विधानसभा चुनाव 2012

Feb

27

2012

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तालमेल का घालमेल

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तालमेल का घालमेल

मौजूदा राजनीतिक हालात को देखते हुए यह कयास लगाया जा रहा है कि बसपा और सपा में बहुत ज्यादा सीटों का अंतर नहीं होगा और दोनों दल नंबर वन की लडाई लड़ रहे हैं. जबकि भाजपा और कांग्रेस का संघर्ष तीसरे नंबर का है. सबसे प्रबल संभावना सपा और कांग्रेस गठबंधन सरकार की है. राहुल भले ही चुनावी सभाओं में सपा के खिलाफ कड़े तेवर दिखा रहे हैं लेकिन हकीकत यह है कि अखिलेश और राहुल के "बैकरूम ब्वायज" लगातार एक दूसरे के संपर्क में हैं. दरअसल कांग्रेस और सपा दोनों दलों की राजनीतिक मजबूरी है कि वे एक दूसरे से हाथ मिलाएं. सपा को अपने सबसे बड़ी राजनतिक दुश्मन मायावती को सत्ता से बाहर करना है तो कांग्रेस का साथ चाहिए ही. राजनीतिक समझ और समय की नजाकत भांपने वाले मुलायम सिंह ने इसकी पहल भी की और वे खुद चल कर कांग्रेस विधानमंडल के नेता प्रमोद तिवारी के यहां गए और उन्हें गठबंधन का एक राजनीतिक प्रस्ताव भी दिया. जिसके मुताबिक अगर उत्तर प्रदेश में दोनों दल मिलकर सरकार बनाते हैं तो मुख्यमंत्री कांग्रेस का और उपमुख्यमंत्री अखिलेश यादव होंगे, जबकि बाहर से समर्थन दे रही सपा केंद्र की यूपीए सरकार में शामिल हो होगी और मुलायम सिंह

Feb

26

2012

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सब तख्त उछाले जाएंगे

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सब तख्त उछाले जाएंगे

सबकी निगाहें चेहरों और चमक-धमक से लबरेज कांग्रेस के उस चुनाव प्रबंधन पर लगी हैं जिनकी बदौलत वो आजादी के बाद से ही केंद्र की सत्ता पर बार-बार काबिज होती रही है। ये चुनाव कांग्रेस की अग्नि परीक्षा है। ये चुनाव न सिर्फ यूपीए का राजनैतिक भविष्य तय करेंगे, बल्कि इनसे राहुल गाँधी और फॅमिली की हिन्दुस्तान की राजनीति में प्रासंगिकता भी तय होगी। जो भी हो ये बिलकुल तय है कि उत्तर प्रदेश के चुनाव परिणाम, संसद से लेकर सड़क तक खलबली मचाएंगे। आस्थाएं, विश्वास और मित्रता के अर्थ भी बदल सकते हैं। आइये देखते हैं इन चुनावों के परिणाम विभिन्न राजनैतिक दलों को कैसे प्रभावित कर सकते हैं।

बहुजन समाज पार्टी: समूचे प्रदेश में बहुजन समाज पार्टी के खिलाफ लहर दिखाई दे रही है। इस बात की प्रबल सम्भावना है कि भ्रष्टाचार, मंत्रियों के दुराचरण और खुद मुख्यमन्त्री की अधिनायक छवि की वजह से बसपा की सीट और वोटों का प्रतिशत दोनों घटे, लेकिन ये घटाव कितना होगा इसका अंदाजा लगाना अभी मुश्किल है। मायावती भी लोकप्रियता के ग्राफ में आई इस कमी को स्वीकारती हैं लेकिन उनका मानना है कि नए परिसीमन की वजह से हुआ सीटों का गठन उन्हें लाभ पहुँचायेगा, लेकिन अगर क्षेत्रवार दृष्टि

Feb

25

2012

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जनता का जनादेश या राजभवन का राज?

