COMMENTARY
May
16
2012
रेखा की रासलीला पर जया का जलजला
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जया की शिकायत जायज है. पहली बात तो यह है कि आखिर सरकार ने क्या सोचकर रेखा गणेशन को राज्यसभा की सीट दिया. रेखा मशहूर अदाकारा रही हैं लेकिन कांग्रेस के राज में सिर्फ अदाकारा, गुलकारा होने से राज्यसभा की पात्रता नहीं बनती है. इसके लिए राजनीतिक उद्येश्य होना जरूरी होता है. फिर चाहे सचिन तेन्दुलकर हों कि रेखा गणेशन. राज्यसभा की हर मनोनीत सीट का अपना संदेश होता है. इसलिए नेपथ्य में जा चुकी अभिनेत्री रेखा को दी गई यह सीट पूरी तरह से राजनीतिक गुणा गणित लगती है. तो क्या कांग्रेस के रणनीतिकारों ने रेखा को यह सीट इसलिए दी क्योंकि समाजवादी पार्टी ने जया बच्चन को राज्यसभा भेज दिया था. अमिताभ बच्चन परिवार से घांदी परिवार की पुरानी दुश्मनी देखते हुए तो यही शक बनता है.
अब राज्यसभा भेज भी दिया तो सीट अगल बगल करने का क्या तुक था? जया बच्चन अर्थात पुराने जमाने की जया भादुड़ी अब अमिताभ बच्चन की बुजुर्ग जीवन संगिनी हैं और नाती पोतों से भरा पुरा उनका परिवार है. अब क्या यह याद दिलाया जाना जरूरी है कि किसी जमाने में रेखा अमिताभ बच्चन की प्रेमिका हुआ करती थीं? कुछ लोग तो यह भी कहते हैं कि यह प्रेम कभी पुराना
May
16
2012
अपना डीएनए उनको दे दो तिवारी
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इस विषय में सह-रजिस्ट्रार को पूरा अधिकार दे दिया है कि वह तिवारी के रक्त का नमूना जबरन प्राप्त कर सकता है . दो दिनों पूर्व के आदेशों के अनुसार तिवारी को आज शाम तक दिल्ली हाईकोर्ट में अपना जवाब दाखिल करना था कि वह रोहित शेखर की याचिका पर कोर्ट के आदेशनुसार डीएनए परिक्षण के लिए स्वयं अपने रक्त का नमूना देंगे या पुलिस की सहायता से कोर्ट को अपने आदेशों की पालना सुनिश्चित करनी पड़ेगी. बताते चलें कि इससे पूर्व भी दिल्ली उच्च न्यायालय परिक्षण के आदेश दे चुका है जिस पर रोक लगाने के लिए तिवारी ने सर्वोच्च न्यायालय में अपील की थी परन्तु सर्वोच्च न्यायालय ने रोक लगाने से इंकार करते हुए याचिका ख़ारिज कर दी थी. आज के आदेशनुसार अब २१ मई तक यदि तिवारी अपने रक्त का नमूना नहीं देंगे तो कोर्ट के रजिस्ट्रार पुलिस की सहायता से जबरन उनके रक्त का नमूना लिया जायेगा. राजनेताओं के रंगीन मिजाजी से जुडा यह बहुत ही दिलचस्प मामला है. रोहित शेखर नाम के एक युवक जिसने बहुत ही हिम्मत रख अदालत से गुहार लगाईं है कि एनडी तिवारी के उसकी मां मां उज्ज्वला शर्मा के साथ गहरे ताल्लुकात थे और उन्होंने उनकी मां से शादी करने
May
13
2012
अंबेडकर के कार्टून पर नासमझी भरा विवाद
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यह मानने का कोई कारण नहीं है कि इस देश में डॉ अंबेडकर की राजनीति को समझने वालों की कमी है. हालांकि मैं यह भी अब मुकम्मल तौर पर मानने लगा हूँ कि डॉ अंबेडकर के नाम पर वोट की भीख माँगने वालों को उनके राजनीतिक दर्शन के बारे में बिलकुल सही जानकारी नहीं है. जिस कार्टून के हवाले से संसद में हंगामा हुआ वह हमारे नेताओं की बौद्धिक क्षमता का एक अहम नमूना है.
