इंटरनेट मेरे आगे
Aug
06
2011
गूगल की गलतियां, भाषाओं को सजा
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गूगल ने पिछले पांच-छह साल के भीतर ही भारतीय भाषाओं के लिए तकनीकी क्षेत्र में इतना कार्य कर दिया है जो (माइक्रोसॉफ्ट को छोड़कर) किसी अन्य कंपनी ने पिछले तीन दशकों में भी नहीं किया था। इतनी सी अवधि में उसने अपने सर्च इंजन के भारतीय भाषाई संस्करण शुरू किए, ब्लॉगर और जीमेल में भारतीय भाषाओं का समर्थन शुरू किया, हमारी भाषाओं में कंप्यूटर इनपुट देने के लिए कुछ बेहद सरल किंतु बेहद उपयोगी टूल (आईएमई, ट्रांसलिटरेशन टूल आदि) तैयार किए, भारतीय लिपियों के बीच पारस्परिक रूपांतर की सटीक सुविधा शुरू की, ऑनलाइन ऑफिस सॉफ्टवेयर में हमारी भाषाओं के लिए समर्थन शुरू किया और अब अनुवाद की सुविधा लेकर आया है। उसकी ज्यादातर परियोजनाओं की गुणवला उच्च स्तरीय रही है। लेकिन दुर्भाग्य से अनुवाद के बारे में यही बात नहीं कही जा सकती। यहां गूगल के नजरिए में कुछ बुनियादी दिक्कतें दिखाई देती हैं।
इंसानी दिमाग का जवाब नहीं
मशीनी अनुवाद मानवीय मेधा और तर्क-शक्ति के आगे हमेशा नतमस्तक ही रहेगा। लेकिन मशीन के पीछे भी इंसानी दिमाग ही है जो प्रयास करना नहीं छोड़ता। यही वजह है कि अंग्रेजी से हिंदी और हिंदी से अंग्रेजी अनुवाद सुविधा में धीरे-धीरे, क्रमिक सुधार आ रहा है। लेकिन ये अनुवाद कब विश्वसनीयता

