इंटरनेट

Sep

01

2011

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ई आंदोलन करते तो ज्यादा सफल रहते अन्ना

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ई आंदोलन करते तो ज्यादा सफल रहते अन्ना

गांधीवादी तरीके से अन्ना हजारे का अनशन 13 वें  दिन स्थगित हुआ, खत्म नहीं. फिलवक्त कोई भी राजनैतिक प्रेक्षक यह बताने की स्थिति में नहीं है कि यह कब खत्म होगा। अलबत्ता यह हर आम और खास को मालूम है कि अन्ना का अनशन सरकारी लोकपाल और टीम अन्ना द्वारा ड्राफ्ट किया गया जनलोकपाल बिल को लेकर है। वैसे अन्ना के समर्थन में देश के हजारों युवा और अन्य तबके के लोग शामिल होते जा रहे हैं लेकिन फौरी तौर पर।

यहां इन वर्गो का उल्लेख करना न केवल समीचीन होगा बल्कि सामयिक भी, कि भारत में दो वर्ग ऐसे हैं जिनके बिना यह लड़ाई अधूरी है या यूं कहें कि यही दो वर्ग हैं जो आंदोलन को परोक्ष या अपरोक्ष रूप से संचालित कर रहे हैं। एक झुंड है मीडिया का और दूसरा है एनजीओ का धंधा करने वाले लोगों का। कुछ हद तक तो इस आंदोलन को व्यापकता प्रदान की है सोशल मीडिया ने जिसके गुणगान करते कमोवेश हर समाचार पत्र, चैनल, पत्रिका या न्यूज पोर्टल और वेबसाइट के लोग थक नहीं रहे हैं। समृद्ध मीडिया घरानों की समूह पोर्टल या न्यू मीडिया से जुड़े हुये लोगों के साथ-साथ नेट जनरेशन ने इस आंदोलन को दिशा दी है।

Aug

15

2011

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नई आजादी की सोलहवीं सालगिरह

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नई आजादी की सोलहवीं सालगिरह

वर्ल्ड वाइड वेब के जन्मदाता टिम बर्नर्स ली चाहते हैं कि इंटरनेट को मूल अधिकारों में शामिल किया जाए। वैसे फिनलैंड में इंटरनेट को नागरिक अधिकारों में शामिल कर लिया है। इसे अब प्राकृतिक माध्यम मानना शुरू कर दिया है। मिस्र ने साबित किया कि यह लोकतांत्रिक उद्देश्यों को पाने का मजबूत साधन बन सकता है। कोई देश या कंपनी इसकी ठेकेदार न बन सके। लिहाजा इंटरनेट की स्वतंत्रता की रक्षा के लिये अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक मिली-जुली नियामक संस्था बनना चाहिए।  संयुक्त राष्ट्र की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि इंटरनेट की उपलब्धता मूलभूत मानवाधिकार है।  संयुक्त राष्ट्र के विशेष प्रतिनिधि फ्रैंक ला रू ने ये रिपोर्ट विचारों और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के अधिकार के प्रचार और संरक्षण के अधीन तैयार की है।

उनका मत है कि इंटरनेट की सुविधा ऐसी परिस्थिति में और महत्वपूर्ण हो जाती है, जब राजनीतिक अशांति फैली हो। ये देखते हुए कि इंटरनेट, असामानता से लड़ने के साथ-साथ विकास और मानव प्रगति को बढ़ावा देने जैसे बहुत से मानवाधिकारों के लिए एक अनिवार्य साधन बन चुका है, इंटरनेट की सुविधा उपलब्ध कराना सभी देशों की प्राथमिकता होनी चाहिए।

इंटरनेट पारदर्शिता बढ़ाने, जानकारी उपलब्ध कराने और लोकतांत्रिक समाज के निर्माण में आम नागरिकों की

