लिमटी की लालटेन
Feb
12
2012
भईया जी नहीं चाहते मनमोहन रहें पीएम
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जनता के धन में आग लगातीं अंबिका!
देश की सूचना और प्रसारण मंत्री अंबिे जनता के गाढ़े पसीने से संचित अरबों खरबों रूपयों को पानी में बहाने की तैयारी पुख्ता कर ली है। इस साल सूचना प्रसारण मंत्रालय के सरकारी कलेंडर में सोनिया गांधी के संदेश और फोटो को वज़ीरे आज़म डॉ.मनमोहन सिंह से पहले स्थान दिया गया है। इतना ही नहीं करोड़ों की तादाद में छपे इन मंहगे कलेण्डर को देश के छः लाख गांवों में निजी तौर पर भेजा जा रहा है। इसके लिए चार चके के वाहन में जीपीएस लगवाकर काम को अंजाम दिया जा रहा है। इसका ठेका निजी कंपनियों को दिया गया है। मंत्रालय ने जिला कलेक्टर से लेकर ग्राम पंचायत तक इस कलेंडर को बटवाने की व्यवस्था की है। आम चुनावों के पहले कांग्रेस अपनी छवि के निर्माण के लिए जनता के धन के पैसे का सरासर दुरूपयोग किए जा रही है और विपक्ष में बैठी भाजपा मूकदर्शक बनी बैठी है।
आडवाणी की कीचन कैबिनेट से अनंत कुमार की छुट्टी
भारतीय जनता पार्टी में अनंत कुमार इन दिनों हाशिए पर ही चल रहे हैं। एल.के.आड़वाणी की रथ यात्रा के उपरांत शिकवे शिकायतों के पुलिंदों ने अनंत कुमार को आड़वाणी की किचिन कैबनेट
Nov
06
2011
राहुल के तीर से घायल हुए मनमोहन
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कमल को चुभने लगा शिव का त्रिशूल
मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज स जब भी दिल्ली यात्रा पर गए और पत्रकारों से रूबरू हुए तब तब वे कमल चालीसा (केंद्रीय मंत्री कमल नाथ का गुणगान) करना नहीं भूले। बाद बाद में नेशनल हाईवे की दुर्दशा पर वे कमल नाथ के खिलाफ हो गए थे। मध्य प्रदेश सरकार का शायद ही कोई एसा मंत्री होगा जो कमल नाथ के खिलाफ बोला हो। इस बार कमल नाथ ने तो गजब ही कर दिया। अपने संसदीय क्षेत्र जिला छिंदवाड़ा में उन्होंने मध्य प्रदेश सरकार के भ्रष्टाचार पर जमकर प्रहार किए। उन्होंने कहा कि शिवराज सरकार सड़कों की बरबादी का रोना रोती है। केंद्रीय मंत्री रहते कमल नाथ ने शिवराज सिंह को बीस हजार करोड़ रूपए दिए थे। शिवराज चुप हैं, रक्षात्मक मुद्र में खड़े दिख रहे हैं। मतलब साफ है कि केंद्र की मदद को उन्होंने घोला और पी लिया है।
मराठा क्षत्रप ने कांग्रेस से बनाई दूर
केंद्र सरकार में भागीदार राकांपा के सुप्रीमो शरद पंवार इन दिनों सरकार और कांग्रेस को आड़े हाथों लिए हुए हैं। पंवार न जाने क्यों फिर से कांग्रेस के घुर विरोधियों के सतत संपर्क में हैं। सोनिया गांधी को विदेशी मूल का जतलाकर यह मुद्दा
Aug
29
2011
वो बने राष्ट्रपिता ये हो सकते हैं राष्ट्रपति
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सादगी के सामने नतमस्तक हुए जनसेवक
अण्णा हजारे को देश का हर नागरिक सेल्यूट कर रहा है।
ने बहुत सादगी के साथ अनशन आरंभ किया और समूचे देश को एक सूत्र में पिरो दिया। संसद में बहस हुई कभी दो बजे तो कभी तीन बजे दिन में बहस अगले दिन पर टाल दी गई। किसी ने यह नहीं सोचा कि आप तो दो बजे यह कहकर बरी हो जाते हो कि कल चर्चा होगी, पर दो बजे से दूसरे दिन बारह बजे तक उस 74 साल के व्यक्ति पर क्या बीतती होगी? अण्णा ने जो कर दिखाया वह सचमुच अकल्पनीय है। आज के इस युग में 12 दिन लगातार अनशन करना बहुत बड़ी बात है उससे भी बड़ी बात इन शातिर राजनेताओं के रहते भी अनशन का ‘‘अहिंसक‘‘ रहना है। अण्णा की सदगी ने भाजपा को झुकाया और भाजपा के रूख से कांग्रेसनीत सरकार को घुटने टेकना पड़ा। कुल मिलाकर यह साफ हो गया है कि जनसेवक सब कुछ कर सकते हैं, पर वे चाहकर भी जनता के हितों की अनदेखी ही करते हैं।
ढहाया प्रियंका वढ़ेरा का बंग्ला!
