान सभा की बहस के दौरान हुए भा

को पढ़ा है उन्हें मालूम है कि उसी सभा में मौजूद तरह तरह की मान्यता वाले

May

12

2012

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क्या आमिर के कहने से भ्रूण हत्याएं रुक जाएंगी?

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क्या आमिर के कहने से भ्रूण हत्याएं रुक जाएंगी?

हालात तो ये हैं कि जब मैंने ये सवाल सोशल मीडिया पर उठाए तो कहा गया कि मैं नेगेटिव सोच वाला पत्रकार हूं. मेरी समस्या न तो आमिर खान से है और न ही उनके कार्यक्रम सत्यमेव जयते से जिसमें कन्या भ्रूण हत्या को एक मुद्दा बनाया गया है.

समस्या इस बात से है कि क्या हमारा समाज इस हालत में पहुंच गया है कि किसी स्टार को बताना पड़ेगा कि कोई मुद्दा कितना गंभीर है या किस मुद्दे पर हमें सोचना चाहिए.

स्वदेश सिंह ने हवाला दिया अनपढ़ जनता का जिसे जागरुक किए जाने की ज़रुरत है लेकिन ये देखना भी ज़रुरी है कि भ्रूण हत्याओं का गढ़ हमारे गांव नहीं बल्कि शहर हैं जहां भ्रूणों की
होती है.


ीडिया पर भ्रूण हत्या का विरोध करने वाले और टीवी पर कार्यक्रम देखकर आंसू बहाने वालों में कई वो लोग भी शामिल हैं जो लड़कियों को बोझ के तौर पर देखते होंगे.

क्या आपको लगता है कि वो टीवी पर शो देखकर लड़कियों के प्रति अपना दुराग्रह बदल लेंगे. अगर हमारी मानसिकता यही रह गई है कि जो स्टार बोलेगा उसे ही मानेंगे तो फिर ऐसे समाज के बारे में कुछ कहने की ज़रुरत नहीं.

May

10

2012

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हज और मजहब का हक

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हज और मजहब का हक

600 करोड़ की यह सब्सिडी हज यात्रियों को नहीं बल्कि एयरइंडिया को मदद के तौर पर दी जाती है। एआईएम के प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी द्वारा कही गई उक्त बात कहीं न कहीं इस बात की ओर इशारा करता है की किस तरह काँग्रेसी सरकार मुस्लमानों को वोट बैंक के कुचक्र में फंसा कर अपने फायदे के लिए हज सब्सिडी के नाम पर अपना हित साधती रही ।

पहले हज यात्रा पानी के जहाज़ से की जाती थी। लेकिन पानी के जहाज़ से की जाने वाली हज यात्रा में लगने वाली लागत लगातार महंगी हो रही थी  तब  सरकार ने इसका किराया बढ़ाने का प्रस्ताव रखा तो मुस्लिम समाज ने इसका जमकर इस आधार पर विरोध किया कि ऐसा करने से उनका एक धार्मिक कर्तव्य पूरा होना कठिन होता जायेगा। हवाई यात्रा उपलब्ध होने के बाद हज यात्रियों के अलावा बाकी लोग हवाई यात्रा से यात्रा करना ज्यादा पसंद करने लगे बजाय जल यात्रा के क्योंकि जलयात्रा बेहद थकाऊ होता था और समय भी ज्य

लगता था। 

सन 195ं सरकार ने मुस्लिम समाज के सामने यह विकल्प रखा कि वह अगर जलयात्रा की जगह हवाई यात्रा करने को राज़ी हो जाये तो ऐसा करने से दोनों के यात्रा व्यय में

May

07

2012

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हिलेरिया की सवारी में कोलकाता की खामोश भागीदारी

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हिलेरिया की सवारी में कोलकाता की खामोश भागीदारी

