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संवाद विस्फोट

अमीरी का प्रतीक गढ़ने की गरीबी

अगर आपको गरीबी को रेखांकित करना हो तो प्रतीक चुनने में कोई मुश्किल नहीं होती. भारत गरीबों का देश बना दिया गया ...

शुद्ध विचार का अशुद्ध व्यापार संभव नहीं

दुनिया का तो पता नहीं लेकिन भारत में विचार के व्यापार का तरीका बड़ा वीभत्स हो गया है. जो व्यापार है उसमें ...

आखिर कैसे दूर होगा रश्मि हंस के मन का दंश?
 

आखिर कैसे दूर होगा रश्मि हंस के मन का दंश?

समझौता करके जो लोग शीर्ष पर पहुंचते हैं, वे शीर्ष पर पहुंचकर अक्सर आपत्तिजनक व्यवहार करते हैं. भारत की हिन्दी पत्रकारिता ने पिछले चार दशकों में व्यापक विस्तार किया है. चार दशक पहले अगर एक लाख के सर्कुलेशन वाला अखबार राष्ट्रीय होने का दर्जा पा लेता था तो आज एक करोड़ छपनेवाला हिन्दी अखबार भी दूसरे नंबर का ही माना जाता है. अब शीर्ष पर पहुंचने के लिए करोड़ की तरूणाई के आगे जाने की जरूरत है. हिन्दी अखबारों के इस अनपेक्षित विस्तार ने कई तरह की विडंबनाओं को पैदा किया है. इसमें सबसे बड़ी विडंबना हैं ऐसे अखबारों में शीर्ष पर बैठे लोगों का व्यवहार. ... Full story

हिन्दुत्व की चिल्लपो और भाई सुरेश चिपलूणकर
 

हिन्दुत्व की चिल्लपो और भाई सुरेश चिपलूणकर

इतनी जल्दी सुरेश चिपलूणकर नतीजे पर पहुंच जाएंगे इसकी उम्मीद मुझे भी नहीं थी. अभी जुमा जुमा चार छह रोज पहले उन्होंने अपने ब्लाग पर इच्छा व्यक्त की थी कि वे हिन्दुत्व को सूचना के स्तर पर मजबूती पहुंचाने के लिए एक वेबसाइट बनाने की तमन्ना रखते हैं, और यह काम वे लोगों के सहयोग से करना चाहते हैं. उनका कोई छह लाख साल का बजट है, अगर इतना पैसा इकट्ठा हो जाए तो वे समाचार विचार से जुड़ी एक ऐसी वेबसाइट शुरू कर सकते हैं. ... Full story

क्षतिपूर्ति से क्षत विक्षत
 

क्षतिपूर्ति से क्षत विक्षत

न जाने कितनी दफा हमने अपने लिखने पढ़ने में क्षतिपूर्ति शब्द का प्रयोग किया होगा. लेकिन अपने पिछले पांच छह महीने के अनुभव की ओर झांकता हूं तो लगता है कि कितना छद्म है यह शब्द क्षतिपूर्ति. सिर्फ आगे और आगे की ओर बढ़नेवाले जीवन में जो क्षति हो जाती है उसकी पूर्ति कभी होती है क्या? हम आप सब स्वभाव से भावनात्मक हैं. इसलिए अपने द्वारा रची गयी किसी भी रचना से अपना भावनात्मक लगाव स्थापित कर लेते हैं. ... Full story

ताकि लाइव रहे मोहल्ला लाइव
 

ताकि लाइव रहे मोहल्ला लाइव

अविनाश दास असमंजस में हैं कि मोहल्ला की गलियां अवरुद्ध तो न हो जाएंगी? कोई चार साल पहले एनडीटीवी में काम करते हुए ब्लागिंग के जरिए इंटरनेट की दुनिया में प्रवेश करनेवाले अविनाश दास इन ब्लाग से उठकर वेबसाइट पर आये और जो जमात उन्होंने मोहल्ला पर विकसित की थी उस जमात के साथ अपने डोमेन पर बहस को जिन्दा रखा. विपक्ष की सास्वत आवाज बनाये रखी. ... Full story

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  1. बाढ़ से ज्यादा झूठ का प्रकोप (5.00)

  2. अब शुरू हुआ असली खेल (5.00)

  3. आसान नहीं है कश्मीर का समाधान (5.00)

  4. अशोक चव्हाण ने इस्तीफा दिया, कलमाड़ी हटाये गये (5.00)

  5. बुर्के को बैन करो! (5.00)

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Anand Pradhan

Anand Pradhan

काशी हिन्दू विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में पीएचडी आनंद प्रधान पत्रकारिता के सैद्धांतिक और व्यावहारिक पक्ष में पारंगत होने की प्रक्रिया में हैं. छात्र राजनीति से लंबे समय तक जुड़ाव रहा. इन दिनों दिल्ली के प्रतिष्ठित इंस्टीट्यूट आफ मास कम्युनिकेशन में एसोसिएट प्रोफेसर.