देश विदेश
Apr
26
2012
लंका में लगी नफरत की आग
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सिंघलियों का कहना है कि जिस जगह मस्जिद स्थित है इतिहास में वो बौद्धों के उपासना स्थल के रूप में दर्ज रहा है। मुस्लिमों समुदाय पर हमले की आशंका के मद्देनजर मस्जिद और उसके आस–पास के इलाके में सुक्रशाबल तैनात कर दिए गए हैं। कल एक बातचीत में दम्बुल्ला के मंडलियां सचिव आर रत्ननायके ने बताया कि इस सम्बन्ध में सरकार दोनों ओर के प्रतनिधियों से बातचीत कर कोई निर्णय लेगी।
लिट्टे के पतन के बाद शांत दिख रहे श्रीलंका में भीतर भीतर एक बड़ा ज्वालामुखी साँसे ले रहा है। अल्पसंख्यकों खासतौर से मुस्लिमों के धार्मिक अधिकार लगातार आहत हो रहे हैं। दुखद ये है कि इस पूरे घटनाक्रम पर सरकार यहाँ तक कि प्रधानमन्त्री और सरकार में शामिल अल्पसंख्यक मंत्रियों के अलग अलग किस्म के बयान आ रहे हैं। श्रीलंका के प्रधानमंत्री दिशानायके जयरत्न का मंगलवार को यहाँ के एक समाचार चैनल पर यह बयान आया कि”ऐसी किसी जगह पर जहाँ किसी भी धर्म का मंदिर रहा हो, मस्जिद का निर्माण अगर कर लिया गया है तो वो गलत है ,लेकिन हम अपने देश में अल्पसंख्यकों के साथ किसी भी प्रकार का अन्याय
ं होने देंगे “। इस बयान के तुरंत बाद श्रीलंका की महिला मामलों की मंत्री एApr
23
2012
कश्मीर पर बात क्यों करें?
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जम्मू-कश्मीर को विशेषाधिकार प्रदान करने वाली धारा 370 ए को समाप्त हो जाने की बात कर्णधारों ने कही थी, लेकिन वह दिन-प्रतिदिन मजबूत होती जा रही है। दिखावे के लिए भारत यह भी शर्त रखता है कि पहले पाकिस्तान अपनी सरजमीं का प्रयोग भारत विरोधी आतंकी गतिविधियों के लिए न होने देने की गारंटी दे, परंतु शर्त पूरी हुए बगैर भारत पाकिस्तान की इस बात में आ जाता है कि बातचीत नहीं होने का लाभ आतंकियों को मिलेगा। आतंक और आतंकी पाकिस्तान की विदेश नीति के अभिन्न अंग हैं। आजादी के बाद देश की 561 रियासतों का सरदार पटेल ने भारत में विलय कराया। पटेल के दबाव से जूनागढ़ का शासक पाकिस्तान चला गया। ब्रिटिश संसद ने भारत को भारत स्वतंत्रता अधिनियम 1947 के तहत आजादी दी थी। अधिनियम में रियासत के राजाओं को भारत या पाकिस्तान में विलय करने की आजादी दी गई थी जिसमें समय सीमा का कोई उल्लेख नहीं था। परंतु कई राजाओं ने जनता की राय के विपरीत जाकर विलय करने का निर्णय लिया था, लेकिन यदि विलय करने में जनता की राय नहीं रही होती तो यह देश आज इस तरह खड़ा नहीं रहता। स्पष्ट है कि यही अधिकार सभी प्रांतों की रियासतों के पास
Apr
10
2012
बेवजह जरदारी की खातिरदारी
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पाकिस्तान के राबर्ट वाड्रा है जरदारी: बीते साल भर से भारत में जिस तरह घपलों और घोटालों का भंडाफोड़ हो रहा है उसके तार कहीं न कहीं सोनिया गांधी के दामाद राबर्ट वाड्रा तक पहुचते दिखाई देते हैं. राष्ट्रमंडल खेलों के दौरान राबर्ट वाड्रा के चहेतों को मुनाफा कमवाने के लिए ठेके आवंटित किये जाने की बात सामने आई थी. टूजी घोटाले में जिस यूनिटेक की कंपनी यूनिनॉर का नाम आया है उसमें भी राबर्ट वाड्रा की हिस्सेदारी बताई जा रही है. सैन्य साजो सामान की खरीदारी में जो कमीशनखोरी होती दिख रही है उसमें भी राबर्ट वाड्रा की ओर अंगुलियां उठाई जा रही हैं. हैलिकॉप्टरों की खरीद के लिए भी एक कमीशनखोरी का मामला सामने आया है, उसमें भी राबर्ट की भूमिका संदिग्ध बताई जाती है. सोनिया गांधी के दामाद राबर्ट वाड्रा उसी अंदाज में काम कर रहे हैं जिस अंदाज में अस्सी और नब्बे के दशक में नुसरत भुट्टो के दामाद आसिफ अली जरदारी कर रहे थे. हर सौदे में जरदारी का कमीशन हुआ करता था. जिसके चलते पाकिस्तान में वे मिस्टर टेन परसेन्ट के नाम से भी मशहूर हो गये थे.