अमरीकी विदेश मंत्री हिलेरी क्लिंटन ने कहा है कि पूर्वी भारत में व्यवसाय की अपार संभावनाएं हैं! हिलेरी भारत दौरे पर कोलकाता आई है जहां उन्होंने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से मुलाकात की है। क्लिंटन सुबह करीब 11:10 बजे राइटर्स बिल्डिंग पहुंचीं, जहां ममता ने दोनों हाथ जोड़कर 'नमस्ते' कहकर उनका अभिवादन किया। दोनों नेताओं ने सचिवालय के प्रथम तल के कॉरिडोर में चेहरे पर खिली मुस्कान के साथ तस्वीरें खिंचवाईं. ममता ने क्लिंटन को उनके स्वागत के लिए सुसज्जित राइटर्स बिल्डिंग के इतिहास से अवगत कराया। क्लिंटन कुछ पलों के लिए नोबेल पुरस्कार विजेता राष्ट्र कवि रवींद्रनाथ टेगौर की तस्वीर के सामने भी खड़ी हुईं। टेगौर की पुरानी तस्वीर हटाकर यहां नई तस्वीर लगाई गई है।इससे पहले सुबह क्लिंटन ने ला मार्टिनियर स्कूल में कहा था कि जब वह कॉलेज में थीं, तब उन्होंने टेगौर के सम्बंध में जाना था और तब से वह उनकी प्रशंसक हैं।। उल्लेखनीय है कि दोनों ही नेताओं को प्रसिद्ध टाइम पत्रिका ने दुनिया के सबसे प्रभावशाली लोगों की सूची में शामिल किया है।

इस महत्वपूर्ण मुलाकात के लिए होटल ताज बंगाल, जहां हिलेरी ठहरी हैं, से राइटर्स जाने वाले सभी रास्तों को एफबीआई की टीम के साथ कोलकाता पुलिस के एसटीएफ

May

06

2012

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एनसीटीसी पर चित्त हो गये चिदम्बरम

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एनसीटीसी पर चित्त हो गये चिदम्बरम

एनसीटीसी बैठक के बाद पत्रकारों को गृह मंत्री पी चिदंबरम ने जानकारी दी. उन्होंने कहा कि बैठक में हुई चर्चा के बाद सरकार विचार करेगी और फैसला लेगी. उन्होंने कहा कि एनसीटीसी के गठन के लिए उन्हें संसद की मंजूरी मिली हुई है. एनसीटीसी के बारे में हुए मुख्यमंत्रियों एक सम्मलेन के बाद यह तय माना जा रहा है कि ३ फरवरी को जिस तरह का नोटिफिकेशन गृह मंत्रलय ने एनसीटीसी की स्थापना के लिए जारी किया था उसमें बड़े पैमाने पर परिवर्तन होगा. हालांकि यह भी सच है कि केंद्र सरकार एनसीटीसी के अपने एजेंडे को आगे बढाने में सफल हो जायेगी क्योंकि प्रधानमंत्री ने अपने भाषण में साफ़ कहा कि यह बैठक एनसीटीसी को आपरेशनलाइज़ करने के लिए ही बुलाई गयी है.

जानकार बताते है कि शनिवार की बैठक में जो बात सबसे ज्यादा बार चर्चा में आई वह एनसीटीसी को इंटेलिजेंस ब्यूरो के अधीन रखने को लेकर थी. लगता है कि एनसीटीसी को केंद्र सरकार को इंटेलिजेंस ब्यूरो से अलग करना ही पडेगा. एकाध को छोड़कर सभी मुख्यमंत्रियों ने इस बात पर सहमति जताई कि आतंकवाद से लड़ना बहुत ज़रूरी है और मौजूदा तैयारी के आगे जाकर उस के बारे में कुछ किया जाना चाहिए. पश्चिम बंगाल

May

04

2012

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कलेक्टर की रिहाई और सोनी सोढ़ी का सवाल

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कलेक्टर की रिहाई और सोनी सोढ़ी का सवाल