सबको मालूम है कि संसद में हमेशा ऐसे लोगों का बहुमत होता है जो इस देश के इतिहास और राजनीति को अच्छी तरह से समझते हैं. हाँ इस बात से भी इनकार नहीं किया जा सकता कि संसद में कुछ ऐसे लोग भी पंहुच गए हैं जिनको भारत के समकालीन इतिहास की कोई जानकारी नहीं है. यहाँ यह जान लेना बहुत ज़रूरी है कि डॉ अंबेडकर उदारवादी राजनीतिक दार्शनिक थे. अपनी आलोचना करने वालों को हमेशा ही अपने मिशन को पूरा करने वालों में शामिल मानते थे. अपने विरोधियों के प्रति कभी भी हिंसा का समर्थन नहीं किया.
जिन लोगों ने संविधान सभा की बहस के दौरान हुए भा
को पढ़ा है उन्हें मालूम है कि उसी सभा में मौजूद तरह तरह की मान्यता वालेMay
12
2012
क्या आमिर के कहने से भ्रूण हत्याएं रुक जाएंगी?
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हालात तो ये हैं कि जब मैंने ये सवाल सोशल मीडिया पर उठाए तो कहा गया कि मैं नेगेटिव सोच वाला पत्रकार हूं. मेरी समस्या न तो आमिर खान से है और न ही उनके कार्यक्रम सत्यमेव जयते से जिसमें कन्या भ्रूण हत्या को एक मुद्दा बनाया गया है.
समस्या इस बात से है कि क्या हमारा समाज इस हालत में पहुंच गया है कि किसी स्टार को बताना पड़ेगा कि कोई मुद्दा कितना गंभीर है या किस मुद्दे पर हमें सोचना चाहिए.
स्वदेश सिंह ने हवाला दिया अनपढ़ जनता का जिसे जागरुक किए जाने की ज़रुरत है लेकिन ये देखना भी ज़रुरी है कि भ्रूण हत्याओं का गढ़ हमारे गांव नहीं बल्कि शहर हैं जहां भ्रूणों की
होती है.
ीडिया पर भ्रूण हत्या का विरोध करने वाले और टीवी पर कार्यक्रम देखकर आंसू बहाने वालों में कई वो लोग भी शामिल हैं जो लड़कियों को बोझ के तौर पर देखते होंगे.
क्या आपको लगता है कि वो टीवी पर शो देखकर लड़कियों के प्रति अपना दुराग्रह बदल लेंगे. अगर हमारी मानसिकता यही रह गई है कि जो स्टार बोलेगा उसे ही मानेंगे तो फिर ऐसे समाज के बारे में कुछ कहने की ज़रुरत नहीं.
May
10
2012
हज और मजहब का हक
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600 करोड़ की यह सब्सिडी हज यात्रियों को नहीं बल्कि एयरइंडिया को मदद के तौर पर दी जाती है। एआईएम के प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी द्वारा कही गई उक्त बात कहीं न कहीं इस बात की ओर इशारा करता है की किस तरह काँग्रेसी सरकार मुस्लमानों को वोट बैंक के कुचक्र में फंसा कर अपने फायदे के लिए हज सब्सिडी के नाम पर अपना हित साधती रही ।
पहले हज यात्रा पानी के जहाज़ से की जाती थी। लेकिन पानी के जहाज़ से की जाने वाली हज यात्रा में लगने वाली लागत लगातार महंगी हो रही थी तब सरकार ने इसका किराया बढ़ाने का प्रस्ताव रखा तो मुस्लिम समाज ने इसका जमकर इस आधार पर विरोध किया कि ऐसा करने से उनका एक धार्मिक कर्तव्य पूरा होना कठिन होता जायेगा। हवाई यात्रा उपलब्ध होने के बाद हज यात्रियों के अलावा बाकी लोग हवाई यात्रा से यात्रा करना ज्यादा पसंद करने लगे बजाय जल यात्रा के क्योंकि जलयात्रा बेहद थकाऊ होता था और समय भी ज्य
लगता था।सन 195ं सरकार ने मुस्लिम समाज के सामने यह विकल्प रखा कि वह अगर जलयात्रा की जगह हवाई यात्रा करने को राज़ी हो जाये तो ऐसा करने से दोनों के यात्रा व्यय में
May
07
2012
हिलेरिया की सवारी में कोलकाता की खामोश भागीदारी
