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INTERVIEW

भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई का ढोंग कर रही है टीम अन्ना

मुफ्ती समून कासमी अब तक न तो भारतीय मुसलमानों के लिए और न ही भारतीय मीडिया के लिए कोई बड़ा नाम था ...

मुसलमानों के हमदर्द नहीं हैं मुलायम

उत्तर प्रदेश के राजनीतिक मैदान में इस बार पीस पार्टी की मौजूदगी सबके लिए चर्चा का विषय है. चुनाव के दौरान पीस ...

जदयू के कुनबे के साथ शरद यादव (बीच में)
 

भाजपा को कुशवाहा भा गये तो हम क्या करें?

पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर अक्सर प्रसंग छेड़ने पर कहते थे कि शरद यादव जैसी राजनीतिक सूझ-बूझ के नेता कम हैं। इस संक्षिप्त बातचीत में वह हम पा सकते हैं। उत्तर प्रदेश के पिछले चुनाव में भाजपा ने जदयू के लिए करीब 36 सीटें छोड़ी थी। इस तरह एक गठबंधन के तहत 2007 का चुनाव लड़ा गया था। लेकिन इस बार जदयू के लिए भाजपा ने सीटें नहीं छोड़ी, फिर भी अपने स्वभाव के विपरीत भाजपा की आलोचना करने से बच रहे हैं। हालांकि वे यह कहने से अपने आपको नहीं रोक पाये कि भाजपा हमारे साथ नहीं बल्कि बाबू सिंह कुशवाहा के साथ मैदान में उतरना पसंद करती है तो उसमें हम क्या कर सकते हैं? चुनाव की इस भागम-भाग में शरद यादव से संजीव कुमार ने यह बातचीत की है- ... Full story

किसी को नहीं मिलेगा पूर्ण बहुमत
 

किसी को नहीं मिलेगा पूर्ण बहुमत

राष्ट्रवादी जन क्रांति पार्टी के संस्थापक और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह सूबे के विधानसभा चुनाव में कुछ अलग कर गुजरने की तैयारी में हैं। आप इसे चुनावी खेल भी कह सकते हैं, लेकिन इतना तय है कि जिस वोट की राजनीति सूबे में भाजपा करती रही है, उस वोट को बांटने की पूरी तैयारी कल्याण सिंह ने इस बार कर दी है। सूबे के 250 से ज्यादा सीटों पर राष्ट्र्वादी जन क्रांति पार्टी ने अपने उम्मीदवार खड़े करनेवाले कल्याण सिंह मानते हैं कि उत्तर प्रदेश में किसी को पूर्ण बहुमत नहीं मिलेगा। कल्याण सिंह से अखिलेश अखिल ने फोन पर बातचीत की। बातचीत के अंश- ... Full story

माया साहब को समझना है तो बाबा साहब को समझो
 

माया साहब को समझना है तो बाबा साहब को समझो

अम्बेकडकरवादी प्रो एल. कारुण्यकरा, डॉ बाबा साहब अंबेडकर दलित और आदिवासी अध्ययन केन्द्र, वर्धा के निदेशक हैं। प्रोफेसर कारुण्यकरा दलित चिंतक के रूप में मानते हैं कि मायावती जो कर रही हैं उसमें कुछ गलत नहीं है। उनकी राजनीति में दलित उत्थान के बीज छिपे हुए हैं। प्रोफेसर कहते हैं कि जो लोग मायावती को आज राजनीतिक रूप से घेर रहे हैं असल में वे किसी दलित नेता के उत्थान को बर्दाश्त नहीं कर पा रहे हैं। एक दलित चिंतक से मायावती की राजनीति को समझने की कोशिश की आशीष कुमार अंशु ने- ... Full story

काशी का अस्सी उपन्यास के पात्र पप्पू के चाय की दुकान पर काशीनाथ सिंह
 

पाठकों के बाजार का लेखक हूं मैं

काशी का अस्सी उपन्यास से चर्चित हुए हिन्दी के सुप्रसिद्ध कथाकार, उपन्यासकार काशीनाथ सिंह को उनके उपन्यास रेहन पर रग्घू के लिए हिन्दी का साहित्य अकादमी पुरस्कार दिया जा रहा है। उनकी रचनाप्रक्रिया, कहानियों के शिल्प व तीन उपन्यासों के तीन रंगों पर देशबन्धु की साहित्य संपादक सर्वमित्रा सुरजन ने काशीनाथ सिंह से दूरभाष पर विस्तृत चर्चा की। काशीनाथ सिंह मानते हैं कि वे उस बाजार के लेखक हैं जो पाठकों से मिलकर बनता है। प्रस्तुत है बातचीत के महत्वपूर्ण अंश- ... Full story

