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	<updated>2012-05-17 10:56:59</updated>
	
			
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					<title>संगमा के नाम पर शुरू हुआ संगम</title>
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					<published>2012-05-17T10:36:00-05:00</published>
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					<content type="html"><![CDATA[देश के आगामी राष्ट्रपति प्रत्याशी के लिए पहली बार कोई नाम मजबूती से सामने आ गया है। पीए संगमा के नाम पर नवीन पटनायक और जयललिता के संगम से अब संगमा राष्ट्रपति के लिए गंभीर उम्मीदवार बन गये हैं। संगमा ने पिछले दिनों दोनों मुख्यमंत्रियों से मुलाकात कर समर्थन मांगा था।]]></content>
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					<title>हम रउआ सबके भावना समझतानी</title>
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					<published>2012-05-17T10:30:00-05:00</published>
					<updated>2012-05-17T10:30:00-05:00</updated>
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					<content type="html"><![CDATA[भोजपुरी को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल किये जाने की आज एक बार फिर लोकसभा में जोरदार मांग उठी और सरकार ने आश्वासन दिया कि संसद के मानसून सत्र में इस बारे में निर्णय की घोषणा की जायेगी। निर्णय जब होगा तब होगा लेकिन दक्षिण के चिदम्बरम ने भोजपुरी में चार शब्द बोलकर उन सबको खुश कर दिया जो भोजपुरी को आठवीं अनुसूची में शामिल करने की मांग कर रहे हैं। ]]></content>
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					<title>शव के साथ सहवास की बकवास</title>
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					<published>2012-05-17T10:20:00-05:00</published>
					<updated>2012-05-17T10:20:00-05:00</updated>
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						<name>सलीम अख्तर सिद्दीकी</name>
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					<content type="html"><![CDATA[इन दिनों इंटरनेट पर कहा जा रहा है कि मोरक्को के एक काजी जमजमी अबुल बारी ने पिछले साल मई में फतवा दिया था कि इसलाम के अनुसार पत्नी की मौत के बाद भी शादी बरकरार रहती है और पति, पत्नी के देहांत के छह घंटे के अंदर उसके शव के साथ सहवास कर सकता है। बात यहीं खत्म नहीं होती, अब कहा जा रहा है कि मिस्र की संसद में ऐसा कानून बनाने का प्रस्ताव लाया गया है, जो पत्नी की मौत के बाद उसके साथ हमबिस्तर होने की इजाजत दे। जो बात सुनने में ही खराब लगे, उसके बारे में कानून बनाने की बात हास्यास्पद ही नहीं लगती, बल्कि घृणा भी होती है। शव के साथ सहवास करने की बात, चाहे वह पत्नी ही क्यों न, कोई सोच भी नहीं सकता। विकृत मानसिकता का शख्स ही ऐसा कर सकता है।]]></content>
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					<title>राजनीतिक मनमर्जी की निर्मम बनर्जी</title>
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					<published>2012-05-17T10:07:00-05:00</published>
					<updated>2012-05-17T10:07:00-05:00</updated>
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						<name>पंकज चतुर्वेदी</name>
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					<content type="html"><![CDATA[पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की राजीनति की अपनी एक निराली शैली है। शायद इसी निराली शैली का कमाल है कि वे अड़ जाने पर पूरी सरकार के सीने पर चढ़कर रेलमंत्री बदलवा देती हैं और इसी निराली शैली का कमाल है कि जो काम प्रधानमंत्री भी नहीं कर पाये वह करने के लिए अमेरिकी विदेश मंत्री कोलकाता पहुंच जाती हैं और निवेश का लालच देकर रिटेल में एफडीआई के लिए राजी करने की कोशिश करती हैं। आखिर ममता बनर्जी की राजनीतिक यात्रा क्या रही है जो आज न केवल उन्हें एक कठोर राजनीतिज्ञ के तौर पर स्थापित कर रहा है बल्कि उनके विरोधियों को उनके सामने झुकने पर मजबूर कर देता है।]]></content>
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					<title>गे निकला आमिर खान का यौन पीड़ित हरीश</title>
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					<published>2012-05-17T00:35:00-05:00</published>
					<updated>2012-05-17T00:35:00-05:00</updated>
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					<content type="html"><![CDATA[अर्थमेव जयते के जरिए करोड़ों पीट रहे आमिर खान के शो सत्यमेव जयते के दूसरे ही एपिशोड पर सवालिया निशान लग गया है. यह सवालिया निशान एक बार फिर सोशल मीडिया ने खड़ा किया है कि आमिर खान के शो में यौन पीडित वह नौजवान आईबीएन-7 के जिंदगी लाइव में गे कैसे हो जाता है? हरीश अय्यर नाम के इस शख्स के ऊपर सोशल मीडिया मे जमकर बहस हो रही है. ]]></content>
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					<title>व्यास जी की चमचागीरी</title>
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					<published>2012-05-17T00:03:00-05:00</published>
					<updated>2012-05-17T00:03:00-05:00</updated>
