बड़ी खबर
Feb
20
2012
दुश्मन के दर पर मुसलमानों का मसीहा
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दिग्विजय सिंह को आरएसएस से जुड़े लोग ही मजाक में उन्हें अपना भाई बताते रहते हैं लेकिन यह कोई मजाक नहीं है. पूर्वी उत्तर प्रदेश से लेकर पश्चिमी उत्तर प्रदेश तक मुस्लिम मतों को विभाजित करने के लिए गोरखनाथ पीठ के प्रमुख महंत अवैद्यनाथ ने न केवल मुसलमानों की पीस पार्टी पैदा करवा दी बल्कि उसको आर्थिक मदद पहुंचाने में कांग्रेस से मदद भी करवा दी. गोरथनाथ पीठ ठाकुर महंत की पीठ कही जाती है इसलिए यहां के महंत अवैद्यनाथ और उनके उत्तराधिकारी योगी आदित्यनाथ ने चुनाव से बहुत पहले पीस पार्टी की स्थापना में जमकर मदद की. अगर आप पीस पार्टी का एजंडा देखें तो समझ में आ जाता है कि वह प्रदेश में ठाकुर और मुस्लिम मतों के ध्रुवीकरण को ही अपनी जीत का आधार बताती रहती है. पीस पार्टी के मुखिया मोहम्मद अय्यूब खुलेआम कहते रहते हैं कि वे प्रदेश में ठाकुरों और मुसलमानों का राजनीतिक गठजोड़ तैयार कर रहे हैं जो पूरे प्रदेश की राजनीति को प्रभावित करेगा.
प्रभावित करने की इसी राजनीति को अंजाम देने के लिए ढाई तीन महीने पहले दिग्विजय सिंह ने भी महंत अवैद्यनाथ से मुलाकात की थी. यह मुलाकात गोरखपुर में हुई थी और
Dec
03
2011
अकाल मौत के गाल में समा गये 500 नौनिहाल
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मौत के सर्वाधिक मामले जनपद के चोपन विकास खंड से सामने आये हैं। फिर भी, त्रासदी ये है कि अकाल मौतों के इस रौंगटे खड़ा कर देने वाले अध्याय में कई-कई परिवारों में एक से ज्यादा बच्चों की मौत हुई है। लेकिन अभी त्रासदी खत्म नहीं हुई है। गरीब माँ-बाप इलाज के लिए पैसे न होने की स्थिति में अपने स्वस्थ बच्चों को सेठ -साहूकारों के यहाँ गिरवी रख दे रहे हैं। मौत के इन गंभीर मामलों को लेकर उत्तर प्रदेश में इस एक वक्त जब मैडम मायावती विधानसभा चुनावों की गुना गणित में लगी हैं और नौकरशाही जैसे तैसे गुड गवर्नेंस का माहौल बनाने की कोशिशों में। सोनभद्र का काला पानी कहे जाने वाले इन इलाकों में बच्चों की मौत के इन मामलों पर किसी की भी निगाह नहीं पड़ी है ,सरकारी चिकित्सक दुर्गम कहे जाने वाले इन इलाकों में जाने से पह्ले गुरेज करते थे, निजी चिकत्सकों के लिए आदिवासियों का इलाज हमेशा से घाटे का सौदा है, ऐसे में आदिवासियों के पास दो ही विकल्प शेष बचे हैं या तो वो अपने बच्चों का इलाज झोला झाप डाक्टरों से कराएँ या फिर उन्हें ओझाओं के भरोसे छोड़ दें।
बच्चों की मौत के इन मामलों में जब जिलाधिकारी
Nov
06
2011
टीम अन्ना नहीं, यह टीम अरविन्द है
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आज के समय के सबसे चर्चित सरपंच जयसिंह सदाशिव महापारे से उनके गांव रालेगण में मुलाकात हुई। पुणे से शिरूर (अहमद नगर) तक के ढाई घंटे के फासले को तय करने के दौरान यह तय नहीं था कि रालेगण जहां अन्ना का मौन व्रत चल रहा है, वहां हमारे समय की सबसे बड़ी बहस ‘जन लोकपाल’ के आंदोलन के दशा और दिशा को लेकर आंदोलन के केन्द्र बने रालेगण सिद्धी गांव में चर्चा के लिए कौन मिलेगा? वैसे अन्ना अपने मौन व्रत के दौरान भी लोगों से मिल जुल रहे थे और लिखकर प्रश्नों पर अपनी प्रतिक्रिया भी दे रहे थे।