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जनता का जनादेश या राजभवन का राज?

कभी यह धमकी मतदाताओं को कांग्रेस के बड़े नेता तो कभी केंद्रीय मंत्री दे रहे हैं। कांग्रेस के बड़े नेताओं की धमकी को राजनीतिक पंडित जुबान फिसलने या मीडिया द्वारा बयान को तोड़मरोड़ कर पेश करने की तर्क को खारिज करते हुए कांग्रेस की सोची-समझी रणनीति का हिस्सा बताते हैं। राजनीतिक जानकार भी इन सबको देखने और सुनने के बाद रणनीति की राह में राष्ट्रपति शासन को देखने लगे हैं।

यूपी में तेरहवीं बार राष्ट्रपति शासन की आहट को समझने के लिए आपको चुनाव की तारीखों की घोषणा से समझना होगा। वर्तमान समय में प्रदेश में पंद्रहवी विधानसभा विद्यमान है, तेरह मई 2007 को इसका गठन हुआ था, पांच साल के हिसाब से कार्यकाल तेरह मई 2012 को पूरा होगा। ऐसा लगता है यूपी में वापसी के लिए बेताब कांग्रेस की बैचेनी को समझते हुए भारत निर्वाचन आयोग ने आनन-फानन में तारीख की घोषणा कर दी। हड़बड़ाहट इस कदर थी कि देश के मुख्य निर्वाचन आयुक्त एसवाई कुरैशी ने पहले चरण का चुनाव मुसलिमों के पाक त्योहार वारावफात के दिन ही रखने के साथ इसकी घोषणा कर दी। चुनाव तरीखों की घोषणा के बाद जब राजनीतिक दलो

इसका विरोध किया तो पहले चरण का चुनाव तीन मार्च को कर दिया।

Feb

22

2012

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महामाया की महाछाया

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महामाया की महाछाया

गाजियाबाद के एक हिस्से को अलग करके मायावती ने ही इसे गौतमबुद्धनगर जिला बनाया था. इसी गौतमबुद्ध नगर में उत्तर प्रदेश के दो सबसे तेज विकसित होते उपनगर स्थित हैं. एक ह नोएडा और दूसरा है ग्रेटर नोएडा. इस नोएडा और ग्रेटर नोएडा के बीच में जहां मायावती की सभा रखी गई थी वहां इतना विशाल मैदान था कि दो तीन लाख लोगों की सभा हो सकती थी. लेकिन मैदान को कांट छांटकर कई हिस्सों में विभाजित कर दिया था जिसमें एक हिस्से में उनकी सभा हुई. जितने बड़े हिस्से को उनकी सभा के लिए आरक्षित किया गया था लगभग उतने ही बड़े हिस्से को उनके हेलिकाप्टर के लिए हैलीपैड बनाया गया था. अगर एक तराजू लेकर दोनों हिस्सों को तौलते तो तोले माशे का ही फर्क शायद पड़ता. मायावती के समर्पित सिपाही उनके भाषण को सुनने के लिए उतनी ही जगह भर पाये जितना उनके हेलिकॉप्टर को उतरने के लिए जगह चाहिए थी.

अब ये दो विरोधाभाषी दृश्य हैं या फिर इसे मायावती के राजनीति का अनिवार्य सच मान लें लेकिन जो दृश्य वहां दिखा उससे लग रहा था कि वहां मौजूद लोगों को मायावती से ज्यादा उनके हैलिकॉप्टर में रुचि थी. जैसे ही मायावती अपना करीब 45 मिनट

Feb

11

2012

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मुलायम में समा रहे हैं माया के लोग

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मुलायम में समा रहे हैं माया के लोग

