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व्यास जी की चमचागीरी

दिल्ली की मीडिया में नेताओं की बटरिंग कोई नहीं है. छोटे मझोले अखबारों और पत्रिकाओं को तो छोड़ ही दीजिए बड़े अखबार ...

पच्चीस करोड़ का विज्ञापन देकर मनाया सरकार का सालगिरह

16 मई का दिन राजा की रिहाई के बाद भी डीएमके के लिए जश्न मनाने का दिन हो या न हो लेकिन ...

अश्लील विज्ञापन आधी रात के बाद
 

अश्लील विज्ञापन आधी रात के बाद

अब बच्चों को 'एडल्ट' विज्ञापनों से बचाने की कवायद शुरू हो गई है। विज्ञापनों पर नजर रखने वाली संस्था 'एडवरटाइजिंग स्टैंडर्ड काउंसिल ऑफ इंडिया' (एएससीआई) ने ऐसे कई टीवी विज्ञापनों का प्रसारण रात 11 बजे से सुबह 6 बजे के बीच करने की सिफारिश की है। सूचना व प्रसारण मंत्रालय इस प्रस्ताव पर विचार कर रहा है। काउंसिल की यह सिफारिश विशेषकर 'फास्ट ट्रैक' (इसमें एक पुरुष और स्त्री को एक कार में आपत्तिजनक अवस्था में दिखाया गया था), 'वाइल्ड स्टोन डिओ' (कार में पुरुष और स्त्री आपत्तिजनक अवस्था में), 'टाटा डोकोमो' जैसे विज्ञापनों के संदर्भ में दी गई। इन विज्ञापनों के खिलाफ शिकायतों को हालांकि काउंसिल ने सही नहीं ठहराया। ... Full story

अब डंक मारेंगे अशोक बाबू
 

अब डंक मारेंगे अशोक बाबू

ये अशोक बाबू विज्ञापन वाले अशोक बाबू नहीं है. ये अशोक बाबू खबर वाले अशोक बाबू हैं जोकि दिल्ली में रहते हैं. पूरा नाम है अशोक वानखड़े. अशोक बाबू दिल्ली की पत्रकारिता में तो हैं ही लेकिन अब उनके ऊपर एक और जिम्मेदारी आ गई है. डंक मारने की जिम्मेदारी. भोपाल के प्रख्यात और कुछ कुछ कुख्यात भी बिच्छू.कॉम ने उन्हें अपना कार्यकारी संपादक बनाया है, राष्ट्रीय संस्करण के लिए. ... Full story

मीडिया में छंटाक भर हैं महिलाएं
 

मीडिया में छंटाक भर हैं महिलाएं

भले ही दिल्ली का न्यूज मीडिया इस मामले में बदनाम हो गया हो कि महिलाओं की भरमार होती जा रही है लेकिन सच्चाई इसके बिल्कुल उलट है। मीडिया में महिलाओं की मौजूदगी आज भी छंटाकभर से ज्यादा नहीं है। दिल्ली की स्टूडियो पत्रकारिता को छोड़ दें तो मीडिया में महिलाओं का देशव्यापी औसत प्रतिनिधित्व मात्र 2.7 प्रतिशत है। इसमें 6 राज्यों और दो केंद्र शासित प्रदेश ऐसे हैं जहां जिला स्तर पर महिला पत्रकारों का औसत शून्य है। जबकि आंध्र प्रदेश में जिला स्तर पर कार्यरत महिला पत्रकार और संपादकों की संख्या सबसे अधिक (107) है और यह सूची में सबसे उपर है। मीडिया स्टडीज ग्रुप द्वारा किये गये एक देशव्यापी मीडिया सर्वे में यह बात सामने आई है। ... Full story

सोनी को नहीं भाई काटजू के कठोर कानून की सलाह
 

सोनी को नहीं भाई काटजू के कठोर कानून की सलाह

कल तक काटजू सूचना एवं प्रसारण मंत्री अंबिका सोनी को चिट्ठी लिखकर मीडिया पर नियंत्रण की दलील दे रहे थे लेकिन जब दोनों का सार्वजनिक मंच पर आमना सामना हुआ तो अंबिका सोनी ने काटजू को टका सा जवाब दे दिया कि उनकी तरह के सख्त कानून से मीडिया को नियंत्रित नहीं किया जा सकता. सूचना एवं प्रसारण मंत्री मानती हैं कि मीडिया के लिए सख्त कानून जैसी बातों की बजाय उसे आत्मनियमन का मौका मिलना चाहिए. ... Full story