खैर, डेढ़ हजार आबादी वाले गांव रालेगण के सरपंच जयसिंह सदाशिव महापारे से मुलाकात हुई। उन्होंने ही बताया कि वे पिछले एक साल से गांव के सरपंच हैं। इससे पहले वे गांव के उपसरपंच हुआ करते थे। बातचीत की शुरूआत कुछ इस तरह से हुई।
‘‘टीम अन्ना को टीम अन्ना क्यों कहते हैं, जबकि टीम बनाने में अन्ना से अधिक दखल अरविन्द केजरीवाल का दिखता है? फिर इस टीम को टीम अरविन्द ही क्यों ना कहा जाए?’ इस तरह के सवालों को महापारे अन्ना पर टाल गए। वैसे उन्होंने स्वीकार किया कि अन्ना और अरविन्द पुराने परिचित नहीं हैं।
Oct
23
2011
कोयला मंत्री पर कालिख पोत रहे हैं उन्हीं के अधिकारी
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कोयला मंत्रालय के भरोसेमंद सूत्रों के अनुसार सीबीआई और केन्द्रीय सतर्कता आयोग की नजर कई और भी अधिकारियों पर है। जांच और छापे की कार्यवाई की चपेट में कुछ और भी संदिग्ध अधिकारियों के आने की संभावना है। जांच एजेंसियों का फंदा जल्दी ही डब्ल्यूसीएल के प्रबंध निदेशक दिनेशचंद्र गर्ग पर कस सकता है।
गौरतलब है कि कोयला मंत्रालय में बहुत कुछ गड़बड़ चल रहा है, लेकिन चुपके-चुपके। 2 जी स्पेक्ट्रम और कामनवेल्थ घोटाले ने यूपीए सरकार और कांग्रेस पार्टी को पहले ही बेचैन कर रखा है। लेकिन कोयला मंत्रालय अपने अधिकारी के कर्मो के कारण हलकान है। वेस्टर्न कोल फील्ड्स लिमिटेड के अध्यक्ष सह प्रबंध निदेशक दिनेशचंद्र गर्ग के काले कारनामों के छींटे मंत्री श्रीप्रकाश जयसवाल पर पड़ने शुरु हो गए हैं। कोयला मंत्रालय, खासकर वेसटर्न कोल फील्ड्स लिमिटेड में चल रही कारगुजारियों को भाजपा ने
तरप्रदेश के चुनाव में उठाने का पूरा मन बना लिया है। केन्द्र में कोयला मंत्री रह चुकीं और मध्यप्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती के करीबी सूत्रों के अनुसार इस मामले को सबसे पहले कोयला मंत्री श्रीप्रकाश जयसवाल के क्षेत्र में उठाया जायेगा। फिर पूरे प्रदेश और देशभर में। सूत्रों के अनुसार कोयला भ्रष्टाचार की मलाई भले ही कोल फील्ड्स के अधिकारी खाOct
05
2011
बीटी की बिसात पर जयराम ने खाई थी मात
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बीटी बैंगन को जयराम रमेश द्वारा अनुमति ना दिए जाने का पर्यावरण मंत्रालय से उनकी छुट्टी का रिश्ता जरूर है और विकीलीक्स द्वारा हाल में किये गये खुलासों से इस सारे मामले में अमरीका की भूमिका पर कई सवाल जरूर खड़े होते हैं. दरअसल विकीलीक्स का यह खुलासा ऐसे समय में हुआ जब अन्ना हज़ारे का अनशन पूरे जोरों पर था सो यह खास खबर भी दब सी गई. बीटी बैंगन पर प्रतिबन्ध के बाद दिल्ली स्थित अमरीकी दूतावास ने जो कूटनीतिक संदेश वाशिंगटन भेजे थे अब विकीलीक्स ने उनका खुलासा किया है. इन संदेशों में जिस तरह की भाषा का इस्तेमाल किया गया है वो अमरीकी गुस्से और तिलमिलाहट के साथ-साथ उसकी दादागिरी जमाने की इच्छा को भी बताता है.
