pvchr
Jun
14
2011
मुसहर होने की 26 साल लंबी सजा
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मेरा नाम आशा मुसहर (40 वर्ष) है। मेरे पिता स्वर्गीय हरि मुसहर है। मेरी पत्नी उर्मिला, मेरे दो लड़किया तीन लडके है। मैं ग्राम-जमापुर, पोस्ट-पिण्डरा, थाना-फुलपुर, ब्लाक-पिण्डरा, जिला-वाराणसी का निवासी हूँ। मैं मेहनत करके अपने परिवार के साथ रूखा-सुखा खाकर जीवन बीता रहा था। तभी एक दिन अचानक गाँव के प्रधानपति अमरनाथ पटेल मेरे नाम से कोटा सत्तन पटेल को दिलवाने के लिए बुलाया। जब मैं सत्तन पटेल के साथ फुलपुर थाने में तस्दीक करवाने के लिए गया। तब वहां दरोगा बोले, ‘‘मुसहर हो कितनी बार जेल गये हो।’’ मैं कुछ नही बोला वहा से आने के बाद मड़ियाहू पत्ता लेने के लिए चला गया। मेरे न रहने पर मेरे घर एक जीप पुलिस आयी, मेरे बीवी बच्चों से मेरे बारे में उन्हें धमकाते हुए पूछा कहा है आशा, मैं पत्ता लेकर आया अपनी पत्नी बच्चों को रोता देखकर पूछा तो वो बोले पुलिस आयी थी। मैं प्रधान के पास गया उन्हें सारी बात बतायी, उन्होंने मुझे अपने भतीजे के साथ थाने भेजा जब मैं वहा गया तोा पुलिस ने बिना कुछ कहे थाने बैठा लिया, अंधेरा होने लगा, मैं घर नही पहुँचा मेरी पत्नी बच्चे घबराकर थाने आये तो पुलिस ने एक चाकु (सबरी) दिखाया कि चोरी करने जा