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अमरीकी विदेश मंत्री हिलेरी क्लिंटन ने कहा है कि पूर्वी भारत में व्यवसाय की अपार संभावनाएं हैं! हिलेरी भारत दौरे पर कोलकाता आई है जहां उन्होंने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से मुलाकात की है। क्लिंटन सुबह करीब 11:10 बजे राइटर्स बिल्डिंग पहुंचीं, जहां ममता ने दोनों हाथ जोड़कर 'नमस्ते' कहकर उनका अभिवादन किया। दोनों नेताओं ने सचिवालय के प्रथम तल के कॉरिडोर में चेहरे पर खिली मुस्कान के साथ तस्वीरें खिंचवाईं. ममता ने क्लिंटन को उनके स्वागत के लिए सुसज्जित राइटर्स बिल्डिंग के इतिहास से अवगत कराया। क्लिंटन कुछ पलों के लिए नोबेल पुरस्कार विजेता राष्ट्र कवि रवींद्रनाथ टेगौर की तस्वीर के सामने भी खड़ी हुईं। टेगौर की पुरानी तस्वीर हटाकर यहां नई तस्वीर लगाई गई है।इससे पहले सुबह क्लिंटन ने ला मार्टिनियर स्कूल में कहा था कि जब वह कॉलेज में थीं, तब उन्होंने टेगौर के सम्बंध में जाना था और तब से वह उनकी प्रशंसक हैं।। उल्लेखनीय है कि दोनों ही नेताओं को प्रसिद्ध टाइम पत्रिका ने दुनिया के सबसे प्रभावशाली लोगों की सूची में शामिल किया है।
इस महत्वपूर्ण मुलाकात के लिए होटल ताज बंगाल, जहां हिलेरी ठहरी हैं, से राइटर्स जाने वाले सभी रास्तों को एफबीआई की टीम के साथ कोलकाता पुलिस के एसटीएफ
May
06
2012
एनसीटीसी पर चित्त हो गये चिदम्बरम
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एनसीटीसी बैठक के बाद पत्रकारों को गृह मंत्री पी चिदंबरम ने जानकारी दी. उन्होंने कहा कि बैठक में हुई चर्चा के बाद सरकार विचार करेगी और फैसला लेगी. उन्होंने कहा कि एनसीटीसी के गठन के लिए उन्हें संसद की मंजूरी मिली हुई है. एनसीटीसी के बारे में हुए मुख्यमंत्रियों एक सम्मलेन के बाद यह तय माना जा रहा है कि ३ फरवरी को जिस तरह का नोटिफिकेशन गृह मंत्रलय ने एनसीटीसी की स्थापना के लिए जारी किया था उसमें बड़े पैमाने पर परिवर्तन होगा. हालांकि यह भी सच है कि केंद्र सरकार एनसीटीसी के अपने एजेंडे को आगे बढाने में सफल हो जायेगी क्योंकि प्रधानमंत्री ने अपने भाषण में साफ़ कहा कि यह बैठक एनसीटीसी को आपरेशनलाइज़ करने के लिए ही बुलाई गयी है.
जानकार बताते है कि शनिवार की बैठक में जो बात सबसे ज्यादा बार चर्चा में आई वह एनसीटीसी को इंटेलिजेंस ब्यूरो के अधीन रखने को लेकर थी. लगता है कि एनसीटीसी को केंद्र सरकार को इंटेलिजेंस ब्यूरो से अलग करना ही पडेगा. एकाध को छोड़कर सभी मुख्यमंत्रियों ने इस बात पर सहमति जताई कि आतंकवाद से लड़ना बहुत ज़रूरी है और मौजूदा तैयारी के आगे जाकर उस के बारे में कुछ किया जाना चाहिए. पश्चिम बंगाल
May
04
2012
कलेक्टर की रिहाई और सोनी सोढ़ी का सवाल