अस्सी और नब्बे के दशक में जरदारी या तो प्रधानमंत्री निवास में पाये जाते थे या
Apr
04
2012
अल्ला हाफिज....सईद!
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एकदम से यह कहना कि अमेरिका पाकिस्तान को अफगानिस्तान बना देगा, कूटनीतिक तौर पर सही नहीं होगा लेकिन हाफिज सईद पर पचास करोड़ का ईनाम इसकी शुरूआत है. दुनिया के लिए सईद आतंकवादी होगा लेकिन खुद पाकिस्तान के लिए मोहम्मद हाफिज सईद "साहब" है. पाकिस्तान में हाफिज सईद सरकार से बड़ा सियासतदां हैं. भारत के पास न जाने कितने सबूत हैं कि भारत की आर्थिक राजधानी मुंबई पर हुए आतंकी हमले का मुख्य सूत्रधार और कोई नहीं बल्कि हाफिज सईद है लेकिन जब मामला पाकिस्तान की अदालत में पहुंचा तो लाहौर हाईकोर्ट ने 13 अक्टूबर 2009 को के लिए हाफिज सईद कोई आरोप निर्धारित नहीं होता है और मामला खारिज हो गया. हाईकोर्ट के निर्णय को दिखावे के तौर पर पाकिस्तान सरकार ने पाकिस्तान सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी लेकिन वहां भी हाफिज सईद को क्लीन चिट मिल गई.
अब जबकि अमेरिका ने हाफिज सईद को अपने "सम्मानितों" की सूची में शामिल कर लिया है तो पाकिस्तान के गृहमंत्री रहमान मलिक उन्हीं फैसलों की दुहाई देते हुए अपने "पाकिस्तानी नागरिक" का बचाव कर रहे हैं. वे कुछ गलत नहीं कर रहे हैं. पाकिस्तानी प्रशासन हाफिज सईद को आतंकवादी मान ले तो पाकिस्तान
Mar
31
2012
दरिद्र नारायण के देश में
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इधर अमेरिका में भी गिनती पूरी हो गई है। जनगणना विभाग की ताजा रिपोर्ट आ गई है। इसे अमेरिका ही नहीं बल्कि भारत में भी पढ़ने की जरूरत है क्योंकि इसे पढ़ने के बाद अमेरिका के बारे में सारी ताजी धारणाएं बासी नजर आने लगती हैं. अब अमेरिका की आधी से ज्यादा आबादी दरिद्रता से अभिशप्त है. सितंबर 2010 से अगस्त 2011 के बीच दो वक्त की रोटी के लिए शासन के सामने हाथ फैलानेवाले लोगों की संख्या में असाधारण बढ़ोत्तरी हुई है. संख्या साढ़े पंद्रह प्रतिशत बढ़ गई है. इसी अवधि के दौरान बेघर, आकाश के नीचे जीनेवाले लोगों की संख्या में भी सोलह फीसदी का इजाफा हुआ है. बेघर बच्चों की संख्या अढ़तीस प्रतिशत बढ़ गई है. आंकड़ें बता रहे हैं कि 2001 से इस देश में गरीबी साल दर साल बढ़ती चली जा रही है.