सोनी सोढ़ी को कौन नहीं जानता होगा। पुलिस ने सोनी को नक्सली होने के आरोप में गिरफ्तार किया। मीडिया के एक वर्ग ने सोनी के पक्ष में एक विशेष अभियान चलाया। इस घटनाक्रम में उन मीडिया संस्थान और कर्मियों का कर्कश कांव-कांव नहीं सुनाई दिया, जो सोनी सोढ़ी को महज एक निर्दोश शिक्षक होने के पक्ष में अभियान चलाकर कर उसकी रिहाई के लिए सरकार की नैतिकता को कमजोर कर रहे थे। कई अखबारों में सोनी सोढ़ी के पक्ष में विशेष आलेख आए, पत्रिकाओं में कवर स्टोरी प्रकाशित हुई। सोनी सोढ़ी पर अत्याचार की मार्मिक रिपोर्टों ने दिल को झकझोर दिया। सोनी के हमदर्द बढ़ गए। सोनी जेल से भी मार्मिक पत्र लिख कर अपने समर्थकों का अपने पक्ष में हौसला मजबूत करती रही। अपने ऊपर अत्याचार की कहानी दुनिया को बताया। कहा कि वह नक्सली नहीं है। कोर्ट के सामने सरकार को हल्की-फुल्की शिकस्त मिली। फिलहाल सुप्रीम कोर्ट ने सोनी की मेडिकल जांच एम्स में कराने की अनुमति दे दी है।

मीडिया की पूरी रिपोर्ट कलेक्टर की रिहाई को लेकर सरकार की पहल और वार्ताकारों की गतिविधियां व उनकी बातचीत पर केंद्रीत रही। लेकिन इसमें एक महत्वपूर्ण बात गौण हो गई। कलेक्टर की रिहाई के बदले नक्सलियों ने जिन

Apr

30

2012

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प्रतिभा ताई का 'महान त्याग'

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प्रतिभा ताई का 'महान त्याग'

सेवा-निवृत्त होने के बाद उन्हें 5 हजार वर्गफुट का प्लाट मिल सकता था लेकिन उन्होंने 2 लाख वर्ग फुट जमीन हथिया ली। यह जमीन रक्षा मंत्रलय की थी और वे हमारे देश की सर्वोच्च सेनापति हैं। इस दो लाख 20 हजार 8 सौ उनपचास वर्गफुट के प्लाट पर उनके लिए आलीशान बंगला बनना था, जिसमें वे अपना शेष जीवन बिता सकें। इसका खर्च भी सरकार को ही उठाना था। मालिक का मालिक कौन? राष्ट्रपति को कौन बरज सकता था? वे चाहतीं तो लूट के इस माल पर बेखटके मजे कर सकती थीं। इसलिए मैंने उनकी घोषणा को ‘महान त्याग’ कहा है।

यह महान त्याग उन्होंने न तो सरकार की वजह से किया है, न संसद की वजह से और न ही अदालत की वजह से! इसकी वजह है, खबरपालिका! जिन संस्थाओं को इस तरह की लूटपाट पर कड़ी नजर रखनी चाहिए, वे या तो लापरवाही या लिहाजदारी की शिकार हो जाती हैं। ऐसे में अखबारों और टीवी चैनल के उन बहादुर पत्रकारों को हमें प्रणाम करना चाहिए जो इस तरह की खबरों को दबने नहीं देते। यह खबर निकली है, सूचना के अधिकार से। फौज के दो सेवा-निवृत्त अफसरों और उनके एक मित्र ने इस लूट का भांडाफोड़ किया था।

Apr

28

2012

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राजनीति की रामरेखा

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राजनीति की रामरेखा

सीबीआई की विशेष अदालत ने जैसे ही बंगारू लक्ष्मण को चार साल की सजा और एक लाख के जुर्माने की सजा सुनाई बंगारू के वकील की प्रतिक्रिया बाद में सुनाई पड़ी, पहले वे बोल पड़े जो राजनीति के रामपद पर आसीन हैं. संसद और संसद के बाहर तू तू मै मै का ऐसा सिलसिला चल पड़ा कि यह सोचने की फुर्सत भी नहीं रही कि नेता नेता आखिरकार मौसेरे भाई होते हैं. यह संदेश कोई और नहीं बल्कि वही अदालत दे रही है जिसने बंगारू को सजा सुनाई है. बंगारू को सजा सुनाने से पहले अदालत ने जो आदेश तैयार किया है उसमें एक दिलचस्प दलील दी है.

