विकीलीक्स
Mar
27
2011
राहुल सचमुच डब्बा है
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इसी नचिकेता कपूर ने 23 अप्रैल 2007 को एक अमेरिकी राजनयिक से बात करते हुए कहा है कि "कांग्रेस के अंदरखाने में इस बात को लेकर बेहद बेचैनी है कि राहुल गांधी ऐसा कुछ नहीं है कि वे प्रधानमंत्री बन सकें. इसलिए इन नेताओं के लिए उम्मीद की किरण राहुल गांधी में नहीं बल्कि नेहरू गांधी परिवार की एक और सदस्य प्रियंका गांधी में नजर आ रही है. वे राजनीति में प्रियंका के आने का इंतजार कर रहे हैं."
अमेरिकी राजनयिक से नचिकेता कपूर की यह बातचीत उस वक्त हो रही है जब उत्तर प्रदेश में चुनाव थे और राहुल गांधी के रोड शो करवाये जा रहे थे. अमेरिकी राजनयिक इस सूचना के आधार पर यह निष्कर्ष निकालता है कि राहुल गांधी की राजनीतिक शुरूआत बहुत कमजोर और अनिच्छा से हुई है.
नचिकेता कपूर अमेरिकी राजनयिक से कहता है कि "राहुल गांधी के राजनीतिक बयान मनमानी होते हैं, वे पहले से तैयारी करके कोई बात नहीं बोलते हैं. राहुल गांधी अपने लिए तैयार किये गये
नीतिक बयानों को बोलने से मना करते हैं." राजनयिक से नचिकेता कपूर यह भी कहता है कि राहुल गांधी का कोई नजदीकी मित्र या सलाहकार नहीं है क्योंकिMar
17
2011
सोनिया गांधी की करप्ट कोटरी
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सूचना क्रान्ति को इस्तेमाल करके जनपक्षधरता के एक बड़े पैरोकार के रूप में विकीलीक्स ने इतिहास में अपनी जगह बना ली है. विकीलीक्स के संस्थापक जूलियन असांज के काम को पूरी दुनिया में सराहा जा रहा है. यह अलग बात है कि अब अमरीकी शासक वर्गों को उनका काम पसंद नहीं आ रहा है और उनके खिलाफ तरह तरह के मुक़दमे भी किये जा रहे हैं. अमरीकी कूटनीति की खासी दुर्दशा भी हो रही है. अमरीकी राजनीति की वे बातें भी पब्लिक डोमेन में आ रही हैं जो आम तौर पर गुप्त रखी जाती हैं. उन बातों को कहने के लिए कूटनीतिक भाषा का इस्तेमाल किया जाता है जिसका आम तौर पर कुछ् मतलब नहीं होता. एक ही बयान के तरह तरह के अर्थ निकाले जाते हैं और यह प्रक्रिया बहुत दिनों तक चलती रहती है.
मनमोहन सिंह की सरकार में अमरीकापरस्त मंत्रियों की तैनाती की सूचना को जिस कच्ची भाषा में भारत में तैनात अमरीकी राजदूत ने वाशिंगटन को दिया था, उसके चलते नई दिल्ली के कई मंत्रियों के चेहरे से नकाब उठ गया है. अब सबको पता है कि मुरली देवड़ा क्यों मंत्री बने थे और मणि शंकर अय्यर को क्यों पैदल किया गया था. दोनों का कारण
Mar
17
2011
संसद में हुई थी सांसदों की 'हार्स ट्रेडिंग'
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अकाली और शिवसेना पर भी लगाया था दांव
अमेरिकी विदेश विभाग द्वारा अपने देश भेजी गयी सूचना के अनुसार 22 जुलाई को संसद में विश्वासमत हासिल करने के लिए कांग्रेस ने अकाली दल और शिवसेना के सांसदों को भी खरीदने की कोशिश की थी. शिवसेना को पटाने के लिए मुकेश अंबानी ने कांग्रेस को आश्वस्त किया था. केबल 9(सी) बताता है-"16 जुलाई को सतीश शर्मा