बदलाव की हवाओं से मीडिया भी अछूता नहीं है, बदलाव के खुशबू सूंघकर मीडिया ने चाल और भाषा बदल दी है। ये चर्चा जनता में भी आम है कि अबकि बदलाव तो जरूर होगा। आम आदमी के मन में यह सवाल उमड़-घुमड़ रहा है कि सत्ता की चाबी किसको मिलेगी। अलग-अलग विचार और गणित हैं, लेकिन बदलाव होगा ये बात तय हो चुकी है।

खुफिया और मीडिया रिपोर्ट के आधार पर नौकरशाह इस बात को सबसे पहले समझ गये कि बहनजी की सरकार बनना मुश्किल है, ऐसे में सत्ता से दूरी बनाने मंमें ही भलाई है। पंचम तल में बैठने वाले बहनजी के खासमखास नौकरशाह ने तो चुनाव की घोषणा से पहले ही समाजवादी पार्टी में लाइजनिंग और मेल-जोल बढ़ाना शुरू कर दिया था, सूत्रों की माने तो नेताजी के दूसरे पुत्र प्रतीक यादव की लखनऊ में आयोजित शादी की रिसेप्शन पार्टी का सारा प्रबंध इसी नौकरशाह के चम्मचों ने किय
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चुनावी शंखनाद के साथ ही बसपा सरकार के डूबते जहाज से कूदने और साथ छोड़ने वाले अफसरों की लाइन ही लग गयी। हालत यह है कि बहनजी की आंख, कान और हाथ माने जाने वाले एक दर्जन से अधिक अफसर बदलाव की सुगबुगाहट के बीच केंद्र

Feb

09

2012

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किन्नर मोर्चा का पॉलिटिकल मार्च

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किन्नर मोर्चा का पॉलिटिकल मार्च

यह भी देखना दिलचस्प है कि इस पार्टी ने विभिन्न विधानसभा क्षेत्रों से चुनाव लड़ने वाले अपने किन्नर प्रत्याशियों में कुछ को भावी मंत्री के तौर पर भी पहले से ही प्रोजेक्ट कर दिया है. पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव और उत्तर प्रदेश के प्रभारी वीरेंद्र कुमार कहते हैं, 'पार्टी 50 किन्नरों को अलग-अलग विधानसभा क्षेत्रों से चुनावी मैदान में उतारना चाहती है, जिनमें से 5 किन्नरों के नाम की घोषणा अब तक की जा चुकी है.' उन्होंने बताया कि किन्नर मोर्चा की अध्यक्ष शोभा बुआ को गाजियाबाद की धौलाना सीट से पार्टी ने अपना उम्मीदवार बनाया है. इसके अलावा शोभा बुआ को पार्टी ने अपने भावी मुख्यमंत्री के तौर पर भी प्रोजेक्ट कर दिया है. विरेन्द्र का दावा है कि उन्हें किन्नरों और किन्नरों से जुड़े संगठनों के अलावा आम लोगों का भी समर्थन मिल रहा है. उन्होंने बताया कि वर्ष 2009 में मध्यप्रदेश के सागर शहर में कमला बुआ के मेयर पद का चुनाव जीतने और उत्तर प्रदेश में शबनम मौसी के आने के बाद से स्थिति में काफी बदलाव आ चुका है और इसकी झलक उत्तर प्रदेश के चुनावी नतीजों में भी दिखाई देगी. विरेन्द्र कहते हैं, 'लोग भ्रष्टाचार से तंग आ चुके हैं और वे लिंग भेद

Feb

04

2012

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मेरा दिल करता है कि मंच से कूद जाऊं और आपको पकड़कर...

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मेरा दिल करता है कि मंच से कूद जाऊं और आपको पकड़कर...

भाई राहुल गांधी की तर्ज पर ही प्रियंका गांधी ने भी लोगों को जगाने का जिम्मा उठा लिया है. बस फर्क सिर्फ इतना है कि राहुल बहुत सीधी सपाट और अपेक्षाकृत कम आकर्षक शैली में अपनी बात कहते हैं जबकि प्रियंका गांधी अपनी आकर्षक शैली में इसी एक बयान को दिल की अपील बना देती हैं.