न्याय देवी के आंख की पट्टी उतारते हुए माननीय न्यायाधीश ने मानों उनसे कहा कि आप किताबों को का मनन करते करते थक गई हैं इसलिए आप समाज की ओर देखिए. समाज के ये मौसेरे भाई कैसी गंदगी फैला रहे हैं उसका अनुभव करिए तब बताइये कि बंगारू के बारे में क्या फैसला लिखें? मानों न्याय देवी ने अपने नयनों उघाड़ते हुए सबकुछ देखा और जज महोदय को संदेश दिया कि समाज में ऐसी धारणा बनती जा रही है कि ऊंचे लोग कोई भी अपराध करें उनका कुछ नहीं बिगड़ता. इसलिए कुछ

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मदन तिवारी

मदन तिवारी

मदन तिवारी पेशे से वकील हैं. गया में रहकर वकालत करते हैं. लेकिन वकालत के पेशे में पत्रकारिता कब घुस गई पता ही नहीं चला. मदन तिवारी कहते हैं कि भ्रष्टाचार के खिलाफ जब कलम ने अपनी लड़ाई बंद कर दी तो उन्होंने कलम उठा ली. इसलिए अब मीडिया के अलावा अर्थ और विदेश मामलों पर भी जमकर लिखते हैं.
Seetaram Yechuri

Seetaram Yechuri

हैदराबाद के ब्राह्मण कुल में पैदा हुए सीताराम येचुरी भारत में कम्युनिस्ट आंदोलन के कुछ चेहरों में एक बन गये हैं. सेंट स्टीफेन और जेएनयू से शिक्षा. 1974 में एसएफआई में सक्रिय और बाद में सीपीआईएम से जुड़े. 1984 में सीपीआई सेन्ट्रल कमेटी में शामिल हुए. वर्तमान में सीपीआई (एम) पोलित ब्यूरो के मेम्बर और ऐसे सक्रिय राजनीतिज्ञ जिनसे मिलने की तमन्ना बराक ओबामा भी रखते हों.
Rajiv Yadav

Rajiv Yadav

इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक राजीव दिल्ली स्थित आईआईएमसी से मीडिया में मास्टर डिग्री ले चुके हैं. फिलहाल इलाहाबाद में रहकर मुक्त पत्रकारिता और जनाधिकार के मुद्दों पर सक्रिय कार्य कर रहे हैं. विस्फोट पर लेखन.
Ashok Wankhade

Ashok Wankhade

यवतमाल में पैदा हुए अशोक वानखेडे पढ़ने के लिए इंदौर आये तो पत्रकारिता का कैरियर साथ में लेकर इंदौर से बाहर निकले. फ्री प्रेस जर्नल से पत्रकारिता शुरू करनेवाले अशोक वानखेडे चौथा संसार में काम करने दिल्ली आये तो यहीं के होकर रह गये. करीब पचीस साल के अपने पत्रकारीय कैरियर में अंग्रेजी, हिन्दी और मराठी तीनों भाषाओं के लिए काम किया है. इलेक्ट्रानिक का जमाना आया तो विडियो जर्नलिज्म में भी हाथ आजमाया. अब एक अखबार के राजनीतिक संपादक होने के साथ साथ नये मीडिया को नारा-ए-मस्ताना बनाना चाहते हैं.
Dr. Ashish Vashisth

Dr. Ashish Vashisth

डॉ. आशीष वशिष्ठ लखनऊ में रहनेवाले स्वतंत्र पत्रकार हैं. विभिन्न विषयों पर समसामयिक टिप्पणी और लेखन.
Harsh Vardhan

Harsh Vardhan

हर्षवर्धन टीवी पत्रकार हैं. अमर उजाला में लंबे समय तक काम करने के बाद सीएनबीसी आवाज में काम किया. बतंगड़ नाम से नियमित ब्लाग भी लिखनेवाले हर्षवर्धन राजनीतिक विश्लेषक के तौर पर स्थापित हैं.
Vinod Upadhyay

Vinod Upadhyay

मूलत: बक्सर बिहार के रहनेवाले विनोद उपाध्याय भोपाल में रहकर पत्रकारिता करते हैं. दैनिक राष्ट्रीय हिन्दी मेल से पत्रकारिता में प्रवेश. वर्तमान में भोपाल से ही प्रकाशित होनेवाले दैनिक अग्निबाण से जुड़े हुए हैं.
Arvind Tripathi