कांग्रेस की राजकुमारी प्रियंका वढ़ेरा इन दिनों असहज ही नजर आ रही हैं। वे एक के बाद एक आर्कीटेक्ट के
Aug
21
2011
युवराज का युवा भारत अण्णा के लिए सड़कों पर!
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दिग्गी के पर कतरे सोनिया ने
अनाप शनाप बयानबाजी कर सुर्खियने के आदी कांग्र्रेस के महासचिव राजा दिग्विजय सिंह के लगता है दुर्दिन आरंभ हो गए हैं। अपना आपरेशन कराने विदेश जाने के पहले कांग्रेस की बागडोर एक शीर्ष समिति के हाथों में सौंप गईं सोनिया। इसमें उन्होंने अपने पुत्र राहुल गांधी को स्थान देकर परिवार वाद का नायाब उदहारण पेश किया है, पर इस समिति में 10 जनपथ और 12 तुलगक लेन के करीबी राजा दिग्विजय सिंह को नहीं रखा गया है। सियासी गलियारों में इसके निहितार्थ खोजे जा रहे हैं। कहा जा रहा है िकि कांग्रेस की नजरों में भविष्य के वजीरे आजम राहुल गांधी के अघोषित राजनैतिक द्रोणाचार्य राजा दिग्विजय सिंह के धुर विरोधियों अहमद पटेल और जनार्दन द्विवेदी ने चाल चलकर राजा का कद कम कर दिया है। सोनिया की अनुपस्थिति में अब राहुल की मजबूरी होगी कि वे दिग्गी के बाजए पटेल और द्विवेदी के साथ ज्यादा समय बिताएं।
मनमोहन नहीं राहुल के लिए है लोकपाल
इस वक्त देश भर में एक ही चर्चा चल रही है। और वह है सरकारी लोकपाल और जनलोकपाल। टीम अण्णा की मांग है कि इसके दायरे में प्रधानमंत्री को भी लाया जाना चाहिए। उधर सरकार इस मांग
May
22
2011
यूपी में कांग्रेस से ही आहत युवराज
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सत्तर के काका लगा रहे कुलाटी
कहते हैं बंदर कितना भी बूढ़ा होाटी मारना नहीं छोड़ता। कमोबेश यह फिकरा वालीवुड के शहंशाह रहे काका यानी सत्तर के दशक के सुपर स्टार जतिन उर्फ राजेश खन्ना पर एकदम फिट बैठ रहा है। 29 दिसंबर 1942 को जन्मे काका ने डिंपल कापडिया का साथ छोड़ने के बाद फिल्मों से लगभग किनारा ही कर लिया था। काका का जीवन एकाकी हो चला था, किन्तु पिछले एक दशक से काका के नीरस जीवन में एक बार फिर बहार आती दिख रही है। काका पिछले आठ सालों से फिलीपींस के पूर्व महामहिम राष्ट्रपति फर्निनांड मोर्कोज की भतीजी अनीता आड़वाणी के साथ ‘नयन मटक्का‘ कर रहे हैं। कांग्रेस के नई दिल्ली के पूर्व सासंद रहे काका का अफेयर बांद्रा में रहने वाली अनीता के साथ चल रहा है, दोनों ही एक दूसरे को पिछले 32 सालों से जानते हैं। गुजरे जमाने के सुपर स्टार राजेश खन्ना भले ही आज गुमनामी के अंधेरे में जीवन बिता रहे हों पर उनके चाहने वालों की कमी आज भी नहीं है। रोमांटिक हीरो की छवि बना चुके काका और अनीता का अफेयर कहां तक परवान चढ़ पाता है इस बात का इंतजार सभी को बेसब्री से है।
ममता