May

02

2011

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नये मीडिया ने दी नई आजादी

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नये मीडिया ने दी नई आजादी

ओबामा का मानना है कि जब लोग इंटरनेट, मोबाइल फोन और अन्य माध्यमों के जरिए पहले से कहीं अधिक सूचना पा रहे हैं, चीन, इथोपिया, ईरान और वेनेजुएला ने इन प्रौद्योगीकियों तक पूरी तरह से पहुंच और इनके इस्तेमाल पर रोक लगा रखी है। बहरहाल, न्यू मीडिया ने परंपरागत मीडिया की निर्भरता से निजात दिलाई है। अब देश-दुनिया के लगभग सभी प्रमुख समाचार पत्रों एवं चैनलों के पत्रकार आजकल अपना पक्ष न्यू मीडिया पर बेहिचक रख रहे हैं।

काबिलेगौर है कि न्यू मीडिया ने ही बीते वर्ष कई बड़े खुलासे किये हैं। दुनिया के कई देशों को हिला देने वाले विकीलीक्स के संपादक जूलियन असांजे पत्रकारिता को ही न्यू मीडिया के माध्यम से अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर प्रोत्साहित कर रहे हैं। सोशल मीडिया ने दुनिया को एक गांव के रूप में तब्दील कर दिया है। स्वतंत्रता की अभिव्यक्ति को निशुल्क मौका देकर इसने मीडिया को पंख लगा दिये हैं, यह पत्रकारिता को प्रोत्साहित करता है, यही एक ऐसा मीडिया है जिसने अमीर, गरीब और मध्यम वर्ग के अंतर को समाप्त कर दिया है। कुल मिलाकर मीडिया के सोशल मीडिया ने सारे मायने ही बदल दिये हैं।’’

दुनिया में पिछले एक दशक के दौरान सूचना प्रौद्योगिकी और संचार के ज

अनेक परिवर्तन

Nov

19

2010

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इंटरनेट को मिली नयी भाषा

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इंटरनेट को मिली नयी भाषा

जैसे गूगल एप्स के तहत इंटरनेट के जरिए इस्तेमाल किए जाने वाले कुछ एप्लीकेशंस (गूगल डॉक्स, जीमेल, गूगल वीडियो आदि)। क्या यह आश्चर्यजनक नहीं लगता कि इंटरनेट कनेक्शन के बिना भी आप जीमेल का इस्तेमाल कर सकें? माना कि नई ईमेल बिना इंटरनेट कनेक्शन के नहीं आ सकती, लेकिन अब तक आई हुई सारी ईमेल को तो आप देख-पढ़ सकेंगे! साल भर पुराने किसी ईमेल संदेश के साथ आए अटैचमेंट की जरूरत पड़ गई? कोई बात नहीं इंटरनेट कनेक्शन के बिना ही डाउनलोड कर लीजिए!

एचटीएमएल 5 (हाइपर टेक्स्ट मार्कअप लैंग्वेज) वह बुनियादी भाषा है जिसे इंटरनेट एक्सप्लोरर, फायरफॉक्स और क्रोम जैसे ब्राउज़र समझ पाते हैं। वे इस तकनीकी भाषा में लिखी हुई इबारतों को इंसानों के समझने लायक वेब पेजों के रूप में दिखाते हैं। आपने पीएचपी, एएसपी.नेट, जेएसपी, कोल्ड यूज़न और इनसे मिलती-जुलती कुछ और आधुनिक भाषाओं के बारे में सुना या पढ़ा होगा। ये भाषाएं सर्वर साइड भाषाएं कहलाती हैं और हमारा ब्राउज़र इन्हें नहीं समझता। जब इन भाषाओं में लिखे हुए कोड को वेब सर्वर द्वारा एचटीएमएल में बदलकर पेश किया जाता है, तभी वे इंटरनेट एक्सप्लोरर पर वेब पेजों की शक्ल में दिखाई देते हैं। चूंकि आप-हम अप्रत्यक्ष रूप से एचटीएमएल कोड को

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