Arvind Tripathi

अरविन्द त्रिपाठी देश के कई बड़े समाचार पत्रों व पत्रिकाओं में काम करने के बाद वर्तमान में दिल्ली से प्रकाशित हो रही "सामना" हिंदी पत्रिका में उत्तर प्रदेश से विशेष संवाददाता के पद पर कार्यरत हैं. साथ ही पानी और पर्यावरण के मुद्दे पर राजेन्द्र सिंह के साथ काम कर रहे हैं.
Awesh Tiwari

Awesh Tiwari

मेरे लिए खबरें सिर्फ सूचनाओं को कलमबंद करने का जरिया नहीं है ,ये जरुरी है कि जिनके लिए भी हम खबरें लिख रहे हैं उनको उन ख़बरों से कुछ मिले |पिछले एक दशक से उत्तर भारत के सोन-बिहार -झारखण्ड क्षेत्र में आदिवासी किसानों की बुनियादी समस्याओं ,नक्सलवाद ,विस्थापन ,प्रदूषण और असंतुलित औद्योगीकरण को लेकर की गयी अब तक की रिपोर्टिंग में हमने अपने इस सिद्धांत को जीने की कोशिश की है। नेटवर्क6 के संपादक।
Anshuman Tiwari

Anshuman Tiwari

मूलत: उत्तर प्रदेश के रहनेवाले अंशुमान तिवारी ने आर्थिक पत्रकारिता को हिन्दी में बहुत शुरूआती दौर से देखा समझा है. अमर उजाला कारोबार के लिए काम किया और बाद में दैनिक जागरण समूह से जुड़े. वर्तमान में दैनिक जागरण के ब्यूरो चीफ हैं. इसके साथ ही अर्थार्थ नाम से ब्लाग भी लिखते हैं.
Dr. Shashi Tiwari

Dr. Shashi Tiwari

डॉ शशि तिवारी मीडिया जगत की विभिन्न गतिविधियों से जुड़ी हैं और सूचनामंत्र नामक पत्रिका का संपादन करती हैं. भोपाल में रहते हुए मीडिया संगठनों में सक्रियता के साथ साथ दूरदर्शन के लिए भी मुक्त रूप से काम करती हैं.
Sanjay Tiwari

Sanjay Tiwari

आप जहां तक सोच सकते हैं इंटरनेट आपको वह करने का मौका देता है. अभी तक मानव सभ्यता ने जितने भी मीडिया माध्यमों का उपयोग किया है यह उन सबमें अनूठा, प्रभावी और सर्वगुण संपन्न है. सूचना लेने देने के तीन माध्यमों दृश्य, श्रवण और पाठ को एक ही धागे में लपेटे नया मीडिया उत्पादन और पहुंच दोनों के लिहाज से सर्वश्रेष्ठ है. ऐसे नये मीडिया का जनहित के लिए भरपूर उपयोग हो, विस्फोट.कॉम उसी दिशा में उठा एक कदम है. visfot@visfot.com
Rakesh Sinha

Rakesh Sinha

अकादमिक पृष्ठभूमि से ताल्लुक रखनेवाले प्रो. राकेश सिन्हा संघ विचारधारा के बीच सक्रिय समानतावादी विचारक हैं. राकेश सिन्हा हिन्दुत्व की प्रखर धारा के पैरोकार हैं. लेकिन ऐसा करने के लिए वे हिंसक विवाद की बजाय अहिसक "संवाद" को अपना जरिया बनाते हैं. इंडिया पॉलिसी फाउण्डेशन के मानद निदेशक के रूप में शोध, अध्ययन और संवाद को आगे बढ़ा रहे हैं.
S N Singh

S N Singh

शेष नारायण सिंह मूलतः इतिहास के विद्यार्थी हैं. शुरू में इतिहास के शिक्षक रहे. .बाद में पत्रकारिता की दुनिया में आये...प्रिंट, रेडियो और टेलिविज़न में काम किया. इन्होने १९२० से १९४७ तक की महात्मा गाँधी की जीवनी के उस पहलू पर काम किया है जिसमें वे एक महान कम्युनिकेटर के रूप में देखे जाते हैं..1992 से अब तक तेज़ी से बदल रहे राजनीतिक व्यवहार पर अध्ययन करने के साथ साथ विभिन्न मीडिया संस्थानों में नौकरी की. अब मुख्य रूप से लिखने पढने के काम में लगे हैं. एक अखबार में काम और विस्फोट.कॉम के सम्मानित स्तंभलेखक.
Rajesh Singh