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					<content type="html"><![CDATA[दिल्ली की मीडिया में नेताओं की बटरिंग कोई नहीं है. छोटे मझोले अखबारों और पत्रिकाओं को तो छोड़ ही दीजिए बड़े अखबार और टीवी चैनलवाले भी नेताओं को उपकृत करने में कोई कमी नहीं रखते हैं. कई बार उन्हें खबरों के बीच हाइलाइट किया जाता है और कई बार सिर्फ उनके लिए खबरें तैयार कर ली जाती हैं. मौका हो या न हो नेता को चर्चा में रखना है तो खबर बनती रहेगी. खबर छपती रहेगी. इस काम के लिए दिल्ली में आलोक मेहता काफी बदनाम रहे हैं लेकिन ऐसा लगता है कि इस जमात में एक और नया नाम जुड़ गया है. वह नाम है हरिशंकर व्यास का जो इन दिनों नई दिल्ली से नया इंडिया छाप रहे हैं. ]]></content>
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					<title>पच्चीस करोड़ का विज्ञापन देकर मनाया सरकार का सालगिरह</title>
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					<published>2012-05-16T23:48:00-05:00</published>
					<updated>2012-05-16T23:48:00-05:00</updated>
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					<content type="html"><![CDATA[16 मई का दिन राजा की रिहाई के बाद भी डीएमके के लिए जश्न मनाने का दिन हो या न हो लेकिन तमिलनाडु की मुख्यमंत्री जयललिता ने इस दिन को धूमधाम से मनाया. उनके सरकार के एक साल पूरा होने के इस धूमधाम की धमक राजधानी दिल्ली में भी दिखाई दी. राजधानी के सभी प्रमुख अंग्रेजी अखबारों का कवर मुंहमांगी कीमत देकर खरीद लिया. केवल दिल्ली ही नहीं बल्कि देश के लगभग सभी अंग्रेजी अखबारों के फ्रंट और बैक कवर जयललिता के गुणगान से पटे रहे. ]]></content>
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					<title>अश्लील विज्ञापन आधी रात के बाद</title>
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					<published>2012-05-16T20:58:00-05:00</published>
					<updated>2012-05-16T20:58:00-05:00</updated>
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					<content type="html"><![CDATA[अब बच्चों को &#039;एडल्ट&#039; विज्ञापनों से बचाने की कवायद शुरू हो गई है। विज्ञापनों पर नजर रखने वाली संस्था &#039;एडवरटाइजिंग स्टैंडर्ड काउंसिल ऑफ इंडिया&#039; (एएससीआई) ने ऐसे कई टीवी विज्ञापनों का प्रसारण रात 11 बजे से सुबह 6 बजे के बीच करने की सिफारिश की है। सूचना व प्रसारण मंत्रालय इस प्रस्ताव पर विचार कर रहा है। काउंसिल की यह सिफारिश विशेषकर &#039;फास्ट ट्रैक&#039; (इसमें एक पुरुष और स्त्री को एक कार में आपत्तिजनक अवस्था में दिखाया गया था), &#039;वाइल्ड स्टोन डिओ&#039; (कार में पुरुष और स्त्री आपत्तिजनक अवस्था में), &#039;टाटा डोकोमो&#039; जैसे विज्ञापनों के संदर्भ में दी गई। इन विज्ञापनों के खिलाफ शिकायतों को हालांकि काउंसिल ने सही नहीं ठहराया।]]></content>
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					<title>अक्षय उर्जा क्रांति की ओर बिहार</title>
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					<published>2012-05-16T10:46:00-05:00</published>
					<updated>2012-05-16T10:46:00-05:00</updated>
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					<content type="html"><![CDATA[बिहार से दूर दिल्ली और मुंबई में बैठे लोग बिहार के बारे में जैसा सोचने लगे हैं उस पर भी सवाल उठाये जाते हैं. कहा जाता है कि बिहार में वैसा कुछ बड़ा बदलाव नहीं हो रहा है जिसके लिए किसी नीतीश सरकार की तारीफ की जाए. ऐसा कहनेवाले बिहार से ज्यादा दूर नहीं बल्कि पटना में बैठे मिल जाएंगे जो मानते हैं कि बिहार में नीतीश कुमार की तानाशाही के कारण उनका जयगान हो रहा है. लेकिन कुछ तथ्य ऐसे हैं जिन्हें जानकर कोई भी आश्चर्य से बोल पड़ेगा कि क्या यह बिहार में हो रहा है? उससे भी बड़ा आश्चर्य यह कि यह जो हो रहा है उसमें बिहार सरकार या एनके सिंह की आंकड़ेबाजी बिल्कुल शामिल नहीं है. यह समाज और गैरसरकारी संस्थानों का मिलाजुला प्रयास है जो बिहार को बिजली के मामले बिल्कुल नये धरातल पर खड़ा कर रहा है. बिहारी समाज अपने दम पर उर्जा आपूर्ति की दिशा में आगे बढ़ रहा है. ]]></content>
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					<title>सुरक्षा के ताबूत में स्वार्थ की कील</title>
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					<published>2012-05-16T20:23:00-05:00</published>
					<updated>2012-05-16T20:23:00-05:00</updated>
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						<name>शेष नारायण सिंह</name>
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					<content type="html"><![CDATA[राष्ट्रीय आतंकरोधी केंद्र यानी एनसीटीसी की स्थापना की कोशिश ठंडे बस्ते के हवाले हो गयी है. इस तरह कारगिल पर पाकिस्तानी घुसपैठ के बाद शुरू हुई केंद्र सरकार की वह कोशिश भी अनिश्चय को समर्पित हो गयी है जिसमें दावा किया गया था कि अब आतंकवाद को रोकने के लिए प्रभावी कार्रवाई की जायेगी और इंटेलिजेंस की व्यवस्था इतनी मज़बूत कर दी जायेगी कि आतंकी वारदात के पहले ही उसकी जानकारी मिल जाया करेगी. इसी योजना के हिसाब से गृह मंत्रालय ने हमले के बाद अमरीकी होमलैंड सेक्योरिटी विभाग की तरह का आतंकवाद विरोधी संगठन बनाने की योजना बनायी थी. ]]></content>
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