गौरतलब है कि ९ फरवरी २०१० को जयराम रमेश ने भारत कि पहली जीन-परिवर्तित खाद्य फसल बीटी बैंगन को बाज़ार में उतारने की अनुमति देने से मना कर दिया था. ऐसा करके उन्होंने देश की आम जनता की सेहत से होने वाले खिलवाड़ को रोकने और देश की खेती-खुदमुख्तारी को बचाने का बड़ा काम किया. जयराम रमेश ने बीटी बैंगन पर प्रतिबंध लगाते हुए जो फेसला दिया उसमें उन्होंने बीटी बैंगन के अनेक प्रकार के सम्भावित दुष्प्रभावों का
Oct
03
2011
शिवराज के सिर पर सवार डम्पर घोटाले का जिन्न
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लोकायुक्त से काला-पीला कराकर हासिल की गई खात्मा रिपोर्ट पर सवाल उठाने वालों को रोकने की नीयत से लोकायुक्त और ईओडब्ल्यू को आरटीआई के दायरे से बाहर करने के सरकार के फ़ैसले पर हाईकोर्ट ने हाल ही में सामान्य प्रशासन और आयुक्त आरटीआई से चार हफ़्तों में जवाब तलब किया है। वहीं देश में भ्रष्टाचार के खिलाफ़ काम करने वाली संस्था भारत पुर्नोत्थान अभियान (आईआरआई) अब इस मामले का परीक्षण कर हाईकोर्ट और फिर सुप्रीम कोर्ट ले जा सकती है।
भ्रष्टाचार के खिलाफ़ ज़ोरशोर से आवाज़ उठाती नज़र आने वाली प्रदेश सरकार ने २५ अगस्त को अधिसूचना जारी कर लोकायुक्त और आर्थिक अपराध अनुसंधान ब्यूरो को सूचना के अधिकार के दायरे से बाहर कर दिया। अब इन दोनों जाँच एजेंसियों के बारे में इस कानून के तहत जानकारियाँ नहीं माँगी जा सकेंगी। सच्चाई का गला गुपचुप घोंटने के लिये राज्य सरकार ने वही वक्त चुना जब देश में अन्ना हज़ारे के आँदोलन की लहर थी और शिवराज सिंह इस मुहिम का खुलकर समर्थन कर रहे थे। मगर कहते हैं ना, “हाथी के दाँत खाने के और, दिखाने के और” फ़िर सरकारें भी किसी हाथी से कम थोड़े ही हैं। एक ओर जहाँ पूरे देश में भ्रष्टाचार के खिलाफ अलख
Aug
30
2011
अन्ना को अगवा करके हुआ अनशन?
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अन्ना हजारे को दिल्ली लानेवाले दो लोग हैं. एक हैं अरविन्द केजरीवाल और दूसरे मनीष सिसौदिया. इंडिया अगेन्स्ट करप्शन की रैलियों में अन्ना को शामिल करने का निर्णय इन्हीं दोनों का था. अन्ना के अलावा अन्य गैर राजनीतिक नेताओं को भी इस अभियान में शामिल करने का निर्णय लिया गया था जिसमें श्री श्री रविशंकर और बाबा रामदेव जैसे धार्मिक लोग भी शामिल थे. अन्ना हजारे सामािजक नेता के बतौर इसमें शामिल थे. शुरूआत में तो किसी ने खास नोटिस नहीं लिया लेकिन जंतर मंतर के धरने के बाद अन्ना हजारे सबसे बड़ी पर्सनालिटी बनकर उभरे. इसके बाद उन्होंने लोकपाल की बैठकों में भी हिस्सा लिया लेकिन बात बनती न देखकर अन्ना हजारे ने 16 अगस्त से फिर से अनशन करने का ऐलान कर दिया.
अब तक टीम अन्ना से बाबा रामदेव विदा हो चुके थे और स्वामी अग्निवेश भी हाशिये पर ही थे. निर्णय का सारा दारोमदार अरविन्द केजरीवाल, मनीष सिसौदिया, किरण बेदी और प्रशांत भूषण के पास था. इन लोगों ने शुरू में जुड़े रहे देविन्दर शर्मा जैसे लोगों को भी किनारे कर दिया क्योंकि देवेन्दर शर्मा बाबा रामदेव के साथ मंत्रियों के यहां बैठकें कर आये थे. आचार्य बालकिशन ने जिस क्लैरिजेज की मीटिंग में अंडरटेकिंग लिखकर
Aug
24
2011
हजार करोड़ की बंदरबांट
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हमेशा की तरह झारखण्ड में पूंजीपति दलालों और नेताओं की मिलीभगत से एक बार फिर एक बड़े घोटाले की जमीन तैयार की जा रही है. यह घोटाला, घोटाला न दिखे इसलिए एक्सपर्ट लोगों की सलाह भी ली गई है. इस घोटाले को फुल प्रूफ बनाने के लिए कागज़ी प्रक्रिया को भी पूरा किया जा रहा है. अगर यह सब संभव हो पाया तो झारखण्ड एक बार फिर कम से कम हजार करोड रुपये के घोटालेबाज़ी में कीर्तिमान स्थापित करेगा.