Rajesh Singh

मुंबई में रहनेवाले राजेश सिंह मानवाधिकार कार्यकर्ता और पत्रकार हैं. वर्तमान समय में नागरिक विकल्प नामक पत्रिका का संपादन और मानवाधिकार संस्था का संचालन.
SATISH SINGH

SATISH SINGH

लंबे समय तक मुख्यधारा की पत्रकारिता करने के सतीश सिंह पिछले एक साल से स्वतंत्र पत्रकारिता और लेखन कर रहे हैं. दैनिक हिन्दुस्तान, दैनिक जागरण, प्रभात खबर, हिन्दुस्तान टाईम्स के लिए काम किया. वर्तमान समय में दिल्ली में कार्यरत.
Abhishek Singh

Abhishek Singh

अभिषेक रंजन सिंह मूलतः खगड़िया बिहार के रहने वाले हैं। 2007-08 में नई दिल्ली के भारतीय जनसंचार संस्थान से पत्रकारिता की पढ़ाई पूरी की। करियर की शुरूआत सकाल मीडिया गुप्र से किया। उसके बाद एक कारोबारी पत्रिका में बतौर संवाददाता काम किया औऱ उसके बाद एक राष्ट्रीय हिंदी दैनिक में लगभग एक साल उपसंपादक के पद पर काम किया। इन दिनों दक्षिण एशिया की प्रमुख ब्रॉडकास्ट एजेंसी सीवीबी न्यूज सर्विस में कार्यरत हैं। इसके अलावा विस्फोट सहित देश के प्रमुख हिंदी समाचार पत्र और पत्रिकाओं में समसामयिक मुद्दों पर नियमित लेखन कर रहे हैं।
A N Sibli

A N Sibli

1993 से हिन्दी, उर्दू और अंग्रेजी के विभिन्न राष्ट्रीय अखबारों और पत्रिकाओं में लेखन कर रहे अब्दुल नूर सिबली इस वक्त दिल्ली से प्रकाशित हिन्दुस्तान एक्सप्रेस में बतौर ब्यूरो चीफ कार्यरत हैं. विभिन्न वेबसाइटों पर नियमित लेखन.
Prem Shukla

Prem Shukla

मुंबई से प्रकाशित हिन्दी सामना के कार्यकारी संपादक. पिछले 20 सालों से पत्रकारिता. पत्रकारिता के साथ ही मुबंई में हिन्दीभाषी समाज के विभिन्न सांस्कृतिक और सामाजिक गतिविधियों में भी सक्रिय. विस्फोट.कॉम के नियमित स्तंभ लेखक.
Puja Shukla

Puja Shukla

पेश से टीवी पत्रकार पूजा शुक्ला धाकड़ लिक्खाड़ हैं. घर परिवार की जिम्मेदारी और टीवी पत्रकारिता के साथ साथ कलम को तलवार की तरह इस्तेमाल करती हैं. दिल्ली युनिवर्सिटी से पढ़ी लिखी पूजा दिल्ली में ही रहती है.
Balendu Sharma

Balendu Sharma

माईक्रोसाफ्ट के मोस्ट वैलुएबल प्रोफेशनल पुरस्कार से सम्मानित बालेन्दु दाधीच वेब पोर्टल प्रभासाक्षी के समूह संपादक है. तकनीकि के घोड़े पर हिन्दी की काठी बांधनेवाले बालेन्दु दाधीच केवल तकनीकि के जानकार ही नहीं बेहतरीन पत्रकार भी हैं.
Rajiv Sharma

Rajiv Sharma

राजीव शर्मा राजस्थान में रहकर मुक्त पत्रकारिता कर रहे हैं.इससे पूर्व कइ अखवारों के लिए रिपोटिंग कर चुके हें। राजनीति के अलावा पानी-पर्यावरण के मुद्दे पर संवेदनशील रिपोर्टिंग के लिए प्रयासरत। विस्फोट के लिए राजस्थान से नियमित लेखन और रिपोर्टिंग.
Arjun Sharma

