कंपनीराज

Feb

02

2012

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टूजी घोटाले की टूटी हुई कड़ियां

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टूजी घोटाले की टूटी हुई कड़ियां

टूजी स्पेक्ट्रम घोटाले में सुप्रीम कोर्ट की यह टिप्पणी महत्वपूर्ण है. टूजी स्पेक्ट्रम आवंटन घोटाले में सारा झगड़ा इसी बात का है कि निजी घरानों को लाभ पहुंचाने के लिए स्पेक्ट्रम आवंटन नीति में मनमानी बदलाव किये गये और कौड़ियों के दाम में अनमोल स्पेक्ट्रम टेलिकॉम कंपनियों को बांट दिये गये. मामला सुप्रीम कोर्ट में पहुंचा. सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश देने शुरू किये. उन निर्देशों के आधार पर सीबीआई को केस रजिस्टर करना पड़ा और उसके बाद क्या कुछ हुआ उसको पूरा देश जानता है. अपने इस आदेश के साथ कि जो लाइसेन्स तत्कालीन संचार मंत्री ए राजा द्वारा आवंटित किये गये थे उन्हें कैंसिल किया जाए और उन कंपनियों पर फाइन लगाया है जिन्होंने गड़बड़झाला करके स्पेक्ट्रम हासिल किया था.

गड़बड़झाले में शामिल सबसे बड़ी कंपनी है एटिसलाट डीबी टेलिकॉम. यह वही कंपनी है जिसके मुखिया शाहिद बलवा तिहाड़ में लंबा वक्त बिताकर मुंबई लौट गये हैं. डीबी रियलिटी के नाम से रियल एस्टेट का कारोबार करनेवाली इस कंपनी ने दुनिया के दूसरे सबसे बड़े मोबाइल मार्केट में इस उम्मीद से कदम रखा था कि वे उसी तरह से भारतीय टेलिकॉम मार्केट में घुसपैठ कर लेंगे जिस तरह से रिलायंस ने किया था. एटिसलाट दुनिया के 19 देशों में

Sep

13

2011

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मजदूरों पर मारुति सुजुकी की मार

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मजदूरों पर मारुति सुजुकी की मार

पिछले एक पखवाड़े से दिनों से लगातार चल रहे भाषणों के बीच जब एकरसता-सी आ रही थी तो सड़क के उस पार एक बस से ज़ोर-ज़ोर से आ रही क्रांतिकारी नारों की आवाज़ ने मज़दूरों में कौतूहल जगा दी. पहले बस से उतरते कुछ पैर नीचे दिखे, फिर दो-एक चेहरे और फिर 50 से ज़्यादा ऐसे चेहरे जिसे देखकर मज़दूरों ने किलकारी मारनी शुरू कर दी. उनके हाथ में तख़्तियां थीं जिनमें मज़दूरों के समर्थन वाले हर्फ़ लिखे थे. सड़क के इस पार अब यह साफ़ हो गया था कि जेएनयू से यह बस आई है और मज़दूरों के इस सवाल पर वे उनका साथ देने आए हैं. बहुत देर तक तालियां बजती रही. फिर छात्र-मज़दूर एकता ज़िदाबाद के नारे. डीयू और जामिया से भी छात्र-छात्राओं के कुछ समूह वहां मौजूद थे. नौजवान से दिखने वाले मज़दूरों के उत्साही नेता सोनू गुज्जर ने लोगों को संबोधित करते हुए कहा, ‘जिस आंदोलन में स्टूडेंट घुस जाए. समझो वो लड़ाई जीत ली गई.’ मानेसर और गुड़गांव के बाकी कंपनियों के मज़दूर यूनियनों से मिलने वाले समर्थन के बाद दिल्ली के विश्वविद्यालयों से आ रहे विद्यार्थियों ने सबके भीतर उत्साह और जीत की नई उमंग भर दी.

सफ़ेद और लाल रंग के

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