झारखण्ड में कुछ ऐसी कंपनियों को लौह अयस्क निकालने के लिए ऐसी खदानें दी गई हैं जिसमें निकला लोहा वे अपने निर्माण के लिए ही इस्तेमाल कर सकती हैं. खनन क्षेत्र में इसे कैप्टिव माइनिंग कहा जाता है. इस कैप्टिव माइनिंग के तहत कंपनियों पर प्रतिबंध है कि वे निकाले गये लौह अयस्क का निर्यात नहीं कर सकती. लौह अयस्क की खोज में जितना अच्छी किस्म का लोहा मिलता है उससे अधिक कम महत्ववाला लौह अयस्क चूर्ण निकलता है जिसे आइरन ओर फाइन्स कहा जाता है. अब राज्य की भाजपा गठबंधन सरकार ने इस आइरन ओर फाइन्स की बिक्री पर से प्रतिबंध हटा लिया है. 2 अगस्त को राज्य की सरकार ने एक कैबिनेट मीटिंग बुलाकर यह निर्
िया कि लौहAug
12
2011
फोर्ड फाउण्डेशन के पैसे से चल रहा है अन्ना का आंदोलन
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शायद नहीं. पहले भी उनके ट्रस्ट सवालों के घेरे में आते रहे हैं और अब अमेरिकी राजनयिक द्वारा अन्ना के समर्थन में बयान देने से साफ हो गया है कि अन्ना हजारे का आंदोलन आखिरकार किसे फायदा पहुंचा रहा है?
दुनिया के मानचित्र पर एक देश है अमेरिका. वैसे तो यह महज देशभर है लेकिन यह अपने आपमें एक विश्व है. दुनिया की सभी शीर्ष संस्थाएं इसके प्रभाव में काम करती हैं और दुनिया के लगभग हर देश पर इसका किसी न किसी रूप में प्रभाव है. दुनिया के देशों को प्रभावित करने के लिए अमेरिका तरह तरह के हथकंडे अख्तियार करता है
ी वह सीधे राजनीतिक दलों का इस्तेमाल करके अपना काम करता है तो कभी वहां काम करनेवाली संस्थाएं गैर राजनीतिक समूहों के जरिए अमेरिका का हित साधती हैं. देश की कंपनियों का आखिरी उद्येश्य अमेरिका हो जाना ही होता है इसलिए उनका अमेरिकीकरण करने के लिए अमेरिका को कुछ खास नहीं करना होता है.अन्ना हजारे ने आज से करीब एक साल पहले देश में एक ऐसे आंदोलन का साथ दिया जो कोई लोकपाल वगैरह के लिए चल रहा था. जो लोग आंदोलन चला रहे थे उन्हें एक चेहरे की तलाश थी और चेहरे की तलाश में
Jul
18
2011
सिफर होंगे शशांक शेखर
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ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर शशांक शेखर मे ऐसा क्या है जो अर्से से सूबे के सबसे बड़े राजनेताओ के खासमखास बन जाते हैं? कभी वीपी सिंह के सबसे खास रहने वाले शशांक शेखर मुलायम, राजनाथ और अब मायावती के खास कैसे बने हुये है इस को लेकर भी उनके चमत्कारिक व्यकित्तव पर राजनैतिक समझ रखने वाले राजनेताओं के अलावा आला दर्जे के अफसर मंथन करने मे जुटे है। सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार को झटका देते हुए कहा है कि वह गैर सिविल सेवा वाले व्यक्ति को कैबिनेट सचिव कैसे बना सकती है ? शीर्ष कोर्ट ने कहा कि शशांक न तो आईएएस हैं और न ही पीसीएस अफसर। फिर उनकी नियुक्ति इस पद पर कैसे हो सकती है?
सुप्रीम कोर्ट ने मायावती सरकार से ये सवाल मैग्सेसे अवार्ड विजेता संदीप पांडे की याचिका पर पूछे। कोर्ट ने शशांक शेखर की नियुक्ति की वैधता की जांच करने का निर्णय लिया है। जस्टिस वीएस सिरपुरकर और टीएस ठाकुर की बेंच ने वरिष्ठ वकील राकेश द्विवेदी से पूछा, किस नियम के तहत शशांक शेखर की नियुक्ति हुई है ? क्या नियम ऐसी नियुक्ति की अनुमति देते हैं ? इस पर द्विवेदी ने कहा कि शशांक की नियुक्ति तय