22 साल का हवाला देते हुए उन्होंने सूबे के पिछड़ेपन, भ्रष्टाचार, अराजकता एवं मौका परस्त राजनीति के लिए गैरकांग्रेसी दलों को जिम्मेदार बताया। कहा, बहुत झेल लिया। अब बर्दाश्त करना बंद करो। उठो, जागो, सोचो और बदल दो यहां के जाति-धर्म और मौका परस्त राजनीति करने वालों को। उन्होंने लोगों को आगाह भी किया कि यदि उनकी बात न मानी तो फिर भुगतोगे। 

अपने प्रचार अभियान की शुरूआत में राहुल को सर्वोपरि रखते हुए प्

का गांधी ने भाई राहुल को ढीठ बताया और कहा कि उनसे पूछा कि यूपी में इतनी मेहनत क्यों कर रहे हो। राहुल ने कहा कि नतीजों से नहीं बल्कि यूपी के पिछड़ेपन को उन्हें बदलना है।

भाई राहुल के संसदीय क्षेत्र अमेठी की गौरीगंज विधानसभा क्षेत्र में चुनाव प्रचार के लिए पहुंची प्रियंका ने आधा दर्जन से अधिक जनसभाएं की और लोगों से मिलीं। दिल्ली से पांच दिनी

Feb

04

2012

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दूसरे चरण में 35 प्रतिशत दागी

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दूसरे चरण में मुख्तार अंसारी मऊ से चुनाव मैदान में है जिसके खिलाफ सर्वाधिक आपराधिक मामले पुलिस में दर्ज हैं दूसरे चरण में मुख्तार अंसारी मऊ से चुनाव मैदान में है जिसके खिलाफ सर्वाधिक आपराधिक मामले पुलिस में दर्ज हैं

उत्तर प्रदेश 2012 विधानसभा चुनाव मे दूसरे चरण के लिए सभी 118 प्रत्याशियों ने अपने विरूद्ध आपराधिक मामलों की पुष्टि की है, जिनमें निर्वाचन क्षेत्र मऊ और घौसी के कौमी एकता दल के उम्मीदवार मुख्तार अंसारी ने अपने विरूद्ध सबसे ज्यादा आपराधिक मामले घोषित किये है। इनमे 15 आपराधिक मामलो मे से 9 गंभीर आईपीसी वाले मामले है। उसके बाद फैफना निर्वाचन क्षेत्र से सपा उम्मीदवार उपेन्द्र तथा कुसीनगर निर्वाचन क्षेत्र से बसपा उम्मीदवार जावेद इकबाल है जिन्होने अपने खिलाफ कमशः 11 और 5 आपराधिक मामले घोषित किये है।

सभी मुख्य पार्टियों ने ऐसे उम्मीदवार को टिकट दिये है जिन्होंने अपने विरूद्ध आपराधिक मामलों की पुष्टि की है। सपा के 59 में से 30 (51%) प्रत्याशी ऐसे हैं जिनके विरूद्ध आपराधिक मामले हैं। बसपा के 59 में से 23(39%), भाजपा के 55 में से 20(36%), कांग्रेस के 59 में से 19 (32%) पीस पार्टी  के 35 भें से 8;23%) तथा जेडीयू के 50 मे से 12 (24%) ऐसे प्रत्याशी हैं अपने विरूद्ध आपराधिक मामलों की पुष्टि की है।

आपराधिक मामलों वाले 118 प्रत्याशियों में से 55 (16 प्रतिशत ) कुल ऐसे प्रत्याशी हैं जिनके खिलाफ गंभीर आपराधिक मामले दर्ज हैं जैसे कि हत्या, जबरन धन उगाही, चोरी, रिश्वत तथा हत्या

Feb

04

2012

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आखिरकार मुद्दा बना भ्रष्टाचार