जनगणना रिपोर्ट आने से पहले अमेरिकी महापौरों के संगठन ने भी शहरों के बारे में ऐसी ही बातें कहीं थीं. इन नगरपालों का कहना था कि पेट भरने और सिर छिपाने के लिए मदद मांगनेवाले बहुत से लोगों को अब हम कोई मदद नहीं कर पाते क्योंकि राजकोष में न तो इतना पैसा है और न ही अनाज. इस तंगी के कारण
Feb
29
2012
बलूचिस्तान की आजादी जरुरी है
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१९४७ में जब पाकिस्तान एक अलग देश बना तब बलूचिस्तान एक स्वतंत्र राज्य था। पाकिस्तान की सेना ने हमला करके उस पर कब्जा जमा लिया लेकिन वहां की आवाम ने कभी भी पाकिस्तानी कब्जे को स्वीकार नही किया। वर्ष १९४८ से हीं वहां सशस्त्र विद्रोह हो रहा है। वहां के राजकुमार अब्दुल करीम खान के नेतर्त्व में विद्रोह की शुरुआत हुई थी और गोरिल्ला पद्धति से पाकिस्तानी सेना के खिलाफ़ सशस्त्र संघर्ष शुरु हुआ जो अबतक जारी है। १९५८ में इस सशस्त्र संघर्ष का नेतृत्व कर रहे नवाब नवरोज खान को उनके सहयोगियों के साथ गिरफ़्तार कर के जेल में डाल दिया गया और नवरोज खान के बेटों और भतीजों को फ़ांसी दे दी गई। नवरोज खान की भी मौत जेल में रहने के हीं दौरान हो गई।
नवरोज खान के द्वारा किये गये विद्रोह को ध्यान में रखते हुये पाकिस्तान ने बलूचिस्तान में अपने सैनिकों की संख्या बढा दी तथा नया सैन्य अड्डा स्थापित किया जिससे कि उनके विद्रोह को दबाया जा सके। लेकिन इसके बाद भी यह संघर्ष जारी रहा और शेर मोहम्मद बिजरानी मारी ने पुन: बलूचिस्तान के लडाको को इकठ्ठा करके पाकिस्तानी सेना के उपर गोरिल्ला हमला करना शुरु कर दिया। इनकी मुख्य मांगों में
Feb
23
2012
तबाही की ओर बढ़ता तेहरान
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अब ईरान और इजराइल के बीच युद्ध के टलने की कोई संभावना नहीं दिखती। ईरान अपने गुप्त परमाणु कार्यक्रमों को बंद नहीं करनेवाला और इजराइल कभी भी ईरान को परमाणु संपन्न राष्ट्र नहीं बनने देगा। परमाणु संपन्न ईरान, इजराइल के अस्तित्व के लिये खतरा है । ईरान ने कभी भी इजराइल को मान्यता नही दी और हमेशा यह दुहराता रहा है कि येरुशलम को इजराइल से मुक्त करायेगा। लेबनान में हजीबुल्लह और गाजापट्टी में हमास को भी ईरान ने हमेशा मदद की है। इजरायल को पता है, अगर ईरान परमाणु बम का निर्माण कर लेता है तो उसका पहला निशाना इजराइल हीं होगा वैसे हालात के पैदा होने से बेहतर है पहले हीं हमला करके ईरान की परमाणु क्षमता को नष्ट कर देना। इस युद्ध का अंजाम भी सभी को पता है। ईरान में तबाही। हालांकि आबादी के हिसाब से ईरान, इजराइल से दस गुणा बडा है। जहां इजराइल की आबादी मात्र 75 लाख है वहीं ईरान की सात करोड से ऊपर। ईरान के पास सैन्य हथियार भी इजरायल से बहुत अधिक हैं। लेकिन इन सबके बावजूद युद्ध की स्थिति में इजरायल का पलड़ा भारी रहेगा और ईरान बचाव की मुद्रा में नजर आयेगा यानी वह इजरायल पर हमला करने
Feb
21
2012
डेमोक्रेसी के लिए पार्लियामेन्ट्री डिप्लोमेसी
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मीरा कुमार को पाकिस्तानी प्रधानमंत्री युसूफ रजा गीलानी ने भी पाकिस्तान आने की दावत दिया था. इसके पहले लोकसभा का कोई भी स्पीकर कभी भी पाकिस्तान की यात्रा पर नहीं गया है. यह बहुत ही दिलचस्प संयोग है कि भारत और पाकिस्तान, दोनों ही देशों में आजकल संसद के निचले सदन की पीठासीन अधिकारी महिलायें हैं.