Arjun Sharma

जालंधर के रहनेवाले अर्जुन शर्मा बीस साल से पत्रकारिता कर रहे हैं. बीस साल में 10 मीडिया घरानों की सैर कर चुके अर्जुन शर्मा का ट्रैक रिकार्ड बताता है कि उन्होंने कलम के साथ कभी कोई समझौता नहीं किया. मीडिया में नये आनेवाले पत्रकारों के लिए व्यावहारिक पत्रकारिता नाम की एक पुस्तक भी लिखी है. विस्फोट.कॉम के लिए पंजाब और हिमाचल का प्रभार. journalistarjun@gmail.com
Devinder Sharma

Devinder Sharma

इंडियन एक्सप्रेस में कृषि रिपोर्टर रहे देवेन्द्र शर्मा अब कृषि और खाद्य मामलों में भारत के जाने-माने नाम हैं. दुनिया में जहां कहीं भी खेती-किसानी से जुड़ी नीतियों की बात चलती है देवेन्द्र शर्मा का नाम लिया जाता है. एक्सपर्ट के साथ साथ अब जन आंदोलनों में भी सक्रिय.
Vinayak Sharma

Vinayak Sharma

दिल्ली विश्वविद्यालय में शिक्षा के दौरान युववाणी और दूरदर्शन आदि के विभिन्न कार्यक्रमों और परिचर्चाओं में भाग लेते हुए जो पत्रकारिता में प्रवेश किया तो बहुत कुछ सीखते हुए विगत पांच वर्षों से पत्रकारिता और लेखन कार्यों के अतिरिक्त राष्ट्रीय स्तर के अनेक सामाजिक संगठनों में पदभार संभाल रहे हैं. वर्तमान में मंडी, हिमाचल प्रदेश से प्रकाशित होने वाले एक साप्ताहिक समाचार पत्र में संपादक.
Dinesh Shakya

Dinesh Shakya

इटावा के रहनेवाले दिनेश शाक्य १९८९ से मीडिया में कार्यरत. १९८९ में पत्रिका हलचल से जुडे फिर साप्ताहिक चौथी दुनिया के बाद दिल्ली प्रेस प्रकाशन से जुडे,१९९६ से समाचार ए़जेसी वार्ता में २००३ मार्च तक इटावा में रिपोर्टर के रूप में काम किया, सहारा समय न्यूज चैनल में काम के साथ साथ विस्फोट.कॉम के लिए लेखन.
Anil Saumitra

Anil Saumitra

जनसंचार माध्यमों की पहुंच विषय पर शोध करनेवाले अनिल सौमित्र भोपाल में रहते हैं. सामाजिक कार्य के अलावा स्वतंत्र पत्रकारिता और मीडिया एक्टिविस्ट के बतौर कार्यरत. विश्व संवाद केन्द्र में भी सक्रिय.
Kailash Satyarthi

Kailash Satyarthi

कैलास सत्यार्थी सामाजिक कार्यकर्ता और बचपन बचाओ आंदोलन के संस्थापक अध्यक्ष हैं.
Afsar Khan Sagar

Afsar Khan Sagar

पूर्वी उत्तर प्रदेश में रहनेवाले एम. अफसरखान सागर ने पूर्वांचल विश्वविद्यालय से समाजशास्त्र में एमए किया है. 2007 से पत्रकारिता में है. विभिन्न अखबारों और पत्रिकाओं के लिए लेखन के साथ ही हिन्दी जर्नलिस्ट एसोसिएशन, उत्तर प्रदेश के संयोजक हैं।
Prakash Ray

Prakash Ray

प्रकाश कुमार रे अब स्वतंत्र पत्रकारिता कर रहे हैं. जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय में लंबे तक छात्र राजनीति करने के बाद सामाजिक जीवन और पत्रकारिता में हस्तक्षेप. फिलहाल स्वतंत्र पत्रकारिता और लेखन के साथ साथ bargad.org के संचालक.