तीज त्यौहार
Oct
25
2011
राम का प्रकाश पर्व नहीं है दीपावली
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श्रीरामावतार से बहुत पहले राजाबलि का राज्य था वो बहुत प्रतापी राजा थे। भगवान बावन ने उनसे दान में सारा राज्य पाठ ले लिया था बाद में उनका शरीर भी नाप लिया था यह कथा लगभग सभी लोग जानते हैं। बात यह थी कि दैत्य वंश में उत्पन्न राजा बलि ने संपूर्ण पृथ्वी मंडल को जीत लिया था स्वर्ग तक उनका शासन चलता था। इंद्र आदि देवता राज्य विहीन होकर भटक रहे थे। संपूर्ण ऐश्वर्य लक्ष्मी राजाबलि के आधीन थी। सभी देवता स्वर्ग छोड़कर भटक रहे थे। सभी देवताओं की प्रार्थना पर ही भगवान विष्णु ने बावन रूप में प्रकट होकर राजा बलि की यज्ञ में जाकर सारा राजपाठ एवं स्वयं राजाबलि को भी दान की प्रतिज्ञा में बाँधकर अपने आधीन कर लिया था। बलि को समस्त परिवार के साथ सुतल लोक भेज दिया था।
इस प्रकार जाते समय बलि से भगवान बावन ने पूछा आपकी कोई इच्छा हो तो कुछ माँग लो क्योंकि मेरा दर्शन व्यर्थ नहीं जाता। इस पर बलि ने कहा महाराज मैं सुतल लोक को प्रसन्नता पूर्वक प्रस्थान कर रहा हूँ किंतु मेरी इच्छा थी कि एक दिन के लिए हर वर्ष हमारा राज्योत्सव पृथ्वी पर मनाया जाता रहे और उस दिन सारी पृथ्वी को प्रकाश
Mar
18
2011
नाना रंगों और विविध रूपों में रची बसी होली
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होली वैसे तो रंगों का त्योहार है। बसंत के आगाज के साथ ही होली का अपना अलग अनूठा आनंद है। होली के हुरियारों को इस दिन हर मामले में सामाजिक तौर पर अघोषित छूट प्रदान हो जाती है। पिछले दो तीन दशकों में हुरियारों ने समाजिक तौर पर मिलने वाली इस छूट का बेजा इस्तेमाल भी आरंभ कर दिया है। अब तो प्राकृतिक रंगों के बजाए शरीर को नुकसान पहुंचाने वाले केमिकल्स का इस्तेमाल कर रंग बनाए जा रहे हैं।
याद पड़ता है कि किस कदर टेसू के फूलों को एकत्र कर घरों में ही रंगों का निर्माण किया जाता था। कवियों द्वारा भी होली के इर्द गिर्द खिलने वाले टेसू के फूलों की तुलना दहकते अंगारों से की जाती रही है। होली के साथ ही पतझड का आगाज होता है। आज तो होली का इंतजार नशैलों को होता है। शराब, भांग, चरस, अफीम, गांजा आदि के नशे में धुत्त लोग अश्लील गालियां देना होली की परंपरा मान चुके हैं। होलिका दहन पर प्रहलाद और होलिका की कहनी से तो सभी वाकिफ ही हैं।
लट्ठमार होली
उत्तर प्रदेश के ब्रज में होली का शुमार अलग ही होता है। कहीं लट्ठ मार तो कहीं झूमती गोपियां। बरसाने की होली का तो