दरअसल पाकिस्तानी कौमी असेम्बली की स्पीकर डॉ फहमीदा मिर्ज़ा तो किसी भी एशियाई देश की पहली महिला स्पीकर हैं. मीरा कुमार २००९ में लोकसभा की अध्यक्ष बनीं जबकि फहमीदा मिर्ज़ा २००८ में ही पाकिस्तान की कौमी असेम्बली की स्पीकर बन चुकी थीं. मीरा कुमार और डॉ फहमीदा मिर्ज़ा के बीच निजी तौर पर भी बहुत अच्छे सम्बन्ध हैं. मीरा कुमार को लिखे एक पत्र में फहमीदा मिर्ज़ा ने कहा था कि हमारे दोनों ही देशों के लोग चाहते हैं कि इस इलाके में शान्ति और सम्पन्नता हो. यह उनका हक भी
हमारी ज़िम्मेदारी है कि हम उनकी आकांक्षा को हकीकत बनाने में मदद करें. हमारे दोनों ही मुल्क पड़ोसी तो हैं ही वे गरीबी, अशिक्षा, बीमारी और अभाव के भी शिकार हैं. हमें उम्मीद करनी चाहिए कि दो महिला स्पीकर साथ साथ काम करके अपने क्षेत्र में लोगों की, ख़ासकर महिलाओं की तरक्की कोJan
28
2012
लोकतंत्र को सेना की सलामी
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इस खबर का ज़िक्र करने का मतलब यह है कि जहाँ पाकिस्तानी फौज और आईएसआई देश की सबसे ताक़तवर संस्थाएं मानी जाती थीं और अगर किसी नवाज़ शरीफ या किसी ज़ुल्फ़िकार अली भुट्टो ने उसका हुक्म नहीं माना तो उसे सत्ता से बेदखल कर दिया जाता था, उसी पाकिस्तान में प्रधानमंत्री युसूफ रज़ा गीलानी के सख्त तेवर के बाद आईएसआई और फौज का मुखिया राजकाज के मामलों की चर्चा में शामिल होने के लिए प्रधान मंत्री के यहाँ हाजिरी लगा रहा है. पाकिस्तान के पिछले साठ साल के इतिहास को जानने वाले जानते हैं कि फौज का मुखिया डांट खाने के बाद कभी किसी भी सिविलियन सरकार को सत्ता से बेदखल करने के लिए ही उसके दफतर जाता है .लेकिन पाकिस्तान में भी हालात बदल रहे हैं. चारों तरफ से लोकतंत्र की मजबूती की खबरें आ रही हैं जो पाकिस्तान के लिए तो बहुत अच्छा है ही, भारत और अफगानिस्तान के लिए बहुत अच्छा है, बाकी दुनिया के लिए बहुत अच्छा है.
पाकिस्तान के बारे में पिछले कुछ महीनों से अजीब खबरें आ रही थीं. पाकिस्तानी मामलों के भारत में मौजूद लाल बुझक्कड़ अक्सर बताते रहते हैं कि बहुत जल्द पाकिस्तान में फौजी हुकूमत कायम होने वाली है. लेकिन ऐसा
Jan
20
2012
बांग्लादेश में सेना की साजिश का सच
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गुरूवार को ढाका कैण्टोनमेन्ट में सेना ने प्रेस कांफ्रेस की उसके अनुसार सेना के गुप्तचर विभाग में काम कर चुके लेफ्टिनेन्ट कर्नल एहसान युसुफ ने रिटायर्ड मेजर जाकिर के साथ मिलकर बांग्लादेश में तख्तापलट की योजना बनाई थी जिसे सेना निरस्त कर दिया है. पूरी प्रेस कांफ्रेस का लब्बोलुआब यह था कि सेना ने बड़ी चतुराई से कर्नल एहसान युसुफ के प्लाट को फेल कर दिया है. सेना के अनुसार तख्तापलट की इस योजना में बांग्लादेशी सेना के ही 12 से 15 आफिसर, कुछ कट्टरपंथी पार्टियों और संस्थाओं से जुड़े और एनआरबी (प्रवासी बांग्लादेशी) शामिल थे.
सेना जो लंबा चौड़ा विवरण दिया है उसके अनुसार लेफ्टिनेन्ट कर्नल युसुफ ने सेना में कार्यरत एक मेजर से संपर्क किया और उसे तख्तापलट में शामिल होने के लिए निमंत्रित किया. युसुफ बांग्लादेश में सेना के जरिए जेहाद करके वहां इस्लामिक गणराज्य स्थापित करना चाहता है इसलिए उसने सेना से ही कुछ लोगों को चुनने का निश्चय किया. लेकिन 13 दिसंबर को जिस दिन कर्नल ने मेजर को इस बारे में बात की उसी दिन मेजर ने अपने ऊपर के अधिकारियों को इस घटना के बारे में बता दिया और लेफ्टिनेन्ट कर्नल को तत्काल गिरफ्तार कर लिया गया. इसके बाद एक और रिटायर्ड मेजर