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पूर्वी अंचल में एक जनसभा को संबोधित करते भाजपा नेता राजनाथ सिंह पूर्वी अंचल में एक जनसभा को संबोधित करते भाजपा नेता राजनाथ सिंह

भाजपा ने कांग्रेस को भ्रष्टाचार की जननी बताते हुए कहा, सुप्रीम कोर्ट के फैसले ने पीएम की ईमानदारी का चोला उतार दिया। मुख्यमंत्री मायावती ने कहा, संप्रग-2 सरकार के ढाई साल के कार्यकाल में कांग्रेस ने बीस लाख करोड़ के 62 घोटाले किए। मुलायम ने कांग्रेस के बजाए बसपा पर निशाना साधा और कहा,भ्रष्टों की सूची में माया का नाम है। भाजपा नेताओं ने भी जमकर कांग्रेस और उसके भ्रष्टाचार को निशाना बनाया।

वहीं, कांग्रेसी नेताओं ने विपक्ष खासकर बसपा पर हमला बोला और कहा, गरीबों का पैसा तो हाथी ही खा गया। भाजपा के वरिष्ठ नेता अरुण जेटली ने चुनावी सभाओं में कांग्रेस को भ्रष्टाचार की जननी बताने के साथ ही 2जी घोटाला देश का सबसे बड़ा कलंक है। अध्यक्ष नितिन गडकरी ने कहा, कांग्रेस ने हमेशा माया-मुलायम की काली करतूतों पर पर्दा डाला तथा सीबीआइ पर दबाव बना सरकारी खजाना लूटने की छूट दी। उमा भारती ने कहा, कांग्रेस में घोटालों के महारथी हैं। टूजी घोटाले में चिदंबरम की भूमिका स्पष्ट होने पर भी प्रधानमंत्री उन्हें बचा रहे हैं। राजा ने अकेले घोटाला नहीं कर लिया। मनमोहन, राहुल व सोनिया की सहमति बिना यह संभव नहीं था। राहुल माया

पर पैकेज की रकम डकारने का आरोप लगाते हैं,

Jan

31

2012

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जनता ने जाना मतदान का महत्व

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जनता ने जाना मतदान का महत्व

जनतंत्र के पहियों को रफ्तार देने में उनकी भागीदारी स्वस्थ लोकतंत्र की नींव को मजबूत करेगी, यही उम्मीद की जाएगी। वोट की ताकत क्या है, यह बताने में मीडिया और सूचना तंत्र के दूसरे आयामों की भूमिका को भी नकारा नहीं जा सकता। निश्चय ही उसके प्रयास मतदाता को जगाने में सफल हुए हैं। इक जमाना था जब वोट का मतलब नेता तक सीमित था। राजनीतिक दल वोटर को घर से उसकी जी-हुजूरी करते हुए वोटिंग सेंटर तक के लिए घोड़ागाड़ी, रिक्शा का इंतजाम करते थे। वोट की परची हाथ जोड़कर उसके घर पहुंचा दी जाती थी। नेता, दोनों हाथ जोड़कर कहा करते थे- साडा ख्याल रखना जी, साडी इज्जत तुहाड़े हत्थ है। वोटर भी भोलेपन में वोट को खर्च कर देता था लेकिन इस दफा यह रवायत बदली है। वोटर ने नेता की बानगी को तोलकर वोट का फैसला अपने बूते करने की पहल की है। लोकतंत्र की समझ की झलक उसमें दिखाई दी है। सोमवार को राज्य में मतदान की प्रक्रिया शांतिपूर्ण ढंग से पूरी हुई। छिटपुट घटनाओं को एक तरफ कर दें तो वोटिंग की प्रक्रिया सही ढंग से संपन्न हुई। युवाओं ने जोश दिखाया तो 106 साल की वयोवृद्धा चिंत कौर का अपने पोते के साथ

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