वहशी, दरिंदा और मानसिक रोगी है चिन्मयानंद
 

वहशी, दरिंदा और मानसिक रोगी है चिन्मयानंद

कोमल गुप्ता उर्फ साध्वी चिदार्पिता और अब गृहस्थ जीवन जी रही साध्वी चिदार्पिता गौतम। चार माह पहले बदायूं के स्वतंत्र पत्रकार वीपी गौतम से विवाह कर अब वह उन्मुक्त जीवन जी रही हैं। 10 सालों तक पूर्व केन्द्रीय मंत्री और धार्मिक जगत में ख्यातिप्राप्त स्वामी चिन्मयानंद सरस्वती के संग रहने वाली साध्वी ने उन पर बलात्कार करने, जबरन दो बार गर्भपात कराने और जान से मारने से संबंधित रिपोर्ट शाहजहांपुर थाने में लिखाई है, जिसके बाद से पूरे देश में, साधु-संत समाज सहित राजनीति और मुमुक्षु आश्रम में हड़कंप मच गया है। 30 वर्षीय सुन्दर स्वस्थ धीर-गंभीर और प्रखर वक्ता साध्वी चिदार्पिता गौतम ने अरबों के मालिक स्वामी चिन्मयानंद से रार क्यों लिया? साध्वी की महत्वाकांक्षा क्या है? जैसे अनेकों सवाल लेकर अखिलेश अखिल ने बदायूं में साध्वी चिदार्पिता और उसके पत्रकार पति वीपी गौतम से रात्रि 8 बजे उनके आवास पर लंबी बातचीत की। ... Full story

मुझे न्याय के नाम पर कुर्बान किया जा रहा है
 

मुझे न्याय के नाम पर कुर्बान किया जा रहा है

भारतीय संसद पर दस साल पहले 13 दिसंबर को आतंकवादी हमला हुआ था. इस हमले के लिए मुख्य आरोपी बताये गये अफजल गुरू को फांस की सजा सुनाई जा चुकी है और उसकी दया याचिका राष्ट्रपति के पास विचारार्थ रखी हुई है. अपनी दया याचिका में अफजल गुरू ने माफीनामें से ज्यादा कश्मीरी युवकों के साथ हो रही ज्यादती को जांचने की मांग उठाई है. खुद अफजल गुरू आपने बारे में कहता है कि वह बहुत गरीब परिवार से ताल्लुक रखता है. जब वह छोटा-सा था, तभी उसके अब्बा का इंतकाल हो गया था. बड़े भाई ऐजाज ने इस उम्मीद में उसे पाला कि वह डॉक्टर बनेगा. कश्मीर में आत्मनिर्णय का अधिकार हासिल करने के लिए हुए आंदोलन में जब हिंसक दौर आया, तब अफजल एमबीबीएस की पहले साल की पढ़ाई कर रहा था. बेसब्री के उसी दौर में वह आंदोलन में शामिल हुआ और फिर सीमा पार कर पाकिस्तान चला गया. ... Full story

हमें ममता बनर्जी से उम्मीद है
 

हमें ममता बनर्जी से उम्मीद है

चार दशक पहले नक्सलवाद की पीठ पर सवार होकर सीपीएम ने सत्ता से कांग्रेस को बेदखल किया और चार दशक बाद माओवादियों की पीठ पर सवार होकर ममता बनर्जी ने सीपीएम को सत्ता से बेदखल किया। लेकिन माओवादी कोटेश्वर राव उर्फ किशन जी के मारे जाने के बाद एक बार नया सवाल यही उभरा है कि आने वाले वक्त में क्या माओवादियों के निशाने पर ममता की सत्ता होगी। लालगढ़ आंदोलन के दौरान वहां गये पुण्य प्रसून वाजपेयी ने उस वक्त किशनजी से बात की थी. किशनी जी ने बातचीत में उम्मीद जाहिर की थी कि ममता बनर्जी आदिवासियों और ग्रामीणों के हक की रक्षा करेंगी लेकिन कोटेश्वर राव की मौत के बाद ऐसा लगता है कि उनकी यह उम्मीद कम से कम ममता बनर्जी से तो पूरी नहीं होगी। उस वक्त की गई बातचीत इस वक्त पढ़िये- ... Full story

पत्नी डिंपल यादव के साथ अखिलेश यादव
 

हम अनएम्प्लॉयड यूथ नहीं, अनएम्प्लॉयड फादर पैदा कर रहे हैं

इनके पिता तीन बार सूबे के मुख्यमंत्री रहे हैं. इनकी पढ़ाई विलायत में हुई है, लेकिन इन दिनों उत्तर प्रदेश में इनकी सहज उपलब्धता और साइकिल की सवारी उन्हें दूसरे हाई प्रोफाइल नेता पुत्रों से जुदा कर रही है. हमेशा मुस्कराने और खिलखिलाने वाला उनका चेहरा कार्यकर्ताओं में जोश भर देता है. प्रदेश में सबसे पहले चुनावी यात्रा का बिगुल बजाने वाले अखिलेश यादव से उन्नाव गेस्ट हाउस में हुई अनिल पांडेय की लंबी बातचीत. ... Full story

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  1. बाढ़ से ज्यादा झूठ का प्रकोप (5.00)

  2. अब शुरू हुआ असली खेल (5.00)

  3. आसान नहीं है कश्मीर का समाधान (5.00)

  4. अशोक चव्हाण ने इस्तीफा दिया, कलमाड़ी हटाये गये (5.00)

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Anshuman Tiwari

Anshuman Tiwari

मूलत: उत्तर प्रदेश के रहनेवाले अंशुमान तिवारी ने आर्थिक पत्रकारिता को हिन्दी में बहुत शुरूआती दौर से देखा समझा है. अमर उजाला कारोबार के लिए काम किया और बाद में दैनिक जागरण समूह से जुड़े. वर्तमान में दैनिक जागरण के ब्यूरो चीफ हैं. इसके साथ ही अर्थार्थ नाम से ब्लाग भी लिखते हैं.