आ गया मुंबई माफिया का एन्साइक्लोपीडिया
 

आ गया मुंबई माफिया का एन्साइक्लोपीडिया

मुंबई माफिया पर पहली बार हिन्दी में एक एनसाइक्लोपीडिया तैयार हुआ है. मुंबई के क्राइम को कवर करते हुए पत्रकार प्रभाकर राव को लगा कि मुंबई माफिया पर समूची जानकारी कहीं एक जगह एकत्र होनी चाहिए और उन्होंने वह काम कर दिया. मूल मराठी में तैयार किये गये इस एनसाइक्लोपीडिया का हिन्दी में भी अनुवाद किया गया है जिसे बुधवार को महाराष्ट्र के गृहमंत्री आर आर पाटिल ने लोकार्पित किया. ... Full story

मीडिया पर नियंत्रण चाहती हैं मीनाक्षी नटराजन
 

मीडिया पर नियंत्रण चाहती हैं मीनाक्षी नटराजन

कांग्रेस महासचिव राहुल गांधी की करीबी और पार्टी सांसद मीनाक्षी नटराजन मीडिया पर अंकुश लगाना चाहती हैं। मीनाक्षी ने इस बारे में बिल लाने के लिए लोकसभा में नोटिस दिया है। बीजेपी ने इस मुद्दे पर राहुल गांधी से सफाई मांगी है तो कांग्रेस ने इसे मीनाक्षी की निजी राय बताकर इससे पल्ला झाड़ लिया है। ... Full story

शोषण के शिकार हैं पांचजन्य के पत्रकार
 

शोषण के शिकार हैं पांचजन्य के पत्रकार

मुखपत्र का मतलब होता है संबंधित विचारधारा का वैचारिक प्रचारक। सभी छोटे बड़े संगठन अपना अपना मुखपत्र छापते ही हैं लेकिन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के चर्चित मुखपत्र हैं जिनमें छपी खबरें अक्सर चर्चा का कारण बनती हैं. एक का नाम है आर्गेनाइजर और दूसरे का नाम है पांचजन्य. इन दोनों ही पाक्षिक मुखपत्रों का प्रकाशन दिल्ली के झंडेवालान स्थित दफ्तर से किया जाता है. इन अखबारों में छपी खबरें और संपादकीय भले ही खबर बनते हों लेकिन यहां काम करनेवाले पत्रकारों और कर्मचारियों की दशा बहुत दयनीय है. संघ अपने यहां काम करनेवाले इन वेतनभोगियों की दुर्गति किये बैठा है. विचारधारा के नाम पर इनका जिस तरह से शोषण किया जाता है उससे त्रस्त यहां के कर्मचारी न तो जी सकते हैं और न मर पाते हैं. ... Full story

मीडिया को पूंजीवादी ताक़तों का एजेंट नहीं बनना चाहिए
 

मीडिया को पूंजीवादी ताक़तों का एजेंट नहीं बनना चाहिए

अपना एकछत्र राज कायम करने के लिए साम्राज्यवादी ताक़तें हर सीमा पार कर रही हैं. संसदीय लोकतंत्र की सीमाएं पार की जा रही हैं और संसदीय लोकशाही की संस्थाओं को बदनाम किया जा रहा है. पूंजीवाद की एजेंट ताक़तों की कोशिश है कि संसदीय लोकतंत्र की हर सम्माननीय संस्था को बदनाम किया जाए और लोकतंत्र को दफ़न करके ऐसी सत्ता व्यवस्था कायम की जाए जिस से साम्राज्यवादी विस्तारवादी शक्तियों को देश की सत्ता को तैनात करने में आसानी हो क्योंकि वही सत्ता तो इन ताकतों की चाकर सत्ता के रूप में काम कर सकेगी. दुर्भाग्य की बात यह है कि इस सारे काम में मीडिया की भूमिका पूंजीवादी ताक़तों के मुनीम की हो गयी है . अगर इस पर अवाम की तरफ से फ़ौरन रोक न लगाई गयी तो देश के लोकतंत्र के सामने अस्तित्व का संकट पैदा हो जाएगा. भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के सेक्रेटरी अतुल कुमार अंजान ने यह बातें समाजवादी नेता स्व.गौरीशंकर राय की याद में आयोजित एक समारोह में शनिवार को दिल्ली में कहीं. ... Full story

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Anshuman Tiwari

Anshuman Tiwari

मूलत: उत्तर प्रदेश के रहनेवाले अंशुमान तिवारी ने आर्थिक पत्रकारिता को हिन्दी में बहुत शुरूआती दौर से देखा समझा है. अमर उजाला कारोबार के लिए काम किया और बाद में दैनिक जागरण समूह से जुड़े. वर्तमान में दैनिक जागरण के ब्यूरो चीफ हैं. इसके साथ ही अर्थार्थ नाम से ब्लाग भी लिखते हैं.