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सोनी सोढ़ी को कौन नहीं जानता होगा। पुलिस ने सोनी को नक्सली होने के आरोप में गिरफ्तार किया। मीडिया के एक वर्ग ने सोनी के पक्ष में एक विशेष अभियान चलाया। इस घटनाक्रम में उन मीडिया संस्थान और कर्मियों का कर्कश कांव-कांव नहीं सुनाई दिया, जो सोनी सोढ़ी को महज एक निर्दोश शिक्षक होने के पक्ष में अभियान चलाकर कर उसकी रिहाई के लिए सरकार की नैतिकता को कमजोर कर रहे थे। कई अखबारों में सोनी सोढ़ी के पक्ष में विशेष आलेख आए, पत्रिकाओं में कवर स्टोरी प्रकाशित हुई। सोनी सोढ़ी पर अत्याचार की मार्मिक रिपोर्टों ने दिल को झकझोर दिया। सोनी के हमदर्द बढ़ गए। सोनी जेल से भी मार्मिक पत्र लिख कर अपने समर्थकों का अपने पक्ष में हौसला मजबूत करती रही। अपने ऊपर अत्याचार की कहानी दुनिया को बताया। कहा कि वह नक्सली नहीं है। कोर्ट के सामने सरकार को हल्की-फुल्की शिकस्त मिली। फिलहाल सुप्रीम कोर्ट ने सोनी की मेडिकल जांच एम्स में कराने की अनुमति दे दी है।
मीडिया की पूरी रिपोर्ट कलेक्टर की रिहाई को लेकर सरकार की पहल और वार्ताकारों की गतिविधियां व उनकी बातचीत पर केंद्रीत रही। लेकिन इसमें एक महत्वपूर्ण बात गौण हो गई। कलेक्टर की रिहाई के बदले नक्सलियों ने जिन
Apr
30
2012
प्रतिभा ताई का 'महान त्याग'
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सेवा-निवृत्त होने के बाद उन्हें 5 हजार वर्गफुट का प्लाट मिल सकता था लेकिन उन्होंने 2 लाख वर्ग फुट जमीन हथिया ली। यह जमीन रक्षा मंत्रलय की थी और वे हमारे देश की सर्वोच्च सेनापति हैं। इस दो लाख 20 हजार 8 सौ उनपचास वर्गफुट के प्लाट पर उनके लिए आलीशान बंगला बनना था, जिसमें वे अपना शेष जीवन बिता सकें। इसका खर्च भी सरकार को ही उठाना था। मालिक का मालिक कौन? राष्ट्रपति को कौन बरज सकता था? वे चाहतीं तो लूट के इस माल पर बेखटके मजे कर सकती थीं। इसलिए मैंने उनकी घोषणा को ‘महान त्याग’ कहा है।
यह महान त्याग उन्होंने न तो सरकार की वजह से किया है, न संसद की वजह से और न ही अदालत की वजह से! इसकी वजह है, खबरपालिका! जिन संस्थाओं को इस तरह की लूटपाट पर कड़ी नजर रखनी चाहिए, वे या तो लापरवाही या लिहाजदारी की शिकार हो जाती हैं। ऐसे में अखबारों और टीवी चैनल के उन बहादुर पत्रकारों को हमें प्रणाम करना चाहिए जो इस तरह की खबरों को दबने नहीं देते। यह खबर निकली है, सूचना के अधिकार से। फौज के दो सेवा-निवृत्त अफसरों और उनके एक मित्र ने इस लूट का भांडाफोड़ किया था।
Apr
28
2012
राजनीति की रामरेखा
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सीबीआई की विशेष अदालत ने जैसे ही बंगारू लक्ष्मण को चार साल की सजा और एक लाख के जुर्माने की सजा सुनाई बंगारू के वकील की प्रतिक्रिया बाद में सुनाई पड़ी, पहले वे बोल पड़े जो राजनीति के रामपद पर आसीन हैं. संसद और संसद के बाहर तू तू मै मै का ऐसा सिलसिला चल पड़ा कि यह सोचने की फुर्सत भी नहीं रही कि नेता नेता आखिरकार मौसेरे भाई होते हैं. यह संदेश कोई और नहीं बल्कि वही अदालत दे रही है जिसने बंगारू को सजा सुनाई है. बंगारू को सजा सुनाने से पहले अदालत ने जो आदेश तैयार किया है उसमें एक दिलचस्प दलील दी है.
न्याय देवी के आंख की पट्टी उतारते हुए माननीय न्यायाधीश ने मानों उनसे कहा कि आप किताबों को का मनन करते करते थक गई हैं इसलिए आप समाज की ओर देखिए. समाज के ये मौसेरे भाई कैसी गंदगी फैला रहे हैं उसका अनुभव करिए तब बताइये कि बंगारू के बारे में क्या फैसला लिखें? मानों न्याय देवी ने अपने नयनों उघाड़ते हुए सबकुछ देखा और जज महोदय को संदेश दिया कि समाज में ऐसी धारणा बनती जा रही है कि ऊंचे लोग कोई भी अपराध करें उनका कुछ नहीं बिगड़ता. इसलिए कुछ


